CA. Ashish Bansal

CA. Ashish Bansal Practicing for small businesses

income tax portal ka haal ye hai abbhi se
15/07/2024

income tax portal ka haal ye hai abbhi se

19/06/2024

जापान में कोई भी कल्याणकारी कार्यक्रम नहीं है जैसे मुफ़्त रसोई गैस, मुफ़्त बिजली, मुफ्त राशन आदि।

उनका आदर्श वाक्य:-

जो आपको चाहिए उसके लिए लिए काम करो या उसके बिना रहो।

संभवतः ये 5 सबसे अच्छे वाक्य हैं जो आपने कभी पढ़े होंगे और ये सभी भारत में भी लागू होने चाहिए।

1. आप अमीरों को गरीब बनाकर गरीबों को अमीर नहीं बना सकते।

2. एक व्यक्ति को बिना काम किए जो मिलता है, दूसरे व्यक्ति को उसके लिए काम करना पड़ता है और उसे अपने इस किए गए काम के लिए कुछ नहीं मिलता।

3. दुनिया की कोई भी सरकार मुफ्त में अपने किसी नागरिक को ऐसा कुछ भी नहीं दे सकती जो सरकार पहले किसी और नागरिक से ले न ले।

4. आप धन को विभाजित करके उसे गुणा नहीं कर सकते!

5. जब आधे लोगों को कुछ भी मुफ्त में मिलेगा तो वह उसके लिए कभी भी काम नहीं करेंगें और उस मुफ्त के माल को देने के लिए जो अन्य नागरिक काम कर रहे हैं वह भी हतोत्साहित होंगे कि उनके द्वारा काम किए जाने पर उसका फल उन्हें न मिलकर उन बेकार के निठलों को मिल रहा है जो काम कर ही नहीं रहे और सरकारी योजनाओं से मुफ्त में माल प्राप्त करने की चाह रखते हैं।

यह किसी भी समृद्ध राष्ट्र के अंत की शुरुआत है।

अच्छे नागरिकों को इस उन्माद को रोकना चाहिए।

आज इस होड़ में सभी राजनीतिक पार्टियों लगी हुई है।

आईये प्रण करें कि भविष्य में इसका अंत करने में अपना पूरा सहयोग देंगे।

क्या आप इसे शेयर न करने का कोई कारण सोच सकते हैं?

यदि नहीं तो इसको दबा कर शेयर करें और जागरूकता अभियान में अपना सशक्त योगदान दें...
🌹🌳🌷🪷💐🙏

10/04/2024

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06/04/2024

Required Accountants- Fresher & Experienced..
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10/01/2024

आयकर की जानकारी
आयकर (इनकम टैक्स) वह कर है जो सरकार लोगों की आय पर आय में से लेती है। आयकर सरकारों के क्षेत्राधिकार के भीतर स्थित सभी संस्थाओं द्वारा उत्पन्न वित्तीय आय पर लागू होता है। कानून के अनुसार, प्रत्येक व्यवसाय और व्यक्ति कर देने या एक कर वापसी के लिए पात्र हैं, और उन्हें हर साल एक आयकर रिटर्न फाइल करना होता है।
सीए आशीष कुमार बंसल
"असीम कृपा"
बी-6, राधिका विहार फेज-2,
सोंख रोड, मथुरा-281004
फ़ोन: 7017054349

06/01/2024

*कभी सोचा है आपने.... 'भगवान' को भगवान ही क्यों कहते हैं..?*
*क्योंकि भगवान शब्द के पांच वर्णों में पंच तत्व समाहित हैं......!*
*भ-भूमी, ग-गगन, व-वायू, आ-आग, न-नीर*
*है ना अद्भुत......!!*

🚩🌞🪷 *सुप्रभात*🪷🌞🚩

06/01/2024

एक सहेली ने दूसरी सहेली से पूछा:- बच्चा पैदा होने की खुशी में तुम्हारे पति ने तुम्हें क्या तोहफा दिया ?
सहेली ने कहा - कुछ भी नहीं!

