Singheswar Nath Mandir Shivnagar Danre

Singheswar Nath Mandir Shivnagar Danre Singheswar Nath temple is at Danre viilage in Godda district.It is on the bank of chir river, where

03/01/2026
ॐ नमः पार्वती पतये, हर हर महादेव🙏🏻
21/11/2025

ॐ नमः पार्वती पतये, हर हर महादेव🙏🏻

07/09/2025

चंद्र ग्रहण के समय इस स्तोत्र को जरूर सुने ।।।

#चन्द्रग्रहण

*इस पोस्ट को सेव करके सुरक्षित कर ले...*पुरातन ग्रंथों के अनुसार, प्राचीन ऋषि-मुनि एवं दार्शनिक हमारे आदि वैज्ञानिक थे, ...
23/07/2024

*इस पोस्ट को सेव करके सुरक्षित कर ले...*
पुरातन ग्रंथों के अनुसार, प्राचीन ऋषि-मुनि एवं दार्शनिक हमारे आदि वैज्ञानिक थे, जिन्होंने अनेक आविष्कार किए और विज्ञान को भी ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

◆ *अश्विनीकुमार 😗
मान्यता है कि ये देवताओं के चिकित्सक थे। कहा जाता है कि इन्होंने उड़ने वाले रथ एवं नौकाओं का आविष्कार किया था।

◆ *धन्वंतरि 😗
इन्हें आयुर्वेद का प्रथम आचार्य व प्रवर्तक माना जाता है। इनके ग्रंथ का नाम धन्वंतरि संहिता है। शल्य चिकित्सा के आदि प्रवर्तक सुश्रुत और नागार्जुन इन्हीं की परंपरा में हुए थे।

◆ *ऋषि भारद्वाज 😗
आधुनिक विज्ञान के अनुसार राइट बंधुओं ने वायुयान का आविष्कार किया। वहीं हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार कई सदियों पहले ही ऋषि भारद्वाज ने विमानशास्त्र के जरिए वायुयान को गायब करने के असाधारण विचार से लेकर, एक ग्रह से दूसरे ग्रह व एक दुनिया से दूसरी दुनिया में ले जाने के रहस्य उजागर किए। इस तरह ऋषि भारद्वाज को वायुयान का आविष्कारक भी माना जाता है।

◆ *ऋषि विश्वामित्र 😗
ऋषि बनने से पहले विश्वामित्र क्षत्रिय थे। ऋषि वशिष्ठ से कामधेनु गाय को पाने के लिए युद्ध में मिली हार के बाद तपस्वी हो गए। विश्वामित्र ने भगवान शिव से अस्त्र विद्या पाई। इसी कड़ी में माना जाता है कि आज के युग में प्रचलित प्रक्षेपास्त्र या मिसाइल प्रणाली हजारों साल पहले विश्वामित्र ने ही खोजी थी।

◆ *गर्गमुनि 😗
गर्ग मुनि नक्षत्रों के खोजकर्ता माने जाते हैं। यानी सितारों की दुनिया के जानकार। ये गर्गमुनि ही थे, जिन्होंने श्री कृष्ण एवं अर्जुन के बारे में नक्षत्र विज्ञान के आधार पर जो कुछ भी बताया, वह पूरी तरह सही साबित हुआ। कौरव-पांडवों के बीच महाभारत युद्ध विनाशक रहा। इसके पीछे वजह यह थी कि युद्ध के पहले पक्ष में तिथि क्षय होने के तेरहवें दिन अमावस थी। इसके दूसरे पक्ष में भी तिथि क्षय थी। पूर्णिमा चौदहवें दिन आ गई और उसी दिन चंद्रग्रहण था। तिथि-नक्षत्रों की यही स्थिति गर्ग मुनि जी ने पहले बता दिए थे।

◆ *पतंजलि 😗
आधुनिक दौर में जानलेवा बीमारियों में एक कैंसर या कर्करोग का आज उपचार संभव है। किंतु कई सदियों पहले ऋषि पतंजलि ने कैंसर को रोकने वाला योगशास्त्र रचकर बताया कि योग से कैंसर का भी उपचार संभव है।

◆ *महर्षि कपिल 😗
सांख्य दर्शन के प्रवर्तक व सूत्रों के रचयिता थे महर्षि कपिल, जिन्होंने चेतना की शक्ति एवं त्रिगुणात्मक प्रकृति के विषय में महत्वपूर्ण सूत्र दिए थे।

