23/10/2016
एक कहानी जो सोचने पर मजबूर करती है
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एक बार एक कसाई के पास उसका एक दोस्त उससे मिलने गया। वहाँ उसने देखा कि एक बड़े से पिंजरे नुमा घर में ढेर सारे बकरे कैद है और आपस में बड़े ही मस्ती के साथ खेल रहे हैं। उस पिंजरे से वह कसाई एक एक करके बकरे को बाहर निकाल कर उसे काट रहा था। उनका मांस बेच रहा था। उस कसाई के दोस्त को यह नजारा बड़ा ही हैरान करने वाला लगा। सारे बकरे पिंजरे की जाली के माध्यम से अपने साथी बकरे को एक एक करके कसाई के द्वारा कटते तो देख रहे थे फिर भी वे खुश लग रहे थे। एक दुसरे के साथ खेलने में मशगूल थे। दोस्त ने कसाई से पूछा कि भाई ऐसा क्यों है? तो कसाई ने बताया कि मैंने हर बकरे को अकेले में उसके कान में कह दिया है कि भाई मैं सारे बकरों को हलाल करूँगा, लेकिन तुम्हे छोड़ दूँगा। तुम्हे किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा। इसलिए तुम बिलकुल चिंता मुक्त हो कर खेलो और खुश रहो। और इसी वजह से ये सारे के सारे खुश है। किसी भी प्रकार का भय और विद्रोह कि भावना इनके मन में नही है। वे सोचते हैं कि वो सुरक्षित है और उनका कुछ नहीं होगा।
आज बैंक कर्मचारियों की हालत उसी पिंजरे में बंद बकरे के जैसी है। जो दूसरे बकरे के हलाल होने पर खुश होता है। किसी अन्य के अपमानित होने पर संतोष अनुभव करता है। कोई साथी फँसता है तो उसे बचाने की बजाय दूसरा खुश होता है। किसी की किसी ग्राहक से झड़प हो तो दूसरा तमाशा देखता है। किसी से कोई गलती हो जाये , तो दूसरा उसकी कहानी बना के मजे लेता है।
ये है हमारी एकता।
एक कटु सत्य ।