23/07/2026
अक्टूबर 2024 के बाद से लेकर 2026 तक बहुत से निवेशकों का सवाल रहा है कि "मार्केट रिटर्न क्यों नहीं दे रहा?" जबकि SIP लगातार चल रही है और भारत की अर्थव्यवस्था भी मजबूत दिखाई देती है।
असल में यह किसी एक कारण से नहीं, बल्कि कई बड़े कारणों के एक साथ आने से हुआ है।
1. अक्टूबर 2024 तक मार्केट बहुत महंगा (Overvalued) हो चुका था
2020 से सितंबर 2024 तक भारतीय बाजार में जबरदस्त तेजी आई।
Nifty लगभग 7,500 से 26,000 के आसपास पहुंच गया।
Small Cap और Mid Cap में कई शेयर 3–5 गुना तक बढ़ गए।
Nifty का P/E अपने ऐतिहासिक औसत से काफी ऊपर चला गया।
जब वैल्यूएशन बहुत महंगे हो जाते हैं, तो बाजार अगले कुछ समय तक या तो गिरता है या फिर लंबे समय तक साइडवेज़ (Time Correction) रहता है।
2. कंपनियों की कमाई (Earnings) उम्मीद से कम रही
मार्केट का सबसे बड़ा इंजन Corporate Earnings होती हैं।
लेकिन FY25 और FY26 में कई सेक्टरों में मुनाफे की वृद्धि धीमी रही।
FMCG
Auto
IT
Banking
Consumer
कई कंपनियों ने उम्मीद से कमजोर परिणाम दिए, जिससे बाजार में उत्साह कम हुआ।
3. Foreign Investors (FII) ने लगातार बिकवाली की
2024 के अंत से FIIs ने भारतीय बाजार से बड़ी मात्रा में पैसा निकाला।
मुख्य कारण
अमेरिका में ऊँची ब्याज दरें
मजबूत डॉलर
चीन के बाजार में आकर्षक वैल्यूएशन
Global Fund Rotation
जब FII बिकवाली करते हैं, तो Nifty और Sensex पर दबाव बनता है। अक्टूबर 2024 में रिकॉर्ड विदेशी बिकवाली और कमजोर आय के कारण बाजार में बड़ी गिरावट देखी गई।
4. Small Cap में Bubble बन गया था
2023-24 में
Small Cap
Micro Cap
SME Stocks
में जरूरत से ज्यादा तेजी आ गई।
SEBI और AMC ने भी कई बार चेतावनी दी कि इस सेगमेंट में वैल्यूएशन बहुत ऊँचे हैं।
इसके बाद इन शेयरों में बड़ी गिरावट और लंबी समय तक कमजोरी रही।
5. Global घटनाओं ने दबाव बनाया
2025-26 में लगातार कई अंतरराष्ट्रीय घटनाएँ हुईं:
अमेरिका की टैरिफ नीतियाँ
डॉलर मजबूत होना
Middle East तनाव
तेल की कीमतों में तेजी
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता
इन कारणों से विदेशी निवेशकों का जोखिम लेने का उत्साह कम हुआ।
6. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमत
भारत अपनी अधिकांश तेल जरूरत आयात करता है।
जब Crude Oil बढ़ता है
Inflation बढ़ती है
कंपनियों का खर्च बढ़ता है
सरकार पर दबाव आता है
Corporate Profit घटता है
इसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ता है। हाल के महीनों में तेल की कीमतों में तेजी ने भी बाजार को दबाव में रखा।
7. Profit Booking होना जरूरी था
2020–2024 के बीच बहुत से निवेशकों ने 100%, 200%, 300% तक का रिटर्न कमाया।
बड़े निवेशकों और संस्थागत निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे बाजार में तेजी की गति रुक गई।
8. Liquidity पहले जैसी नहीं रही
2020-22 में
कम ब्याज दरें
सस्ता पैसा
भारी निवेश
था।
बाद में ब्याज दरें बढ़ीं, जिससे वैश्विक Liquidity कम हुई और बाजार की तेजी भी धीमी पड़ी।
9. Index नहीं बढ़ा, लेकिन Sector Rotation चलता रहा
बहुत लोगों को लगता है कि मार्केट नहीं चला।
असलियत में
Defence
Railways
Capital Goods
Power
PSU
Healthcare
जैसे सेक्टरों में अलग-अलग समय पर अच्छी तेजी आई।
यानी पैसा पूरे बाजार में नहीं, बल्कि चुनिंदा सेक्टरों में घूमता रहा।
10. Time Correction
हर Bull Market में एक चरण ऐसा आता है जब
Index ज्यादा नहीं बढ़ता।
कंपनियों की कमाई धीरे-धीरे बढ़ती है।
वैल्यूएशन सामान्य होते हैं।
इसे Time Correction कहा जाता है।
2024 के बाद का समय काफी हद तक ऐसा ही रहा। कई विश्लेषकों का मानना है कि सितंबर 2024 से चली आ रही अंडरपरफॉर्मेंस के पीछे यही प्रमुख कारण रहे और अब वैल्यूएशन पहले की तुलना में अधिक संतुलित दिख रहे हैं।
निवेशकों के लिए सीख
यदि आपका निवेश 10–15 वर्षों का है, तो ऐसे दौर सामान्य हैं। इतिहास बताता है कि:
तेजी के बाद अक्सर 1–2 साल का ठहराव आता है।
इसी समय SIP सबसे अधिक यूनिट्स खरीदती है।
अगले Bull Run का आधार अक्सर इसी दौर में बनता है।
एक लाइन में कारण:
अक्टूबर 2024 के बाद बाजार इसलिए नहीं भागा क्योंकि वैल्यूएशन बहुत महंगे थे, कंपनियों की कमाई कमजोर रही, FIIs ने बिकवाली की, वैश्विक अनिश्चितताएँ बढ़ीं, तेल महंगा हुआ और बाजार ने "Price Correction" की बजाय "Time Correction" का रास्ता चुना।