27/12/2016
Thought of the day
We are nothing, but v can be a , ONE
इस व्यापक ब्रह्माण्ड में हमारा वजूद रेत के एक कण से भी कहीं कम है, उदहारण के तौर पर cosmic calender, के अनुसार 13.8 बिलियन (लगभग 14 अरब वर्ष) हमारे ब्रह्माण्ड का जीवन काल मात्र एक साल के, हमारे द्वारा निर्धारित केलिन्डर में दर्शाया गया है. जिसमे हमारा 80 -100 साल का जीवन मात्र, एक जुगनू के सिर्फ एक light blink के समान है.
कितना व्यापक है ये ब्रह्माण्ड, कितना विशाल, कितना अनंत, हमारे अस्तित्व के सामने.
हमारा जीवन काल मात्र एक जुगनू का light blink.......
अहम्, वहम , क्रोध , घृणा , लालच , डर , ईर्ष्या , शोक और ना जाने क्या क्या से परिपूर्ण हमारे जीवन काल का हिस्सा होते हैं
इस छोटे से जीवन काल में इतना कुछ ? तो शायद रेत का एक कण भी हमसे कहीं विशाल है.
क्या किआ जाए ? कैसे विशाल बना जाए ? कैसे इस ब्रह्माण्ड की तरह व्यापक बना जाए ?
कैसे सीना तान के, इस ब्रह्माण्ड के सामने, अपने विशाल वजूद के साथ, अपने व्यापक व्यतित्व के साथ खड़ा हुआ जाए।।
ज्ञान...... सिर्फ ज्ञान एकत्र करके , ज्ञान को आत्म सात करके, इस ब्रह्माण्ड के सामने अपना विशाल व् व्यापक वजूद लिए अपनी मौजादगी दर्ज कर सकते हैं।।
बिखरा पड़ा है...... पुस्तकों में, ग्रंथो में, परिस्थितियों में , जो कि हमारा विद्यालय है और उनका आत्म मंथन हमारा गुरु।।
विचार व् लेखक
Vikrant singh MD (aquadrink.in) HVM beam pvt Ltd
Sr vice president (u.p)
Akhil bharat hindu mahasabha
सत् नाम श्री वाहे गुरु