उसने सवाल करते हुए पूछा कि क्या ये अच्छी बात है ? क्या उस की नज़र में तुम्हारी कोई कीमत नहीं ?

लफ्ज़ों का ये ज़हरीला बम गिरा कर वह सहेली दूसरी सहेली को अपनी फिक्र में छोड़कर चलती बनी।

थोड़ी देर बाद शाम के वक्त उसका पति घर आया और पत्नी का मुंह लटका हुआ पाया। फिर दोनों में झगड़ा हुआ।

एक दूसरे को लानतें भेजी। मारपीट हुई, और आखिर पति पत्नी में तलाक हो गया।

जानते हैं प्रॉब्लम की शुरुआत कहां से हुई ? उस फिजूल जुमले से जो उसका हालचाल जानने आई सहेली ने कहा था।

बिकास जी ने अपने जिगरी दोस्त पवन से पूछा:- तुम कहां काम करते हो?

मनोज जी- फला दुकान में।
बिकास जी - कितनी तनख्वाह देता है मालिक?
मनोज जी-18 हजार।

बिकास जी-18000 रुपये बस, तुम्हारी जिंदगी कैसे कटती है इतने पैसों में ?
मनोज जी- (गहरी सांस खींचते हुए)- बस यार क्या बताऊं।

मीटिंग खत्म हुई, कुछ दिनों के बाद मनोज जी अब अपने काम से बेरूखा हो गया। और तनख्वाह बढ़ाने की डिमांड कर दी।

जिसे मालिक ने रद्द कर दिया। पवन ने जॉब छोड़ दी और बेरोजगार हो गया। पहले उसके पास काम था अब काम नहीं रहा।

एक साहब ने एक शख्स से कहा जो अपने बेटे से अलग रहता था। तुम्हारा बेटा तुमसे बहुत कम मिलने आता है। क्या उसे तुमसे मोहब्बत नहीं रही?

बाप ने कहा बेटा ज्यादा व्यस्त रहता है, उसका काम का शेड्यूल बहुत सख्त है। उसके बीवी बच्चे हैं, उसे बहुत कम वक्त मिलता है।

पहला आदमी बोला- वाह!!

यह क्या बात हुई, तुमने उसे पाला-पोसा उसकी हर ख्वाहिश पूरी की, अब उसको बुढ़ापे में व्यस्तता की वजह से मिलने का वक्त नहीं मिलता है। तो यह ना मिलने का बहाना है

इस बातचीत के बाद बाप के दिल में बेटे के प्रति शंका पैदा हो गई। बेटा जब भी मिलने आता वो ये ही सोचता रहता कि उसके पास सबके लिए वक्त है सिवाय मेरे।

याद रखिए जुबान से निकले शब्द दूसरे पर बड़ा गहरा असर डाल देते हैं।। बेशक कुछ लोगों की जुबानों से शैतानी बोल निकलते हैं।

हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बहुत से सवाल हमें बहुत मासूम लगते हैं।

जैसे-
तुमने यह क्यों नहीं खरीदा।
तुम्हारे पास यह क्यों नहीं है।

तुम इस शख्स के साथ पूरी जिंदगी कैसे चल सकती हो।
तुम उसे कैसे मान सकते हो।
वगैरा वगैरा।।

इस तरह के बेमतलबी फिजूल के सवाल नादानी में या बिना मकसद के हम पूछ बैठते हैं।

जबकि हम यह भूल जाते हैं कि हमारे ये सवाल सुनने वाले के दिल में नफरत या मोहब्बत का कौन सा बीज बो रहे हैं।।

आज के दौर में हमारे इर्द-गिर्द, समाज या घरों में जो टेंशन टाइट होती जा रही है, उनकी जड़ तक जाया जाए तो अक्सर उसके पीछे किसी और का हाथ होता है।

वो ये नहीं जानते कि नादानी में या जानबूझकर बोले जाने वाले जुमले किसी की ज़िंदगी को तबाह कर सकते हैं।

ऐसी हवा फैलाने वाले हम ना बनें।

💐💐

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Plot No 06, असीम कृपा राधिका विहार फेस 2 मथुरा
Mathura
281004

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