Bharti Kisan Union

Bharti Kisan Union Associated to All India Kisan Coordination Committee(KCC), Umbrella organization founded by late Sh Sharad Joshi and led by S. Bhupinder Singh Mann Ex MP

https://www.youtube.com/watch?v=gfn5yRtxk8M
14/08/2026

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भारत और अमेरिका के बीच Trade Deal को लेकर किसान नेताओं के बीच मतभेद...

Shivraj Singh Chouhan Bhupinder Singh Mann Nitin Gadkari
11/08/2026

Shivraj Singh Chouhan Bhupinder Singh Mann Nitin Gadkari

Chandigarh, Aug 10 (PTI) Former Rajya Sabha MP and Bharatiya Kisan Union (Mann) chief Bhupinder Singh Mann on Tuesday urged Punjab Chief Minister Bhagwant Singh Mann to reconsider the state Assembly’s resolution seeking suspension of mandatory E20 petrol for vehicles not designed or certified to u...

Thank you Indian Express   for sharing this news from archives. 11000 farmers under leadership of Late Sh   and Bhupinde...
08/08/2026

Thank you Indian Express for sharing this news from archives. 11000 farmers under leadership of Late Sh and Bhupinder Singh Mann Bhupinder Singh Mann were arrested on 3rd January 1984.

The current generation of farmers organizations must know the history of Kisan Andolan which has been built through lot of hard work, total commitment to farmers cause and is based on truth.

This is link : January 03, Forty Years Ago: Farmers Arrested | The Indian Express
https://share.google/iV6Rg3Z6g15ASYsri

Shivraj Singh Chouhan Nitin Gadkari Bhagwant Mann Rahul Gandhi Gurnam Singh Charuni Rakesh Tikait Balbir Singh Rajewal Bku Lakhowal Shaina

Anti-E20 lobbying hurts farmers. Ethanol aids diversification, boosts incomes and saves forex. Govt must clarify mileage...
05/08/2026

Anti-E20 lobbying hurts farmers. Ethanol aids diversification, boosts incomes and saves forex. Govt must clarify mileage/pricing, offer E20 or unblended fuel at market price and not roll back blending. An AIKCC delegation led by Bhupinder Singh Mann Ex MP and National President of BKU and Chairman of All India Kisan Coordination Committee raised this with Nitin Gadkari

04/08/2026

Meeting was held with Union Agriculture Minister on following points
1. Ethanol and crop diversification
Ethanol policy should promote maize, sorghum and other low-water crops. Cheap FCI rice should not undercut maize, while E20 pricing, mileage and vehicle compatibility must be transparent.

2. MSP and competitive markets
MSP must remain a safety net, but farmers should also have access to e-NAM, interstate trade and regulated futures markets through exchanges such as NCDEX.

3. Modern seeds and agricultural research
Farmers should receive biotechnology-enabled, climate-resilient and high-yielding seeds after scientific approval. Agricultural universities need greater research funding with accountability.

4. Punjab and Haryana agricultural transition package
Farmers of Punjab and Haryana incurred heavy debt while ensuring India’s food security. They need loan restructuring, interest relief, assured markets for alternative crops and greater support for canals and micro-irrigation.

5. Comprehensive National Agricultural Policy
A national policy should clearly define the responsibilities of the Centre and states. It should reform the Essential Commodities Act and ensure stable import-export and agricultural marketing policies.

4 अगस्त 2026सेवा में,माननीय श्री शिवराज सिंह चौहान जीकेंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रीभारत सरकारकृषि भवन, नई दिल्लीव...
04/08/2026

4 अगस्त 2026

सेवा में,
माननीय श्री शिवराज सिंह चौहान जी
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री
भारत सरकार
कृषि भवन, नई दिल्ली

विषय: कृषि नीति में तत्काल सुधारों के संबंध में ज्ञापन

आदरणीय चौहान जी,

4 अगस्त 2026 को आपके साथ हुई बैठक में अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति यह ज्ञापन आपके विचारार्थ प्रस्तुत कर रही है।

