15/01/2026
डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) एक खतरनाक साइबर धोखाधड़ी (Cyber Fraud) है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI, या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर पीड़ित को वीडियो कॉल के जरिए डराते हैं और उसे उसके घर में ही "कैद" (अरेस्ट) रहने का नाटक करने को मजबूर करते हैं।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम कैसे काम करता है?
झूठा आरोप: ठग आपको कॉल करके कहते हैं कि आपके नाम से कोई अवैध पार्सल आया है या आपके आधार कार्ड का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) या ड्रग तस्करी जैसे अपराधों में हुआ है।
वीडियो कॉल पर निगरानी: वे आपको Skype या WhatsApp वीडियो कॉल पर आने को कहते हैं और फर्जी पुलिस स्टेशन जैसा सेटअप दिखाकर वर्दी में अधिकारी बनकर बात करते हैं।
घर में कैद करना: वे आपको डराते हैं कि आप अपराधी हैं और जांच पूरी होने तक आपको कैमरा बंद नहीं करना है और किसी से बात नहीं करनी है।
पैसों की वसूली: मामले को रफा-दफा करने या "जमानत" के नाम पर वे आपसे बड़ी रकम अपने खातों में ट्रांसफर करवा लेते है I
महत्वपूर्ण तथ्य (2026 अपडेट):
कानून में कोई प्रावधान नहीं: भारतीय कानून में "डिजिटल अरेस्ट" जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है।
कोई भी एजेंसी वीडियो कॉल पर पैसे नहीं मांगती: पुलिस, CBI, या ED कभी भी वीडियो कॉल पर पूछताछ करके पैसे नहीं मांगते और न ही गिरफ्तारी करते है I
सरकार की कार्रवाई: 2026 में केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों पर सख्ती बढ़ा दी है और डिजिटल अरेस्ट से निपटने के लिए विशेष समितियों का गठन किया है।
बचाव और सहायता:
अगर आपको ऐसा कोई कॉल आए, तो तुरंत कॉल काट दें और डरें नहीं।
1930 पर कॉल करें या Cyber Crime Portal पर शिकायत दर्ज करें I
किसी भी अनजान व्यक्ति को वीडियो कॉल पर अपनी निजी जानकारी या पैसा न दें।