10/10/2023
मंजिल की तलाश थी
और सफर भी अकेला,
आगे किस्मत खड़ी थी
पीछे दुनिया का मेला।
पास जाने पर बड़ी आफत है,
माना कि हंसी नजारा है,
चलो दूर से ही देख लेते है ‘मेला’
पैसों का ये खेल सारा है।
जब भी मैं तुम्हारी यादों का सजाता हूँ मेला,
तुम ही तुम नजर आती हो, मैं खुद को पाता हूँ अकेला।
बचपन मेले से खुशियाँ खरीद कर लाता है,
जवानी मेले में तो सिर्फ खर्च करके आता है।