◆ *कणाद ऋषि 😗
वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक और अणु विज्ञान के प्रणेता रहे हैं। इनके समय अणु विज्ञान दर्शन का विषय था, जो बाद में भौतिक विज्ञान में आया।

◆ *सुश्रुत 😗
ये शल्य चिकित्सा पद्धति के प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य थे। इन्होंने सुश्रुत संहिता नामक ग्रंथ में शल्य क्रिया का वर्णन किया है। सुश्रुत ने ही त्वचारोपण (प्लास्टिक सर्जरी) और मोतियाबिंद की शल्य क्रिया का विकास किया था। पार्क डेविस ने सुश्रुत को विश्व का प्रथम शल्य चिकित्सक कहा है।

◆ *जीवक 😗
सम्राट बिंबसार के एकमात्र वैद्य। उज्जयिनी सम्राट चंडप्रद्योत की शल्य चिकित्सा इन्होंने ही की थी। कुछ लोग मानते हैं कि गौतम बुद्ध की चिकित्सा भी इन्होंने की थी।

◆ *बौधायन 😗
बौधायन भारत के प्राचीन गणितज्ञ और शुलयशास्त्र के रचयिता थे। आज दुनिया भर में यूनानी उकेलेडियन ज्योमेट्री पढाई जाती है मगर इस ज्योमेट्री से पहले भारत के कई गणितज्ञ ज्योमेट्री के नियमों की खोज कर चुके थे। उन गणितज्ञ में बौधायन का नाम सबसे ऊपर है, उस समय ज्योमेट्री या एलजेब्रा को भारत में शुल्वशास्त्र कहा जाता था।

◆ *भास्कराचार्य 😗
आधुनिक युग में धरती की गुरुत्वाकर्षण शक्ति (पदार्थों को अपनी ओर खींचने की शक्ति) की खोज का श्रेय न्यूटन को दिया जाता है। किंतु बहुत कम लोग जानते हैं कि गुरुत्वाकर्षण का रहस्य न्यूटन से भी कई सदियों पहले भास्कराचार्यजी ने उजागर किया। भास्कराचार्यजी ने अपने ‘सिद्धांतशिरोमणि’ ग्रंथ में पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के बारे में लिखा है कि ‘पृथ्वी आकाशीय पदार्थों को विशिष्ट शक्ति से अपनी ओर खींचती है। इस वजह से आसमानी पदार्थ पृथ्वी पर गिरता है’।

◆ *चरक 😗
चरक औषधि के प्राचीन भारतीय विज्ञान के पिता के रूप में माने जातें हैं। वे कनिष्क के दरबार में राज वैद्य (शाही चिकित्सक) थे, उनकी चरक संहिता चिकित्सा पर एक उल्लेखनीय पुस्तक है। इसमें रोगों की एक बड़ी संख्या का विवरण दिया गया है और उनके कारणों की पहचान करने के तरीकों और उनके उपचार की पद्धति भी प्रदान करती है। वे स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण पाचन, चयापचय और प्रतिरक्षा के बारे में बताते थे और इसलिए चिकित्सा विज्ञान चरक संहिता में, बीमारी का उपचार करने के बजाय रोग के कारण को हटाने के लिए अधिक ध्यान रखा गया है। चरक आनुवांशिकी (अपंगता) के मूल सिद्धांतों को भी जानते थे।

◆ *ब्रह्मगुप्त 😗
7 वीं शताब्दी में ब्रह्मगुप्त ने गणित को दूसरों से परे ऊंचाइयों तक ले गये। गुणन के अपने तरीकों में उन्होंने लगभग उसी तरह स्थान मूल्य का उपयोग किया था, जैसा कि आज भी प्रयोग किया जाता है। उन्होंने गणित में शून्य पर नकारात्मक संख्याएं और संचालन शुरू किया। उन्होंने ब्रह्म मुक्त सिध्दांतिका को लिखा, जिसके माध्यम से अरब देश के लोगों ने हमारे गणितीय प्रणाली को जाना।

◆ *अग्निवेश 😗
ये शरीर विज्ञान के रचयिता थे।

◆ *शालिहोत्र 😗
इन्होंने पशु चिकित्सा पर आयुर्वेद ग्रंथ की रचना की।

◆ *व्याडि 😗
ये रसायन शास्त्री थे। इन्होंने भैषज (औषधि) रसायन का प्रणयन किया। अलबरूनी के अनुसार व्याडि ने ऐसा लेप बनाया था, जिसे शरीर पर मलकर वायु में उड़ा जा सकता था।

