03/05/2026
वैज्ञानिक सोच का समर्थन करने वाले IPS अधिकारी किशन सहाय मीणा पर हाल ही में जयपुर में एक गंभीर केस दर्ज हुआ है। जो लोग यह मान रहे हैं कि यह FIR सिर्फ उनके 'बयानों' की वजह से हुई है, उन्हें इस मामले का पूरा सच जानना चाहिए।
FIR की असली वजह क्या है?
यह सच है कि पाखंडी बाबाओं (जैसे धीरेंद्र शास्त्री और प्रेमानंद) और अंधविश्वास के खिलाफ बोलने के कारण वो लंबे समय से मनुवादियों के निशाने पर थे। जयपुर के मालवीय नगर थाने में FIR दर्ज हुई है, एक 53 वर्षीय महिला ने उन पर 'शादी का झांसा देकर रेप, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
क्या ये आरोप सच हैं या फंसाने की साजिश?
इस पर खुद IPS किशन सहाय का बयान आया है। उन्होंने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यह उन्हें फंसाने की एक बहुत बड़ी "साजिश" है। उन्होंने प्रशासन को चुनौती दी है कि उनकी और उस महिला की व्हाट्सएप चैट्स की निष्पक्ष जांच कर ली जाए, जिससे सारा सच सामने आ जाएगा। जब कोई अधिकारी सिस्टम और पाखंडियों की आंखों में खटकता है, तो उसे झूठे मुकदमों में फंसाने का इतिहास इस देश में बहुत पुराना है।
एक अंबेडकरवादी का नजरिया:
हम अंधविश्वास, कुप्रथाओं और ढोंग के खिलाफ IPS किशन सहाय के तार्किक और वैज्ञानिक विचारों का पूरा समर्थन करते हैं। अगर यह साबित होता है कि यह सिर्फ एक ईमानदार और तार्किक आवाज़ को दबाने की मनुवादी साजिश है, तो पूरा बहुजन समाज डटकर उनके साथ खड़ा रहेगा!
अंधविश्वास के खिलाफ उठी आवाज़ और अचानक दर्ज हुई इस गंभीर FIR की टाइमिंग पर आपकी क्या राय है? क्या आपको भी इसमें कोई गहरी साजिश नजर आती है?