22/12/2025
सर सोराबजी पोचखानावालाद्वारा 1911 में स्थापित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, राष्ट्रीय वित्तीय परिसंपत्ति की परिकल्पना को साकार करते हुए, पहला पूर्णतः भारतीय स्वामित्व वाला और प्रबंधित वाणिज्यिक बैंक था। इसने भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाई, ब्रिटिश शासन के दौरान सेवाएं प्रदान कीं, और बाद में 1969 में राष्ट्रीयकरणके बाद एक सरकारी स्वामित्व वाली संस्था बन गई । यह एक विशाल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के रूप में विकसित हुआ है, जो सभी वर्गों, विशेष रूप से ग्रामीण भारत की सेवा करने पर केंद्रित है, और 2028 तक नेट ज़ीरो का लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रमुख उपलब्धियाँ और इतिहास
स्थापना (1911): 21 दिसंबर, 1911 को "स्वदेशी बैंक" के रूप में शुरू किया गया, जिसका स्वामित्व पूरी तरह से भारतीयों के पास था और सर फिरोजशाह मेहता इसके पहले अध्यक्ष थे।
प्रारंभिक परिकल्पना: संस्थापक सोराबजी पोचखानावाला ने इसे "राष्ट्र की संपत्ति और देश की धरोहर" घोषित किया था, जिसका उद्देश्य आम जनता को बैंकिंग सेवाएं प्रदान करना था।
विकास और नवाचार (1969 से पहले): इसने अपने नेटवर्क का विस्तार किया, टाटा औद्योगिक बैंक काअधिग्रहण किया (1925), और लंदन में सेंट्रल एक्सचेंज बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना में भूमिका निभाई (1936)।
राष्ट्रीयकरण (1969): अन्य प्रमुख बैंकों के साथ, इसका भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीयकरण कर दिया गया, जिससे यह एक सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक बन गया।
राष्ट्रीयकरण के बाद: समावेशी विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति में उल्लेखनीय वृद्धि की और कर संग्रह और पेंशन भुगतान जैसी सेवाओं के लिए एक प्रमुख सरकारी एजेंसी बन गई।
आधुनिक युग: एक आधुनिक बैंक के रूप में विकसित हुआ है, जिसमें डिजिटल सेवाओं (जैसे कि विदेशी मुद्रा के लिए सेंट ई-ट्रेड पोर्टल) को एकीकृत किया गया है और 2028 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन की प्रतिबद्धता सहित ईएसजी लक्ष्यों को अपनाया गया है।
अद्वितीय स्थिति
हालांकि अक्सर इसे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ भ्रमित किया जाता है, लेकिन सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया एक वाणिज्यिक बैंक है, न कि देश का केंद्रीय मौद्रिक प्राधिकरण।
यह एक महत्वपूर्ण सरकारी स्वामित्व वाली संस्था बनी हुई है, जिसमें भारत सरकार इसकी सबसे बड़ी शेयरधारक है।