12/12/2013
ग्रहो का प्रभाव और आप
सूर्य:- सूर्य आत्मा,पिता,शौर्य,पराक्रम,राजसत्ता,तथा शासन, का कारक होता है।कुण्ड्ली मे सूर्य शुभ प्रभाव मे होतो व्यक्ति मंत्री ,राज्यधिकारी,प्रशासनिक सेवक,उच्चधिकारि या सरकारी नौकरी मे होता है।
सूर्य की शुभता के लिए पिता की सेवा एवं सूर्य को जल देना चाहिए।
चन्दमा :-चन्दमा,मन, माता,धन,जल,सफेद वस्तुए जैसे दुध, चावल का कारक होता है । कुण्ड्ली मे चन्द्र्मा शुभ प्रभाव होतो व्यक्ति नवसेना,पानी से संबंधित, शराब, औषधिनिर्माण,जैसे कार्यो मे होता है।
चन्द्रमा की शुभता के लिए माता की सेवा शुक्ल पक्ष के चन्द्र के दर्शन करना चाहिए।
मंगल :-यह छोटे भाई ,साहस,पराक्रम, भूमि,अग्नि,शस्त्र,क्रुरता का कारक होता है।कुण्ड्ली मे मंगल शुभ प्रभाव मे होतो व्यक्ति भवन निर्माण अग्नि से संबंधित कार्य, सेना, पुलिस से जुडा होता है।
मंगल की शुभता के लिए भाई से प्रेम रखना चाहिए,हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए।
बुध :-कुण्ड्ली मे बुध वाणी, बुध्दि,किशोर बच्चो,बहन ,तथा त्वचा, का कारक है।कुण्ड्ली मे जब यह शुभ हो तो व्यक्ति वाणी ,लेखन, तथा संवाद से संबंधित कार्य जैसे-गायन,वकील,ज्योतिष लेखक , कम्प्यूटर,मीडिया एवं खेल या बच्चो से संबंधित कार्य करते है।
बुध की शुभता के लिए बच्चो एवं बहनो को खुश रखना चाहिए।भगवान गणेश की उपासना करनी चाहिए।
गुरु: -कुण्ड्ली मे गुरु धर्म, विद्या, धन, ज्ञान, गुरु, पुत्र,बडे भाई, स्त्री के लिए वैवाहिक सुख का कारक होता है।कुण्ड्ली मे जब यह शुभ होतो व्यक्ति अध्यापक ज्योतिषि,कथावाचक, वैद्य,कैशियरहोता है। अर्थात वह किसी उच्चपदासीन ज्ञानी व्यक्ति होता है।
गुरु की शुभता के लिए बड़ेजनो,साधु-संतो,गुरुजनो, की सेवा एवं भगवान विष्णु की भक्ति करनी चाहिए।
शुक्र:- कुण्ड्ली मे शुक्र सौन्दर्य-श्रंगार, शयन-सुख, भोग-विलास, मनोरंजन,और,स्त्री,का कारक होता है।कुण्ड्ली मे जब यह शुभ होतो व्यक्ति गायन, नाच ,मीडिया ,फिल्म, फैशन, कला, डिजाइनिग,स्त्रियो के या स्त्रियो से संबंधित कार्य करता है।
शुक्र की शुभता के लिए अपनी पत्नी को खुश रखना चाहिए एवं लक्ष्मी जी की पूजा करनी चाहिए।
शनि:-शनि कुण्ड्ली मे रोग, आयु, म्रत्यु, नौकर, भूगर्भ वस्तुएँ ,बुरी-दूषित चीजे जैसे-कूडा, अँधेरा ,दरिद्रता,कर्ज,जुआ के कारक है। शनि शुभ हो तो व्यक्ति खनिज वस्तुयें जैसे-लोहो, पेट्रोल,गैस,के कार्य ,कबाड के कार्य, मजदूरो के द्वारा किया गए कार्य-फैक्ट्री,ठेकेदारी आदि करता है।
शनि कि शुभता के लिए दरिद्र,रोगी,बुजुर्गो,कि सेवा करनी चाहिए। हनुमान जी एवं शनि महाराज की पूजा करनी चाहिए।
राहु: –यह छाया ग्रह है ।इस के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन मे आस्मिक लाभ –हानि होती है। इसकी शुभता से व्यक्ति फोटोग्रफी,शेयर, गूढ रहस्यम्यी कार्य-जासूसी,ज्योतिष,तंत्र-मंत्र खोज विज्ञान,से संबंधित कार्य करता है।
राहु की शुभता के लिए सरस्वती जी की पूजा करनी चाहिए। कोढी,अपंग,व्यक्तियो की सेवा करनी चाहिए ।
केतु:- यह भी एक छाया ग्रह है।इसके प्रभाव से व्यक्ति के जीवन मे आस्मिक लाभ –हानि होती है। इसकी शुभता से व्यक्ति गूढ्विद्दा,शल्य चिकित्सा,रसायनिक द्रव,जहरीले द्रव, औषधी का कार्य करता है।
केतु की शुभता के लिए गणेश जी की पूजा करनी चाहिए। कोढी ,अपंग,व्यक्तियो की सेवा करनी चाहिए ।