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कहते हैं कि फौज में कुछ लोग जीते जीघोस्ट बन जाते हैं। वो ना दिखाई देते हैं,नाउनका कुछ पता होता हैं ,वो बस अपनीमौजूदगी का...
26/01/2026

कहते हैं कि फौज में कुछ लोग जीते जी

घोस्ट बन जाते हैं। वो ना दिखाई देते हैं,ना

उनका कुछ पता होता हैं ,वो बस अपनी

मौजूदगी का एहसास तब ही जगाते हैं जब

किसी दुश्मन की जान जानी होती है।

आज की कहानी है सुबेदार मेजर अनिल

कुमार दहिया एक घोस्ट की...

कल्पना कीजिए ज़मीन से सटे हुए, ठिठुराती

ठंड में, आतंकियों के लॉन्च पैड से महज़ सौ

मीटर की दूरी पर कोई सैनिक 36 घंटे तक

बिल्कुल न हिले।

न भोजन।

न पानी।

न नींद।

कहते हैं कि धैर्य एक हथियार है।

और जम्मू-कश्मीर की बर्फ़ीली पहाड़ियों में

नायब सूबेदार अनिल कुमार दहिया ने इसी

हथियार को सबसे घातक रूप में ढाल दिया

जिसने उन्हे शौर्य पदक दिलवा दिया।

नायब सूबेदार दहिया ने उस मिशन में खुद

को मिट्टी में घुला दिया। वे दिखाई नहीं दिए वे

अदृश्य हो गए।

जहाँ अधिकांश लोग एक घंटे की असहजता

में टूट जाते हैं, वहाँ उन्होंने दो दिन केवल

एक सही क्षण का इंतज़ार किया।अनुशासन

रंग लाया। पाँच भारी हथियारों से लैस

आतंकी घुसपैठ के लिए बढ़े। उन्हें ज़रा भी

आभास नहीं था कि “घोस्ट” उन्हें देख रहा

है।जैसे ही वे किल ज़ोन में दाख़िल हुए,

ख़ामोशी एक साइलेंट कील में बदल गई।

50 मीटर की करीबी मुठभेड़ में, अगुआई

करते हुए, नायब सूबेदार दहिया ने अकेले

दम पर तीन आतंकियों को ढेर कर दिया और

इस पूरी घुसपैठ को कुचल दिया।

यह केवल एक मुठभेड़ नहीं थी यह मानव

मन के इच्छा शक्ति की जीत थी।यही इस

पारा एसएफ के मरून बेरेट की आत्मा है।

दर्द को ख़ामोशी में सहना ,उसे अपनी

मजबूती बनाना, एक गोली एक दुश्मन के

मोटो से सटीकता से वार करना और चाहे

जो हो हर कीमत पर विजय पाना।

हम चैन से सोते हैं क्योंकि कुछ ऐसे ही घोस्ट

सरहद पर घात लगाए जागते रहते

हैं।स्पेशल फ़ोर्सेस के ऑपरेशन में “घोस्ट”

उस सैनिक को कहा जाता है जो दुश्मन के

बेहद पास होते हुए भी दिखाई नहीं देता,

सुनाई नहीं देता, और अपनी मौजूदगी का

कोई निशान नहीं छोड़ता। घंटों-घंटों, कभी-

कभी दिनों तक एक ही मुद्रा में पड़े रहना,

साँसों की गति तक को नियंत्रित करना, शरीर

को ज़मीन का हिस्सा बना लेते हैं।यह

सामान्य प्रशिक्षण से परे खुद पर मानसिक

विजय है।

आप इनकी तस्वीर देखिए एक वीर सैनिक

के जीवन में उसे सर्वश्रेष्ठ मानने के लिए

जितने भी अलंकार दिए जा सकते हैं,सब

उनकी वर्दी पर सुशोभित है।ऐसे वीरों की

शौर्यगाथाएं को हर भारतीयों को जानने का

हक है,आखिर इतना तो हम कर ही सकते

हैं।

🇮🇳 गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏








क्या आप जानते हैं की धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज की मृत्यु का बदला कैसे लिया गया और किसने लिया ? दो मिनट का थ्रेड👇आपके...
26/01/2026

