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कर्ज या लोन लेने से पहले याद रखें ये जरूरी 9 बातें-  हर व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी कर्ज लेने की आवश्यकता पड़ती है। जर...
25/07/2021

कर्ज या लोन लेने से पहले याद रखें ये जरूरी 9 बातें-

हर व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी कर्ज लेने की आवश्यकता पड़ती है। जरूरत के हिसाब से कर्ज की रकम छोटी या बड़ी हो सकती है। मसलन, घर या गाड़ी खरीदते समय हमें बैंक से लोन की जरूरत पड़ती है। इसी तरह अचानक किसी बड़े खर्चे के आ जाने पर हम अपने किसी दोस्त, रिश्तेदार या ऑफिस में साथ काम करने वाले व्यक्ति से पैसे उधार लेते हैं अन्यथा बड़े खर्चे का भुगतान क्रेडिट कार्ड से करके उसको सुविधानुसार भविष्य में चुकाते हैं। इस तरह कर्ज भले छोटा हो या बड़ा इसकी जरूरत समय समय पर हर किसी को पड़ती रहती है।

कर्ज लेने से पहले याद रखें ये जरूरी नौ बातें # #

1.कर्ज भुगतान की क्षमता (रिपेमेंट कैपेसिटी) के अनुरूप ही लें उधार
कर्ज किसी भी माध्यम से लें इतना जरूर ध्यान रखें कि यह रकम आपकी कर्ज चुकाने की क्षमता के हिसाब से ही हो। अर्थात अपनी नियमित आय से पैसा बचा कर आप लोन की रकम एक निश्चित समय में चुका सकने में सक्षम हों।

एक्सपर्ट मानते हैं कि आपके कुल कर्ज की मासिक किश्त आपकी मासिक आय के 15 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।उदाहरण के तौर पर अगर आप 40,000 रुपए महीना कमाते हैं तो आपके सभी प्रकार के कर्ज की EMI 6000 रुपए से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इससे ज्यादा EMI होने पर आपकी भविष्य की योजनाएं या मासिक बजट प्रभावित हो सकता है।

2.कर्ज कम से कम समयावधि के लिए लें
कर्ज चुकाने की समयावधि जितनी लंबी होती है उतनी ही ज्यादा राशि आपको लोन के भुगतान में चुकानी होती है। ऐसा माना जाता है कि लोन का कार्यकाल जितना छोटा हो उतना अच्छा है। कर्ज चुकाने की समयावधि बढ़ाने पर EMI की राशि तो कम हो जाती है लेकिन कर्जदाता की ओर से चुकायी जाने वाली कुल रकम बढ़ जाती है।

उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कि कार्तिक ने 10 फीसदी की दर से 50 लाख रुपए का लोन 20 वर्षों के लिए लिया है। इसमें उसकी EMI 48,251 रुपए होगी।

अगर वह अपनी EMI 5 फीसदी सालाना की दर से बढ़ा दे तो यह लोन 12 साल में पूरा हो सकता है।

वहीं EMI 10 फीसदी की दर से सालाना बढ़ा देने पर लोन 9 वर्ष 3 महीने में खत्म हो जाएगा।

3.EMI निश्चित समय पर ही दें
इस बात का ध्यान जरूर रखें कि कर्ज चाहे छोटे समय के लिए हो जैसे कि क्रेडिट कार्ड का बिल या लंबी अवधि का जैसे होम लोन, भुगतान समय पर करें। अगर आप एक भी किश्त देने से चूक जाते हैं या फिर पेमेंट में देरी करते हैं तो इसका असर सीधा क्रेडिट प्रोफाइल पर पड़ता है। जिसके कारण भविष्य में लोन लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

4.निवेश करने या फिजूलखर्ची के लिए कर्ज न लें
निवेश करने के लिए पैसे उधार न लें। निश्चित रिटर्न देने वाले निवेश विकल्प जैसे फिक्सड डिपॉजिट, बॉण्ड कभी भी लोन पर लिए जाने वाले ब्याज की बराबरी नहीं कर सकते। इक्विटी में निवेश बेहद अस्थिर होते हैं। ऐसे में निवेश करने के लिए कभी भी निवेश न करें। साथ ही अपने खर्चों को पूरा करने के लिए कभी भी लोन न लें।

