27/10/2018
जोश है, तो जासूस बनो
अगर अपने आप पर भरोसा, हिम्मत और अपराधों से लड़ने का साहस और देशभक्ति का जज्बा है, तो जासूसी में करियर आपके लिए बेहतर साबित हो सकता है। आइए, जानते हैं कैसे :
टेलिविजन और फिल्मों में जासूसों के कारनामे देखकर मन में एक सवाल पैदा होता है कि आखिर ये जासूस उलझी हुई समस्याओं और आपराधिक गुत्थियों को सुलझाते कैसे हैं? इसमें कोई शक नहीं है कि जासूसों के जोशीले कारनामे नौजवानों को इसे करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, लेकिन हकीकत में एक जासूस का काम उतना आसान नहीं होता, जितना एकबारगी नजर आता है। एक डिटेक्टिव को अपनी हिम्मत, साहस और बौद्धिक कौशल से आपराधिक गुत्थियों को सुलझाना पड़ता है। इस काम में तमाम तरह के जोखिम शामिल होते हैं। अपराध जगत से टक्कर लेकर देश व समाज हित में काम करने का साहस रखने वाले और इस पेशे से जुड़ी तमाम चुनौतियों और मुश्किलों को स्वीकार करके अपना भविष्य बनाने की इच्छा रखने वाले को ही अपना करियर जासूस के रूप में बनाने के बारे में सोचना चाहिए।
क्या काम है जासूस का
डिटेक्टिव मुख्य रूप से पुलिस विभाग या फिर निजी कंपनियों को अपनी सेवाएं प्रदान करता है। उसका काम मुख्य रूप से आपराधिक मामलों की तहकीकात करके तथ्यों को एकत्र करना होता है, जिनकी मदद से पुलिस तहकीकात करके मामले की तह तक जाकर अपराधी को कानून के हवाले करती है। जरूरत पड़ने पर जासूस आपराधिक मामलों से जुड़े संदेहास्पद लोगों से पूछताछ और छापों में पुलिस व क्राइम ब्रांच के सरकारी अफसरों की भी मदद करता है। निजी कंपनियों से जुड़े जासूस मुख्यत: कॉरपोरेट सेक्टर के लोगों, सिलेब्रिटिज व एग्जिक्यूटिव्स के लिए भी अपनी सेवाएं प्रदान करते हैं। जासूस का काम काफी चुनौतीपूर्ण होता है। इस क्षेत्र में काम करने का कोई समय निर्धारित नहीं होता। ड्यूटी के समय इन्हें हमेशा चौकन्ना रहना पड़ता है। यही नहीं, इन्वेस्टिगेशन के इस क्षेत्र में प्रवेश के लिए जरूरी है कि उम्मीदवार पूरी तरह फिट हो और हर समय सचेत रहे। शुरुआती तौर पर इस क्षेत्र के लिए कुछ जरूरी सामग्री खरीदनी होती हैं, जैसे : मिनीरिकॉर्डर, मैचबॉक्स, बटन साइज या हिडन कैमरा और मोबाइल। ये चीजें इनके हथियार समझे जाते हैं।
प्राइवेट डिटेक्टिव जॉब के लिए किसी कोर्स की जरूरत नहीं होती, लेकिन अच्छी नौकरी के लिए आपके पास डिग्री होना जरूरी है। इंटेलिजेंस, गवर्नमेंट, मिलेट्री और लॉ इंफोर्समेंट में सेवा के बाद कई लोग प्राइवेट डिटेक्टिव सर्विस के क्षेत्र में प्रवेश करते हैं।
प्रवेश प्रक्रिया और कोर्स
इस क्षेत्र में प्रवेश के लिए किसी खास एजुकेशन बैकग्राउंड की जरूरत नहीं होती। एक सिम्पल ग्रैजुएट भी इस क्षेत्र में काम कर सकता है। इसमें प्रवेश प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से किया जाता है। परीक्षा का संचालन यूपीएससी द्वारा देश के विभिन्न केन्द्रों पर किया जाता है। इसके अलावा आप देश-विदेश के इंस्टिट्यूट और डिटेक्टिव एजेंसियों द्वारा चलाए जा रहे प्रफेशनल डिग्री और डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं। 1 वर्षीय डिप्लोमा कोर्स 'दी आर्ट ऑफ इन्वेस्टीगेशन' तथा 'क्रिमिनॉलजी एंड फॉरेंसिक साइंस' में डिग्री कोर्स कर उच्च स्तर के जासूस बन सकते हैं।
रोजगार की संभावनाएं
रॉ में इस तरह के उम्मीदवार को शुरुआत में जूनियर लेवल पर डिप्टी फील्ड ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया जाता है। साथ ही सीबीआई और आईबी में असिस्टेंट इंटेलिजेंस ऑफिसर ग्रेड-2 के तौर पर भी नियुक्त किए जाते हैं।
वर्तमान में इस क्षेत्र के विशेषज्ञों की मांग दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। अब तो रजिस्टर्ड डिटेक्टिव एजेंसियों ने अपनी शाखाएं विदेशों में भी शुरू कर दी हैं। यकीनन यह क्षेत्र सम्भावनाओं से भरा है। इस क्षेत्र में अनुभव के बाद डिटेक्टिव अपनी सिक्युरिटी एजेंसी शुरू कर सकते हैं। वर्तमान में डिटेक्टिव एजेंसियां अपनी सेवाएं देने के लिए हाई चार्ज करती हैं। जरूरत पड़ने पर लोग अपनी विशेष सुरक्षा, प्रॉपर्टी प्रॉटेक्शन और मनी ट्रांसफर जैसे मामलों में एक विश्वसनीय डिटेक्टिव एजेंसी की सेवा निजी तौर पर लेना पसंद करते हैं। इन सेवाओं के लिए काफी बड़ी रकम वसूली जाती है। निजी कंपनियों के अलावा डिटेक्टिव सरकारी एजेंसी जैसे रिसर्च एंड एनालिसिस विंग - रॉ, पुलिस सविर्स या सेंट्रल इंटेलिजेंस ब्यूरो - सीबीआई में भी ये लोग अपनी सेवाएं दे सकते हैं। डिटेक्टिव एजेंसी में शुरुआती तौर पर उम्मीदवार लगभग 8 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह कमा सकता है। विशेष योग्यता प्राप्त और अनुभवी इन्वेस्टिगेटर 2 से 20 हजार प्रतिदिन तक कमा सकते हैं।
मुख्य आकर्षण
- अभी तक सिर्फ यूपीएससी द्वारा जासूस बनने के लिए प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाता था। जल्दी ही एनडीए में भी इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। दिल्ली और मुंबई विश्वविद्यालयों में भी इससे संबंधित कोर्स चलाए जाएंगे।
- मिलिट्री, इंटेलिजेंस और लॉ इन्फोर्समेंट जैसी सविर्सेज में काम करने के बाद प्राइवेट डिटेक्टिव के रूप में काम शुरू किया जा सकता है।
- प्रशिक्षित और अनुभवी जासूस रॉ जैसी सरकारी एजेंसियों मुख्य पदों पर कार्य कर सकते हैं।
- शुरुआत में वेतनमान के तौर पर 8 से 15 हजार रुपये प्रति माह और प्रशिक्षित व अनुभवी जासूस 2 से 20 हजार प्रति दिन तक भी कमा सकते हैं।