क्या आप जानते हैं की धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज की मृत्यु का बदला कैसे लिया गया और किसने लिया ? दो मिनट का थ्रेड👇आपके रोंगटे खड़े कर देगा ! बस दो मिनट का समय निकालिए और अंत तक पढ़िए

छत्रपति संभाजी की हत्या के बाद औरंगजेब के सेनापति जुल्फिकार खान ने रायगढ़ पर कब्जा कर छत्रपति संभाजी की पत्नी येसु बाई और उनके पुत्र को भी कैद कर लिया जिसके बाद छत्रपति संभाजी महाराज के छोटे भाई राजाराम जी महाराज छत्रपति के पद पर विभूषित हुए।

छत्रपति संभाजी महाराज को औरंगजेब ने 40 दिनों तक भयंकर यातनाएं देकर मारा था। इस हाहाकारी मृत्यु ने मराठों के सीनों में आग लगा दी। उनके सारे मतभेद खत्म हो गए और सिर्फ एक ही लक्ष्य रह गया राक्षस औरंगजेब का सर्वनाश।

संगमेश्वर के किले में जब शूरवीर छत्रपति संभाजी अपने 200 साथियों के साथ औरंगजेब के सिपहसालार मुकर्रम खान के 10 हजार मुगल सिपाहियों के साथ जंग लड़ रहे थे, उस वक्त छत्रपति संभाजी के साथ एक और बहादुर योद्धा अपनी जान की बाजी लगा रहा था जिसका नाम था माल्होजी घोरपड़े।

छत्रपति संभाजी के साथ लड़ते हुए माल्होजी घोरपड़े भी वीरगति को प्राप्त हो गए और माल्होजी घोरपड़े के पुत्र संताजी घोरपड़े ने ही अपने युद्ध अभियानों से औरंगजेब की नाक काट डाली और औरंगजेब को इतिहास में भगोड़ा भी साबित कर दिया।

संताजी घोरपड़े के साथ एक और वीर मराठा ने दिया जिसका नाम था धना जी जाधव। औरंगजेब को यकीन था कि छत्रपति संभाजी की हत्या के बाद मराठों का मनोबल टूट जाएगा लेकिन वो उस वक्त हैरान हो गया जब तुलापुर में अचानक संताजी और धनाजी ने हमला कर दिया। औरंगजेब लाखों की सेना के साथ महाराष्ट्र के तुलापुर नाम की जगह पर अपना डेरा डाले बैठा हुआ था।

यह वही जगह थी जहां पर औरंगजेब ने छत्रपति संभाजी महाराज की क्रूरता से हत्या की थी। गुरिल्ला युद्ध में पारंगत संताजी 2000 मराठा सैनिकों के साथ औरंगजेब की सेना पर खूंखार शेर की तरह टूट पड़े। संताजी ने अपने साथियों के साथ गाजर मूली की तरह मुगलों को काटना शुरू कर दिया।

इस युद्ध का वर्णन करते हुए मुगलिया इतिहासकार काफी खान लिखता है कि तुलापुर की जंग के बाद संताजी की दहशत मुगलिया सैनिकों के दिलों में घर कर गई थी। संताजी के सामने पड़ने वाला मुगलिया सैनिक या तो मार दिया जाता या कैद हो जाता। आखिर में हालत ये हो गए कि संताजी का नाम सुनते ही मुगल सेना में भगदड़ मच जाती थी।

तुलापुर में संताजी के मराठों के अचानक हमले से मुगल जोर-जोर से चिल्लाने लगे हुजूर मराठे आ गए। एक तरफ पूरी मुगल सेना औरंगजेब की जान बचाने की कोशिश में लगी हुई थी तो दूसरी तरफ मराठे मुगलियों लाशों के ढेर लगा रहे थे।

