Kranti

Kranti We should come on one munch where we can think, work and support our Maa Bharti and hindus. This organisation will work for helping India.

20/02/2017

एक रूपये मात्र रोज का भुगतान वो भी भारतीय सेना के लिए। मोदी सरकार ने कल कैबिनेट की मीटिंग में भारतीय सेना की आधुनिकता और सेना के जवानो जो कि युद्ध क्षेत्र में घायल होते है या शहीद होते है उनके लिए एक बैंक अकाउंट खोल ही दिया।जिसमे हर भारतीय अपनी स्वेक्षा से कितना भी दान दे सकता है। जो कि 1 रुपए से शुरू होकर असीमित है।

इस पैसे का प्रयोग सेना तथा अर्धसैनिक बलो के लिए हथियार खरीदना भी होगा । मन की बात तथा फेसबुक, ट्वीटर,व्हात्सप्प पर लोगो के सुझाव पर आज के जलते हालात पर मोदी सरकार ने अंततः फैसला लेते हुए नई दिल्ली, सिंडिकेट बैंक में आर्मी वेलफेयर फण्ड बैटल कैदुअल्टी फण्ड अकाउंट खोला है।

यह मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक है। जहाँ से भारत को सुपर पॉवर बनने से कोई नहीं रोक सकता। भारत की 1.30 करोड़ जनसंख्या में से अगर 70% भी केवल एक रुपया इस फण्ड में रोज़ डालते है तो वो 1 रुपये एक दिन में 100 करोड़ होगा। 30 दिन में 3000 करोड़ और 36000 करोड़ एक साल में। 36,000 करोड़ तो पाकिस्तान का सालाना रक्षा बजट भी नहीं है । हमलोग प्रतिदिन 100 या 1000 रुपया रोज़ फालतू के काम में खर्च कर देते है लेकिन यदि हमलोग एक रूपये सेना के लिए दिया तो सचमुच भारत एक सुपर पॉवर जरूर बनेगा।

आपका ये रुपया सीधे रक्षा मंत्रालय के सेना सहायता एवं वॉर कैसुअल्टी फण्ड में जमा होगा। जो सैन्य सामग्री और सेना के जवानो के काम आएगा

इसलिए मोदीजी के इस अभियान से जुड़कर सीधे तौर पर सेना की मदद करें। पाकिस्तान हाय हाय कर, सड़क जाम करने और बयानबाजी करने से कुछ नहीं होगा। मोदी और देश की जनता की सोच को अमलीजामा पहनाये और अपने देश की सेना को मजबूत बनाये। जिससे पकिस्तान और चीन जैसे देशो को उसकी बिना किसी देश की सहायता से उनकी औकात बता सके। बैंक डिटेल्स निचे दिए गए है।
Bank Details:
SYNDICATE BANK
A/C NAME: ARMY WELFARE FUND BATTLE CASUALTIES
A/C NO: 90552010165915
IFSC CODE: SYNB0009055
SOUTH EXTENSION BRANCH,NEW DELHI.

इस सन्देश को सभी जगह फैला दे ताकि सभी 1.30 करोड़ भारतीयो को अपने कर्तव्यों का पता चल जाये। सभी ग्रुप और पर्सनल no पर भी भेजें। जय हिन्द।

