05/03/2025
वो चालीस बार से ज्यादा सलेक्शन में गया। एक भी जगह सलेक्ट नहीं हुआ। कभी गेंदबाजी में फेल होकर बल्लेबाज बनने की सोचा, तो कभी हारकर विकेटकीपर बन गया।
ज़िंदगी उसे क्या बनाना चाहती थी, समझ नहीं आ रहा था। आख़िरकार एक दिन सपनों की पिच पर बोल्ड होने के बाद उसने तय कर लिया कि अब हमेशा के लिए क्रिकेट छोड़ देगा और पढ़ाई करेगा।
फिर पांच साल उसने आर्टिटेक्ट की पढ़ाई की और पढ़ाई के बाद तीन साल की नौकरी।
नौकरी से भी मन ऊब गया...तो बाप को फोन किया कि पापा ये नौकरी हमसे नहीं हो रहा। बस एक बार और ट्राई करने दो, इस बार नहीं हुआ तो पक्क़ा क्रिकेट छोड़ दूंगा।
पिता ने इजाज़त दे दी तो उसने नौकरी छोड़कर भारत का सबसे फ़ास्ट बॉलर बनने का सपना देख लिया। औऱ हमेशा की तरह उसमें भी फेल हो गया। इतने फेलियर के बाद तो बस अंतिम प्रण ही बाकी था।
अंतिम बार तय किया कि अबकी स्पिन बॉलिंग करूँगा और अगर इस बार कुछ न हुआ तो पक्का क्रिकेट छोड़ दूंगा।
अब जरा कल के मैच में आते हैं।
चार-पाँच ओवर के बाद खूंखार ट्रैविस हेड शमी और पांड्या को अपने चिर-परिचित स्टाइल में मार रहा है...देश के करोड़ों लोगों की सांस थम गई हैं।
मेरे आस-पास कुछ लोगों ने तो डरके मारे टीवी तक बन्द कर लिया है कि हेडवा ससुरा फार्म में आ गया बे, अब तो आस्ट्रेलिया तीन सौ रन बना लेगा।
तभी कप्तान रोहित शर्मा बॉल उसी लड़के को थमातें हैं, जो एक दिन क्रिकेट से हार मानकर आर्टिटेक्ट बन गया था।
दूसरी ही बाल होती है... हेड सामने है...देखते ही देखते इस आर्टिटेक्ट ने हेड को आउट करके भारत की जीत का नक्शा प्रस्तुत कर दिया है और टीवी पर नज़र गड़ाए करोड़ो भारतीयों की बांछे खिल गईं हैं।
बार-बार वरुण चक्रवर्ती के बारे में सोचता हूँ तो लगता है कि क्या वरुण की कहानी उन तमाम मिडिल क्लॉस लड़कों की कहानी नही है, जो थक-हारकर सपने और नौकरी की लड़ाई में एक दिन नौकरी के हाथों क्लीन बोल्ड हो जाते हैं और वहीं सेम पिच पर जीवन भर घीसते रहतें हैं।
वरुण आज नौकरी कर रहे होते तो न जाने कहाँ होते। लेकिन आज अपने उस एक फैसले से हम सबके सामने हैं..गर्व का विषय बनकर।
क्रिकेट में हार-जीत तो लगा रहेगा...
लेकिन जिस देश का सबसे गरीब बच्चा भी बाल और बैट का जुगाड़ कर लेता है। डंडे से स्टम्प बना लेता है..उस देश में वरुण चक्रवर्ती जैसे खिलाड़ियों का आते रहना ज़रूरी है।
ये कहानियां फेल होने के बाद भी सपने देखना और उसे हर हाल पूरा करना सिखाती हैं।
शाबाश वरुण... ❤️
अतुल कुमार राय