11/12/2025
ये सारे पॉइंट्स ऑप्शन / फ्यूचर्स के Open Interest (OI) और प्राइस के रिलेशन के बारे में हैं और काफी हद तक सही हैं थोड़ा साफ़ भाषा में समझें।OI का बेसिक मतलबOI मतलब कितने कॉन्ट्रैक्ट अभी तक खुले हैं, यानी जो पोज़िशन ली गई हैं पर अभी तक स्क्वेयर-ऑफ / सेटल नहीं हुई हैं हर नया Buy–Sell पेयर (नई पोज़िशन) बनने पर OI बढ़ता है, और जब पुरानी पोज़िशन क्लोज़ होती है तो OI घटता है तुम्हारे पॉइंट 1–3“OI मतलब खुले पड़े हैं, कितने contracts अभी तक” – ये लाइन कॉन्सेप्ट के हिसाब से सही है, बस ध्यान रहे OI कॉन्ट्रैक्ट्स की नेट गिनती नहीं बल्कि खुले कॉन्ट्रैक्ट्स की कुल संख्या दिखाता है “OI बढ़े तो नई positions जुड़ रही हों” – हाँ, सामान्यतः बढ़ता OI मतलब मार्केट में नया पैसा / नई पोज़िशन आ रही है “OI घटे तो traders अपनी positions बंद कर रहे हों” – ज़्यादातर केस में OI गिरना पोज़िशन क्लोज़िंग (Long Unwinding या Short Covering) का संकेत होता है Price + OI की व्याख्या“Price ऊपर + OI ऊपर = Trend मज़बूत” – आम तौर पर ये Long buildup माना जाता है, यानी बुलिश ट्रेंड में नई Long पोज़िशन जुड़ रही हैं, ट्रेंड मजबूत समझा जाता है “Price नीचे + OI ऊपर = Short selling active” – इसे Short buildup कहते हैं, यानी लोग नई Short पोज़िशन बना रहे हैं, मंदी वाला मूव स्ट्रॉन्ग माना जाता है .एक छोटी टेबल से याद रखोध्यान रहे: सिर्फ OI और Price देखकर ही फाइनल नतीजा नहीं निकालना चाहिए, साथ में वॉल्यूम, लेवल (स्ट्राइक पर OI कहाँ ज्यादा है) और ओवरऑल ट्रेंड भी देखना ज़रूरी है