21/08/2016
जीवन बीमा क्या है
जीवन बीमा एक अनुबन्ध अथवा करार है। इसका अर्थ यह है कि एक विशेष घटना के घटने पर बीमेदार को अथवा उसके उत्तराधिकारी/ उत्तराधिकारियो को कोई पूर्व निशचित धन दे दिया जायेगा। प्राय: एक साधारण परिवार अपनी दिन-प्रतिदिन की आवश्यकताओं अर्थात रोटी, कपडा व मकान के लिए परिवार के कर्ता को निरन्तर प्राप्त होने वाली आय पर निर्भर होता है। जब तक कर्ता जीवित है, आय भी जीवित है परिवार की आवश्यकताएं भी पूरी होती रहती है। परन्तु यदि कर्ता को मृत्यु ने अचानक उठा लिया तो परिवार को आर्थिक कठिनाई का सामना करना पडेगा। कितने ही परिवारों की दशा ऐसे समय में बडी दयनीय हो जाती है। जीवन का अंत कब होगा यह निशचित नही है। यह अनिश्चितता ही वह जोखिम है जो कर्ता की मृत्यु से होने वाली आर्थिक क्षति की पूर्ति के लिये किसी प्रकार के संरक्षण की आवश्यकता को जन्म देती है।
बीमा वह साधन है जो जोखिम को समाप्त करता है और अनिश्चितता को निश्चितता मे बदल देता है।
जानें अपना जीवन बीमा
भारत में जीवन बीमा की शुरुआत सौ साल से भी पहले हुई थी.
दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले हमारे- जैसे देश में बीमा को उतना महत्व नहीं दिया जाता, जितना दिया जाना चाहिए. यहां हम एलआईसी के विशेष संदर्भों के ज़रिये पाठकों को जीवन बीमा की कुछ अवधारणाओं से अवगत कराने की कोशिश कर रहे हैं.
बहरहाल, यह बात ध्यान रखने योग्य है कि यहां हम जो कुछ भी बताने जा रहे हैं, वह एलआईसी की किसी पॉलिसी के नियम/ शर्तों या उसके लाभों या विशेषाधिकारों का विस्तृत ब्यौरा नहीं है.
विस्तृत जानकारी के लिए हमारे शाखा या मंडल कार्यालय से संपर्क करें. कोई भी एलआईसी एजेंट आपकी आवश्यवता के अनुरूप पॉलिसी का चुनाव करने और उसके भुगतान में आपकी मदद करके खुश होगा.
जीवन बीमा क्या है?
जीवन बीमा ऐसा अनुबंध है, जो उन घटनाओं के घटने पर, जिनके लिए बीमित व्यक्ति का बीमा किया जाता है, एक ख़ास रकम अदा करने का वादा करता है.
अनुबंध निम्नलिखित अवधि के दौरान बीमित रकम के भुगतान के लिए वैध होता है :
• भुगतान तिथि, या
• या नियत अवधि के अंतराल पर .खास-.खास तिथियों पर या?
• दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु पर बशर्ते कि वह भुगतान अवधि से पहले हो
अनुबंध के तहत पॉलिसी धारक को नियत अंतराल पर निगम को प्रीमियमों का भुगतान करना होता है. एल.आई.सी.सार्वभौमिक रूप एक से ऐसा संस्थान माना जाता है, जो जोखिम दूर करता है और अनिश्चितता की जगह निश्चितता लाता है तथा आजीविका कमाने वाले के असामयिक निधन पर परिवार की समय से मदद करता है.
