ACS/ CA Ritika Singh

ACS/ CA Ritika Singh 𝙇𝙚𝙜𝙖𝙡 𝘼𝙙𝙫𝙞𝙨𝙤𝙧 𝙘𝙪𝙢 𝘾𝙤𝙢𝙥𝙡𝙞𝙖𝙣𝙘𝙚 𝙊𝙛𝙛𝙞𝙘𝙚𝙧 𝙖𝙣𝙙 𝙁𝙞𝙣𝙖𝙣𝙘𝙞𝙖𝙡 𝘿𝙤𝙘𝙩𝙤𝙧 𝙛𝙤𝙧 𝙩𝙝𝙚 𝘾𝙤./ 𝙄𝙣𝙩𝙚𝙧𝙣𝙖𝙩𝙞𝙤𝙣𝙖𝙡 𝙇𝙞𝙖𝙨𝙤𝙣𝙚𝙧

𝙎𝘽𝙇𝘾, 𝘽𝙂 𝙘𝙪𝙢 𝘽𝙪𝙨𝙞𝙣𝙚𝙨𝙨 𝙇𝙤𝙖𝙣 𝙋𝙧𝙤𝙫𝙞𝙙𝙚𝙧

𝙂𝙤𝙡𝙙

फ़र्श से अर्श तक:—मैडम सविता प्रधान IAS -दर्द,तकलीफ़ और इम्तिहानों की क़ैद से IAS तक का सफ़र तय करने वाली और मौत से हाथ ...
28/04/2026

फ़र्श से अर्श तक:—

मैडम सविता प्रधान IAS -दर्द,तकलीफ़ और इम्तिहानों की क़ैद से IAS तक का सफ़र तय करने वाली और मौत से हाथ छुड़ाकर लौटने वाली एक महिला की कहाँनी:-

महज 16 साल की उम्र में सविता प्रधान की शादी हो गई थी...!! उनकी शादीशुदा जिंदगी बहुत तकलीफदेह हो गई...!! पति का सभी के सामने धमकाना, पीटना और बेइज्जती करना आम होने लगा था...!! ससुराल में ठीक से खाना खाना भी मुश्किल हो गया था...!! घर की सफाई करने के बाद खाना बनाने के लिए कहा जाता था...!! नौकरों की तरह ट्रीट किया गया...!! वो कहती हैं, 'मैं कई बार अपने अंडरगारमेंट्स में रोटी छिपाकर बाथरूम जाती थी और वहां सिर्फ रोटी से पेट भरती थी...!! उस समय भी मुझे अहसास नहीं हो रहा था कि आखिर मेरे साथ हो क्या रहा है...!!
वे बताती हैं, 'शोषण बढ़ता ही गया...!! मुझे छोटी-छोटी बातों पर पीटा जाता था...!! दिन-रात मैं शारीरिक हिंसा का शिकार होती थी...!! जब एक दिन पिता मिलने आए, तो उन्होंने घर ले जाने की विनती की...!! 'उन्होंने शाम तक वापस आने और उसे घर ले जाने का वादा किया..!! लेकिन वे वापस नहीं आए...!! उस दिन, समझ आ गया कि इस नरक से मुझे बचाने कोई नहीं आएगा...!!

'मैं फांसी लगाने ही वाली थी...!! इस समय तक दो बच्चों की मां बन चुकी थीं, फिर भी उनकी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ था...!! वे बताती हैं 'मेरा माथा फटा हुआ है, हाथ पर कट के निशान हैं, पीठ जली हुई है...!! रोज-रोज के अत्याचार अब सहन करना मुश्किल हो गया था...!! पता था कि खुद की जान लेना गलत है लेकिन इसके अलावा कोई और रास्ता नजर नहीं आ रहा था...!!' एक दिन उन्होंने अपनी जान देने का फैसला किया...!!

