Ritish Online Marketing

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श्री राम नवमी की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं 💐💐💐💐
10/04/2022

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💐💐💐💐

Power of network marketing
21/01/2018

Power of network marketing

17/09/2017
18/04/2017

एक दिन मैंने लिया था निर्णय,
मुझे "आम" बन नहीं मरना है ।
नाज कर सके सब मुझ पर,
कोई ऐसा काम करना है।।

इक अवसर को उम्मीद बना कर,
निकल पड़ा विजय पथ पर।
ताने सुने, व्यंग्य सुने पर,
चलता रहा में हिम्मत कर।।

कभी थी जीत कभी हताशा,
पर मैंने छोड़ी नहीं आशा।
देखो मंजिल पास आ रही,
देता रहा में खुद को दिलासा।।

धन, मित्र व सुविधाएं आई,
वक्त थोड़ा लगा जरूर।
बिना दंभ के डटा रहा,
हो गया में सफल मशहूर।।

जिन - जिन ने विरोध किया था,
वे सारे पछता रहे हैं ।
काश हम भी जुड़ गए होते,
यह सोच दुख मना रहे हैं।।

18/04/2017

एक चूहा किसान के घर में बिल बना कर रहता था. एक दिन चूहे ने देखा कि किसान और उसकी पत्नी एक थैले से कुछ निकाल रहे हैं. चूहे ने सोचा कि शायद कुछ खाने का सामान है.
उत्सुकतावश देखने पर उसने पाया कि वो एक चूहेदानी थी. ख़तरा भाँपने पर उस ने पिछवाड़े में जा कर कबूतर को यह बात बताई कि घर में चूहेदानी आ गयी है.
कबूतर ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि मुझे क्या? मुझे कौनसा उस में फँसना है?
निराश चूहा ये बात मुर्गे को बताने गया.
मुर्गे ने खिल्ली उड़ाते हुए कहा... जा भाई..ये मेरी समस्या नहीं है.
हताश चूहे ने बाड़े में जा कर बकरे को ये बात बताई... और बकरा हँसते हँसते लोटपोट होने लगा
उसी रात चूहेदानी में खटाक की आवाज़ हुई जिस में एक ज़हरीला साँप फँस गया था.
अँधेरे में उसकी पूँछ को चूहा समझ कर किसान की पत्नी ने उसे निकाला और साँप ने उसे डंस लिया.
तबीयत बिगड़ने पर किसान ने वैद्य को बुलवाया. वैद्य ने उसे कबूतर का सूप पिलाने की सलाह दी.
कबूतर अब पतीले में उबल रहा था.
खबर सुनकर किसान के कई रिश्तेदार मिलने आ पहुँचे जिनके भोजन प्रबंध हेतु अगले दिन मुर्गे को काटा गया.
कुछ दिनों बाद किसान की पत्नी मर गयी... अंतिम संस्कार और मृत्यु भोज में बकरा परोसने के अलावा कोई चारा न था......
चूहा दूर जा चुका था...बहुत दूर ...........
अगली बार कोई आप को अपनी समस्या बातये और आप को लगे कि ये मेरी समस्या नहीं है तो रुकिए और दुबारा सोचिये....

By newly diamond om prakash sir
15/04/2017

By newly diamond om prakash sir

13/04/2017

एक दिन एक व्यक्ति ऑटो से रेलवे स्टेशन जा रहा
था। ऑटो वाला बड़े आराम से ऑटो चला रहा
था। एक कार अचानक ही पार्किंग से निकलकर
रोड पर आ गयी। ऑटो चालक ने तेजी से ब्रेक
लगाया और कार, ऑटो से टकराते टकराते बची।
कार चालक गुस्से में ऑटो वाले को ही भला-
बुरा कहने लगा जबकि गलती कार- चालक की
थी।
ऑटो चालक ने कार वाले की बातों पर गुस्सा
नहीं किया और क्षमा माँगते हुए आगे बढ़ गया।
ऑटो में बैठे व्यक्ति को कार वाले की हरकत पर
गुस्सा आ रहा था ।
उसने ऑटो वाले से पूछा, "तुमने उस कार वाले को
बिना कुछ कहे ऐसे ही क्यों जाने दिया? उसने
तुम्हें भला-बुरा कहा जबकि गलती तो उसकी
थी। हमारी किस्मत अच्छी है, नहीं तो उसकी
वजह से हम अभी अस्पताल में होते।"
ऑटो वाले ने कहा, "साहब बहुत से लोग गार्बेज
ट्रक (कूड़े का ट्रक) की तरह होते हैं। वे बहुत सारा
कूड़ा अपने दिमाग में भरे हुए चलते हैं। जिन चीजों
की जीवन में कोई ज़रूरत नहीं होती उनको मेहनत
करके जोड़ते रहते हैं जैसे क्रोध, घृणा, चिंता,
निराशा आदि। जब उनके दिमाग में इनका कूड़ा
बहुत अधिक हो जाता है तो वे अपना बोझ
हल्का करने के लिए इसे दूसरों पर फेंकने का मौका
ढूँढ़ने लगते हैं।
इसलिए मैं ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखता हूँ और
उन्हें दूर से ही मुस्कराकर अलविदा कह देता हूँ।
क्योंकि अगर उन जैसे लोगों द्वारा गिराया
हुआ कूड़ा मैंने स्वीकार कर लिया तो मैं भी एक
कूड़े का ट्रक बन जाऊँगा और अपने साथ साथ
आसपास के लोगों पर भी वह कूड़ा गिराता
रहूँगा।
मैं सोचता हूँ जिंदगी बहुत ख़ूबसूरत है इसलिए जो
हमसे अच्छा व्यवहार करते हैं उन्हें धन्यवाद कहो
और जो हमसे अच्छा व्यवहार नहीं करते उन्हें
मुस्कुराकर माफ़ कर दो। हमें यह याद रखना
चाहिए कि सभी मानसिक रोगी केवल
अस्पताल में ही नहीं रहते हैं। कुछ हमारे आस-पास
खुले में भी घूमते रहते हैं।"
*प्रकृति के नियम:*
यदि खेत में बीज न डाले जाएँ तो कुदरत उसे
घास-फूस से भर देती है।
उसी तरह से यदि दिमाग में सकारात्मक विचार
न भरें जाएँ तो नकारात्मक विचार अपनी जगह
बना ही लेते हैं।
*दूसरा नियम है*
जिसके पास जो होता है वह वही बाँटता है।
"सुखी" सुख बाँटता है,
"दु:खी" दुःख बाँटता है,
"ज्ञानी" ज्ञान बाँटता है,
"भ्रमित" भ्रम बाँटता है, और
"भयभीत" भय बाँटता है।
जो खुद डरा हुआ है, वह औरों को डराता है,
चमका हुआ चमकाता है।
बिलकुल इसी तरह एक *"सफल"* इंसान वही

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