26/07/2026
एक अधूरी तैयारी... जिसने पूरे परिवार की दुनिया बदल दी
(बदला हुआ नाम – दीपक | स्थान – खिचड़ीपुर, पूर्वी दिल्ली)
दोस्तों,
मैं गिरीश कोहली, इंश्योरेंस कंसल्टेंट, LIC of India, मयूर विहार, दिल्ली।
आज मैं आपको एक ऐसी सच्चाई से प्रेरित कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जो शायद किसी की ज़िंदगी बदल दे।
इस कहानी का नाम है "काश... उस दिन फैसला कर लिया होता!"
दीपक, पूर्वी दिल्ली की खिचड़ीपुर री-सेटलमेंट कॉलोनी में रहने वाला एक साधारण युवक था। वह नोएडा की एक प्राइवेट कंपनी में सुपरवाइज़र की नौकरी करता था। उसकी मासिक आय लगभग ₹25,000 थी।
उसके परिवार में उसकी पत्नी और दो मासूम बच्चे थे—तीन साल का एक बेटा और केवल छह महीने की एक नन्ही बेटी।
तीन भाइयों में बंटवारे के बाद उसके हिस्से में केवल एक छोटा-सा कमरा आया था। उसी एक कमरे में उसका पूरा संसार बसता था। पत्नी 12वीं पास थी, लेकिन बच्चों के छोटे होने के कारण वह गृहिणी थी। पूरे परिवार की जिम्मेदारी केवल दीपक के कंधों पर थी।
पिछले लगभग दो वर्षों से मैं दीपक को बार-बार समझाता था कि जीवन में सबसे पहले अपनी आय का बीमा कराना चाहिए।
कई बार वह मेरी बात मान जाता था। एक-दो बार तो उसने प्रस्ताव फॉर्म पर हस्ताक्षर भी कर दिए। कभी फॉर्म अपने घर ले गया कि "कल जमा कर दूँगा।"
लेकिन हर बार कोई न कोई बहाना सामने आ जाता।
कभी घर का खर्च...
कभी बच्चों की जरूरत...
कभी कोई रिश्तेदारी...
और अक्सर उसकी पत्नी यही कहती—
"अभी पैसे बहुत जरूरी जगह लग रहे हैं, इंश्योरेंस बाद में देखेंगे।"
समय निकलता गया...
पॉलिसी लेने का "सही मुहूर्त" कभी नहीं आया।
लेकिन...
दुर्घटनाएँ कभी शुभ मुहूर्त देखकर नहीं आतीं।
कुछ दिन पहले जब दीपक रोज़ की तरह बाइक से दिल्ली से नोएडा अपने ऑफिस जा रहा था, तभी एक भीषण सड़क दुर्घटना हो गई।
भगवान की कृपा से उसकी जान तो बच गई...
लेकिन शरीर की कई हड्डियाँ टूट गईं।
डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि पहले जैसा काम कर पाना शायद अब संभव नहीं होगा।
अब ज़रा सोचिए...
जिस घर की रोटी केवल एक व्यक्ति की कमाई से चलती थी, जब वही कमाने वाला बिस्तर पर आ जाए...
तो सबसे पहले किसकी आँखों से नींद उड़ती है?
उस पत्नी की...
जो दो साल तक कहती रही—
"अभी इंश्योरेंस की क्या ज़रूरत है?"
आज वही पत्नी अस्पताल के बाहर बैठकर सिर्फ एक बात दोहरा रही है—
"काश... हमने उस समय पॉलिसी ले ली होती।"
अगर दीपक ने समय रहते LIC की उपयुक्त पॉलिसी के साथ दुर्घटना लाभ (Accidental Benefit Rider) लिया होता, तो परिस्थितियों के अनुसार उसे दुर्घटना से जुड़े अतिरिक्त लाभ मिल सकते थे। कई योजनाओं में दुर्घटना के कारण मृत्यु होने पर मूल बीमित राशि के अतिरिक्त समान राशि का लाभ (यानी कुल मिलाकर दोगुना भुगतान) मिल सकता है, और कुछ मामलों में स्थायी विकलांगता होने पर नियमों के अनुसार अतिरिक्त वित्तीय सहायता या किस्तों में लाभ भी उपलब्ध हो सकता है। लाभ हमेशा चुनी गई पॉलिसी, राइडर और उसके नियमों व शर्तों पर निर्भर करते हैं।
शायद उस परिवार की आर्थिक लड़ाई इतनी कठिन नहीं होती।
दोस्तों,
हम मोबाइल बदलने के लिए पैसे जोड़ लेते हैं...
त्योहारों पर हजारों रुपये खर्च कर देते हैं...
लेकिन जिस इंसान की कमाई से पूरा घर चलता है, उसकी सुरक्षा को हम टालते रहते हैं।
याद रखिए—
ज़रूरत बीमा की नहीं पड़ती... ज़रूरत उस सुरक्षा की पड़ती है, जो बीमा समय आने पर देता है।
इंश्योरेंस कभी खर्च नहीं होता, यह परिवार के भविष्य की सुरक्षा में किया गया निवेश है।
यदि आपके परिवार की पूरी जिम्मेदारी भी आपके कंधों पर है, तो आज ही अपने भविष्य के बारे में सोचिए।
क्योंकि...
दुर्घटना पूछकर नहीं आती, लेकिन सही समय पर लिया गया निर्णय आने वाली मुश्किलों को बहुत हद तक संभाल सकता है।
आज निर्णय लीजिए, ताकि कल आपके परिवार को "काश..." न कहना पड़े।
धन्यवाद आपका इन्शुरेन्स एडवाइजर
गिरीश कोहली 099118 49075