22/11/2019
ज्ञान चर्चा
मेरा और हमारा
चर्चा में आया
मेरा क्या है। मेरा मैं, मेरे बच्चे, मेरी पत्नी, मेरा घर, मेरा काम , मेरा घर, मेरा व्यापार
हमारा क्या हमारा मोहल्ला, हमारा पार्क हमारा देश , हमारी शाखा, हमारा मन्दिर, हमारा समाज
जहाँ मैं लगता है वहां व्यक्ति ज्यादा जिम्मेदार दिखाई देता है। जैसे बच्चे को छोड़ना है 07.30 बजे तो छोड़ना है प्राथमिकता है। ये ही मन्दिर जाना है 07.30 बजे। वहां उसके लिये ये प्राथमिकता में नही होता। समाज का कोई काम हो तो वहां से कैसे बचना कैसे निकलना कोई दुर्घटना हो तो वहां से अपनी गाड़ी कितनी तेजी से निकालना, पड़ोस में किसी को हमारी जरूरत हो तो कैसे अपने को असहाय बताना और अपने को समस्या हो तो दूसरों से अपेक्षा की वो हमारे यहां समय पर उपस्थित हो।
कहने का भाव है जिसमे आप मेरा लगा देंगे जैसे देश मेरा है तो कोई सड़क पर थूकेगा तो आपको तनाव होगा। पार्क में कोई गंदगी करेगा तो आपको परेशानी होगी। मंदिर में आप प्रसन्नता अनुभव करोगे। जो प्रसन्नता बच्चे को छोड़ने में आपको मिलती है कि मैं नही छोडूंगा तो कौन छोड़ेगा।
ऐसा ही आपका शरीर भी है इसको भी हम अपना न मान कर दुनिया का मान लेते है इसकी ऊपरी तो देखभाल का ध्यान रखते है पर अंदरूनी लापरवाही रखते है पर जैसे ही बच्चे के साथ कोई घटना हो तो उसको पूरी सलाह देंगे या चिंतित होंगे।
कहने का भाव यह है कि हम जिसमे मैं जोड़ देते है उसके लिये सब मैनेज कर लेते है और जिसको हमारा वही उसके लिये बहाने बताना शुरू करते है। और कुछ नही हो सकता इस समाज का, देश का मोहल्ले का, कोई जागरूक नही है। अपने काम पर निकल जाते है।
मनोज शर्मा "मन"