उन्होंने बताया, 'मैंने अपने बेटे को सुला दिया...!! दूसरे बेटे को फीड कराया...!! माथा चूमा जैसे कि आखिरी बार सुला रही हूं...!! एक स्टूल खींचा और पंखें पर साड़ी लटका दी...!! मैं फांसी लगाने ही वाली थी कि खिड़की से मेरी सास का चेहरा दिखाई दिया...!! उन्होंने मुझे देखा, लेकिन उन्होंने रोका नहीं, उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे...!! वे वहां से ऐसे चली गईं जैसे उन्होंने कुछ देखा ही नहीं या उनके लिए कोई मायने नहीं रखता...!! ' यह उनके लिए एक निर्णायक पल था...!! उन्होंने कहा, 'तब मुझे एहसास हुआ कि मैं ऐसे लोगों के लिए अपनी जान नहीं दे सकती...!! हिम्मत जुटाकर वे ससुराल से भाग निकलीं...!!

ससुराल से भागने के बाद सविता अपनी चचेरी बहन की भाभी के घर में रहने लगी थीं...!! पार्लर में काम किया, ट्यूशन पढ़ाया और संघर्ष करते-करते आगे की पढ़ाई की...!! लेकिन अभी सब खत्म नहीं हुआ था...!! अलग होने के बाद भी पति कभी-कभी आता था और मारपीट करता था...!! उन्होंने बताया, 'वह बच्चों के सामने मुझे पीटता था...!! एक दिन एक बाल्टी में पेशाब किया और मुझ पर फेंक दिया.!! उस समय मैं एग्जाम देने जा रही थी...!! मैं फिर से नहाई, कपड़े बदले और अपना पेपर देने चली गई...!!मेरा दिल वाकई में कठोर हो गया था...!!

पहले अटेंप्ट में PCS और फिर UPSC CSE क्रैक कर IAS ऑफिसर बनीं...!!
सविता का लक्ष्य अच्छी सरकारी नौकरी पाने का था...!! उन्होंने अकेले बच्चों की परवरिश करते हुए सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी की और बहुत जल्द उनकी मेहनत रंग लाई...!! कई सालों के संघर्ष और परेशानियों से जूझते हुए सविता ने अपने पहले ही प्रयास में मध्य प्रदेश राज्य सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली...!! वे एक सरकारी अधिकारी बन गईं...!! एक आदिवासी छात्रा के तौर पर अपनी इस उपलब्धि के लिए, सरकार ने उन्हें 75,000 रुपये की छात्रवृत्ति भी दी...!!

इसके बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2017 का फॉर्म भरा...!! पहले ही अटेंप्ट में प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू कर लिया था...!! आज, सविता प्रधान एक IAS अधिकारी हैं...!!वे अपने पद का इस्तेमाल दूसरों की मदद करने के लिए करती हैं, खासकर गरीब समुदायों की महिलाओं और लड़कियों की...!! वे उनके शिक्षा के अधिकार और एक निडर जीवन के लिए संघर्ष करती हैं...!!