मराठे मुगल छावनी के अंदर घुस गए। इतना कत्लेआम हुआ कि औरंगजेब अपनी जान बचाकर भागा। औरंगजेब की जान बच गई लेकिन पूरे मुगल साम्राज्य की नाक कट गई और औरंगजेब पर भगोड़े का ठप्पा लग गया। मराठे औरंगजेब के कैंप के ऊपर लगे दो सोने के कलश काटकर सिंहगढ़ किले को लौट आए।

अगले दिन जब सुबह हुई तो औरंगजेब मुगलों की मौत का मंजर देखकर हैरान रह गया और कहने लगा या अल्लाह किस मिट्टी के बने हैं ये मराठे यह ना थकते हैं ना झुकते हैं ना पीछे हटते हैं इन्हें मिटाते मिटाते कहीं हम ना मिट जाएं औरंगजेब इस दुख भरे हादसे से पूरी उम्र बाहर ही नहीं आ पाया था।

मराठे मुगल छावनी के अंदर घुस गए। इतना कत्लेआम हुआ कि औरंगजेब अपनी जान बचाकर भागा। औरंगजेब की जान बच गई लेकिन पूरे मुगल साम्राज्य की नाक कट गई और औरंगजेब पर भगोड़े का ठप्पा लग गया। मराठे औरंगजेब के कैंप के ऊपर लगे दो सोने के कलश काटकर सिंहगढ़ किले को लौट आए।

अगले दिन जब सुबह हुई तो औरंगजेब मुगलों की मौत का मंजर देखकर हैरान रह गया और कहने लगा या अल्लाह किस मिट्टी के बने हैं ये मराठे यह ना थकते हैं ना झुकते हैं ना पीछे हटते हैं इन्हें मिटाते मिटाते कहीं हम ना मिट जाएं औरंगजेब इस दुख भरे हादसे से पूरी उम्र बाहर ही नहीं आ पाया था।

इस घटना के दो दिन बाद ही संता जी ने रायगढ़ किले पर हमला बोल दिया। छत्रपति संभाजी की पत्नी येसुबाई को कैद करने वाले मुगल सरदार जुल्फिकार खान ने यहां पहले ही घेरा बनाया हुआ था।

मराठों ने जुल्फिकार खान की सेना को काटकर रायगढ़ किले पर भी कत्लेआम मचा दिया और मुगलों का बेश कीमती खजाना घोड़े और पांच हाथी अपने साथ पकड़कर पन्हाला लेकर आए। इस तरह कई गोरिल्ला युद्धों ने मुगल सेना का मनोबल तोड़ कर रख दिया।

मराठों को जब भी मौके मिलता वो मुगल सेना को चीर के रख देते। अब बारी मुकर्रम खान की थी। जिसने छत्रपति संभाजी महाराज को छल और धोखे से कैद किया था उस। 50 हजार रुपए ईनाम देते हुए, मुकर्रम खान को औरंगजेब ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर और कोकण प्रांत का सूबेदार नियुक्त किया था। मराठों ने यह प्रण लिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए पर उस मुकर्रम खान को जिंदा नहीं छोड़ना है और दिसंबर सन 1689 को मराठों ने मुकर्रम खान की विशाल सेना को घेरकर मुगलों को भिंडी की तरह तोड़ना शुरू कर दिया।

इस घनघोर युद्ध में अब संताजी घोरपड़े ने मुकर्रम खान को दौड़ा दौड़ा कर मारा। खून से लथपथ पड़े मुकर्रम खान की ये दुर्दशा देखकर मुगल सेना उसे जंगलों में लेकर भाग गई पर मराठों के दिए घावों ने जंगल में तड़पा तड़पा कर मुकर्रम खान की जान ले ली। मुकर्रम खान को मारकर मराठों ने छत्रपति संभाजी महाराज के मृत्यु का बदला लिया ।

संताजी घोरपड़े के साहस और शौर्य पर खुश होकर सन 1691 को छत्रपति राजाराम महाराज ने उन्हें मराठा साम्राज्य का सरसेनापति घोषित किया। सर सेनापति बनते ही संताजी ने अपना पहला निशाना मुगल सल्तनत को बनाया और अपने साथ 15 से 20 हजार का मराठा लश्कर लेकर औरंगजेब की मुगल सल्तनत में भयंकर तबाही मचा दी। कृष्णा नदी पार कर्नाटक जैसे एक के बाद एक मुगल इलाकों में मराठा साम्राज्य के जीत का डंका बजाया।

