26/08/2023
हाल ही में स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने पूरे भारत में कारीगरों और महिला स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से दो महत्त्वपूर्ण पहलों की घोषणा की।
ये पहलें हैं: विश्वकर्मा योजना और लखपति दीदी योजना तथा इसके तहत महिला स्वयं सहायता समूहों हेतु ड्रोन का प्रावधान।
विश्वकर्मा योजना:
परिचय:
विश्वकर्मा योजना विशेष रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय के पारंपरिक शिल्प कौशल में कुशल व्यक्तियों के उत्थान के लिये शुरू की गई एक अग्रणी योजना है।
इस योजना का नाम दिव्य वास्तुकार और शिल्पकार विश्वकर्मा के नाम पर रखा गया है, यह विभिन्न व्यवसायों में लगे कारीगर परिवारों को कौशल प्रदान करने की गुरु-शिष्य परंपरा को संरक्षण और विकास पर केंद्रित है।
प्रमुख विशेषता:
मान्यता और समर्थन: इस योजना में नामांकित कारीगरों और शिल्पकारों को पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र और एक पहचान पत्र प्रदान किया जाएगा।
ये कामगार और शिल्पकार 5% की रियायती ब्याज दर पर 1 लाख रुपए (पहली किश्त) और 2 लाख रुपए (दूसरी किश्त) तक की संपार्श्विक-मुक्त ऋण सहायता के लिये भी पात्र होंगे।
कौशल विकास और सशक्तीकरण: विश्वकर्मा योजना को वर्ष 2023-2024 से 2027-2028 तक पाँच वित्तीय वर्षों के लिये 13,000 करोड़ रुपए से 15,000 करोड़ रुपए तक का बजट आवंटित किया गया है।
यह योजना कौशल प्रशिक्षण के लिये 500 रुपए और आधुनिक उपकरणों की खरीद के लिये 1,500 रुपए का वज़ीफा प्रदान करती है।
सीमा और कवरेज: इस योजना में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में 18 पारंपरिक व्यापार शामिल हैं। इन व्यवसायों में बढ़ई, नाव बनाने वाले, लोहार, कुम्हार, मूर्तिकार, मोची, दर्जी और आदि शामिल हैं।
पंजीकरण और कार्यान्वयन: विश्वकर्मा योजना के लिये पंजीकरण का कार्य गाँवों में सामान्य सेवा केंद्रों पर पूरा किया जा सकता है।
इस योजना के लिये जहाँ केंद्र सरकार धन उपलब्ध कराएगी, वहीं राज्य सरकारों से भी सहयोग मांगा जाएगा।
मूल्य शृंखलाओं के साथ एकीकरण: इस योजना का एक उल्लेखनीय उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कारीगरों को घरेलू तथा वैश्विक दोनों मूल्य शृंखलाओं में निर्बाध रूप से एकीकृत किया जाए, ताकि उनकी बाज़ार पहुँच और अवसरों में वृद्धि हो।