31/03/2026

𝘛𝘰𝘥𝘢𝘺 𝘪𝘴 𝘢𝘯 𝘈𝘯𝘯𝘶𝘢𝘭 𝘈𝘤𝘤𝘰𝘶𝘯𝘵 𝘊𝘭𝘰𝘴𝘪𝘯𝘨 𝘥𝘢𝘵𝘦. 𝘊𝘭𝘦𝘢𝘳 𝘢𝘭𝘭 𝘺𝘰𝘶𝘳 𝘮𝘪𝘴𝘶𝘯𝘥𝘦𝘳𝘴𝘵𝘢𝘯𝘥𝘪𝘯𝘨, 𝘩𝘶𝘳𝘵, 𝘨𝘶𝘪𝘭𝘵, 𝘢𝘯𝘨𝘦𝘳, 𝘳𝘦𝘴𝘦𝘯𝘵𝘮𝘦𝘯𝘵, 𝘧𝘦𝘢𝘳, 𝘳𝘦𝘫𝘦𝘤𝘵𝘪𝘰𝘯𝘴, 𝘧𝘢𝘪𝘭𝘶𝘳𝘦, 𝘦𝘯𝘷𝘺, 𝘶𝘯𝘧𝘰𝘳𝘨𝘪𝘷𝘦𝘯, 𝘮𝘪𝘴𝘣𝘦𝘩𝘢𝘷𝘪𝘰𝘳, 𝘮𝘪𝘴𝘵𝘢𝘬𝘦𝘴 𝘢𝘯𝘥 𝘢𝘭𝘭 𝘯𝘦𝘨𝘢𝘵𝘪𝘷𝘦 𝘧𝘦𝘦𝘭𝘪𝘯𝘨 𝘢𝘯𝘥 𝘤𝘰𝘯𝘴𝘪𝘥𝘦𝘳 𝘵𝘩𝘦𝘮 𝘢𝘴 𝘺𝘰𝘶𝘳 𝘤𝘭𝘰𝘴𝘦𝘥 𝘢𝘤𝘤𝘰𝘶𝘯𝘵𝘴.
𝘞𝘪𝘴𝘩𝘪𝘯𝘨 𝘺𝘰𝘶 𝘢 𝘷𝘦𝘳𝘺 𝘏𝘢𝘱𝘱𝘺, 𝘏𝘦𝘢𝘭𝘵𝘩𝘺 𝘢𝘯𝘥 𝘞𝘦𝘢𝘭𝘵𝘩𝘺 𝘕𝘦𝘸 𝘍𝘪𝘯𝘢𝘯𝘤𝘪𝘢𝘭 𝘠𝘦𝘢𝘳 (2026-2027) 😊

3 मार्चजमशेदजी नुसीरवानजी टाटाजमशेदजी नुसीरवानजी टाटा का जन्म 3 मार्च 1839 में दक्षिणी गुजरात के नवसारी में एक पारसी परि...
03/03/2026

3 मार्च
जमशेदजी नुसीरवानजी टाटा
जमशेदजी नुसीरवानजी टाटा का जन्म 3 मार्च 1839 में दक्षिणी गुजरात के नवसारी में एक पारसी परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम नुसीरवानजी तथा माता का नाम जीवनबाई टाटा था। उनके पिता अपने ख़ानदान में अपना व्यवसाय करने वाले पहले व्यक्ति थे। मात्र चौदह वर्ष की आयु में ही जमशेदजी अपने पिता के साथ बंबई आ गए और व्यवसाय में क़दम रखा। छोटी उम्र में ही उन्होंने अपने पिता का साथ देना शुरू कर दिया था। जब वे सत्रह साल के थे तब उन्होंने मुंबई के ‘एलफ़िंसटन कॉलेज’, में प्रवेश ले लिया और दो वर्ष बाद सन 1858 में ‘ग्रीन स्कॉलर’ (स्नातक स्तर की डिग्री) के रूप में उत्तीर्ण हुए और पिता के व्यवसाय में पूरी तरह लग गए। इसके पश्चात इनका विवाह हीरा बाई दबू के साथ करा दिया गया।
जमशेद जी ने हांगकांग और शंघाई जैसे बड़े नगरो में अपने व्यापार की शाखाएं खोली. उन्होंने चीन में रहकर वहां की अर्थव्यवस्था का भी अध्ययन किया. अपने व्यापार को विस्तार देने की कड़ी में वे लन्दन भी गये. उस समय उनकी उम्र 25 वर्ष थी.उन्होंने लन्दन में सूती वस्त्र उद्योग पर अधिक ध्यान दिया. इस सम्बन्ध में उन्होंने लंकाशायर और मेनचेस्टर नगरो की यात्रायें की. यह नगर वस्त्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध है. यहाँ वे चार वर्ष तक वस्त्र उद्योग से सम्बन्धित समस्याओ का अध्ययन करते रहे.
वह दौर बहुत कठिन था। अंग्रेज अत्यंत बर्बरता से 1857 कि क्रान्ति को कुचलने में सफल हुए थे। 29 साल की आयु तक जमशेदजी अपने पिता जी के साथ ही काम करते रहे। 1868 में उन्होने 21000 रुपयों के साथ अपना खुद का व्यवसाय शुरू किया। सबसे पहले उन्होने एक दिवालिया तेल कारखाना ख़रीदा और उसे एक रुई के कारखाने में तब्दील कर दिया और उसका नाम रखा - एलेक्जेंडर मिल (Alexender Mill) ! दो साल बाद उन्होने इसे खासे मुनाफे के साथ बेच दिया। इस पैसे के साथ उन्होंने नागपुर में 1874 में एक रुई का कारखाना लगाया। महारानी विक्टोरिया ने उन्ही दिनों भारत की रानी का खिताब हासिल किया था और जमशेदजी ने भी वक़्त को समझते हुए कारखाने का नाम इम्प्रेस्स मिल (Empress Mill) (Empress का मतलब ‘महारानी’) रखा।
औद्योगिक विकास कार्यों में जमशेदजी यहीं नहीं रुके। देश के सफल औद्योगीकरण के लिए उन्होंने इस्पात कारखानों की स्थापना की महत्वपूर्ण योजना बनाई। ऐसे स्थानों की खोज की जहाँ लोहे की खदानों के साथ कोयला और पानी सुविधा से प्राप्त हो सके। अंतत: आपने बिहार के जंगलों में सिंहभूमि जिले में वह स्थान (इस्पात की दृष्टि से बहुत ही उपयुक्त) खोज निकाला। जमशेद जी की अन्य बड़ी उल्लेखनीय योजनाओं में पश्चिमी घाटों के तीव्र धाराप्रपातों से बिजली उत्पन्न करनेवाला विशाल उद्योग है जिसकी नींव 8 फ़रवरी 1911 को लानौली में गवर्नर द्वारा रखी गई।
सफल औद्योगिक और व्यापारी होने के अतिरिक्त सर जमशेदजी उदार चित्त के व्यक्ति थे। वे औद्योगिक क्रांति के अभिशाप से परिचित थे जमशेदजी ने कहा था कि- “अगर किसी देश को आगे बढ़ाना है तो उसके असहाय और कमज़ोर लोगों को सहारा देना ही सब कुछ नहीं है। समाज के सर्वोत्तम और

