KC Sir

KC Sir A MDRT ADVISOR with MAX LIFE & HDFC ERGO General Insurance.TOP ADVISOR,certified by KINDER BROTHERS Present Address:-E-Wing ,Flat No.

E-201,Mahindra Splendour, Bhandup (west),LBS Marg, Mumbai, Maharashtra

26/09/2025

ग्यारह वर्ष सदा बहार।

25/09/2025

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21/01/2025

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सोने चाँदी के थोक व्यापारियों हेतु                       सूचना   सोने चाँदी के थोक व्यापारी जो अपनी दुकान (गद्दी) चौक  (...
14/01/2023

सोने चाँदी के थोक व्यापारियों हेतु
सूचना

सोने चाँदी के थोक व्यापारी जो अपनी दुकान (गद्दी) चौक (गोल-दरवाजा) बाजार या, उसके 100 मीटर के अन्दर बनाना चाहते हैं, उनके लिये,

एक सुनहरा अवसर

आपको 1000 sq.feet की जगह (व्यापारिक संस्थान - commercial Building) के बाजार मूल्य से एक चौथाई दाम में साई हालमार्क की दुकान के पास में उपलब्ध है। जगह के साथ में मॉडर्न बाथरूम और किचन भी उपलब्ध है।
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14/09/2022

हिन्दी दिवस की आपसब को बहुत बहुत बधाइयाँ।
आज इस शुभअवसर पर हमको आपसे कुछ कहना है।
आजका एक दिन हिन्दी दिवस के रूप में मनाकर क्या हम हिन्दी के प्रति अपने कर्तव्य को निभा देते हैं?
क्या हमने कभी सोचा है कि जिस हिंदुस्तान की मिट्टी ने हमको जन्म दिया उसके प्रति हमारे बस इतना करने से ऋण उतर जायेगा?
क्या हमने इस बात पर ध्यान दिया है कि बीसवीं सदी के हिंदुस्तान के बच्चे एवम उनके माता-पिता,हिंदी सीखने,पढ़ने और बोलने में शर्मिन्दगी का अहसास करते हैं।अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों से पढ़ने वाले बच्चे एवं उनके माता-पिता हिन्दी की पढ़ाई से कब दूर होते चले गये ये उनको पता ही नहीं चल पाया।करीब एक पीढ़ी अर्थात 25-30 वर्ष बीत जाने के बाद अब बहुत से भारतीयों को ऎसा लग रहा है कि कुछ गलत हो गया है,परन्तु बहुतों को अभी भी कोई अहसास नहीं है कि हमसे क्या छूट गया है या हम कितनी बड़ी समस्या से रूबरू हो चुके हैं,और वो है,अपनी हिंदुस्तानी भाषा हिन्दी के प्रति विमुख होना।आज 2-4 वर्ष के बच्चे से लेकर 20-30 वर्ष के युवाओं को ठीक से हिन्दी बोलनी नहीं आती,पढ़ने की बात तो दूर की है।आज अंग्रेजी के प्रेम ने हमको हिन्दी से कितना दूर कर दिया है,ये सोचने और समझने की बात है।
क्या हमारे आज के माता-पिता और आज की पीढ़ी के बच्चे इस बात का संज्ञान लेंगें कि अंग्रेजी की इस अन्धी दौड़ में हम अपनी हिन्दी से कितनी दूर निकल आये हैं?
क्या हमको इस बात से शर्मिंदगी नहीं होती कि हिंदुस्तानी होने के बावजूद हम हिन्दी नहीं लिख-बोल पा रहे हैं?हम हिन्दी जैसी परिपक्व भाषा को छोड़कर दूसरी अपरिपक्व भाषा को सीखने में अपने को उलझाये हुए हैं,जबकि हिन्दी से अधिक समग्रता अंग्रेजी भाषा में नहीं है।
हमारी भाषा में 13 स्वर हैं और अंग्रेजी भाषा में सिर्फ 5 स्वर।
हमारी भाषा में 36 व्यंजन हैं और अंग्रेजी में सिर्फ 21व्यंजन।
साफ दिखाई पड़ता है कि अंग्रेजी भाषा हिन्दी के समकक्ष बहुत दूर-दूर तक खड़ी नहीं रह सकती है।
इसलिये आप सब से मेरा अनुरोध है कि हिन्दी भाषा के प्रति अपने प्रेम को दुबारा उत्पन्न करें,स्वयम भी हिन्दी मे लिखना एवम बोलना शुरू करें और अपने बच्चों को भी हिन्दी सिखाने और बोलने सहायक बनें।
जो सज्जन व्हाट्सएप पर टूटी फूटी( अंग्रेजी में हिन्दी )लिखने की वजह से अकसर अर्थ का अनर्थ कर देते हैं,उनसे भी मेरा अनुरोध है कि वे भी अब हिन्दी का ही उपयोग करें और व्हाट्सअप्प पर अपने मन के उदगारों को सही रूप में व्यक्त करें।
इस कार्य में हम आपकी सहायता करने को हमेशा तैयार हैं,जो भी सज्जन जानना चाहते हैं कि आप कैसे व्हाट्सएप पर abcd टाइप करते हुए हिन्दी लिख सकते हैं,तो हमसे सम्पर्क करें।
आशा है आप आगे से हिन्दी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बढ़ाने की कोशिशें तेज कर देंगें।
एक बार फिर हिन्दी-दिवस की बधाइयाँ एवम शुभकामनायें।

