24/11/2019
ज्ञान चर्चा
नाम का अर्थ
हम सभी के नाम जो हमारे माता पिता जी ने रखे उनका एक अर्थ होता है। जैसे हरिहर मतलब हरि को जपना, ऐसे ही देवताओं के नाम पर नाम रखे जाते थे ताकि उन्हें आवाज़ दे तो भगवान का भी सिमरन हो जाये।
वक्त बदला नाम छोटे रखने लगे जैसे पोंटी, मोंटी, बिल्लू, पप्पू, चंगा, रोमी जिनका कोई अर्थ नही होता इनका प्रचलन हो गया।
ऐसे ही पहले घर मे माताजी, पिताजी, चाचाजी, ताऊजी जैसे नाम से पुकारते थे आज उसकी जगह मम्मी, पापा, डेड, मोम, पा, अंकल, आंटी, कज़न ने ले ली है। जिनका भी अर्थ ढूंढो तो और ही निकलता है। मतलब बिना अर्थ या द्विअर्थी अर्थ निकलते दिखते है। और लोग इसमे ढलते गए और आप इस पर किसी से बात करेंगे तो वो आपको घूरेगा ये कौन सी नई दुनिया से आया है।
इस पर एक रोचक कहानी है जो मेरे मित्र ने भेजी थी कि एक बार एक पिंजरे में कुछ बंदरो को रखा गया और ऊपर एक केले का गुच्छा टांग दिया गया। और एक सीढ़ी लगाई गई।अब एक बंदर ने केले देखे वो जैसे ही सीढ़ी पर चढ़ा उस पर ठंडे पानी की बौछार फेंकी गई और बाकी बंदरो पर भी फेंकी गई। फिर थोड़ी देर बाद दूसरा बन्दर चढ़ा तो फिर पानी की बौछार पड़ी और सभी बंदरो पर पड़ी। अब बंदर समझ गए। जैसे ही कोई बन्दर केले के लालच में ऊपर चढ़ता सभी बन्दर उसे खींच लेते और खूब पिटाई करते।
कुछ समय बाद उन्होंने एक बंदर को पिंजरे से निकाल कर एक दूसरा नया बन्दर पिंजरे में डाल दिया । वो नया बन्दर केलो को देख जैसे चढ़ा सभी ने मिलकर उसे पीट दिया। अब वो बन्दर आराम से बैठ गया। धीरे धीरे उन्होंने सारे पुराने बन्दर बदल कर नए कर दिए। पर जैसे ही कोई बन्दर चढ़ता सब पीटते।
पुराने बंदरो को तो पता था कि पानी पड़ेगा इसलिये पीटते थे पर नए बंदरो को तो पता नही था फिर भी वो नये बन्दर को पीटते थे।
इस कहानी का अर्थ यह है कि हम भी उन्ही में से है अगर कोई अब कुछ नया करना चाहे तो.....
मंनोज शर्मा "मन"