30/01/2026
एनएसई के लंबे समय से इंतजार किए जा रहे आईपीओ को अहम मंजूरी हासिल हो गई है. सेबी ने आईपीओ के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी कर दिया है. इससे आईपीओ को लाने की बड़ी बाधा दूर हो गई है. मंजूरी मिलने के बाद एनएसई आधिकारिक रूप से मर्चेंट बैंकर्स और अन्य संस्थानों के साथ इश्यू लाने पर काम शुरु कर सकती है. अनुमान है कि अगले वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में इश्यू लॉन्च हो सकता है.
NSE का आईपीओ का काफी लंबे समय से इंतजार किया जा रहा है. दरअसल ‘डार्क फाइबर’ केस के कारण पूरी प्रक्रिया अटक गई थी. आम कंपनियों के विपरीत, स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉजिटरी और क्लियरिंग कॉरपोरेशन जैसी मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर संस्थाओं को ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल करने से पहले सेबी से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना जरूरी होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि ये संस्थाएं देश के वित्तीय बाजारों की स्थिरता और सुचारू संचालन के लिए बेहद अहम होती हैं.
एक अनुमान मुताबिक NSE का अनलिस्टेड शेयर भाव ₹2,000 प्रति शेयर के करीब है, जिससे उसका मार्केट कैप करीब ₹5 लाख करोड़ बैठता है. यह लिस्टेड BSE से लगभग पांच गुना बड़ा है, जिसका मार्केट कैप शुक्रवार तक ₹1.13 लाख करोड़ था. 30 नवंबर तक इक्विटी कैश सेगमेंट में NSE की हिस्सेदारी 92.7% और इक्विटी ऑप्शंस सेगमेंट में 74.3% थी.
एनएसई ने सबसे पहले 2016 में आईपीओ के लिए अर्जी दी थी हालांकि बाद में इसे वापस ले लिया गया था. साल 2025 में एनएसई ने को-लोकेशन सहित अन्य मामलों में सेबी के समक्ष सेटलमेंट एप्लीकेशन दी थी. जिसके बाद अब से एनओसी दी गई है