*क्या आजकल नींव ही कमजोर पड़ रही है, गृहस्थी की!**आज हर दिन किसी न किसी का घर खराब हो रहा है।*इसके मूल कारण और जड़ पर को...
25/01/2022

*क्या आजकल नींव ही कमजोर पड़ रही है, गृहस्थी की!*

*आज हर दिन किसी न किसी का घर खराब हो रहा है।*
इसके मूल कारण और जड़ पर कोई नहीं जा रहा है,जो कि अतिआवश्यक और सम्भावित है,एवं निम्न हैं।
*1-पीहरवालों की अनावश्यक दखलंदाज़ी*
2-संस्कार विहीन शिक्षा
*3-आपसी तालमेल का अभाव*
4-ज़ुबानदराज़ी
*5-सहनशक्ति की कमी*
6-आधुनिकता का आडम्बर
*7-समाज का भय न होना*
8-घमंड झूठे और अधकचरे ज्ञान का
*9-अपनों से अधिक गैरों की राय*
10-परिवार से कटना
*11-घण्टों मोबाइल पर चिपके रहना,और घर गृहस्थी की तरफ ध्यान न देना*
12-मानसिक-अहंकार के वशीभूत होना।
उपर्युक्त 12 कारण तो प्रमुख हैं,बाकी सारे कारण इन बातों से ही उत्पन्न होते हैं।जिन्हें समझना अत्यंत आवश्यक है।
*पहले भी तो परिवार होता था,और वो भी बड़ा।*
लेकिन वर्षों आपस में निभती थी!
*भय था,प्रेम था,और रिश्तों की मर्यादित जवाबदेही भी* रामायण में एक जगह प्रभु राम खुद कहते हैं कि,"भय बिन होय न प्रीति"
पहले माँ बाप ये कहते थे,कि मेरी बेटी गृह कार्य में दक्ष है
*और अब कहते हैं कि मेरी बेटी नाज़ों से पली है।आज तक हमने तिनका भी नहीं उठवाया*
तो फिर करेगी क्या शादी के बाद?और कर भी कैसे पायेगी, जब कुछ करना सीखा ही नहीं।
*शिक्षा के घमँड में बेटी को बड़ों का आदर करना नहीं सिखाना,अच्छी बातें, घर के कामकाज,रसोई के कार्य नहीं सिखाना और बच्चों की परवरिश एवम परिवार चलाने के सँस्कार नहीं देना प्रमुख कारण हैं।
माँएं खुद की रसोई से ज्यादा बेटी के घर में क्या बना ,क्या किया,कहाँ घूमने गयीं आदि पर ध्यान देती हैं।
*भले ही खुद के घर में रसोई में सब्जी जल रही है*
मोबाईल तो है ही रात दिन बात करने के लिए
*परिवार के लिये किसी के पास समय नहीं*
या तो TV या फिर पड़ोसन से एक दूसरे की बुराई या फिर दूसरे के घरों में तांक-झांक
*बुज़ुर्गों को तो बोझ समझते हैं*,बुजुर्गों से राय मशवरा करना,और उनके तजुर्बे से सीख लेकर काम करना और उसका फायदा उठाकर अपना समय और संसाधनों की बचत करना तो आज की पीढ़ी सीखना नहीं चाहती,अगर एक कुछ समझना चाहता है,तो दूसरा उसको करने नहीं देता,और वो मन मारकर कलह न हो यह सोचकर चुप रह जाता है,जिससे साथी को और सह मिलती है।
पूरा परिवार साथ बैठकर भोजन तक नहीं कर सकता
*सब अपने कमरे में*
वो भी मोबाईल पर
*बड़े घरों का हाल तो और भी खराब है*
कुत्ते बिल्ली के लिये समय है,अपने बच्चों को कुछ सिखाने और अच्छे संस्कार देने का समय या इच्छा नहीं।
