29/12/2022
बार बार पेपर लीक प्रकरण
⬧ प्रमुख कारण
राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी,कड़े कानून का अभाव, जितना कानून बना है उसका भी कड़ाई से पालन नहीं किये जाना, संलिप्त व्यक्ति/टीचर्स व कोचिंग सेंटर्स/स्कूल्स पर सख़्त कार्रवाई नहीं किये जाना, जातिगत आधार पर अपराधियों का महिमामंडन व उनको आश्रय देने की प्रवृत्ति (अपराधियों के जमानत पर छूटने पर उनका स्वागत व उनके सम्मान में भोजन का आयोजन तक देखा गया है), ऐसे प्रकरण में लिप्त लोगों का परमात्मा के प्रति डर नहीं होना(आख़िर एकदिन उसके घर भी जाना है…सारा हिसाब-किताब देना है), ‘नई बात नौ दिन खींचतान से तेरह दिन’ की तरह यह मैटर कुछ दिन बाद ठंडे बस्ते में डाल देना।
⬧ परिणाम
पढ़ने वाले विद्यार्थी डिप्रेशन में, विद्यार्थियों के सच्चे हितैषी(परिवार जन,गुरूजन इत्यादि)परेशान, मीडिया वालों को कुछ दिन मसालेदार खबर।
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⬧ समाधान
हमेशा की तरह कुछ जनों के लिए समाधान ये हैं
X पार्टी की जगह Y पार्टी का शासन हो, X की जगह Y मुख्यमंत्री हो, कोचिंग वाले बोले और धरना दे तो समाधान हो जाये,सारे कोचिंग सेंटर ही बंद हो जाये वगैरह वगैरह।
⬧ क्या वास्तव में इससे कुछ होगा ?
⬧ अब क्या करने की ज़रूरत ?
देश के प्रधानमंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ध्यान दीजिए।
पेपर लीक करने वालों को ‘डिबार’ नहीं अब ‘दुनियाँ से बाहर’ करने की ज़रूरत है…जितने विद्यार्थियों ने पेपर लीक प्रकरण से डिप्रेशन में आकर अब तक आत्महत्याएँ की है उन सबकी हत्या का दोषी वर्तमान व भूतकाल के पेपर लीक प्रकरण के अभियुक्तों को बनाकर सीधे मर्डर का केस चलाओ…कोई पक्का वाला इलाज करो।