कुल मिला कर जीवन बीमा मृत्यु की वजह से पैदा होने वाली समस्याओं का सभ्यताजन्य आंशिक समाधान है. संक्षेप में, जीवन बीमा का संबंध हर व्यक्ति के जीवन में आने वाली दो समस्याओं से हैः
1. समय से पहले व्यक्ति के मर जाने और अपने आश्रितों को उनके हाल पर छोड़ जाने
2. बुढ़ापे तक बिना सहारे के जीने की
जीवन बीमा बनाम अन्य बचतें
बीमा अनुबंध
बीमा अनुबंध चरम सद्भावनापूर्ण अनुबंध होता है, जिसे तकनीकी तौर पर "चरम विश्वास" कहा जाता है। तमाम महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा करने का सिद्धांत इसी महत्वपूर्ण सिद्धांत पर आधारित है, जो हर तरह के बीमे पर लागू होता है.
पालिसी लेने के समय पालिसी धारक को सुनिश्चित कराना चाहिए कि प्रस्ताव प्रपत्र में पूछे गये तमाम सवालों के सही जवाब दिये जायें ब कोई भी .गलतबयानी , किसी भी ची.ज का खुलासा न करना या किसी दस्तावे.ज में धोखाधड़ी करके जोखिम य स्वीकार ' कराना बीमा अनुबंध को अमान्य और निरस्त कर देता है।
सुरक्षा
जीवन बीमा की मा.र्फत की जाने वाली बचत बचतकर्ता की मृत्यु हो जाने पर जो.खिम के र्खिंला.फ सुरक्षा की पूरी गारंटी देता है ब यही नहीं , निधन की स्थिति में जीवन बीमा पूरी बीमित रकम का भुगतान ( मय बोनसों के जहां बोनस मिलते हैं ) आश्र्वस्त कराता है ब जबकि दूसरी बचतों में सि.र्फ बचत की रकम मय ब्याज के अदा की जाती है
समृद्धि बढ़ाने में मदद
जीवन बीमा समृद्धि को प्रोत्साहन देता है ब यह दीर्घकालिक बचत का अवसर प्रदान करता है क्योंकि योजना में निहित आसान किस्तों में आसानी से भुगतान किया जा सकता है ब (मसलन् प्रीमियमों का भुगतान या तो माहवार, तिमाही, छमाही या सालाना किस्तों में किया जाता है)
उदाहरणार्थ यवेतन बचत योजना' (जिसे आम तौर पर यएसएसएस' के नाम से जाना जाता है) के तहत बीमित व्यक्ति के वेतन से माहवार कटौती की मा.र्फत प्रीमियम के भुगतान का आसान उपाय मुहैया करती है
इस तरह के मामलों में नियोक्ता काटी गयी प्रीमियमें सीधे एलआईसी को अदा कर देता है ब वेतन बीमा योजना किसी भी संस्थान या प्रतिष्ठान के लिए आदर्श योजना होती है , अलबत्ता इसके साथ कुछ नियम/ शर्तें जु ड़ी होती हैं
नकदी
बीमा बचत के मामले में किसी ऐसी पालिसी की जमानत पर जो .क.र्ज मूल्य प्राप्त कर चुकी हो , .क.र्ज मिलना आसान होता है . इसके अलावा , जीवन बीमा पालिसी को व्यावसायिक .क.र्ज की जमानत के रूप में भी स्वीकार किया जाता है
ढकर राहत
आय कर और संपत्ति कर कटौती के उपयोग का भी जीवन बीमा सबसे उपयुक्त उपाय है ब जीवन बीमा की प्रीमियमों के रूप में अदा की जाने वाली रकम पर यह सुविधा उपलब्ध है , जो लागू आय कर दरों पर निर्भर करती है
करदाता कर .कानून के प्रावधानों का लाभ उठाकर करों में रिआयत पा सकता है . इस तरह के मामलों में बीमित व्यक्ति को दूसरी तरह की योजना के मु.काबले छोटी प्रीमियमें भरती होती हैं
जरूरत के समय पैसे