*परिवार के लिये भी समय नहीं*
सबसे ज्यादा बदलाव तो इन दिनों महिलाओं में आया है
*दिन भर मनोरँजन*
मोबाईल
*स्कूटी कार पर घूमना फिरना*
समय बचे तो बाज़ार जाकर शॉपिंग करना
*और ब्यूटी पार्लर*
जहां घंटों लाईन भले ही लगानी पड़े
*भोजन बनाने या परिवार के लिये समय नहीं,क्योंकि रोज रोज नये रेस्टोरेंट खुल रहे हैं और उनको चलाने की जिम्मेदारी भी तो है।
खासकर बच्चों को तौर तरीके सिखाना एवम उनके ऊपर ध्यान देना,उनको संस्कार देना तो आज की पीढ़ी जानती ही नहीं है।बच्चों को आत्मनिर्भरता या आत्मविश्वास की सीख देने के बहाने बच्चों में जो अति-विश्वास और गरूर भरा जा रहा है,जो आगे चलकर उनके जीवन को गर्त में ले जाने का कार्य करता है।जब वो अपनी नाकामी की वजह से किसी कार्य में सफल नहीं होते तो वो उसे सह नहीं पाते और टूट जाते हैं,क्योंकि उन्हें" धैर्य और सन्तोष" क्या होता है,ये तो सिखाया ही नहीं जा रहा है।अगर बच्चों को ऎसे ही शिक्षा दी जाती रही तो आगे आने वाली पीढ़ी का भगवान ही मालिक होगा,क्योंकि वो अवसाद (डिप्रेशन) के शिकार होने लगेंगें,और ऎसा होना शुरू भी हो चुका है।
होटल रोज़ नये-नये खुल रहे हैं
*जिसमें स्वाद के नाम पर कचरा बिक रहा है*
और साथ ही बिक रही है,बीमारी एवं फैल रही है,घर में अशांति
*आधुनिकता तो होटलबाज़ी में है*
बुज़ुर्ग तो हैं ही घर में बतौर चौकीदार या बहुत जगह अब साथ में रहते ही नहीं हैं।
*माँ बाप बच्ची को शिक्षा तो बहुत दे रहे हैं*
लेकिन उस शिक्षा के पीछे की सोच?
*ये सोच नहीं है कि परिवार को शिक्षित करेंगी,सुसंस्कृत करेगी,
बल्कि दिमाग में ये है,कि कहीं तलाक-वलाक हो जाये तो अपने पाँव पर खड़ी हो जाये
*ख़ुद कमा खा ले*
जब ऐसी अनिष्ट सोच और आशंका पहले ही दिमाग में हो तो रिज़ल्ट तो वही सामने आना ही है
*साइँस ये कहता है,कि गर्भवती महिला अगर कमरे में सुन्दर शिशु की तस्वीर टांग ले तो शिशु भी सुन्दर और हृष्ट-पुष्ट होगा*
मतलब हमारी सोच का रिश्ता भविष्य से है
*बस यही सोच कि-अकेले भी जिंदगी जी लेगी गलत है*
संतान सभी को प्रिय है
*लेकिन ऐसे लाड़ प्यार में हम उसका जीवन खराब कर रहे हैं*
पहले पुराने समय में स्त्री तो छोड़ो पुरुष भी थाने,कोर्ट कचहरी जाने से घबराते थे
*और शर्म भी करते थे*
लेकिन अब तो फैशन हो गया है
*पढ़े-लिखे युवक-युवतियाँ तलाकनामा तो जेब में लेकर घूमते हैं*
पहले समाज के चार लोगों की राय मानी जाती थी
*और अब तो समाज की कौन कहे,माँ बाप तक को जूते की नोंक पर रखते हैं*
सबसे खतरनाक है-ज़ुबान और भाषा,जिस पर अब कोई नियंत्रण नहीं रखना चाहता
*कभी-कभी न चाहते हुए भी चुप रहकर घर को बिगड़ने से बचाया जा सकता है*
