28/04/2026
फ़र्श से अर्श तक:—
मैडम सविता प्रधान IAS -दर्द,तकलीफ़ और इम्तिहानों की क़ैद से IAS तक का सफ़र तय करने वाली और मौत से हाथ छुड़ाकर लौटने वाली एक महिला की कहाँनी:-
महज 16 साल की उम्र में सविता प्रधान की शादी हो गई थी...!! उनकी शादीशुदा जिंदगी बहुत तकलीफदेह हो गई...!! पति का सभी के सामने धमकाना, पीटना और बेइज्जती करना आम होने लगा था...!! ससुराल में ठीक से खाना खाना भी मुश्किल हो गया था...!! घर की सफाई करने के बाद खाना बनाने के लिए कहा जाता था...!! नौकरों की तरह ट्रीट किया गया...!! वो कहती हैं, 'मैं कई बार अपने अंडरगारमेंट्स में रोटी छिपाकर बाथरूम जाती थी और वहां सिर्फ रोटी से पेट भरती थी...!! उस समय भी मुझे अहसास नहीं हो रहा था कि आखिर मेरे साथ हो क्या रहा है...!!
वे बताती हैं, 'शोषण बढ़ता ही गया...!! मुझे छोटी-छोटी बातों पर पीटा जाता था...!! दिन-रात मैं शारीरिक हिंसा का शिकार होती थी...!! जब एक दिन पिता मिलने आए, तो उन्होंने घर ले जाने की विनती की...!! 'उन्होंने शाम तक वापस आने और उसे घर ले जाने का वादा किया..!! लेकिन वे वापस नहीं आए...!! उस दिन, समझ आ गया कि इस नरक से मुझे बचाने कोई नहीं आएगा...!!
'मैं फांसी लगाने ही वाली थी...!! इस समय तक दो बच्चों की मां बन चुकी थीं, फिर भी उनकी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ था...!! वे बताती हैं 'मेरा माथा फटा हुआ है, हाथ पर कट के निशान हैं, पीठ जली हुई है...!! रोज-रोज के अत्याचार अब सहन करना मुश्किल हो गया था...!! पता था कि खुद की जान लेना गलत है लेकिन इसके अलावा कोई और रास्ता नजर नहीं आ रहा था...!!' एक दिन उन्होंने अपनी जान देने का फैसला किया...!!
उन्होंने बताया, 'मैंने अपने बेटे को सुला दिया...!! दूसरे बेटे को फीड कराया...!! माथा चूमा जैसे कि आखिरी बार सुला रही हूं...!! एक स्टूल खींचा और पंखें पर साड़ी लटका दी...!! मैं फांसी लगाने ही वाली थी कि खिड़की से मेरी सास का चेहरा दिखाई दिया...!! उन्होंने मुझे देखा, लेकिन उन्होंने रोका नहीं, उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे...!! वे वहां से ऐसे चली गईं जैसे उन्होंने कुछ देखा ही नहीं या उनके लिए कोई मायने नहीं रखता...!! ' यह उनके लिए एक निर्णायक पल था...!! उन्होंने कहा, 'तब मुझे एहसास हुआ कि मैं ऐसे लोगों के लिए अपनी जान नहीं दे सकती...!! हिम्मत जुटाकर वे ससुराल से भाग निकलीं...!!
ससुराल से भागने के बाद सविता अपनी चचेरी बहन की भाभी के घर में रहने लगी थीं...!! पार्लर में काम किया, ट्यूशन पढ़ाया और संघर्ष करते-करते आगे की पढ़ाई की...!! लेकिन अभी सब खत्म नहीं हुआ था...!! अलग होने के बाद भी पति कभी-कभी आता था और मारपीट करता था...!! उन्होंने बताया, 'वह बच्चों के सामने मुझे पीटता था...!! एक दिन एक बाल्टी में पेशाब किया और मुझ पर फेंक दिया.!! उस समय मैं एग्जाम देने जा रही थी...!! मैं फिर से नहाई, कपड़े बदले और अपना पेपर देने चली गई...!!मेरा दिल वाकई में कठोर हो गया था...!!
पहले अटेंप्ट में PCS और फिर UPSC CSE क्रैक कर IAS ऑफिसर बनीं...!!
सविता का लक्ष्य अच्छी सरकारी नौकरी पाने का था...!! उन्होंने अकेले बच्चों की परवरिश करते हुए सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी की और बहुत जल्द उनकी मेहनत रंग लाई...!! कई सालों के संघर्ष और परेशानियों से जूझते हुए सविता ने अपने पहले ही प्रयास में मध्य प्रदेश राज्य सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली...!! वे एक सरकारी अधिकारी बन गईं...!! एक आदिवासी छात्रा के तौर पर अपनी इस उपलब्धि के लिए, सरकार ने उन्हें 75,000 रुपये की छात्रवृत्ति भी दी...!!
इसके बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2017 का फॉर्म भरा...!! पहले ही अटेंप्ट में प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू कर लिया था...!! आज, सविता प्रधान एक IAS अधिकारी हैं...!!वे अपने पद का इस्तेमाल दूसरों की मदद करने के लिए करती हैं, खासकर गरीब समुदायों की महिलाओं और लड़कियों की...!! वे उनके शिक्षा के अधिकार और एक निडर जीवन के लिए संघर्ष करती हैं...!!