प्रतिभाशाली लोगों को ऊँचा उठाना और उन्हें ऐसी स्थिति में पहुँचाना भी जरूरी है, जिससे कि वे देश की महान सेवा करने लायक़ बन सकें।
विश्व प्रसिद्ध 'ताजमहल होटल' सिर्फ़ मुम्बई ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारत में ख्यातिप्राप्त है। 'ताजमहल होटल' के निर्माण के पीछे एक रोचक कहानी छुपी हुई है। सिनेमा के जनक लुमायर भाईयों ने अपनी खोज के छ: महीनों बाद अपनी पहली फ़िल्म का शो मुम्बई में प्रदर्शित किया था। वैसे तो वे ऑस्ट्रेलिया जा रहे थे, लेकिन बीच रास्ते में उन्होंने मुम्बई में भी शो रखने की बात सोची। 7 जुलाई, 1896 को उन्होंने मुम्बई के तत्कालीन आलीशान वोटसन होटल में अपनी छ: अलग-अलग फ़िल्मों के शो आयोजित किए। इन शो को देखने के लिए मात्र ब्रिटिश लोगों को ही आमंत्रित किया गया था, क्योंकि वोटसन होटल के बाहर एक तख्ती लगी रहती थी, जिस पर लिखा होता था कि "भारतीय और कुत्ते होटल में नहीं आ सकते हैं"। 'टाटा समूह' के जमशेदजी टाटा भी लुमायर भाईयों की फ़िल्में देखना चाहते थे, लेकिन उन्हें वोटसन होटल में प्रवेश नहीं मिला। रंगभेद की इस घृणित नीति के ख़िलाफ़ उन्होंने आवाज भी उठाई। इस घटना के दो साल बाद ही वोटसन होटल की सारी शोभा धूमिल कर दे, एक ऐसे भव्य 'ताजमहल होटल' का निर्माण जमशेदजी ने शुरू करवा दिया। 1903 ई. में यह अति सुंदर होटल बनकर तैयार हो गया। कुछ समय तक इस होटल के दरवाज़े पर एक तख्ती भी लटकती थी, जिस पर लिखा होता था कि- "ब्रिटिश और बिल्लियाँ अंदर नहीं आ सकतीं।
तत्कालीन मुम्बई में ताज होटल की इमारत बिजली की रोशनी वाली पहली इमारत थी, इसीलिए इसकी चकाचौंध हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती थी। इसकी गणना संसार के सर्वश्रेष्ठ होटलों में की जाने लगी थी।
अपनी इस सफलता से उन्हें पूर्ण संतोष न मिला। पुन: इंग्लैंड की यात्रा की। वहाँ लंकाशायर के से बारीक वस्त्र की उत्पादनविधि और उसके लिए उपयुक्त जलवायु का अध्ययन किया। इसके लिए उन्होंने नागपुर को चुना और वहाँ वातानुकूलित सूत मिलों की स्थापना की।
जमशेद जी के दिमाग में तीन बडे विचार आये। एक, अपनी लोहा व स्टील कंपनी खोलना ; दूसरा, एक जगत प्रसिद्ध अध्ययन केंद्र स्थापित करना ; व तीसरा, एक जलविद्युत परियोजना (Hydro-electric plant) लगाना। होटल ताज महल दिसंबर 1903 में 4,21,00,000 रुपये के शाही खर्च से तैयार हुआ।
भारतीय औद्योगिक क्षेत्र में जमशेदजी का योग असाधारण महत्त्व रखता है। इन्होंने भारतीय औद्योगिक विकास का मार्ग ऐसे समय में प्रशस्त किया, जब उस दिशा में केवल यूरोपीय, विशेषत: अंग्रेज ही कुशल समझे जाते थे।
जमशेदजी की अन्य बड़ी उल्लेखनीय योजनाओं में पश्चिमी घाटों के तीव्र जलप्रपातों से बिजली उत्पन्न करनेवाला विशाल उद्योग है, जिसकी नींव 8 फ़रवरी 1911 को लानौली में गवर्नर द्वारा रखी गयी। इससे बम्बई की समूची विद्युत आवश्यकताओं की पूर्ति होने लगी।
खनिजों आदि के अन्वेषण की यह तथा अन्य बड़ी योजनाएँ अभी पूरी भी नहीं हुई थीं कि उनके ख्यातिपूर्ण जीवन का, आशा के प्रतिकूल 19 मई 1904 को 65 वर्ष की अवस्था में ही अंत हो गया।
~ मेरे आदर्श 🙏🏻