लेकिन चुप रहना कमज़ोरी समझा जाता है।आखिर शिक्षित जो हैं,और उसपर मायके की सह,सोने पर सुहागे का काम करती है,
*और हम किसी से कम नहीं वाली सोच जो विरासत में मिली है,चाहें खुद कुछ भी करने की स्थिति में न हों पर दिमाग सातवें आसमान पर ही रहता है कि बहुत कुछ कर सकते हैं।
गोली से बड़ा घाव बोली का होता है
*आज समाज,सरकार व सभी चैनल केवल महिलाओं के हित की बात करते हैं*
पुरुष जैसे अत्याचारी और नरभक्षी हों
*बेटा भी तो पुरुष ही है*
एक अच्छा पति भी तो पुरुष ही है
*जो खुद सुबह से शाम तक दौड़ता है,परिवार की खुशहाली के लिये*
खुद के पास भले ही पहनने के कपड़े न हों
*घरवाली के लिये हार के सपने ज़रूर देखता है*
बच्चों को महँगी शिक्षा देता है और उनकी खुशी के सारे साधन जुटाने में कोई कसर नहीं छोड़ता है।
*मैं मानता हूँ पहले नारी अबला थी*
माँ बाप से एक चिठ्ठी को मोहताज़
*और बड़े परिवार के काम का बोझ*
अब ऐसा है क्या?
*सारी आज़ादी*
मनोरंजन हेतु TV
*कपड़े धोने के लिए वाशिंग मशीन*
मसाला पीसने के लिए मिक्सी ,चार बर्नर वाला गैस का चूल्हा,ओटीजी,और ओवन,बर्तन धोने के लिये डिश-वॉशर और जाने क्या क्या चीजें घरों में होती हैं,
*रेडिमेड पैक्ड आटा*
पैसे हैं,तो नौकर-चाकर
*घूमने को स्कूटी या कार*
फिर भी और आज़ादी चाहिये
*आखिर ये मृगतृष्णा का अंत कब और कैसे होगा?*
घर में कोई काम ही नहीं बचा
*दो लोगों का परिवार*
उस पर भी ताना
*कि रात दिन काम कर रही हूं*
ब्यूटी पार्लर आधे घंटे जाना आधे घंटे आना और एक घंटे सजना नहीं अखरता।
*लेकिन दो रोटी बनाना अखर जाता है*
कोई कुछ बोला तो क्यों बोला?
*बस यही सब वजह है घर बिगड़ने की*
खुद की जगह घर को सजाने सवारने,और बच्चों को संस्कारी बनाने में ध्यान दें,तो ये सब न हो
*समय होकर भी समय कम है परिवार के लिये*
ऐसे में परिवार तो टूटेंगे ही,और बच्चे बिगड़ेंगें ही।
*पहले की हवेलियां सैकड़ों बरसों से खड़ी हैं,और पुराने रिश्ते भी*
आज के घर कुछ दिनों में ही धराशायी
*और रिश्ते भी महीनों में खत्म*
इसका कारण है,रिश्तों मे ग़लत सँस्कार और खुदगर्जी की सोच,खैर हम तो जी लिये
*सोचे आनेवाली पीढी*
घर चाहिये या दिखावे की आज़ादी?
*दिनभर बाहर घूमने के बाद रात तो घर में ही महफूज़ होती है*
आप मानो या ना मानो आप की मर्जी मगर यह सत्य है,कि अगर अब भी नहीं सुधरने की सोची तो शायद बहुत देर हो जायेगी। 🙏🏼🙏🏼 धन्यवाद,
KC Sir
इस लेख का कुछ भाग हमने किसी लेख से लिया है,एवम कुछ भाग हमने खुद लिखा है।
इसमें व्यक्त विचारों से 2-4% व्यक्ति अपवाद के रूप में हो सकते हैं।
आप लोगों की टिप्पणियों का स्वागत है।