उपयुक्त बीमा योजना वाली पालिसी लेकर या कई अलग - अलग योजनाओं के समुय वाली पालिसी लेकर समय - समय पर पैदा होने वाली पैसों की .जरूरत को पूरा किया जा सकता है
बच्चों की पढ़ाई - लिखाई, गृहस्थी शुरू करने या शादी के. खर्चों या किसी. खास व.क्.फे में पैदा होने वाली मौद्रिक .जरूरतों को पूरा करना इन पालिसियों की मदद से आसान हो जाता है
इसके विपरीत पालिसी के पैसे व्यक्ति के सेवानिवृत्ति होने पर मकान बनवाने या दूसरे निवेशों जैसे कामों के लिए उपलब्ध हो सकते हैं
इसके अलावा , पालिसी धारकों को मकान बनवाने या .फ्लैट .खरीदने के लिए .क.र्ज भी उपलब्ध कराया जाता है ( हालांकि इसके साथ कुछ शर्तें लागू होती हैं )
कौन खरीद सकता है पालिसी
कोई भी वयस्क स्त्री - पुरुष जो वैध अनुबंध कर सकता है अपना और उनका बीमा करा सकता है जिनके साथ उनके बीमा कराने योग्य हित जुड़े हों
व्यक्ति अपने पति / या पत्नी या बों का भी बीमा करा सकता है लेकिन इसके साथ कुछ शर्तें जु ड़ी होती हैं ब बीमा प्रस्तावों को स्वीकार करते समय निगम व्यक्ति के स्वास्थ्य , उसकी आय और दूसरे प्रासंगिक कारकों पर विचार करता है
स्त्रियों के लिए बीमा
राष्ट्रीयकरण ( १९५५ ) से पहले कितनी ही बीमा कंपनियां स्त्रियों का बीमा करने के लिए अतिरिक्त प्रीमियमें लेती थीं या कुछ अवरोधक शर्तें लगाती थीं. बहरहाल, राष्ट्रीयकरण करने के बाद से जिन शर्तों पर औरतों का जीवन बीमा किया जाता है, उन शर्तों की समय-समय पर समीक्षा की जाती रही है ब
आज की तारी.ख में कमाने वाली कामकाजी औरतों को मर्दों के समतुल्य माना जाता है . दूसरे मामलों में निवारक शर्त लगायी जाती है . वह भी सि.र्फ तब जब औरत की उम्र ३० साल तक हो और कराधान सीमा में आने लायक उसकी आमदनी न हो.
चिकित्सकीय .गैर चिकित्सकीय योजनाएं
आम तौर पर जीवन बीमा बीमित व्यक्ति के स्वास्थ्य की जांच के बाद किया जाता है . बहरहाल , जीवन बीमा को व्यापक प्रसार देने और असुविधाओं को टालने के लिए जीवन बीमा निगम बिना डाक्टरी जांच के बीमा सुरक्षा देने लगा है , जिसके साथ कुछ शर्तें जु ड़ी होती हैं.
लाभ के साथ और बिना लाभ की योजनाएं
कोई बीमा पालिसी लाभ आधारित हो सकती है या बिना लाभ की भी हो सकती है ब लाभ आधारित पालिसियों के मामले में घोषित बोनस की, अगर इस तरह के बोनस की घोषणा की गयी हो , एक निश्चित अवधि पर होने वाले नियमित मूल्यांकनों के बाद पालिसी के साथ आवंटन किया जाता है और अनुबंधित रकम के साथ उनका भुगतान देय होता है.
बिना लाभ वाली पालिसियों के मामले में बिना किसी जो ड़ के अनुबंधित रकम अदा की जाती है ब लाभ युक्त पालिसी की प्रीमियमों की रकम इसीलिए लाभ रहित पालिसियों के मु.काबले .ज्यादा होती है.
कीमैन बीमा
कीमैन बीमा व्यापारिक कंपनियां / कंपनी को अपने महत्वपूर्ण कर्मचारियों के असामयिक निधन से होने वाले वित्रीय नुकसान से बचाने के लिए करती हैं.
जीवन बीमा” से लाभ ?– कुछ विचार !
