14/10/2022
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मौत खरीदते हैं लोग जा जाकर मयखाने में,
मैं तो साहब सुखी जीवन बेचता हूँ।
हाँ मैं बीमा बेचता हूँ।
गुटखा, तम्बाकू और न जाने किस किस रूप में लोग बीमारियाँ खरीदते हैं,
मैं तो साहब बेहतर ईलाज बेचता हूँ।
हाँ मैं बीमा बेचता हूँ।
जन्म से मरण तक लोग बुनते हैं सपने,
मैं उन सपनों को पूरा करने की कागजात बेचता हूँ।
हाँ मैं बीमा बेचता हूँ।
गमों की आंधी ने उजाड़ा है जिस घर को, मै उस घर में मुस्कान बेचता हूँ
हाँ मैं बीमा बेचता हूँ।
उजड गई जिसकी दुनिया, बिखर गया जिनका जीवन, मैं उन्हें सारा जहान बेचता हूँ।
हाँ मैं बीमा बेचता हूँ।
जरा सी बात पर लोग तोड़ लेते हैं रिश्ते, मैं उन टुटे रिश्तों की सिलाई बेचता हूँ।
हाँ मैं बीमा बेचता हूँ।
मुन्ना की पढाई और मुनिया के शादी की शहनाई बेचता हूँ, दादी और दद्दू के बुढापे की दवाई बेचता हूँ।
हाँ मैं बीमा बेचता हूँ।
मैं तो साहब आपकी जरूरत बेचता हूँ, आपके खुशियों के खातिर कुछ पल खूबसूरत बेचता हूँ।
हाँ मैं बीमा बेचता हूँ।
मै सड़क पर दौड़ता हूँ साहब, जानते हैं क्यूँ? क्योंकि मैं नहीं चाहता की कल आपके अपनो को सड़क पे आना पडे।
हाँ मैं बीमा बेचता हूँ।
मैं परिवार को खुश रखने का जिम्मा बेचता हूँ...
हाँ साहब मैं बीमा बेचता हूँ।
मैं सोचता था इतनी खूबियों के बाद भी मुझसे क्यूँ भागते हैं लोग, अब समझ में आया लोग मुझसे नहीं अपनी जिम्मेवारियों से भागते हैं।
हा साहब मैं खुशिया बाटता हू, हा साहव मैं तो बीमा बेचाता हू....🕺🏻