देश की कृषि नीति का केंद्र केवल उत्पादन नहीं, बल्कि किसान की आमदनी, आधुनिक तकनीक, प्रतिस्पर्धी बाजार और अपना निर्णय लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। जब तक वैकल्पिक फसलों के लिए पक्का बाजार और लाभकारी मूल्य नहीं मिलेगा, तब तक फसल विविधीकरण सफल नहीं हो सकता।

1. एथेनॉल नीति का लाभ किसान तक पहुँचे

भारत का एथेनॉल कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा और कृषि उपज की नई मांग पैदा करने की दिशा में अच्छा कदम है। लेकिन इस नीति का वास्तविक लाभ किसान को मिलना चाहिए।

E20 पेट्रोल से संबंधित बहस का जवाब स्वतंत्र वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर दिया जाना चाहिए। पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल की वास्तविक मात्रा स्पष्ट रूप से लिखी जाए। अलग-अलग श्रेणी और निर्माण वर्ष के वाहनों पर माइलेज, इंजन अनुकूलता और वारंटी से जुड़े परीक्षण सार्वजनिक किए जाएँ।

नीति आयोग ने कम ऊष्मीय क्षमता की भरपाई के लिए एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल का मूल्य सामान्य पेट्रोल से कम रखने की सिफारिश की थी। सरकार को मिश्रित और गैर-मिश्रित पेट्रोल के मूल्य तथा करों का पूरा विवरण सार्वजनिक करना चाहिए। पुराने वाहनों के लिए कम एथेनॉल वाला उपयुक्त ईंधन उपलब्ध कराने पर भी विचार होना चाहिए।

पानी की कमी वाले क्षेत्रों में एथेनॉल उत्पादन के लिए धान के बजाय मक्का, ज्वार, फसल अवशेष और कम पानी लेने वाली दूसरी फसलों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

FCI ने जून 2025 से जून 2026 के बीच लगभग 63.5 लाख टन चावल एथेनॉल संयंत्रों को ₹2,250 से ₹2,320 प्रति क्विंटल की दर पर दिया। दूसरी ओर, FCI की औसत अधिग्रहण लागत 2024-25 में ₹3,719.72 और 2025-26 में ₹3,889.46 प्रति क्विंटल थी। चावल का यह बिक्री मूल्य 2026-27 के लिए मक्का के ₹2,410 प्रति क्विंटल MSP से भी कम है।

इससे डिस्टिलरियों की मांग मक्का और दूसरे कच्चे माल से हटकर सस्ते FCI चावल की ओर जा सकती है। इसलिए हमारी मांग है कि:

- बड़ी मात्रा में FCI चावल जारी करने से पहले मक्का उत्पादकों को MSP से जुड़ी खरीद या मूल्य सहायता दी जाए।
- FCI चावल का मूल्य ऐसा न हो जिससे मक्का और दूसरे कच्चे माल का बाजार खराब हो।
- कच्चे माल और एथेनॉल के मूल्य निर्धारण के लिए कम से कम पाँच वर्ष की स्थिर नीति घोषित की जाए।

2. MSP के साथ वैकल्पिक बाजार भी आवश्यक

MSP किसान के लिए जरूरी सुरक्षा कवच है, लेकिन सरकारी खरीद हर फसल और हर किसान को नहीं संभाल सकती। बाजार गिरने पर किसान को MSP का सहारा और बाजार बेहतर होने पर अधिक मूल्य प्राप्त करने की स्वतंत्रता, दोनों मिलने चाहिए।

किसान के पास मंडी में बेचने के साथ-साथ दूसरे वैध बाजारों में बेचने का विकल्प भी होना चाहिए। e-NAM को वास्तविक राष्ट्रीय कृषि बाजार बनाया जाए। इसके लिए समान गुणवत्ता मानक, भरोसेमंद जांच, अंतरराज्यीय परिवहन, विवाद निपटारा और एकीकृत व्यापारी लाइसेंस की आवश्यकता है।

