29/11/2016
"कोई भी काम कितना भी छोटा क्यों न हो, उसमें अपना सबकुछ लगाना चाहिए" - जेआरडी टाटा
आधुनिक भारत की औद्योगिक बुनियाद रखने वाले उद्योगपती और नागरी उड्डान के पिता जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा या जे.आर.डी. टाटा का निधन २९ नवंबर १९९३ में हुआ था !
- प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान जेआरडी ने पहिली बार विमान के बारे जाना था , तभी से विमान उडाने की चाहत पैदा हुई !
- जे आर डी टाटा की मां फ्रांसिस थी, उन्होंने फ्रांसीसी सेना में एक वर्ष का अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण भी प्राप्त किया और सेना में कार्य करते रहना चाहते थे पर उनके पिता की इच्छा कुछ और थी इसलिए उन्हें सेना छोड़ना पड़ा।
- भारत में स्टील, इंजीनीयरींग, होट्ल, ऊर्जा, रसायन, आतिथ्य, वायुयान और अन्य उद्योगो के विकास में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- जेआरडी टाटा भारत में पायलट लाइसेंस पाने वाले प्रथम व्यक्ति थे।
- जे.आर.डी. टाटा ने देश की पहली वाणिज्यिक विमान सेवा ‘टाटा एयरलाइंस’ की शुरुआत की, जो आगे चलकर सन १९४६ में ‘एयर इंडिया’ बन गई।
- इस योगदान के लिए जेआरडी टाटा को भारत के नागरिक उड्डयन का पिता भी कहा जाता है।
- १९६८ में कड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के बावजूद लंदन के एक अखबार द्वारा किए गए सर्वेक्षण में एअर इंडिया ‘विश्व की सबसे अच्छी विमान सेवा’ के खिताब से पुरस्कृत हुई।
निर्णायक मंडल की एक सदस्या के अनुसार, ‘मैं रोम में विमान के पड़ाव के दौरान अपनी कुछ चाकलेट विमान में अपनी सीट पर रखकर उतर गई थी। जब मैं वापस लौटी, तो चाकलेट यथावत रखी थी किंतु सिर्फ उसी कुर्सी के पास की खिड़की बंद कर दी गई थी, ताकि चाकलेट धूप पड़ने से पिघल न जाए।’
- जेआरडी ने छोटी छोटी बातों का ध्यान रखा !
- उन्ही के नेतृत्व में १९४५ में टाटा मोटर्स की स्थापना हुई !
- उन्होंने टाटा समूह के कंपनियों में आठ घंटे का कार्यदिवस, निःशुल्क चिकित्सा सहायता, कर्मचारी भविष्य निधि योजना और कामगार दुर्घटना मुआवजा योजना जैसी कर्मचारी कल्याण योजनाओं को भारत में पहली बार शुरू किया। जिन्हें बाद में भारत सरकार ने भी अपनाया।
- एशिया का पहला कॅन्सर अस्पताल की स्थापना जे आर डी टाटा ने की, TISS टाटा इन्स्टीट्यूट आॅफ सोशल सायन्सेस की स्थापना की !
- उनके अतुलनीय योगदान के लिए 1992 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मनित किया।
- २६ जुलाई १९८८ को उन्होंने अध्यक्ष पद छोड़ा तब तक टाटा समूह ९५ उद्यमों का एक विशाल समूह बन चुका था !
'एक इंसान के लिए सपनों की एक छोटी-सी उड़ान थी, मगर इंसानियत के लिए वह एक दूरगामी हवाई सफर था !