5.बड़ी राशि वाले लोन के साथ इंश्योरेंस जरूर लें
अगर आप होम लोन या कार लोन जैसा कोई बड़ा लोन लेते हैं तो साथ में इंश्योरेंस लेना न भूलें। जैसे कि लोन की राशि के बराबर का टर्म प्लान लें। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर आपको कुछ हो जाता है और आप पर आश्रित लोग EMI नहीं चुका पाते तो कर्जदाता आपके एसेट्स ले लेता है। टर्म प्लान लेने से आपकी अनुपस्थिति में घर वालों को आर्थिक तंगी से नहीं जूझना पड़ेगा।

6.खरीदारी करते समय बाजार में कीमतों की तुलना कर लें-
अगर आप कर्ज लेकर कोई संपत्ति खरीद रहे हैं तो बाजार में कीमतों की तुलना जरूर कर लें। सही डील मिलने पर आपको हो सकता है कि कम राशि का ही लोन लेना पड़े। लोन की राशि जितनी कम होगी कर्जदाता के लिए यह उतना ही अच्छा होगा।

7.कर्ज से जुड़ी नियम व शर्तें जरूर पढ़ें-
किसी भी आकस्मिक स्थिती से बचने के लिए लोन लेते समय नियम व शर्तें जरूर पढ़ें। अगर आप कानूनी दस्तावेज का संदर्भ नहीं समझ पा रहे हैं तो किसी वित्तीय सलाहकार की मदद लें।

8.सभी कर्जों को एक जगह से लेने का प्रयास करें
अगर आपने एक से ज्यादा लोन ले रखे हैं और ये सब अलग अलग बैंक या वित्तीय कंपनियों से हैं तो कोशिश कीजिए कि इन सभी को एक ही बैंक या वित्तीय कंपनी में ट्रांस्फर करवा लें। लोन की रकम एक जगह हो जाने पर बैंक आपको बैलेंस ट्रांस्फर जैसी सुविधाओं के अंतर्गत आकर्षक ब्याज दरें ऑफर कर सकता है। ऐसा करने से आप पर EMI का बोझ कम हो जाएगा। साथ ही समय-समय पर मिलने वाली अतिरिक्त आय का भी इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करें। अगर आप नौकरीपेशा हैं तो कंपनी में बोनस मिलने पर, इंक्रीमेंट या इंसेंटिव हाथ आने पर आपको अपने कर्ज का भुगतान कर देना चाहिए।

9.जरूरी चीजों के लिए लोन जरूर लें भविष्य के लिए की गई योजनाओं को प्रभावित न करें
सरल शब्दों में समझें तो कभी भी अपने बच्चों की पढ़ाई या शादी के लिए रिटारमेंट फंड का इस्तेमाल न करें। पढ़ाई के लिए लोन और स्कॉलरशिप जैसे विकल्प मौजूद हैं जिसमें पढ़ाई का खर्चा कवर होता है। लेकिन बाजार में ऐसा कोई आकर्षक प्रोडक्ट नहीं जिसके जरिए आप अपनी रिटारमेंट की जरूरतों को पूरा कर सकें। ध्यान रखें कि रिटारमेंट योजना भी बच्चे की पढ़ाई जितनी ही जरूरी होती है। एक अच्छी फाइनेंशियल प्लानिंग की खासियत यही है कि एक जरूरत को पूरा करने के लिए दूसरी जरूरी चीज के प्लान को प्रभावित न करें।

21/07/2021

Deals in 2 & 4 wheelar finance

पहिये के अविष्कार की रोचक कहानी  आदिमानव लगभग 20,000 साल पहले पहिये दार गाडियों का उपयोग किया करते थे लेकिन विश्वसनीय प्...
15/07/2021