किसानों को NCDEX जैसे विनियमित कमोडिटी एक्सचेंजों के माध्यम से वायदा और विकल्प कारोबार तक सुरक्षित पहुँच मिलनी चाहिए। प्रमुख कृषि वस्तुओं के वायदा कारोबार पर लंबे समय से जारी व्यापक रोक की स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए। डिलीवरी आधारित और सख्ती से विनियमित वायदा बाजार किसानों को भाव का अग्रिम संकेत और जोखिम से सुरक्षा दे सकता है।

3. किसान को आज के दौर का बीज मिले

हरित क्रांति इसलिए सफल हुई क्योंकि उस समय किसानों को उपलब्ध सर्वोत्तम बीज और तकनीक दी गई। आज भी किसान को जैव-प्रौद्योगिकी आधारित, जलवायु सहनशील और अधिक उपज देने वाले आधुनिक बीज मिलने चाहिए।

नई किस्मों की स्वीकृति वैज्ञानिक, पारदर्शी और समयबद्ध प्रक्रिया से हो। सुरक्षा प्रमाणित होने के बाद बीज चुनने का निर्णय किसान पर छोड़ा जाए। भारत अपने किसानों को आधुनिक तकनीक से वंचित रखकर उन आयातित कृषि उत्पादों से मुकाबला करने को नहीं कह सकता, जिन्हें उसी तकनीक से पैदा किया गया है।

प्रस्तावित बीज विधेयक, 2025 में किसान के अपने खेत का बीज बचाने, बोने, दोबारा बोने, आपस में बाँटने और विनिमय करने के अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए। साथ ही नकली बीज, खराब अंकुरण और झूठे दावों के लिए व्यावसायिक बीज कंपनियों की जिम्मेदारी तय हो।

विधेयक के बारे में फैलाई जा रही गलत जानकारी का जवाब कृषि विश्वविद्यालयों, विश्वसनीय वैज्ञानिकों और किसान प्रतिनिधियों के माध्यम से दिया जाए। वास्तविक आशंकाओं का भी हर प्रावधान के आधार पर स्पष्ट उत्तर मिलना चाहिए।

कृषि विश्वविद्यालयों को अधिक शोध सहायता दी जाए, लेकिन यह सहायता नई किस्मों के विकास, बीज की उपलब्धता, किसानों द्वारा अपनाई गई तकनीक और खेत तक पहुँचने वाली विस्तार सेवाओं से जोड़ी जाए।

4. पंजाब और हरियाणा के लिए कृषि बदलाव पैकेज

पंजाब और हरियाणा के किसानों ने देश के गेहूँ और चावल भंडार के लिए मशीनरी, सिंचाई और कृषि साधनों में भारी निवेश करके भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की। इस राष्ट्रीय जिम्मेदारी को निभाते हुए किसानों पर कर्ज भी बढ़ा।

इसी व्यवस्था ने दोनों राज्यों को गेहूँ-धान के फसल चक्र में फँसा दिया। परिणामस्वरूप भूजल गिरा, मिट्टी की सेहत खराब हुई और खेती की लागत तथा कर्ज बढ़े। इसे केवल किसानों या राज्य सरकारों की विफलता नहीं माना जा सकता।

पंजाब और हरियाणा के लिए केंद्र और राज्यों की साझेदारी में कृषि बदलाव पैकेज बनाया जाए। इसमें निम्न प्रावधान हों:

- वास्तविक संकटग्रस्त संस्थागत कृषि ऋणों का पुनर्गठन और उचित ब्याज राहत।
- मक्का, दालों और तिलहनों के लिए MSP आधारित सहायता और सुनिश्चित बाजार।
- धान छोड़कर दूसरी फसल अपनाने वाले किसानों की आय सुरक्षा।
- वैकल्पिक फसलों के लिए प्रसंस्करण, भंडारण, बीमा और विपणन ढाँचा।
- बागवानी, पशुपालन, कृषि वानिकी, ड्रिप और सूक्ष्म सिंचाई के लिए अधिक वित्तीय सहायता।
- नहरों, वितरिकाओं और खेतों तक पानी पहुँचाने वाली नालियों की बहाली के लिए केंद्रीय सहायता।

यह कोई खैरात नहीं होगी। यह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में इन दोनों राज्यों के योगदान और उनके किसानों द्वारा चुकाई गई पर्यावरणीय कीमत की स्वीकृति होगी।

