27/08/2016
घण्टो सोचकर भी इस तस्वीर को देखकर नया कुछ ना लिख सका..........बस पुरानी दो पंक्तियां याद आ गई...................................
"गिर रहा है दिन ब दिन इंसानियत का स्तर..!
और इंसान का दावा है..कि हम तरक्की पर हैं..!!"