औरंगजेब मराठों के डर से सह्याद्री के पर्वतों में इधर से उधर भागता। लगातार 27 साल मराठों ने औरंगजेब को इतना घुमाया इतना दौड़ाया कि उसका जीना मुश्किल हो गया अंत में मराठों के हाथों हो रही लगातार मुगलों की पराजय के दुख में वह नीच औरंगजेब तड़प तड़प कर महाराष्ट्र में ही मर गया।








चुकंदर का सेवन अधिकतर लोग सलाद के रूप में या जूस बनाकर करते हैं। इसके लाल रंग के कारण अधिकतर लोग सिर्फ इसे खून बढ़ाने वा...
25/01/2026

चुकंदर का सेवन अधिकतर लोग सलाद के रूप में या जूस बनाकर करते हैं। इसके लाल रंग के कारण अधिकतर लोग सिर्फ इसे खून बढ़ाने वाली चीज के रूप में ही जानते हैं और इसका उपयोग भी इसी लिए करते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसे खाने के एक नहीं अनेक फायदे हैं। आज हम बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे ही फायदों के बारे में…
गुणों से भरपूर – चुकंदर में सोडियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस, क्लोरीन, आयोडीन, आयरन और अन्य महत्वपूर्ण विटामिन पाए जाते हैं। इसे खाने से हीमोग्लोबिन बढ़ता है। उम्र के साथ ऊर्जा व शक्ति कम होने लगती है, चुकंदर का सेवन अधिक उम्र वालों में भी ऊर्जा का संचार करता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो हमेशा जवान बनाए रखते हैं।
त्वचा के लिए फायदेमंद – यदि आपको आलस्य महसूस हो रहा हो या फिर थकान लगे तो चुकंदर का सेवन कीजिए। इसमें कार्बोहाइड्रेट होता है, जो शरीर की ऊर्जा बढ़ाता है। सफेद चुकंदर को पानी में उबाल कर छान लें। यह पानी फोड़े, जलन और मुहांसों के लिए काफी उपयोगी होता है। खसरा और बुखार में भी त्वचा को साफ करने में इसका उपयोग किया जा सकता है।
दिल की बीमारियां – चुकंदर में नाइट्रेट नामक रसायन होता है, जो रक्त के दबाव को काफी कम कर देता है और दिल की बीमारी के जोखिम को भी कम करता है। चुकंदर एनीमिया के उपचार में बहुत उपयोगी माना जाता है। यह शरीर में रक्त बनाने की प्रक्रिया में सहायक होता है। आयरन की प्रचुरता के कारण यह लाल रक्त कोशिकाओं को सक्रिय रखने की क्षमता को बढ़ा देता है। इसके सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और घाव भरने की क्षमता भी बढ़ जाती है।
हाई ब्लड प्रेशर में – लंदन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने रोज चुकंदर का जूस पीने वाले मरीजों को अध्ययन में शामिल किया। उन्होंने रोज चुकंदर का मिक्स जूस (गाजर या सेब के साथ) पीने वाले मरीजों के हाई ब्लड प्रेशर में कमी पाई। अध्ययन के मुताबिक रोजाना केवल दो कप चुकंदर का मिक्स जूस पीने से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। हालांकि इसका ज्यादा सेवन घातक साबित हो सकता है।
कब्ज और बवासीर – चुकंदर का नियमित सेवन करेंगे तो कब्ज की शिकायत नहीं होगी। बवासीर के रोगियों के लिए भी यह काफी फायदेमंद होता है। रात में सोने से पहले एक गिलास या आधा गिलास जूस दवा का काम करता है।
जिम करने वालों के लिए – जो लोग जिम में जी तोड़ कर वर्कआउट करते हैं, उन्हें खाने के साथ चुकंदर खाना चाहिए। इससे शरीर में ऊर्जा बढ़ती है और थकान दूर होती है। साथ ही अगर हाई बीपी हो गया हो तो इसे पीने से केवल 1 घंटे में शरीर नॉर्मल हो जाता है।

