04/01/2026
मैं दिनेश कुमार गौतम, अपने पुत्र शिवम दत्त गौतम (MBA छात्र, सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल बिज़नेस – SIIB, पुणे) की मृत्यु से संबंधित घटना का निम्नलिखित तथ्यात्मक विवरण प्रस्तुत कर रहा हूँ।
घटना की शुरुआत
दिनांक 2 दिसंबर को मेरा पुत्र शिवम कॉलेज परिसर में आयोजित फुटसल मैच में भाग ले रहा था। खेल के दौरान उसे अचानक असहजता, बेचैनी और सांस लेने में परेशानी महसूस हुई।
स्थिति को समझते हुए उसने स्वयं सब्स्टीट्यूट (बदलाव खिलाड़ी) माँगा और खेल छोड़कर मैदान के एक कोने में जाकर बैठ गया।
कुछ समय तक वह वहीं बैठा रहा, लेकिन उसकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उसकी स्थिति और बिगड़ी और वह वहीं बैठे-बैठे बेहोश होकर गिर पड़ा।
चूँकि उस समय अधिकांश लोग मैच देखने में व्यस्त थे, इसलिए लगभग एक मिनट बाद लोगों का ध्यान उस पर गया।
बेहोशी के बाद
जब छात्रों ने मेरे पुत्र की स्थिति को देखा, तब वह बेहोश था और उसकी सांस असामान्य / कम हो रही थी। यह स्पष्ट रूप से एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी थी।
छात्रों द्वारा उसे तत्काल कॉलेज के मेडिकल रूम ले जाने का प्रयास किया गया।
मेडिकल रूम तक पहुँचने में कठिनाई
कॉलेज का मेडिकल रूम पहली मंज़िल पर स्थित है, जहाँ पहुँचने के लिए केवल सीढ़ियाँ हैं, कोई लिफ्ट उपलब्ध नहीं है।
इसके अतिरिक्त:
• कोई स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं था
• कोई व्हीलचेयर उपलब्ध नहीं थी
इन परिस्थितियों में छात्रों को मेरे पुत्र को अपने हाथों में उठाकर सीढ़ियों से ले जाने का प्रयास करना पड़ा। स्थिति अत्यंत गंभीर होने के कारण और सीढ़ियाँ चढ़ा पाना संभव न होने से, उन्हें मेडिकल रूम के नीचे ही लिटाना पड़ा।
मेडिकल सहायता की गंभीर कमी
मेडिकल रूम में उपस्थित नर्स द्वारा न तो CPR दिया गया और न ही कोई ऑक्सीजन सपोर्ट उपलब्ध कराया गया।
इसके अतिरिक्त:
• कॉलेज की ओर से कोई एम्बुलेंस की व्यवस्था नहीं की गई
• नर्स द्वारा छात्रों से ऑनलाइन कैब बुक करने को कहा गया
छात्रों ने कैब बुक की, परंतु वह रद्द हो गई, जिससे और अधिक कीमती समय नष्ट हुआ।
ऑटो-रिक्शा के माध्यम से ले जाना
कैब रद्द होने के बाद छात्रों ने ऑटो-रिक्शा की व्यवस्था करने का प्रयास किया, जिसमें भी काफी समय लग गया।
इस पूरे समय के दौरान:
• कोई डॉक्टर या प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ मेरे पुत्र के साथ नहीं था
• कोई CPR नहीं दिया गया
• कोई ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं कराई गई
इसके बाद छात्रों द्वारा मेरे पुत्र को फिर से अपने हाथों में उठाकर कॉलेज गेट तक पहुँचाया गया और ऑटो के माध्यम से अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल पहुँचने की स्थिति
ऑटो में ले जा