लाइफ के लिये     --------    वाइफ के लिये‌   जी हाँ वैवाहिक जिन्दगी के वो सुनहरे पल,जो आप अपने जीवन-साथी के साथ , तब गुज...
06/01/2022

लाइफ के लिये -------- वाइफ के लिये
‌ जी हाँ वैवाहिक जिन्दगी के वो सुनहरे पल,जो आप अपने जीवन-साथी के साथ , तब गुजारते हैं,जब आप अपनी जिन्दगी की सारी जिम्मेदारियों को निभा चुके होते हैं,अपनी सारी व्यस्तताओं से पार पा चुके होते हैं,जब आप बिल्कुल चिन्तामुक्त हो चुके होते हैं।
जी हाँ,आपने बिल्कुल सही समझा, हम आपकी उस उम्र की तरफ इशारा कर रहे हैं,जिसे बहुत सारे लोग रिटायरमेंट की उम्र बोलते हैं,पर हम उस उम्र को" जिन्दगी के सुनहरे पल" बोलते हैं, क्योंकि हमें पता है कि हम अपनी उम्र के उन लम्हों, मिनटों, घंटों, हफ्ते, महीने, वर्षो या कई दशकों को सुनहरें वर्षों में कैसे बदल सकते हैं।
अब हम आपको वो तरीका बतायेंगें जिससे आप अपने सुनहरे वर्षों का सुखः बगैर किसी आर्थिक चिन्ता के प्राप्त कर सकेंगें।
हम एक उदाहरण के लिये मान लेते हैं कि आप 55 वर्ष के हैं और आप की पत्नी भी 55 वर्ष की ही हैं।अब हम सोचते हैं कि आप आने वाले 5-6 वर्षों के बाद रिटायरमेंट की जिन्दगी जीना चाहते हो,और किसी भी चिन्ता के बगैर मस्त होकर अपनी जिंदगी के बाकी बचे सुनहरे पलों को यादगार बनाना चाहते हो,चाहें वो पल 20 वर्ष हों या 40 वर्ष। जिसमें आपको अपने खर्चे के लिये किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े।
तो अगर आप सोचते हो कि आपकी आगे की जिन्दगी के लिये करीब 6 लाख रुपये प्रति वर्ष,मतलब 50 हज़ार रुपये प्रति महीना काफी होगा,तो आप सही सोचते हो,और इसके लिये आपको क्या करना होगा,ये हम नीचे बता रहे हैं।
आपको एक बात अपने दिमाग में अवस्य रखनी होगी कि बैंक में जमा किये हुए रुपयों (FD) पर ब्याज की दर पिछले 10 वर्षों में 12 प्रतिशत से घटकर 6 प्रतिशत आ गयी है और आने वाले वर्षों में अन्य विकसित देशों की तरह 1 या 2 प्रतिशत तक हो जायेगी, जैसा कि अर्थशास्त्री बोल रहे हैं।
ऎसे समय में हम आपको ये सुनहरा अवसर प्रदान कर रहे हैं,जिसमें गारण्टी के साथ आपको अपनी जमा पर लाभ मिलेगा,वो भी टैक्स फ्री और आपका पूरा का पूरा रुपया सुरक्षित भी रहेगा।
अब आगे समझिये।
अगर आपको 50 हज़ार रुपये महीना अपनी बाकी बची 'जिन्दगी भर के लिये" चाहिये,(आपके साथ साथ आपकी पत्नी भी शामिल हैं),तो आपको अपनी उम्र के 55 वर्ष से लेकर 60 वर्ष तक मतलब 6 साल 15 लाख रुपये प्रति वर्ष जमा करने होंगें।
