24/10/2023
दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर अपनी दिव्य दृष्टि से देख रही है, सुपर पवार बनने की होड़ में कई देश अपना-अपना शक्ति प्रदर्शन अलग-अलग रंगमंच (देश) मे कर रहे है। जिन कस्बों, स्थलों या फिर कहिए दानवता की प्रदर्शनी का स्थान या रंगमंच जहां नाटक को दर्शाया जा रहा है, वहाँ हर रोज रक्त की नदियां बह रही है। रक्त की नदियां तो उस रंगमंच (देश) मे बह रही है, पर उसकी छीटें देश के प्रत्येक देशवासियों पर पड़ता है , जिसे हर कोई तब महसूस करता है, जब हम किसी भी बाजार के रंगमंच पर किसी चीज को खरीद रहे होते है। रंगमंच के चंद किरदार सिर्फ अपने फायदे के लिए उस रंगमंच के इर्द गिर्द मानवता को बेरहमी से कुचलते या नष्ट करते हुए देखे जा रहे है। जिस मानवता की बात श्वामि विवेकानंद जी ने की थी, क्या वह मानवता हमें दिख रही है? विश्व-मानवता की रक्षा की चुनौती कितनी बड़ी है ??