पहिये के अविष्कार की रोचक कहानी



आदिमानव लगभग 20,000 साल पहले पहिये दार गाडियों का उपयोग किया करते थे लेकिन विश्वसनीय प्रमाणों के आधार पर ज्ञात होता है कि पहिये का प्रचलन 3500 से 4000 ईस्वी पूर्व सीरिया और सुमेरियसा में ही सबसे पहले हुआ था | 3000 ईसा पूर्व तक मेसापोटामिया में पहिये का ख़ासा प्रचलन शूर हो चूका था और सिन्धु घाटी में यह लगभग 2500 वर्ष ईसा पूर्व पहुचा |
पहिये का आविष्कार संसार में कब और कहा ,किस प्रकार हुआ या किसने किया , इस संबध में निश्चित रूप से कुछ नही कहा जा सकता | पहिये का लाभ उठाकर पैदल चलने की इस क्रिया यानि साइकिल का अविष्कार भले ही लगभग पौने दो सौ वर्ष पूर्व हुआ हो लेकिन पहिये का अविष्कार निश्चित रूप से हजारो वर्ष पूर्व हुआ हो इसके सर्वत्र प्रमाण मौजूद है |
पौराणिक सभ्यताओं से लेकर हजारो वर्ष पुराणी पूरा-सामग्री में भी रथो या बैलगाडियों के होने के प्रमाण उपलब्ध है | फिर भी ऐसा समझा जाता है कि पहिये का अविष्कार “मेसापोटामिया” में यानि आधुनिक ईराक के एक हिस्से में कभी हजारो वर्ष पूर्व हुआ था | कहा जाता है कि किसी पेड़ के गोल तने को काटकर पहिये की तरह उपयोग में लाया जाता था | कुछ लोगो का मत है कि पहिये का अविष्कार का विचार आदिम मानव के मस्तिष्क में सिक्के जैसी गोल वस्तु को लुढकते देख आया होगा |
जिस प्रकार संसार की सबसे महत्वपूर्ण खोज आग को बताया जाता है उसी प्रकार अविष्कारो की दुनिया में पहिये का अविष्कार का अत्यधिक महत्व है | यह आविष्कार आदि-मानवो में से चाहे जिसने भी किया हो ,संसार को उसका आभारी होना ही चाहिए क्योंकि उसने रफ्तार की दुनिया के इस मूल-आधार को ढूढ निकाला था | यदि पहिया न होता तो आज दुनिया हर ओर से काफी पिछड़ी हुयी होती , क्योंकि कोई भी फिसलने वाली चीज उतनी तेज नही दौड़ सकती जितनी तेजी से पहिया दौड़ता है |
पहिये की परिधि का वैज्ञानिक आधार भी है जिसमे विभिन्न प्रकार की तेज -रफ्तार की सवारियों तथा अनेक यंत्रो का अविष्कार हुआ है | वैज्ञानिकों में पाया कि पहिये की बाहरी परिधि जितनी देर में एक चक्कर लगाती है उतनी ही देर में भीतर परिधि कई चक्कर लगा लेती है अर्थात बाहरी परिधि जितनी अधिक छोटी होगी , उसकी तुलना में भीतरी परिधि उतने ही अधिक चक्कर लगा लेगी |
इसी सिद्धांत के आधार पर अनेक उपकरणों और मशीनों का अविष्कार किया गया है | इससे आदमी के काम-काज में भरपूर तेजी आयी है | आधुनिक साइकिल में भी चैन द्वारा पैडल के निकट लगे लोहे के चक्कों को घुमा कर इसी सिद्धांत का लाभ उठाया है | इन चक्कों में से एक चक्का बड़ा होता है तथा दूसरा छोटा | साइकिल के पहियों को तेज गति देने के लिए ही इन चक्कों में आकार का अंतर रखा गया है | वैज्ञानिकों का अनुमान कि 6000 से 3500 ई.पु. के बीच पहिये का अविष्कार हुआ |
पहिये का अविष्कार का महत्व सम्भवत: हम इस राकेट के युग में ठीक-ठीक न समझ पाए तो भी हमे इस बात को हमेशा याद रखना चाहिए कि इस बहुत मामूली सी चीज के अविष्कार से ही हमारे आधुनिक यांत्रिक युग की शुरुवात हुयी है | आज से बहुत दिन पहले एक स्लेज में पहिये लगाये गये थे तभी आज हम इस रेल-मोटर के युग में पहुच पाए है |
अगर संक्षेप में हम यह कहे कि हमारी जो कुछ तरक्की हुयी है वह पहिये की ही बदौलत हुयी है तो उसमे कोई गलती नही होगी | इसी पर चढकर हम प्रस्तर युग में , कांस्य युग में आये और कांस्य युग से लौह युग में पहुचे | एक साधारण अविष्कार इतनी जटिलताओ की सृष्टि कर सकता है यह सोचकर सचमुच हैरान रह जाना पड़ता है |
पहिये के अविष्कार के बारे में निश्चित त्थ्योअ का नितांत अभाव है | प्रागैतिहासिक युग में पहिये काठ के ही बने होते | इतने हजार साल बाद तब काठ के बने पहियों का कोई भी निशाँ बाकी बचना नामुनकिन नही इसलिए प्रागैतिहासिक युग में वास्तविक पहिये का नमूना न रहने पर भी पहिये वाली गाडी का चित्र मिला है | ऐसे चित्रों को देखकर ही वैज्ञानिक पहिये के सम्बन्ध में बहुत कुछ आवश्यक तथ्य जानने में समर्थ हुऐ हैं |

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