23/10/2018
प्रिये साथियों
जैसा कि आप लोगो को मालूम होगा आज ग्रामीण बैंक पेंशन अधिनियम 2018 का डिटेल्स सभी नेताओं,सभी ग्रामीण bank और सभी प्रवर्तक बैंक को भेजा गया जिससे यह साफ है कि जो युवा 01-04-2010 से 31-03-2018 के बीच बैंक मे आए है उनके पास ऑप्शन है कि या तो आप ग्रामीण बैंक की वही पुरानी स्कीम जिसे ईपीएफ 1995 कहा जाता है उसी मे रहिए या फिर एनपीएस को स्वीकार करिए! एक तरफ वो स्कीम है जिससे हमारे पुराने साथी अंन्याय बता रहे थे तो दूसरी ओर एक ऐसी व्यवस्था जिसे कोई भी विभाग जहां ये लागू है स्वीकार करने को तैयार नहीं है. हमारे पुराने साथी /नेता जो अभी कुछ दिन पहले तक हमे पेंशन देने और दिलवाने की बात को लेकर अपनी पीठ थपथपा रहे थे आज वो कुछ बोलने की स्थिति मे नही है चुकी अब इस व्यवस्था की शर्तो से ये सिद्ध हो गया है कि इन लोगो ने अभी तक हम युवाओं का सिर्फ उपयोग किया है! पेंशन के नाम पर हम नए ग्रामीण बैंक कार्मिको के लिए अत्यंत आवश्यक प्रमोशन नीति को इन्होने कभी मुख्य एजेंडे मे रखा ही नहीं और जानकारी लेने पर हम युवाओं को सिर्फ आश्वाशन मिला आज तक हर एजेंडा मे सिर्फ पेंशन को वरीयता दी गई! आज हम अपने आप को ठगा महसूस कर रहे है चूंकि हम नए लोगो की भीड़ इकट्ठा करके इन लोगो ने भारत सरकार पर दबाब बनाया और आज हमलोगो को ही ऐसे स्थान पर छोड़ दिया गया है जहाँ एक ओर कुँवा है तो दूसरी ओर खाई! मित्रो हम ऐसे जगह पे है जहाँ से सिर्फ एक ही रास्ता दिखता है और वो है न्यायालय लेकिन हम नए लोगो के पास अभी ना कोई फ़ंड है और ना कोई हम युवाओं को इकट्ठा करने वाला प्लैटफॉर्म अब ऐसी स्थिति मे हम युवा कहां जाएं और इस परिस्थिति मे हमे क्या करना चाहिए इसके लिए आप सभी साथियों के सुझाव आमंत्रित है!