पोस्टेड ओन: 15 Oct, 2012 जनरल डब्बा में
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आजकल जहां जीवन बहुत बड़ा जोखम हो गया है, कब कहाँ क्या हो जाए नहीं मालूम?,इसलिए इसकी महत्ता और जरूरत पर लोगों का अधिक ध्यान जाना लाजिमी हो गया है! इसलिये जहा पहले केवल ‘भारतीय जीवन बीमा’ ही थी, अब उसकी तरह तमाम बीमा कम्पनीयां खुल गयी है! और तो और अब तो बीमारियों के बड़े खर्चों को न उठा पाने के कारण ‘मेडीकल बीमा’ भी बहुत ही चर्चा में है!
अब सवाल यह उठता है क्या इसकी सार्थकता है या नहीं? बीमा करवाना लाभप्रद है भी की नहीं? इस सवाल पर गौर करें तो कई सवाल सामने आते है जिनका उत्तर अलग-अलग सोच वाले अलग-अलग देते हैं ! कम्पनीयों को तो फायदा ही फ़ायदा है तभी तो सारे देश में तमाम एजेंटों की फ़ौज खड़ी कर दी है, जिन्हें बहुत अच्छा लाभ मिलता है! और बीमा निगम की अपनी ही पूंजी इतनी हो चली है की खुद सरकार को न जाने कितने पैसों का लाभ मिलने लगा है निगम की पूंजी से ? शायद यही कारण है की सरकार बीमा करवाने वालों को आयकर में छूट भी देती है ! बीमा कंपनी ने कई तरह की योजनाओं को मूर्त रूप देकर बाजार में उतारा है, इनको एजेंट लोग विस्तार से बता कर अपने ग्राहकों को आकर्षित करते हैं ! देखा यह गया है की अलग-अलग प्रकार की पालासीयों पर अलग-अलग कमीशन के चलते ये एजेंट ग्राहकों को कभी झूठ कभी अधूरी बात बता कर फंसाते है याने जिन पालीसीयों पर कम कमीशन मिलता है वे लाभप्रद और अच्छी हैं , उन्हें न बता कर, उन पालीसीयों को देने में ज्यादा दबाव बनाते हैं जिन पर उन्हें ज्यादा कमीशन मिलता है! उन्हें पालीसीयों के लेने वालों के हितों को नजरंदाज कर अपना ही हित साधना पड़ता है जो की गलत ही है! और झूठे ही सब्जबाग दिखाते हैं! यह इनकी चालें हैं, जो हर प्रकार की फील्ड के एजेंट करते हैं ! कभी-कभी ये लोग आप से पैसे लेकर जमा भी नहीं करते और पैसा खा भी जाते है! यदि हम कहें की आप पूरी जांच कर के, पता कर के ही कोई पालिसी लें, तो इतना समय किसके पास है? है भी तो इतनी समझ और अक्ल कहाँ से लायें ? कुल मिला कर सब गड़बड़ ही है, पर फिर भी हर आदमी अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए बीमा करवाता ही है!
अब सवाल आता है की आप क्या मानते है की बीमा करवाना सही है या नहीं? इसके बारे में कुछ लोग इसने पक्ष में और कुछ इसके विपक्ष में है! एक तीसरे तरह के लोग है उनकी राय है की बीमा करवाना तो तब सही है जब की करवाने के बाद आदमी परिपक्क्वता से पहले ही मर जाता है उस केस में पैसे का अच्छा लाभ मिलता है,वरना तो सरासर घाटा ही है! अब कोई बता सकता है की कौन आदमी कब मरेगा? बीमा करवाने से थोड़ा बाद या बहुत बाद में? दूसरी बात यह है की आप आज पेट काट कर जो पैसा जमा करते हैं, वह पैसा मिलने पर उसकी ‘वैल्यू’ क्या रहती है? (महंगाई के चलते ), आपको बताया जाएगा की ३० साल बाद १० लाख मिलेगा,१० लाख सुनकर मुंह में पानी आना स्वाभाविक है ,पर उस समय उन १० लाख की कीमत क्या होगी? तो यह सरासर ही घाटे का सौदा है! या कहते हैं की मरने के बाद उस पैसे का लाभ तो किसको मिलेगा? हमें तो नहीं? जब की तकलीफ हमने झेली, पेट कर जमा हमने किया यह पैसा, फायदा हम नहीं ले सके?,इसके जवाब में कह सकते है की, भैया आप अपने बच्चों के लिए क्या-क्या नहीं करते हैं? वैसे ही यह भी उसी तरह का करना है!
