06/12/2025
बहुत पुरानी कहानी थी एक जंगल में एक तोता रहता था उसके दो अंडे थे l दो अंडों से दो बच्चे हुए और वह बड़ी हंसी खुशी से अपनी मां के साथ अपने घोंसले में रहते थे एक दिन एक बहेलिया आया उन दोनों बच्चों को पकड़ कर अपने साथ ले गया और बाजार में बेच दिया जिसमें से एक को साधुओं ने खरीदा तथा दूसरे को डाकुओं ने खरीदा जो साधुओं के पास रहता था वह बहुत ही सरल और शांत स्वभाव का था जब कोई व्यक्ति आश्रम में आता था तो वह उन्हें अभिवादन करता और पूछता था क्या पानी पियोगे ? क्या आप थके हुए हैं ? विश्राम कर लीजिए? परंतु वहीं जो एक तोता डाकुओं के पास था l वह डाकुओं की तरह बात करता था l जैसे कि कहता था l पकड़ लो l सब कुछ छीन लो l काट डालो l मार डालो l सारा धन छीन लो आदि शब्दों को कहता था एक दिन उसे राज्य के राजा शिकार करते-करते साधु के आश्रम में पहुंचे जहां पर उसे तोते ने पूर्णतयः विनोद पूर्वक बात करते हुए राजा साहब का अभिवादन किया l इससे राजा साहब बहुत ही प्रभावित हुए और उसे अपने साथ ले गए परंतु जब दूसरे दिन वही राजा साहब शिकार करने के लिए निकले तो वह उस क्षेत्र में पहुंचे जहां पर डाकू रहते थे उतने समय डाकू तो डर के कारण भाग गए परंतु तोता पिंजरे में बंद वहीं रह गया l जब उस तोते ने राजा साहब को दिखा तो वह वही भाषा को दोहराने लगा l इन्हें पकड़ लो l काट डालो l मार डालो l इनका सारा धन छीन लो तो राजा साहब यह सुनकर बहुत ही स्तब्ध रह गए की एक पक्षी में ऐसा आचरण कैसे आया l उसे भी अपने साथ अपने महल ले गए वहां पर मंत्रियों ने जब इस तोते की अभद्र भाषा को सुना तो मंत्रियों ने राजा को सुझाव दिया कि तोते को मार दिया जाए तब साधुओं के साथ रहने वाले तोते ने बड़े ही सहज भाव से कहा l हे राजन ! यह तोता मेरा ही भाई है जिसे बहेलिया ने बाजार में डाकुओं को बेचा था l डाकुओं के साथ रहने के कारण इसकी भाषा व शैली दोनों डाकू जैसी हो गई है इसमें इसका कोई भी दोष नहीं है l सिर्फ संगति का प्रभाव है
जातक कथा