01/01/2016
06/11/2015
04/10/2015
23/09/2015

एक बार एक हंस और हंसिनी हरिद्वार के सुरम्य वातावरण से भटकते हुए, उजड़े वीरान और रेगिस्तान के इलाके में आ गये!
हंसिनी ने हंस को कहा कि ये किस उजड़े इलाके में आ गये हैं ??
यहाँ न तो जल है, न जंगल और न ही ठंडी हवाएं हैं यहाँ तो हमारा जीना मुश्किल हो जायेगा !
भटकते भटकते शाम हो गयी तो हंस ने हंसिनी से कहा कि किसी तरह आज की रात बीता लो, सुबह हम लोग हरिद्वार लौट चलेंगे !
रात हुई तो जिस पेड़ के नीचे हंस और हंसिनी रुके थे, उस पर एक उल्लू बैठा था।
वह जोर से चिल्लाने लगा।
हंसिनी ने हंस से कहा- अरे यहाँ तो रात में सो भी नहीं सकते।
ये उल्लू चिल्ला रहा है।
हंस ने फिर हंसिनी को समझाया कि किसी तरह रात काट लो, मुझे अब समझ में आ गया है कि ये इलाका वीरान क्यूँ है ??
ऐसे उल्लू जिस इलाके में रहेंगे वो तो वीरान और उजड़ा रहेगा ही।
पेड़ पर बैठा उल्लू दोनों की बातें सुन रहा था।
सुबह हुई, उल्लू नीचे आया और उसने कहा कि हंस भाई, मेरी वजह से आपको रात में तकलीफ हुई, मुझे माफ़ करदो।
हंस ने कहा- कोई बात नही भैया, आपका धन्यवाद!
यह कहकर जैसे ही हंस अपनी हंसिनी को लेकर आगे बढ़ा
पीछे से उल्लू चिल्लाया, अरे हंस मेरी पत्नी को लेकर कहाँ जा रहे हो।
हंस चौंका- उसने कहा, आपकी पत्नी ??
अरे भाई, यह हंसिनी है, मेरी पत्नी है,मेरे साथ आई थी, मेरे साथ जा रही है!
उल्लू ने कहा- खामोश रहो, ये मेरी पत्नी है।
दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। पूरे इलाके के लोग एकत्र हो गये।
कई गावों की जनता बैठी। पंचायत बुलाई गयी।
पंचलोग भी आ गये!
बोले- भाई किस बात का विवाद है ??
लोगों ने बताया कि उल्लू कह रहा है कि हंसिनी उसकी पत्नी है और हंस कह रहा है कि हंसिनी उसकी पत्नी है!
लम्बी बैठक और पंचायत के बाद पंच लोग किनारे हो गये और कहा कि भाई बात तो यह सही है कि हंसिनी हंस की ही पत्नी है, लेकिन ये हंस और हंसिनी तो अभी थोड़ी देर में इस गाँव से चले जायेंगे।
हमारे बीच में तो उल्लू को ही रहना है।
इसलिए फैसला उल्लू के ही हक़ में ही सुनाना चाहिए!
फिर पंचों ने अपना फैसला सुनाया और कहा कि सारे तथ्यों और सबूतों की जांच करने के बाद यह पंचायत इस नतीजे पर पहुंची है कि हंसिनी उल्लू की ही पत्नी है और हंस को तत्काल गाँव छोड़ने का हुक्म दिया जाता है!
यह सुनते ही हंस हैरान हो गया और रोने, चीखने और चिल्लाने लगा कि पंचायत ने गलत फैसला सुनाया।
उल्लू ने मेरी पत्नी ले ली!
रोते- चीखते जब वह आगे बढ़ने लगा तो उल्लू ने आवाज लगाई - ऐ मित्र हंस, रुको!
हंस ने रोते हुए कहा कि भैया, अब क्या करोगे ??
पत्नी तो तुमने ले ही ली, अब जान भी लोगे ?
उल्लू ने कहा- नहीं मित्र, ये हंसिनी आपकी पत्नी थी, है और रहेगी!
लेकिन कल रात जब मैं चिल्ला रहा था तो आपने अपनी पत्नी से कहा था कि यह इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए है क्योंकि यहाँ उल्लू रहता है!
मित्र, ये इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए नहीं है कि यहाँ उल्लू रहता है।
यह इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए है क्योंकि यहाँ की जनता ऐसे पंचों का चुनाव करती हैं जो उल्लुओं के हक़ में फैसला सुनाते हैं!
शायद 65 साल की आजादी के बाद भी हमारे देश की दुर्दशा का मूल कारण यही है कि हमने उम्मीदवार की योग्यता न देखते हुए, हमेशा ये हमारी जाति का है. ये हमारी पार्टी का है के आधार पर अपना फैसला उल्लुओं के ही पक्ष में सुनाया है, देश क़ी बदहाली और दुर्दशा के लिए कहीं न कहीं हम भी जिम्मेदार हैँ!
"कहानी" अच्छी लगे तो आगे भी बढ़ा दें...

02/09/2015
Vande Matram
15/08/2015

Vande Matram

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