तमाम तरह की कम्पनीयों को छोड़कर हमें बीमा तो ‘भारतीय जीवन बीमा निगम’ से ही करवाना चाहीयेइसके द्वारा किसी तरह की कोई तकलीफ नहीं होगी और अच्छी साख वाले एजेंट द्वारा ही करवाना चाहीये ,जो भरोसे वाला भी हो! आप उसके द्वारा बतायी गयी बातों को लिखित में देखकर तसल्ली भी करवा लें! क्योंकि ये लोग हमेशा जाल में फंसाने लिए मौखिक कुछ भी कह सकते हैं और बाद में कहेंगे की हमने तो ऐसा नहीं कहा था! और आप अपना प्रेमीअम खुद ही जमा करें न की किसी एजेंट को पैसा देकर,यदि आपके पास समय नहीं है तो आप कभी-कभी खुद जाकर निगम के आफिस में पता भी करते रहें की सब किस्तें बराबर जमा हो रही हैं की नहीं!
सावधानीपूर्वक करें बीमा पॉलिसी का चयन
प्रकाशित Sat, फ़रवरी 11, 2012 पर 12:58 | स्रोत : Moneycontrol.com
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जीवन बीमा के माध्यम से टैक्स बचत का तरीका बहुत ही लोकप्रिय है एवं अधिकांश व्यक्तियों की टैक्स बचत का बड़ा हिस्सा जीवन बीमा प्रीमियम में जाता है। प्लान की लोकप्रियता का कारण लुभावने विज्ञापन एवं एजेंटों को मिलने वाला तगड़ा कमीशन रहा है, न कि निवेशकों का हित। यदि हम हमारे द्वारा पूर्व में ली गई पॉलिसियों पर गौर करें तो हमें टैक्स बचत का लाभ तो मिला है, परंतु इन पॉलिसियों पर न तो हमें अच्छे रिटर्न मिल पाए हैं और न ही पर्याप्त वित्तीय सुरक्षा। ऐसे में टैक्स बचत के लिए उचित बीमा पॉलिसी का चयन आवश्यक है।
क्यों बचें निवेश प्लान से : एन्डोमेंट प्लान, होल लाइफ प्लान, पेंशन प्लान, मनी बैक प्लान, चाइल्ड प्लान, यूलिप प्लान आदि निवेश प्लान की श्रेणी में आते हैं। इन प्लान को चुनने के पीछे हमारा उद्देश्य बीमा कवर के साथ निवेश पर रिटर्न प्राप्त करने का भी होता है, जबकि बीमा कवर का मुख्य उद्देश्य परिवार को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना होता है।
कम रिटर्न : सामान्यतः इन प्लान में सालाना रिटर्न 5 से 6 फीसदी ही मिल पाता है। महंगाई के इस दौर में इतने कम रिटर्न से जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करना संभव नहीं है। अतः हमें ऐसे साधनों में निवेश करना होगा, जिससे हम महंगाई दर को मात दे सकें।
कम जीवन बीमा कवर : सामान्यतः इन प्लान में वार्षिक प्रीमियम का 10 से 20 गुना ही कवर मिल पाता है, जिससे हम अधिक बीमा कवर नहीं ले पाते हैं। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति को 25 लाख रुपए का बीमा कवर लेना है तो उसे इस तरह के प्लान के लिए सालाना 1.5 से 2 लाख रुपए का प्रीमियम अदा करना होगा, वहीं इतनी ही अवधि के लिए 30 वर्ष के व्यक्ति का 25 लाख का टर्म प्लान लगभग पांच हजार रुपए वार्षिक की प्रीमियम अदा करके लिया जा सकता है। अतः अधिक बीमा कवर के लिए टर्म प्लान ही उचित है।
