28/09/2026
प्रतिष्ठा में,
1. माननीय अध्यक्ष/उपाध्यक्ष/सचिव,
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग / राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग / राष्ट्रीय सफाई
कर्मचारी आयोग, नई दिल्ली।
2. माननीय मुख्यमंत्री महोदय, राजस्थान सरकार, जयपुर।
3. माननीय मंत्री महोदय, नगरीय विकास एवं आवासन विभाग (UDH), राजस्थान
सरकार, जयपुर।
4. प्रमुख शासन सचिव / निदेशक एवं विशिष्ट सचिव, स्वायत्त शासन विभाग,
राजस्थान सरकार, जयपुर।
विषय: बासनी स्थित SR हैंडीक्राफ्ट फैक्ट्री अग्निकांड में फायरकर्मियों की मृत्यु/घायल होने की घटना तथा मुख्य अग्निशमन अधिकारी को उपायुक्त सतर्कता का अतिरिक्त दायित्व दिए जाने के संबंध में उच्चस्तरीय जांच एवं जवाबदेही तय करने बाबत।
महोदयगण जी,
जोधपुर के बासनी स्थित गणेश नगर श्रमिक कॉलोनी की SR हैंडीक्राफ्ट फैक्ट्री में 23 सितम्बर को लगी भीषण आग एवं केमिकल ड्रमों में हुए विस्फोट में 14 फायरकर्मी झुलसे तथा अब तक 3 फायरकर्मियों की मृत्यु हो चुकी है | इस अत्यंत गंभीर घटना के बीच यह भी जांच का विषय है कि मुख्य अग्निशमन अधिकारी श्री जलज घसिया द्वारा उक्त फैक्ट्री को अग्निशमन NOC दी गई थी अथवा नहीं, फैक्ट्री में ज्वलनशील केमिकल के भंडारण की अनुमति थी अथवा नहीं तथा अग्निशमन विभाग के समक्ष लंबित/निरस्त NOC आवेदनों एवं निरीक्षणों की स्थिति क्या थी। पुलिस द्वारा भी फैक्ट्री के स्वामित्व, पंजीकरण तथा ज्वलनशील केमिकल के भंडारण संबंधी अनुमति की जांच अपेक्षित है।
साथ ही, मेरे संज्ञान में आया है कि मुख्य अग्निशमन अधिकारी श्री जलज घसिया को उपायुक्त सतर्कता का दायित्व दिया जाना संदेहास्पद है, इसलिए इसकी वैधानिकता एवं प्रक्रिया की भी जांच आवश्यक है। संलग्न स्वायत्त शासन विभाग के दिनांक 05.11.2024 के आदेश में तकनीकी सेवा के अधिकारियों को उपायुक्त पद का कार्यभार दिए जाने संबंधी आदेशों को तत्काल प्रभाव से अपास्त करते हुए RAS/RMAS सेवा के अधिकारियों को ही उपायुक्त पद का कार्यभार देने के निर्देश हैं, तब फिर क्यों, किसने और किस उद्देश्य से श्री जलज घसिया को उपायुक्त सतर्कता का दायित्व दिया ?
अतः निम्न बिंदुओं की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच हो :
1. उक्त फैक्ट्री को अग्निशमन NOC किसने, कब और किन शर्तों पर जारी की?
2. अग्निशमन NOC के कितने आवेदन वर्तमान में लंबित अथवा निरस्त हैं तथा उनके कारण क्या हैं?
3. घटनास्थल पर भेजे गए सभी फायरकर्मियों को आवश्यक PPE/सुरक्षा उपकरण उपलब्ध थे या नहीं?
4. घायल एवं मृत फायरकर्मियों की नियुक्ति, प्रशिक्षण, ड्यूटी एवं तैनाती का पूरा रिकॉर्ड जांचा जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि किसी संविदा/अप्रशिक्षित कर्मी को इस जोखिमपूर्ण कार्रवाई में लगाया गया था या नहीं और यदि हाँ तो किसने लगाया ?
5. श्री जलज घसिया को उपायुक्त सतर्कता का दायित्व दिए जाने के संबंध में भी संलग्न शासनादेश के आलोक में जांच की जाए।
साथ ही, मृतक फायरकर्मियों के परिवारों को कम से कम ₹50 लाख मुआवजा एवं परिवार के एक सदस्य को नियमित सरकारी सेवा, तथा घायल फायरकर्मियों को सम्पूर्ण उपचार व्यय के साथ कम से कम ₹10 लाख की आर्थिक सहायता दी जाए। यदि कोई घायल भविष्य में कार्य करने में असमर्थ रहता है तो उसके परिवार के एक सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
यदि सुरक्षा मानकों या प्रशिक्षण में कोई कमी थी तो उसके लिए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। यदि इस प्रकरण में समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो मुझे अपनी संस्था के माध्यम से पीड़ित परिवारों को न्याय एवं उचित राहत दिलाने हेतु माननीय न्यायालय की शरण लेने के लिए आवश्यक कदम उठाने पड़ेंगे। भवदीय
सचिन विष्णुदेव सर्वटे
पूर्व उपाध्यक्ष-राज्य अनुसूचित जाति आयोग, राज. सरकार
पूर्व उपाध्यक्ष-राज्य सफाई कर्मचारी आयोग, राज. सरकार
प्रतिलिपि : मा. महापौर/उपमहापौर/संभागीय आयुक्त/कलेक्टर/पुलिस आयुक्त/DDR/आयुक्त नगर निगम, जोधपुर |