14 फरवरी/जन्म-दिवसस्वतंत्रता के साधक बाबा गंगादास1857 के भारत के स्वाधीनता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाने वाले बाबा गं...
13/02/2026

14 फरवरी/जन्म-दिवस
स्वतंत्रता के साधक बाबा गंगादास

1857 के भारत के स्वाधीनता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाने वाले बाबा गंगादास का जन्म 14 फरवरी, 1823 (वसंत पंचमी) को गंगा के तट पर बसे प्राचीन तीर्थ गढ़मुक्तेश्वर (उ.प्र.) के पास रसूलपुर ग्राम में हुआ था। इनके पिता चौधरी सुखीराम तथा माता श्रीमती दाखादेई थीं। बड़े जमींदार होने के कारण उनका परिवार बहुत प्रतिष्ठित था। जन्म के कुछ दिन बाद पूरे विधि-विधान और हर्षोल्लास के साथ उनका नाम गंगाबख्श रखा गया।

चौधरी सुखीराम के परिवार में धार्मिक वातावरण था। इसका प्रभाव बालक गंगाबख्श पर भी पड़ा। जिस समय सब बालक खेलते या पढ़ते थे, उस समय गंगाबख्श भगवान के ध्यान में लीन रहते थे। जब वे आंखें बंदकर प्रभुनाम का कीर्तन करते, तो सब परिजन भाव-विभोर हो उठते थे। जब गंगाबख्श की अवस्था दस वर्ष की थी, तब उनके माता-पिता का देहांत हो गया। अब तो वे अपना अधिकांश समय साधना में लगाने लगे। परिजनों के आग्रह पर वे कभी-कभी खेत में जाने लगे; पर 11 वर्ष की अवस्था में वे एक दिन अपने हल और बैल खेत में ही छोड़कर गायब हो गये।

