29/01/2018
मंगलदेव{हनुमानजी}
मन्गल अच्छा हो तो दुसरो के लिये नम्रता रखता
है,दुसरो के लिये अपने जान कि भी परवा नही करता,यार दोस्तो
भैया का सुख पुरी तराह मीलता है,बहोत दोस्तो बनते है,१०-२० साल पुरानि
दोस्ती होती है,कोइ भि प्रसन्ग हो यार मित्रो दोस्तो निपटा लेते है,ये सब
जातक कि १५ साल कि आयु से पता चल जाता है,यार दोस्तो इक्क्ठा करके बहुत
परक्रम करता है,आर्मी और पुलीस मे जो होते है उनका मन्गल अच्छा होना
चाहीए,कामयाबी के लीये मन्गल अच्छा होना जरुरी है,वायु सेना मे मन्गल के
साथ गुरु अच्छा होना जरुरी है क़्य़ूक़ि ग़ूऋ हवा का मालीक है,मन्गल अच्छा हो तो
दो तीन पेढी साथ मे रहती है,हर उत्सव टाईम पे मनाया जाता है,बचपन मे एसा
बच्चा शरारती होता है,एक जगाह बेठता नही है,६-८ साल तक तोड फोड करता है,बाद
मे १५ साल तक बहोत सेन्सीटीव हो जाता है,एसा जातक अकेला रहेना पसन्द नहि करता मंगलदेव- जुठ नही बोलता-गलत कार्यो से नफरत करता है,पराक्रम करे पर कीसी क़ि मदद के लीये,गलत कार्यो से नफरत करे साथ ना दे अगर कोइ एसा करे तो उसके साथ जगडा भी कर लेता है,एसे जातक को बीमारी क़भी परेसान नही करती,रन्ग गेरुआ होता है,गुरु मन्गल मेल हो तो ग्यान के साथ हीम्मत देता है,१५ साल की उम्र से यश कमाता है,२८ से ३३ साल दरम्यान बहोत नाम कमाता है,जैसे सचिन तेन्डुलकर,ईनके लिये पैसा बांये हाथ का मेल होता है,ऐसा इन्सान किसी भी पडकार को उठा लेते है मतलब एसी हीम्मत वाला होता है कि पहाड खोद के पानी निक़ालने का होंसला रखता है,एसा जातक ठंडे दीमाग से बात सुनता है बाद मे अपना निष्कर्श सुनाता है,उसके साथ कोइ नरमदि से कोइ बात करता है तो उसके जासे मे आ जाता है मंगलदेव- परीवार मे सबलोग मीलकर रहते है,शनी ऊंमर मतलब ३६-४१ दरम्यान बड कार्य करता है,परीवार-सर्कल और आजुबाजु के सुख के लीये भी बहोत कार्य करता है,परीवार मे मील्जुल कर रहेता है मंगल जब खराब होता है तो जिना हराम हो जाता है,बचपन मे चोट लडाई जगडा आम हो जाता है,शरारत एसी करता है जीसकि वजह से दुसरो को दुख मीलता है,पडोसी क़ॅ साथ बच्चो के लिये लडाई होती है,बच्चो कि सेहद आये दीन खराब होती है,आये दिन चोट लगती रहेती है-बार बार खुन नीकलता है,१५ साल मे आते हि एसे हरकत करता है की अपयश मीले,यार मीत्रो इक्क्ठा होके पढाई-लीखाई खराब होती है,सारीरीक कमजोर होता है-बुध्धी क़ा ऊपयोग लोगो को परेशान करने के लिये करता है,कीसी की ईज्जत नही करता-लडने के लिये दुसरे लडको को प्रेरीत करता है,घरवाले भि उसको ऐसे कार्य मे स्पोर्ट करते है,कुटुम्ब मे आये दीन जगडा होता है,बहुओ आपस मे लडती है,भाई-भाई के जगडे होते रहते ह या तो भैआ को कोइ ना कोइ दीक्कत होती है,जब भि जगडा करता है तो सीर फुटता है,लोगो कहे ये लडका खराब है उस पर कोई विस्वास नही करता- तो समजे मंगल खराब है,ज्यादा खराब हो तो ३-४ पुत्रो होते है और वो आपस मे लडाई जगडा करते है,उसमे से १ लडका एसा हो जो कोइ काम नही करता,जो भी करे बुरा काम करता है .