26/10/2024
🌷🚩 * दीपावली निर्णय * 🚩🌷
विक्रम संवत् 2081 में पंचदिवसीय दीपावली त्यौहार के मनाने को लेकर भारतीय जनमानस, पंचागों एवं ज्योतिर्विदों के भिन्न-भिन्न तर्को एवं कथनों के बीच असमंजस में पड़ा है कि दीपावली त्यौहार कब मनाएँ 31 अक्टूबर या 1 नवम्बर में। आश्चर्य है कि सिद्धान्त एवं धर्मग्रन्थों का आश्रय लेकर ये विद्वान न तो एक राय हो सके और ना ही जनमानसू में बहुमत से एक में निर्णय दे सके। देखते हैं संशय का कारण क्या है
भारत में पंचांग निर्माण की दो विधियों प्रमुख है-
एक- प्राचीन सैद्धान्तिक ग्रन्थों के आधार पर
दूसरी- वेधशालाओं के आधार पर ;
इनके अतिरिक्त भी मिश्रित पद्धति है।
ये पंचाग अलग-अलग सिद्धान्त ग्रंथों व पद्धतियों पर निर्मित होने तथा देशान्तर भेद के कारण गणितीय एकरूपता को नहीं दर्शाते है, जिससे इन पंचागों में तिथि, नक्षत्र एवं ग्रह गोचर आदि के निर्धारण में समानता नहीं होती है। यह असमानता ही कभी कभी तिथि, पर्वो एवं
त्यौहारों के निर्धारिण में विवाद व संदेह का कारण बन जाती है। इस संवत में दीपावली त्योहार के निर्धारिण में संशय का एक प्रमुख महत्वपूर्ण कारण यही है। क्योंकि सूर्य सिद्धान्तीय पंचागों में दीपावली मनाने को लेकर कोई विवाद नहीं है। इस प्रकार के पंचांगों में अमावस्या तिथि का समाप्तिकाल सुर्यास्त से पहले होने के कारण दीपावली त्योहार 31 अक्टूबर को प्रदोष व्यापनी अमावस्या में सुस्पष्ट निर्धारित होता है जैसे - काशी विश्व पंचाग में अमावस्या तिथि 1 नवम्बर को सूर्यास्त से 27 मिनट पहले शाम को 5 बजकर 5 मिनट पर समाप्त हुई हैं अतः दीपावली 31 अक्टूबर में मान्य व दर्शायी है , इसी प्रकार जयपुर प्रकाशित जयादित्य पंचांग में अमावस्या तिथि का समाप्ति काल 1 नवम्बर को दिन में 4 बजकर 41 मिनट स्पष्ट है। जिन पंचांगों में अमावस्या तिथि का समाप्तिकाल सूर्यास्त से पहले दर्शाया है उनमें दीपावली त्यौहार मनाने के लिये 31 अक्टूबर का दिन निश्चित किया है। काशी के अधिकांश पंचागों में दीपावली 31 अक्टूबर की मान्य है। लेकिन 1नवम्बर को उत्तर भारत के जिन पंचांगों में अमावस्या तिथि का समाप्तिकाल सूर्यास्त के बाद कुछ मिनट तक गया है वहाँ प्रदोषव्यापनी अमावस्या होने के कारण दीपावली 1 नवम्बर में मनाने की बात कही है। क्योंकि सूर्यास्त के बाद छै: नाड़ी तक प्रदोषकाल होता है , शास्त्रानुसार यदि अमावस्या तिथि दो दिन प्रदोषकाल में व्याप्त रहे तब दूसरे की प्रदोषव्यापनी अमावस्या तिथि में ही दीपावली त्यौहार मनाना चाहिये
" दण्डैक रजनी योगे दर्शः स्यात्तु परेऽहवि । तदा विहाये पूर्वेद्युः परे ऽहनि सुखरात्रिकाः ॥" (निर्णयसिंन्धु/ स्कंदपुराण )
इस प्रकार निर्णय सागर नीमच, श्रीमार्त्तव्ड पंचांग चंडीगढ़, दिवाकर पंचांग जालंधर इत्यादि में दीपावली त्योहार 1 नवम्बर को निर्धारित किया है। किंतु धर्मसिन्धु, निर्णय सिन्धु, भविष्य पुराण के जिन श्लोकों को लेकर दीपावली निर्णय प्रकरण की चर्चा है उन श्लोकों की व्याख्या भी विद्वान-आचार्यों द्वारा अलग- अलग की है जिससे यह विषय संशय का कारण बना है।
आम जनमानस की यह धारणा है कि 1 नवम्बर में अमावस्या तिथि रात्रि व्यापनी नहीं है। इसलिये दीपावली 31 अक्टूबर को ही मनानी चाहिये।
निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि दृश्य गणना आधारित पंचांगों के अनुसार जिन शहरों में सूर्यास्त के उपरांत यदि अमावस्या तिथि एक घटी (24 मिनट) से अधिक समय तक रहती है तो वहाँ प्रदोष काल व्यापनी अमावस्या होने से दीपावली 1 नवम्बर को मनानी चाहिये जैसे दिल्ली, मथुरा, आगरा, ग्वालियर, उज्जैन, पूर्वी एवं मध्यभारत के आधकांश भाग में || मुम्बई को छोड़ सकते हैं
दीपावली निर्णय प्रकरण के विषय में धर्म सिन्धु ग्रंथ में लिखा है कि जहाँ अमावस्या तिथि सूर्योदय में व्याप्त होकर सूर्यास्त के उपरांत एक घटिका से अधिक व्याप्त हो तो संदेह नहीं करना चाहिये अर्थात् उस एक घटिका (24 मिनट) से अधिक प्रदोष व्यापनी अमावस्या में ही दीपावली मनानी चाहिये ॥
" तत्र सूर्योदयं व्याप्यास्तोत्तरं घटिकादि रात्रि व्यापिनी दर्श न संदेह ॥ "
इस प्रकार स्पष्ट है कि 1 नवम्बर में ही लक्ष्मीपूजन व दीपावली त्यौहार का मनाया जाना शास्त्र सम्मत होगा
डा. रूपेन्द्र वर्मा ज्योतिषाचार्य
शोधार्थी पंचांग निर्माण विधि
पी-एच. डी. , एम. एस-सी.(गणित), सबलगढ़