◆ *आर्यभट्ट 😗
इनका जन्म 476 ई. में कुसुमपुर ( पाटलिपुत्र ) पटना में हुआ था। ये महान खगोलशास्त्र और व गणितज्ञ थे। इन्होने ही सबसे पहले सूर्य और चन्द्र ग्रहण की व्याख्या की थी और सबसे पहले इन्होने ही बताया था की धरती अपनी ही धुरी पर धूमती है और इसे सिद्ध भी किया था। यही नही इन्होने सबसे पहले पाई के मान को निरुपित किया।

◆ *वराहमिहिर 😗
इनका जन्म 499 ई. में कपित्थ (उज्जैन ) में हुआ था। ये महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री थे। इन्होने पंचसिद्धान्तका नाम की पुस्तक लिखी थी जिसमे इन्होने बताया था कि अयनांश का मान 50.32 सेकेण्ड के बराबर होता है | इन्होने शून्य और ऋणात्मक संख्याओ के बीजगणितीय गुणों को परिभाषित किया।

◆ *हलायुध 😗
इनका जन्म 1000 ई. में काशी में हुआ था। ये ज्योतिषविद और गणितज्ञ व महान वैज्ञानिक थे। इन्होने अभिधानरत्नमाला या मृतसंजीवनी नमक ग्रन्थ की रचना की | इसमें इन्होने पास्कल त्रिभुज ( मेरु प्रस्तार ) का स्पष्ट वर्णन किया है। पुरातन ग्रंथों के अनुसार, प्राचीन ऋषि-मुनि एवं दार्शनिक हमारे आदि वैज्ञानिक थे, जिन्होंने अनेक आविष्कार किए और विज्ञान को भी ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

*नए भारत का वैश्विक संकल्प...*
*सनातन वैदिक धर्म...विश्व धर्म*
*अखंड हिंदु राष्ट्र भारत...विश्व गुरु भारत*

*धर्मो रक्षति रक्षितः...*🚩

हर हर महादेव ।
22/07/2024

हर हर महादेव ।

हर हर महादेव ।।।🙏🏻
30/03/2024

हर हर महादेव ।।।🙏🏻

क्या हमारे ऋषि मुनि पागल थे?जो कौवों के लिए खीर बनाने को कहते थे?और कहते थे कि कौवों को खिलाएंगे तो हमारे पूर्वजों को मि...
06/10/2023

क्या हमारे ऋषि मुनि पागल थे?

जो कौवों के लिए खीर बनाने को कहते थे?

और कहते थे कि कौवों को खिलाएंगे तो हमारे पूर्वजों को मिल जाएगा?

नहीं, हमारे ऋषि मुनि क्रांतिकारी विचारों के थे।
यह है सही कारण।

क्या पीपल या बड़ के बीज मिलते हैं?

इसका जवाब है नहीं....
बरगद या पीपल की कलम जितनी चाहे उतनी रोपने की कोशिश करो परंतु नहीं लगेगी।
कारण प्रकृति/कुदरत ने यह दोनों उपयोगी वृक्षों को लगाने के लिए अलग ही व्यवस्था कर रखी है।
यह दोनों वृक्षों के बीज कौवे खाते हैं और उनके पेट में ही बीज की प्रोसेसिंग होती है और तब जाकर बीज उगने लायक होते हैं। उसके पश्चात
कौवे जहां-जहां बीट करते हैं, वहां-वहां पर यह दोनों वृक्ष उगते हैं।
पीपल जगत का एकमात्र ऐसा वृक्ष है जो round-the-clock ऑक्सीजन O2 छोड़ता है और बरगद के औषधि गुण अपरम्पार है।
देखो अगर यह दोनों वृक्षों को उगाना है तो बिना कौवे की मदद से संभव नहीं है इसलिए कौवे को बचाना पड़ेगा।

और यह होगा कैसे?

मादा कौआ भादो महीने में अंडा देती है और नवजात बच्चा पैदा होता है।
तो इस नयी पीढ़ी के उपयोगी पक्षी को पौष्टिक और भरपूर आहार मिलना जरूरी है इसलिए ऋषि-मुनियों ने कौवों के नवजात बच्चों के लिए हर छत पर श्राद्ध के रूप मे पौष्टिक आहार की व्यवस्था कर दी।
जिससे कि कौवों की नई जनरेशन का पालन पोषण हो जाये......