उन दिनों उनका सम्पर्क उदासीन सम्प्रदाय के संत विष्णु दास से हो गया था। उनके आदेश से गंगाबख्श ने अपना पूरा जीवन काव्य साधना तथा श्रीमद् भगवद्गीता के प्रचार-प्रसार में लगाने का निश्चय कर लिया। संत विष्णु दास ने उनकी निश्छल भक्ति भावना तथा प्रतिभा को देखकर उन्हें दीक्षा दी। इस प्रकार उनका नाम गंगाबख्श से गंगादास हो गया।

संत विष्णु दास के आदेश पर वे काशी आ गये। यहां लगभग 20 वर्ष उन्होंने संस्कृत के अध्ययन और साधना में व्यतीत किये। उन दिनों देश में सब ओर स्वाधीनता संग्राम की आग धधक रही थी। बाबा गंगादास इससे प्रभावित होकर ग्वालियर चले गये और वहां एक कुटिया बना ली। वहां गुप्त रूप से अनेक क्रांतिकारी उनसे मिलने तथा परामर्श के लिए आने लगे।

ऐतिहासिक नाटकों के लेखक श्री वृन्दावन लाल वर्मा ने ने अपने नाटक ‘झांसी की रानी’ में लिखा है कि रानी लक्ष्मीबाई अपनी सखी मुन्दर के साथ गुप्त रूप से बाबा की कुटिया में आती थीं। आगे चलकर जब रानी लक्ष्मीबाई का युद्ध में प्राणांत हुआ, तो विदेशी व विधर्मियों के स्पर्श से बचाने के लिए उनके शरीर को बाबा गंगादास अपनी कुटिया में ले आये। इसके बाद उन्होंने अपनी कुटिया को आग लगाकर रानी का दाह संस्कार कर दिया।

इसके बाद बाबा फिर से अपने क्षेत्र में मां गंगा के सान्निध्य में आ गये। वे जीवन भर निकटवर्ती गांवों में घूमकर ज्ञान, भक्ति और राष्ट्रप्रेम की अलख जलाते रहे। उन्होंने छोटी-बड़ी 50 से भी अधिक पुस्तकें लिखीं। उन्होंने अपने काव्य में खड़ी बोली का प्रयोग किया है। उन्होंने संत कबीर की तरह समाज में व्याप्त कुरीतियों और अंधविश्वासों पर भरपूर चोट की।

लगभग 20 वर्ष तक वे गढ़मुक्तेश्वर में राजा नृग के प्राचीन ऐतिहासिक कुएं के पास कुटिया बनाकर निवास करते रहे। यहां सन्त प्यारेलाल, माधोराम, फकीर इनायत अली आदि उनके सत्संग के लिए आते रहते थे। 1913 की जन्माष्टमी के पावन दिन ब्रह्ममुहूर्त में में गंगातट पर ही उन्होंने निर्वाण प्राप्त किया।

13/02/2026
10/02/2026

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Security agencies in Jamshedpur have been placed on high alert following a crucial intelligence input received from Inte...
06/02/2026

Security agencies in Jamshedpur have been placed on high alert following a crucial intelligence input received from Interpol indicating a possible terror threat in the city and nearby areas. Acting on the alert, the Jharkhand Police Headquarters has directed district authorities to tighten security arrangements and intensify surveillance.

According to intelligence sources, sleeper cells may be active in and around Jamshedpur and could be planning a major incident. Following the input, senior police officials, including the Senior Superintendent of Police, have taken charge of security operations across the city, said media reports.

