11/05/2026
मैं अपने आप को बदलने की कोशिश कर रहा हूँ - पर ये आसान नहीं है - कभी कभी हम कुछ करना चाहते है, पर कर नहीं पाते!
ज़िन्दगी - कौन समझा है कौन जाना है। यह सही है या वह सही है?
मेरे काम का बड़ा हिस्सा लोगों को wealth create करने, financially secure बनने और future plan करने से जुड़ा है।
प्सालों तक मैंने भारत के विभिन्न नगरों में (लगभग 40शहर), इन्वेस्टमेंट्स,
रिटर्न्स, compounding और money management के बारे में 10000 से अधिक लोगों से मिला हूं।
और मैं आज भी यह मानता हूँ कि पैसा बहुत ज़रूरी है।
👉लेकिन समय के साथ एक बात और समझ आई है-
लोग जीवन के आख़िरी दिनों में अक्सर पैसों की कमी का नहीं अपनी अधूरी ज़िंदगियों का अफ़सोस लेकर जाते हैं।
सबसे ज़्यादा सुने गए पछतावे ये नहीं होते कि
“काश मैंने बड़ा घर लिया होता”
बल्कि ये होते हैं:
1. काश मैं दूसरों की expectations और approval के लिए नहीं, अपने सच्चे मन के अनुसार जीता।
Approval(दूसरों को खुश करना)के लिए जीते-जीते,
कई लोग खुद से ही दूर हो जाते हैं।
2. काश मैंने इतना काम नहीं किया होता,
Family, रिश्ते, अपने लोग छूट गए।कुछ समय उनके साथ बिताया होता।
पैसा वापस आ सकता है
लेकिन गुज़रा हुआ समय नहीं।
3. काश मैंने अपने emotions दबाए नहीं होते।
कई लोग पूरी ज़िंदगी strong दिखते रहे,पर इतने स्ट्रॉंग भी नहीं थे की अपने दिल की बातें कभी कह ही नहीं पाए।
4. काश मैं अपने दोस्तों और अपनों से जुड़ा रहता।
ज़िंदगी की दौड़ में लोग अक्सर मंज़िल तो पा लेते हैं,
लेकिन सफ़र में अपने लोग खो देते हैं।
5. काश मैंने खुद को खुश रहने दिया होता।
बहुत लोग पूरी ज़िंदगी ये सोचते रह जाते हैं:
👉बस ये मिल जाए फिर खुश होऊँगा।
लेकिन happiness कोई future event नहीं
एक choice है।
अंत में इंसान खुद से यही पूछता है:
क्या मैंने अपने दिल की सुनी?
क्या मैंने सही लोगों के साथ समय बिताया?
क्या मैं सच में जिया
या सिर्फ़ निभाता रहा?
ज़िंदगी की सबसे बड़ी गलती वो नहीं जो हमने की
बल्कि वो है जो हम करना चाहते थे,
लेकिन डर, hesitation, society या approval के कारण कभी कर ही नहीं पाए। 🙏