एसे मे भुलकर भि तन्दुर ना रखे,भट्ठी ना जलाये, १५ साल-२०-२३ साल और२८-३३ साल दरम्यान ज्यादा खराबी देता है-किसि तराह का लान्छन लगता है,एसा ना हो तो पैसा खत्म हो जाता है,बढती ऊमर के साथ घर के बुजरग को आराम के बदले कडी मेहनत करनी पड्ती है,घर के लोगो बहारवाले के दोश नीकालते रहते है -खुद का और घरवाले का दोश देख्ते नही,ऐसा जातक ३३ साल तक सेट नही होता है,शादि लेट होती है,२८-३३ साल मन्गल का है उसके बाद सादी होती है,उत्सव पार्टी अध्यात्मीक़ अनुस्ठान होता नहि ,एक दुसरे के साथ बने नही-एसा अवगुन हो सामनेवाला साथ ना दे,साथ मे केतु भि ख्रराब हो तो इज्जत मान पर्तिस्ठा खराब हो-या मीले नही,पुत्र ज्यादा हो और वो भि बिगडे हुए हो,ज्यादा चोट लगे,पुत्र सुख यार मीत्रो भाई सुख खराब होता है,शेहद ख्रराब होति है,शरीर बेडोल हो,अचछी दिखावट ना हो,मोटापा या बीमारी हो,लोगो का जरा सी बातका बुरा मान लेता है और रुठ जाता है, ऐसे मे घर मे कोइ उत्सव नहि होता,खुशी नही आती होम-हवन नही होता,ज्वेलसी फ़ील करता है,दगाबाज होता है,दुसरो का अच्छा नही देख शकता,ये अवगुण दुर करना जरुरी होता है,मेवा वाला,घीवाला हलवा ना बनाये,सौंफ-मध घर मे ना रखे,अगर एसा हो तो जरुर मन्गल का रूण होगा तो इसका अवश्य इलाज करे,बचपन मे आयेदीन लडाई जगडा आम हो जाता है,सरारत एसी करता है लोग आहत होते है,चोट लगनेका डर लगता है,एसी हरकत या काम करे आयेदीन इज्जत मान खराब होता है,शारीरीक कम्जोर होता है और गलत कर्य मे भाग लेता है,कुटुम्ब वाले से जगडा करता रहेता है,भैया-चाचा-ताऊ से अच्छे रिस्ते नही होते,एसी चोट लगे जिसे ठिक होने मे समय लगता है,एसे लोगो से लोग सम्बन्ध नहि रख्ते-अच्छे व्यव्हार नही क़रते,नशा करता है और बुरे काम मे लगा रहता है,मन्गल बद के कोइ भि लक्षन हो तो इन सब बातो का जयादा बुरा असर मिलता है मन्गल बद का लेख पढे,जवानी मे जैसि महेनत करते है उससे ज्यादा बढती ऊंमर मे मेहनत करनी पडती है और उसके मुताबीक फल नही मीलता,जब भि पुजा पाठ या मन्गल कार्य करे या जन्मदीन मनाये कलह होता है और पैसे का नाश होता है,एक दुसरे पे आरोप लगाते है,पैसे कि दिक्कत होती है,छोटि-मोटी नोकरि मिलती है, एक्सिड्न्ट बिमारी लगती है,बच्चे कि पढाई अच्छि ना हो रुकावट आती है,३३ साल बाद सारी कमाई होती है,शादि ३३ साल तक नहि होति है अगर हो जाये तो उसमे खराबि होती है,दुनियादारी मे दोस्तो भाई सहाय नही करते,जब भी शुक्र भाव ९ मे हो या बुध्-शुक्र ,सुर्य-शनी,बुध-मन्गल युति हो या केतु या बुध १-८ भाव मे हो तब घर के आसपास किकर बेरि निम डेक क पेड ना हो ,घर के आसपास खुल्ला मेदान या पार्क ना हो ,स्मसान या कब्रस्तान ना हो,भठि ना हो ,तन्दुर ना हो,घर का दरवाजा आरपार ना हो,एसा है तो बुढापा मे ज्यादा दिक्कत आती है,कोई सहाय नही करता,मर्द को आघात के कारन या किसि वजाह से काम ना करे और औरत को काम करना पड्ता है, जब मन्गल खराब होता है या तो बद होता है तो मन्गल कार्य करे या तो मन्गल कि स्थापना करे तो ज्यादा खराबी मीलती है,
उपाय;-तन्दुर कि रोटी ना खाये,घर मे हलवा ना बनाये-घी डाल के बनाया हुआ खाना ना खाये,भैया-मित्रो-कुम्बे वाले से बनाके रखे,२०किलो चावल कि बोरि कि स्थापना करे और उसे बार बार धुप मे रखे जिसके कारण बीगडे नही और उस चावल को खाये नही,ज्यादा मात्रा मे बारीश का या गन्गाजल के पानी कि स्थापना करे,जो चन्द्र का है चन्द्र हि मन्गल को ठिक कर शकता है,माता-पिता और बुजर्ग या विधवा औरत कि सेवा करे,तन पर ज्यादा चान्दि धारन करे,गरम खाना ना खाये,त्रांबा-सौफ-मध ना रखे.