इन 6 वर्षों में कुल 90 लाख रुपये आप जो जमा करोगे,आपको आपकी उम्र के 61वें वर्ष से हर वर्ष गारंटी के साथ हर हाल में करीब 6 लाख रुपये प्रति वर्ष मिलने लगेंगें।
ये 6 लाख रुपये आपको और आपकी पत्नी दोनों को मिलाकर मिलेंगें,और पूरी जिन्दगीं मिलेंगें।यदि पति की मौत हो जाती है, तो भी पत्नी की आगे की जिन्दगी भर ये रुपये मिलते रहेंगें,और फिर पत्नी की मृत्यु के उपरान्त आपका जमा किया हुआ,पूरा 90 लाख रुपया आपके बच्चों को मिल जायेगा।
एक बात और जानने योग्य है कि जिन 6 वर्षो में 15 लाख की प्रीमियम की क़िस्त जा रही होगी,अगर "उन वर्षों में से किसी भी वर्ष में" अगर पति की मृत्यु हो जाती है तो 15 लाख का 7 गुना रुपया,पत्नी को मिल जायेगा और पालिसी चलती रहेगी अपने सारे लाभों के अनुसार ही पत्नी की उम्र भर के लिये चलेगी और उसके बाद 90 लाख रुपया बच्चों को मिल जायेगा।
अगर उसके बाद उन्ही 6 सालों में ही पत्नी की भी मृत्यु हो जाती है तो बच्चों को 15 लाख का 10 गुना रुपया मिल जायेगा और तब पालिसी वहीं पर बन्द हो जायेगी।
तो आपने देखा कि आप सिर्फ 6 वर्ष रुपया जमा करके अपनी और अपनी पत्नी की जिन्दगी के बाकी बचे सारे के सारे वर्षों को आर्थिक रूप से सुरक्षित और सम्पन्न कर सकते हैं।
अब आपको कितना रुपया प्रति वर्ष चाहिये होगा, इसी बात पर निर्भर करेगा कि आपको कितने रुपये प्रति वर्ष का प्रीमियम प्रति वर्ष, सिर्फ 6 वर्षों तक देना होगा।
आप स्वयं तय करें कि आपको अपने और अपनी पत्नी के उस सुनहरे जीवन के लिये कितना पैसा चाहिये होगा,और हमको फोन करें,हम आपके सुनहरे कल को साकार करने में पूरा सहयोग करेंगें।
आपको ये नहीं भूलना है कि ये सारे के सारे भुगतान,IRDAI द्वारा गारण्टी युक्त हैं,जो भारत सरकार का एक उपक्रम है।और जो भी रुपया प्रति वर्ष आपको आयेगा उसपर भारत सरकार के इनकम-टैक्स डिपार्टमेंट के द्वारा कोई भी टैक्स नही लिया जायेगा(under Sec.10(10)D)
एक बात और,आपका पूरा रुपया आप लोगों की मृत्यु के उपरान्त आपके बच्चों को पूरा का पूरा वापस मिल जायेगा, और वो भी बगैर कोई भी टैक्स कटे,उसी प्राविधान के अंतर्गत।
अब अगर आपको कुछ और जानना है तो हमको नीचे लिखे नम्बर पर फोन करें या व्हाट्सएप करें,हम आपकी सहायता हेतु उपस्थित रहेंगें।
धन्यवाद।
KC Sir
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