इसलिए दिमाग को दौड़ाए बिना श्राद्ध करना प्रकृति के रक्षण के लिए नितांत आवश्यक है।
घ्यान रखना जब भी बरगद और पीपल के पेड़ को देखो तो अपने पूर्वज तो याद आएंगे ही क्योंकि उन्होंने श्राद्ध दिया था इसीलिए यह दोनों उपयोगी पेड़ हम देख रहे हैं।

सनातन धर्म पे उंगली उठाने वालों, पहले सनातन धर्म को जानो फिर उस पर ऊँगली उठाओ। जब आपका विज्ञान नही था, तब हमारे सनातन धर्म को पता था कि किस बीमारी का इलाज क्या है, कौन सी चीज खाने लायक है कौन सी नहीं...? अथाह ज्ञान का भंडार है हमारा सनातन धर्म और उनके नियम, मैकाले के शिक्षा पद्धति में पढ़ के केवल अपने पूर्वजों, ऋषि मुनियों के नियमों पर ऊँगली उठाने के बजाय , उसकी गहराई को जानिये 🙏

🚩जय सनातन जय हिंदुत्व🚩

ध्यान से देखें यही 4.5 फिट शिवलिंग राम मंदिर अयोध्या में विराजमान होंगे हर हर महादेव🚩 #नर्मदेश्वर शिवलिंग जो कि माँ नर्म...
19/08/2023

ध्यान से देखें यही 4.5 फिट शिवलिंग राम मंदिर अयोध्या में विराजमान होंगे हर हर महादेव🚩

#नर्मदेश्वर शिवलिंग जो कि माँ नर्मदा के पावन तट ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग से विश्व की अनमोल धरोवर अयोध्या में रामलला के नवनिर्मित मन्दिर मे विराजमान होंगे,यह कार्य माननीय चंपतराय जी ( महासचिव अयोध्या मंदिर ट्रस्ट) ने श्री 1008 नर्मदानंद बाप जी महाराज (श्री श्री नजर निहाल

(नित्यानंद)आश्रम,ओम्कारेश्वर) को यह कार्य सौपा है जब बाप जी महाराज जम्मू से अयोध्या राष्ट्र समर्पित धर्म यात्रा लेकर गए थे तो श्री चम्पतराय जी ने नर्मदेश्वर महादेब अयोध्या में विराजित हो इस हेतु आपसे चर्चा कर जिम्मेदारी सौपी गई थी।

4.5 फ़ीट के नर्मदेश्वर शिवलिंग साक्षात महादेब श्री राम मंदिर अयोध्या में विराजमान होंगे।
ऐसा शास्त्रों में वर्णन है कि माँ नर्मदा से प्राप्त कंकर शंकर होते हैं, और यह शिवलिंग तो रामजी की इच्छा से ही हरि-हर का मिलन होने जा रहा है।

18 अगस्त 2023 प्रात:10 बजे ओम्कारेश्वर से यह रथ यात्रा प्रारम्भ होगी,पहला रात्रि विश्राम महाकाल मंदिर परिसर उज्जैन,उज्जैन से शाजापुर,ब्यावरा,ग्वालियर,झांसी,लखनऊ,कानपुर,होते हुए अयोध्या जाएगी।

23 अगस्त 2023 अयोध्या पहुचकर श्री राम मंदिर में भगवान रामेश्वर विराजित होंगे।
आप सभी से विशेष अनुरोध है की आप सभी धर्मप्रेमी इस यात्रा से जुड़े, हरि-हर के मिलन के साक्षि बने।


#राममंदिर

आज से पवित्र और शुभ फलदायी बाबा श्री अमरनाथ जी की पवित्र यात्रा का शुभारंभ हो रहा है। 'देवाधिदेव' महादेव जी के दर्शन के ...
02/07/2023

आज से पवित्र और शुभ फलदायी बाबा श्री अमरनाथ जी की पवित्र यात्रा का शुभारंभ हो रहा है। 'देवाधिदेव' महादेव जी के दर्शन के लिए प्रस्थान कर रहें सभी श्रद्धालुओं एवं तीर्थ-यात्रियों को हार्दिक शुभकामनाएं।

सनातन संस्कृति में पवित्र अमरनाथ यात्रा भगवान महादेव के प्रति अगाध श्रद्धा का प्रतीक है। यह यात्रा समस्त जनों के जीवन में सुख, सौभाग्य और समृद्धि लाए, यही मंगलकामना है।

Address

Singheswar Nath Mandir, Shivnagar, Danre, Block/Poreyahat, District/Godda, Jharhand
Godda
814133

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Singheswar Nath Mandir Shivnagar Danre posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share