5. स्पष्ट जिम्मेदारियों वाली राष्ट्रीय कृषि नीति

देश का कृषि प्रशासन कई स्तरों में बँटा हुआ है। कृषि और कृषि मंडियाँ मुख्य रूप से राज्य सूची में हैं। खाद्य पदार्थों का व्यापार और वितरण समवर्ती सूची में आता है। वहीं अंतरराज्यीय व्यापार, वायदा बाजार, आयात-निर्यात और बड़ी खरीद नीतियों पर केंद्र का नियंत्रण या प्रभाव है।

राज्य किसी फसल को बढ़ावा देता है, लेकिन उसकी आयात-निर्यात नीति केंद्र तय करता है। मंडियाँ राज्यों के अधीन हैं, जबकि वायदा बाजार केंद्रीय नियामक नियंत्रित करता है। FCI का स्टॉक बाजार में जारी करना और भंडारण सीमा लगाना भी कीमतों को बदल देता है। नीति असफल होने पर जिम्मेदारी तय नहीं हो पाती।

इसलिए राज्यों और वास्तविक किसान संगठनों से परामर्श करके व्यापक राष्ट्रीय कृषि नीति बनाई जाए। सातवीं अनुसूची तथा कृषि उत्पादन, विपणन और व्यापार से जुड़े कानूनों की समीक्षा हो, ताकि संघीय ढाँचे को कमजोर किए बिना अधिकारों का टकराव और भ्रम दूर किया जा सके।

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में भी सुधार जरूरी है। भंडारण सीमा और माल की आवाजाही पर प्रतिबंध केवल स्पष्ट रूप से परिभाषित कमी के समय, सार्वजनिक मानकों के आधार पर और सीमित अवधि के लिए लगाया जाए। अचानक प्रतिबंध लगाने से भंडारण और प्रसंस्करण में निवेश रुकता है तथा किसानों के भाव गिरते हैं।

आयात-निर्यात नीति भी स्थिर होनी चाहिए। बुवाई के बाद निर्यात प्रतिबंध, अतिरिक्त शुल्क या शुल्क-मुक्त आयात की घोषणा किसान के पूरे आर्थिक अनुमान को बिगाड़ देती है। वास्तविक आपातकाल को छोड़कर बड़े व्यापारिक निर्णय बुवाई से पहले घोषित किए जाएँ।

उपभोक्ताओं की रक्षा आवश्यक है, लेकिन महँगाई नियंत्रित करने का पूरा बोझ किसान पर नहीं डाला जा सकता। गरीब उपभोक्ताओं को सार्वजनिक वितरण प्रणाली, लक्षित सहायता और मूल्य स्थिरीकरण कोष से राहत दी जाए, किसान का मूल्य दबाकर नहीं।

हम आग्रह करते हैं कि छह महीने की समय-सीमा के साथ एक राष्ट्रीय कृषि नीति आयोग बनाया जाए। इसमें संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों, वास्तविक किसान संगठनों, ICAR, कृषि विश्वविद्यालयों, अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों को प्रतिनिधित्व मिले। आयोग व्यापक विचार-विमर्श के बाद समयबद्ध कार्ययोजना प्रस्तुत करे।

देश के किसानों को उचित मूल्य, आधुनिक तकनीक, प्रतिस्पर्धी बाजार और अचानक होने वाले नीतिगत बदलावों से सुरक्षा चाहिए। इन सुधारों को शुरू करने के लिए हम आपके व्यक्तिगत हस्तक्षेप का अनुरोध करते हैं।

सादर,

भवदीय,

भूपिंदर सिंह मान

Sharing some pics of the meeting of AIKCC headed by S. Bhupinder Singh Mann Ex MP and National President of BKU and Chai...
04/08/2026

Sharing some pics of the meeting of AIKCC headed by S. Bhupinder Singh Mann Ex MP and National President of BKU and Chairman of All India Kisan Coordination Committee with Hon'ble Shivraj Singh Chouhan on various issues like Ethenol, MSP, debt waiver and National Policy for agriculture

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