The main suspect under surveillance is Syed Mohammad Arshiyan, a resident of Mango’s Azadnagar area. Interpol has already issued a Red Corner Notice against Arshiyan at the request of the Central Bureau of Investigation. Security agencies suspect his links with the Al-Qaeda network. His name also figures in the Delhi Police’s most-wanted list. His brother, Mohammad Zeeshan, is currently lodged in a Delhi jail in connection with terror-related activities. Both brothers were earlier linked to a 2016 Odisha case involving the arrest of Al-Qaeda operative Abdul Rehman Qatki.

In response to the alert, security has been significantly tightened at sensitive locations, including Tatanagar Railway Station, bus stands, major markets, malls, and industrial areas. Intensive checking is being carried out at hotels, lodges, and guest houses, with special focus on unidentified and suspicious individuals. Vehicle checking has been intensified at entry and exit points of the city, while police and intelligence personnel in plain clothes have been deployed in crowded areas.

The district administration has appealed to citizens to remain calm and not fall prey to rumours. People have been urged to immediately inform the police or the control room if they notice any suspicious person or unattended object.

Police officials stated that they are in constant coordination with Interpol and central agencies and that comprehensive security measures are in place to deal with any situation.

𝘽𝙪𝙨𝙞𝙣𝙚𝙨𝙨 𝙀𝙭𝙘𝙚𝙡𝙡𝙚𝙣𝙘𝙚 𝙞𝙨 𝙣𝙚𝙫𝙚𝙧 𝙖𝙘𝙘𝙞𝙙𝙚𝙣𝙩𝙖𝙡. 𝙄𝙩'𝙨 𝙥𝙧𝙚𝙥𝙖𝙧𝙚𝙙, 𝙘𝙤𝙣𝙨𝙞𝙙𝙚𝙧𝙚𝙙 𝙖𝙣𝙙 𝙚𝙭𝙚𝙘𝙪𝙩𝙚𝙙 𝙥𝙧𝙚𝙘𝙞𝙨𝙚𝙡𝙮 ✌🏻
05/02/2026

𝘽𝙪𝙨𝙞𝙣𝙚𝙨𝙨 𝙀𝙭𝙘𝙚𝙡𝙡𝙚𝙣𝙘𝙚 𝙞𝙨 𝙣𝙚𝙫𝙚𝙧 𝙖𝙘𝙘𝙞𝙙𝙚𝙣𝙩𝙖𝙡. 𝙄𝙩'𝙨 𝙥𝙧𝙚𝙥𝙖𝙧𝙚𝙙, 𝙘𝙤𝙣𝙨𝙞𝙙𝙚𝙧𝙚𝙙 𝙖𝙣𝙙 𝙚𝙭𝙚𝙘𝙪𝙩𝙚𝙙 𝙥𝙧𝙚𝙘𝙞𝙨𝙚𝙡𝙮 ✌🏻

𝙄𝙢𝙥𝙤𝙧𝙩𝙚𝙙 𝘾𝙤𝙥𝙥𝙚𝙧 𝙖𝙫𝙖𝙞𝙡𝙖𝙗𝙡𝙚 𝙢𝙤𝙧𝙚 𝙩𝙝𝙖𝙣 10,000 𝙈𝙏.. 𝘿𝙈 𝙛𝙤𝙧 𝙩𝙝𝙚 𝙚𝙣𝙦𝙪𝙞𝙧𝙮 𝙖𝙣𝙙 𝙥𝙪𝙧𝙘𝙝𝙖𝙨𝙚. 𝘼𝙪𝙩𝙝𝙚𝙣𝙩𝙞𝙘 𝙚𝙣𝙦𝙪𝙞𝙧𝙞𝙚𝙨 𝙖𝙧𝙚 𝙬𝙚𝙡𝙘𝙤𝙢𝙚!!
05/02/2026

𝙄𝙢𝙥𝙤𝙧𝙩𝙚𝙙 𝘾𝙤𝙥𝙥𝙚𝙧 𝙖𝙫𝙖𝙞𝙡𝙖𝙗𝙡𝙚 𝙢𝙤𝙧𝙚 𝙩𝙝𝙖𝙣 10,000 𝙈𝙏..
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