लंबी अवधि की बाध्यता : सामान्यतः ये प्लान 10 वर्ष से 25 वर्ष की अवधि के होते हैं। इन प्लान में पूर्ण अवधि तक प्रीमियम चुकाने की बाध्यता होती है अन्यथा ये प्लान लेप्स हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में जीवन बीमा कवर समाप्त हो जाता है एवं अवधि पूर्व सरेंडर करने पर बहुत ही कम राशि वापस मिल पाती है।
तरलता का अभाव : इन प्लान में मैच्योरिटी के पूर्व पैसों की निकासी नहीं की जा सकती है। बीच में यदि पैसे की जरूरत हो तो मजबूरीवश लोन ही लेना पड़ता है। इस तरह के लोन पर ब्याज दर 9 से 10 फीसदी सालाना है। जहां एक तरफ हमें इस प्लान में रिटर्न 5 से 6 फीसदी सालाना ही मिलता है तो क्या ऐसे में 9 से 10 फीसदी ब्याज दर पर लोन लेना समझदारी है?
प्रस्तावित डायरेक्ट टैक्स कोड : डायरेक्ट टैक्स कोड 1 अप्रैल 2012 से लागू होना प्रस्तावित है। इसके तहत आय से डेढ़ लाख रुपए तक की छूट प्राप्त की जा सकती है। इसकी निम्न 2 सबलिमिट निर्धारित की गई है।
सब लिमिट-1 : एक लाख रुपए तक की छूट, स्वीकृत फंड्स न्यू पेंशन स्कीम (प्रॉविडेंट फंड, सुपर एन्यूटेशन ग्रेच्युटी आदि में निवेश) पर प्राप्त की जा सकेगी।
सब लिमिट-2 : 50 हजार रुपए तक की छूट, लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम राशि (बीमा राशि के 5 फीसदी से अधिक न होने पर) हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम और बच्चों की ट्यूशन फीस पर प्राप्त की जा सकेगी।
अतः यदि डायरेक्ट टैक्स कोड इसी प्रकार लागू कर दिया जाता है तो इंश्योरेंस प्रीमियम पर छूट सब -लिमिट 2 के आधार पर ही मिल पाएगी। आपके लिए बेहतर यही होगा कि आप निवेश बीमा प्लान से बचें एवं जीवन बीमा के लिए टर्म प्लान लें और निवेश को पृथक रूप से अपनी जोखिम क्षमता अनुसार अलग-अलग निवेश साधनों में करें, जिससे कम खर्च में आप अधिक बीमा कवर प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही निवेश को लंबी अवधि तक करने की बाध्यता से छुटकारा, निवेश पर अधिक रिटर्न एवं जरूरत पड़ने पर निवेश को भुना भी सकेंगे।
कौन-सा बीमा चुनें : जीवन बीमा में आज हमारे पास विभिन्न विकल्प मौजूद हैं- एन्डोमेंट प्लान, होल लाइफ प्लान, मनी बैक प्लान, यूलिप प्लान, टर्म प्लान आदि। जीवन बीमा के एन्डोमेंट प्लान, होल लाइफ प्लान, मनी बैक प्लान अथवा यूलिप प्लान में प्रीमियम का अधिकतम हिस्सा निवेश में जाता है, जिससे बीमा कवर बहुत ही कम मिल पाता है, जबकि टर्म प्लान का मूल उद्देश्य बीमा कवर प्रदान करना होता है एवं इस प्लान में प्रीमियम का संपूर्ण हिस्सा कवर में जाता है, जिससे कम प्रीमियम में पर्याप्त बीमा कवर प्राप्त किया जा सकता है। अतः परिवार को पर्याप्त वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने की दृष्टि से टर्म प्लान लिया जाना चाहिए।