16/08/2018
जीएसटी में रिवर्स चार्ज क्या है? कब लगता है? What Is Reverse Charge In GST (Hindi) :
GST में टैक्स वसूलने और जमा करने की प्रक्रिया में सरकार ने एक Reverse Charge (Reverse GST) की प्रक्रिया भी शामिल की है।
हालांकि, शुरुआती दौर में कारोबारियों को ज्यादा उलझाव से बचाने के लिए फिलहाल Reverse Charge को स्थगित रखा गया है।
नवीनतम सूचना के मुताबिक Reverse Charge System को जुलाई 2018 तक के लिए टाल दिया गया है।
इसके बावजूद कारोबारियों में Reverse Charge को लेकर बड़ी जिज्ञासा है और इंटरनेट पर इसे खूब सर्च भी किया जा रहा है।
इस लेख में हमने की इसी गुत्थी को सुलझाने की कोशिश की है। इस लेख में आप जानेंगे कि Reverse Charge क्या है? इसे Reverse Charge क्यों कहते हैं? Reverse Charge किन स्थितियों में लागू होता है? Reverse Charge की वसूली और भुगतान कैसे होता है
जिन दो शब्दों से मिलकर बना है, उसमें Reverse का मतलब है उल्टा (तरीका) और Charge का मतलब है वसूली (टैक्स/GST की)। इन दोनों शब्दों के अर्थों को जोड़ने पर साफ-साफ समझ में आता है कि टैक्स (GST) वसूली की सामान्य प्रक्रिया के बजाय उल्टे तरीके होने वाली प्रक्रिया को Reverse Charge कहते हैं।
लेकिन, उल्टा तरीका क्या है? यह जानने के लिए पहले हमें सीधा तरीका तो मालूम होना चाहिए। तो जीएसटी का सीधा तरीका क्या है, पहले उसी पर बात करते हैं।
सामान्य जीएसटी सिस्टम में GST टैक्स चुकाने और टैक्स जमा करने की जिम्मेदारी अलग-अलग लोगों की होती है।
जो व्यक्ति सामान या सेवा खरीदता है, उसे GST चुकाना पड़ता है। ये भुगतान वह उस दुकानदार या कारोबारी को करता है, जिसने सामान (Goods) बेचा है या सेवा (Service) दी है।
जिस व्यक्ति ने सामान (Goods) या सेवा (service) बेची है, उसे अपने ग्राहक से GST वसूलकर रखना पड़ता है और फिर उसे Government के पास जमा कर देना होता है।
रिवर्स चार्ज सिस्टम में, टैक्स जमा करने प्रक्रिया को उल्टा कर दिया गया है (सिर्फ, कुछ विशेष तरह के मामलों में)
इन विशेष मामलों की जानकारी भी हम इसी लेख में आगे चलकर दे रहे हैं। पहले समझते हैं कि जीएसटी की प्रक्रिया उलटी कैसे हो सकती है।
सिस्टम में जो व्यक्ति सामान (Goods) या सेवा (service) खरीदता है यानी कि purchaser उसके पास ही GST वसूलने की जिम्मेदारी होती है। जबकि, सामान्य प्रक्रिया में खरीदार GST वसूल नहीं सकता।
सामान या सेवा खरीदने वाले (Purchaser) की ही सरकार के पास जमा करने की भी जिम्मेदारी होती है। जबकि सामान्य प्रक्रिया में GST जमा करने की जिम्मेदारी विक्रेता (Seller) की होती थी।
यही कारण है कि ऐसे मामलों में अपनाई गई टैक्स वसूली की उल्टी प्रक्रिया को ”रिवर्स चार्ज” का नाम दिया गया है।