23/05/2026
जब भी कोई भाई टर्म इंश्योरेंस (Term Insurance) लेने की सोचता है, तो सबसे बड़ी गलती यही करता है कि वह अंदाज़े से 50 लाख या 1 करोड़ का प्लान चुन लेता है। लोग सोचते हैं कि 1 करोड़ की रकम बहुत बड़ी है, परिवार के लिए काफी होगी।
लेकिन जब हम बैठकर परिवार की जिम्मेदारियों, बच्चों के भविष्य और बाज़ार की महंगाई का असली हिसाब लगाते हैं, तो पता चलता है कि वह रकम तो बहुत कम थी।
बीमा जगत में आपकी सही कीमत तय करने का एक वैज्ञानिक तरीका होता है, जिसे HLV यानी ह्यूमन लाइफ वैल्यू (Human Life Value) कहा जाता है। आज इसी बात को बिल्कुल आसान शब्दों में विस्तार से समझते हैं कि किसी व्यक्ति के पीछे उसके परिवार को सच में कम से कम और ज़्यादा से ज़्यादा कितने बीमा कवर की ज़रूरत होती है।
कम से कम कितना होना चाहिए बीमा? (The Minimum Rule)
अगर आप टर्म इंश्योरेंस ले रहे हैं, तो आपका कवर कभी भी इस न्यूनतम सीमा (Minimum Limit) से कम नहीं होना चाहिए। इसे निकालने का सीधा व्यावहारिक तरीका यह है:
सालाना कमाई का नियम: आपकी आज की जो भी सालाना शुद्ध आमदनी है, आपका बीमा कवर उसका कम से कम 15 से 20 गुना होना ही चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि आप साल का ₹5 लाख कमाते हैं, तो आपका टर्म इंश्योरेंस कम से कम ₹1 करोड़ का होना अनिवार्य है।
खर्च और कर्ज़ का नियम: मान लीजिए आपके सिर पर ₹30 लाख का होम लोन या बिजनेस लोन चल रहा है, और आपके परिवार का सालाना खर्च ₹4 लाख है। तो आपके जाने के बाद वह ₹30 लाख का लोन भी चुकता होना चाहिए और परिवार के पास इतना पैसा बचना चाहिए जिससे उनका खर्च चलता रहे। इसलिए लोन की रकम को बुनियादी खर्चों में जोड़कर ही न्यूनतम कवर तय करें।
ज़्यादा से ज़्यादा कितना मिल सकता है बीमा? (The Max. Limit)
कई भाई सोचते हैं कि अगर मेरी जेब में पैसा है और मैं प्रीमियम भरने को तैयार हूँ, तो मैं 5 या 10 करोड़ का बीमा ले सकता हूँ। जी नहीं! बीमा कंपनियां जुए या सट्टे को रोकने के लिए आपकी मर्जी से बड़ा कवर नहीं देतीं। ज़्यादा से ज़्यादा कितना बीमा मिलेगा, यह पूरी तरह आपकी उम्र और आज की वैध कमाई (Income Proof/ITR) पर निर्भर करता है:
उम्र 25 से 35 वर्ष (युवा उम्र): इस उम्र में रिस्क कवर सबसे ज़्यादा मिलता है। कंपनियां आपकी सालाना इनकम का ज़्यादा से ज़्यादा 25 से 30 गुना तक का टर्म इंश्योरेंस दे सकती हैं। (जैसे: अगर आपकी ITR ₹6 लाख की है, तो आपको अधिकतम 1.5 करोड़ से 1.8 करोड़ तक का कवर मिल सकता है)।
उम्र 36 से 45 वर्ष (मध्यम उम्र): इस उम्र में जिम्मेदारी और कमाई स्थिर होने लगती है, इसलिए कंपनियां आपकी सालाना इनकम का ज़्यादा से ज़्यादा 15 से 20 गुना तक का कवर देती हैं।
उम्र 46 से 55 वर्ष: इस पड़ाव पर रिस्क बढ़ने के कारण बीमा कंपनियां आपकी सालाना आमदनी का अधिकतम 10 से 15 गुना कवर ही पास करती हैं।
कम बीमा (Under-Insurance) लेने का छुपा हुआ खतरा!
इसे एक सीधे उदाहरण से समझिए। मान लीजिए किसी भाई ने बिना हिसाब लगाए सिर्फ 50 लाख का टर्म प्लान ले लिया। भगवान न करे कल को कोई अनहोनी हो गई और परिवार ने सुरक्षा के लिहाज से वह ₹50 लाख बैंक में एफडी (FD) करवा दिए।
आज के समय में अगर 6% का औसत ब्याज भी मानें, तो परिवार को साल के ₹3 लाख यानी महीने के सिर्फ ₹25,000 मिलेंगे। अब आप खुद ठंडे दिमाग से सोचिए, क्या आज के ज़माने में बढ़ती महंगाई को देखते हुए ₹25,000 महीने में पूरा परिवार सम्मान से अपनी जिंदगी जी पाएगा? बच्चों की अच्छी पढ़ाई और शादियां हो पाएंगी? या सिर पर खड़ा कोई बड़ा लोन चुकता हो पाएगा? जी नहीं!
जब बीमा राशि सही नहीं होती, तो परिवार को अपनी बुनियादी ज़रूरतों के लिए भी दूसरों के सामने हाथ फैलाना पड़ता है।
"टर्म इंश्योरेंस कोई लॉटरी का टिकट नहीं है जिसमें अंदाज़े से कोई भी नंबर चुन लिया जाए। यह आपकी गैर-मौजूदगी में आपके परिवार के सम्मान, बच्चों के सपनों और आपकी आर्थिक जिम्मेदारियों की सौ फीसदी गारंटी है। अपनी कीमत का सही आकलन कीजिए, ताकि आपका परिवार हमेशा सुरक्षित रहे।"
बीमा हमेशा उतना होना चाहिए जो आपके जाने के बाद आपके सारे लोन एक झटके में चुकता कर दे और परिवार के मंथली खर्च को बिना किसी रुकावट के उसी स्तर पर चालू रख सके जैसा आज है।
अब आपकी बारी: क्या आपने अपनी उम्र और कमाई के हिसाब से अपने सही बीमा कवर (HLV) का पूरा हिसाब लगाया है?