Can We Boil Milk With Dates: शरीर की सालों पुरानी कमजोरी को खजूर दूर कर सकता है। इसमें ऐसे गुण होते हैं जो दुबले शरीर मे...
25/01/2026

Can We Boil Milk With Dates: शरीर की सालों पुरानी कमजोरी को खजूर दूर कर सकता है। इसमें ऐसे गुण होते हैं जो दुबले शरीर में जान भर दें। इसके लिए खजूर खाने का सही समय और तरीका मालूम होना चाहिए।
पोषण की कमी से कमजोरी आ जाती है। थकान से शरीर टूटने लगता है। ऊर्जा की कमी बनी रहती है। यह समस्या दिमाग को भी कमजोर बना देती है। कुछ लोगों को सालों से कमजोरी की समस्या रहती है। दवाएं तक असर नहीं कर पाती। ऐसे लोग इस देसी इलाज से शरीर की कमजोरी का काम तमाम कर सकते हैं।

कमजोरी कैसे दूर करें? थकान-कमजोरी मिटाने के लिए ताकत और एनर्जी बढ़ाने की जरूरत होती है। इस काम के लिए खजूर मदद कर सकता है। लेकिन अगर आप एक खास तरीके से खजूर खाएंगे तो कई साल पुरानी कमजोरी खत्म हो जाएगी। आइए खजूर खाने का असरदार तरीका जानते हैं।

खजूर खाने का सही तरीका

सबसे पहले आपको यह पता होना चाहिए इस पावरफुल फूड को खाने का सही टाइम कौन सा है। अगर आप एकदम फिट और फिजिकल एक्टिव हैं तो रात में भी खा सकते हैं। लेकिन सुबह खाली पेट अधिकतर लोगों के लिए परफेक्ट टाइम है। आप 3 भीगे खजूर को 1 गिलास दूध में उबाल लें। इस दूध को गुनगुना पीएं।

घोड़े जैसी ताकत लाने का देसी उपाय

आयुर्वेद में खजूर को मर्दाना ताकत बढ़ाने वाला माना जाता है। USDA के अनुसार, इसमें फाइबर, नेचुरल शुगर, प्रोटीन, आयरन, पोटैशियम होता है। नेचुरल शुगर और प्रोटीन ताकत के साथ तेजी लाते हैं। आयरन खून बढ़ाता है और पोटैशियम नसों में जान डालता है।

बीमारियों की होगी छुट्टी

इस नुस्खे में दूध के गुणों के साथ खजूर में मौजूद फ्लेवेनोइड्स, कैरोटेनोइड्स और फेनोलिक एसिड होते हैं। कैरोटेनोइड्स से दिल और आंख की बीमारी दूर होती है। फेनोलिक एसिड इंफ्लामेशन और फ्लेवोनोइड्स डायबिटीज की बीमारी से बचाते हैं। कुल मिलाकर बुढ़ापे में भी शरीर जवानी की तरह तंदरुस्त होता है।

दिमाग की बत्ती जलाने का उपाय

वैज्ञानिक इस फूड को दिमाग के स्वास्थ्य के लिए अच्छा मानते हैं। यह ब्रेन में होने वाली इंफ्लामेशन को कम करता है। जो कि अल्जाइमर का बड़ा कारण है। यह बीमारी दिमाग की क्षमता को खत्म कर देती है और मुश्किलें होने लगती हैं।

ढांचा होगा तगड़ा

दूध में उबले खजूर हड्डियों के ढांचे के लिए बढ़िया हैं। एक-एक हड्डी में जान आने लगती है। टूटने-मुड़ने का खतरा कम होने लगता है। इसमें हड्डियों की बीमारी से बचाने वाले सारे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। बच्चों को इसका सेवन जरूर करवाना चाहिए।

इस वक्त न खाएं खजूर

आईबीएस की दिक्कत होने परभारी भोजन करने के बादएलर्जी की समस्या होने परडायरिया या दस्त होने परडिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

09/04/2025

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