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22/12/2024

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हनुमानजी का अद्भुत पराक्रमजब रावण ने देखा कि हमारी पराजय निश्चित है तो उसने 1000 अमर राक्षसों को बुलाकर रणभूमि में भेजने...
22/04/2024

हनुमानजी का अद्भुत पराक्रम

जब रावण ने देखा कि हमारी पराजय निश्चित है तो उसने 1000 अमर राक्षसों को बुलाकर रणभूमि में भेजने का आदेश दिया। ये ऐसे थे जिनको काल भी नहीं खा सका था।

विभीषण के गुप्तचरों से समाचार मिलने पर श्री राम को चिन्ता हुई कि हम लोग इनसे कब तक लड़ेंगे? सीता का उद्धार और विभीषण का राज तिलक कैसे होगा? क्योंकि युद्ध की समाप्ति असंभव है।

श्रीराम कि इस स्थिति से वानरवाहिनी के साथ कपिराज सुग्रीव भी विचलित हो गए कि अब क्या होगा? हम अनंत काल तक युद्ध तो कर सकते हैं पर विजयश्री का वरण नहीं! पूर्वोक्त दोनों कार्य असंभव हैं।

अंजनानंदन हनुमान जी आकर वानर वाहिनी के साथ श्रीराम को चिंतित देखकर बोले, 'प्रभु! क्या बात है?'

श्रीराम के संकेत से विभीषण जी ने सारी बात बतलाई। अब विजय असंभव है।

पवन पुत्र ने कहा, 'असम्भव को संभव और संभव को असम्भव कर देने का नाम ही तो हनुमान है। प्रभु! आप केवल मुझे आज्ञा दीजिए मैं अकेले ही जाकर रावण की अमर सेना को नष्ट कर दूँगा।'

'परन्तु कैसे हनुमान? वे तो अमर हैं', श्रीरामजी ने कहा।

'प्रभु! इसकी चिंता आप न करें, बस सेवक पर विश्वास करें', हनुमान बोले।

उधर रावण ने चलते समय राक्षसों से कहा था कि, वहाँ हनुमान नाम का एक वानर है उससे जरा सावधान रहना।

एकाकी हनुमानजी को रणभूमि में देखकर राक्षसों ने पूछा, 'तुम कौन हो? क्या हम लोगों को देखकर भय नहीं लगता जो अकेले रणभूमि में चले आये।'

मारुति बोले, 'क्यों आते समय राक्षसराज रावण ने तुम लोगों को कुछ संकेत नहीं किया था जो मेरे समक्ष निर्भय खड़े हो।'

निशाचरों को समझते देर न लगी कि ये महाबली हनुमान हैं। फिर भी वे सोचे, 'तो भी क्या? हम अमर हैं, हमारा ये क्या बिगाड़ लेंगे।'

भयंकर युद्ध आरम्भ हुआ। पवनपुत्र की मार से राक्षस रणभूमि में ढेर होने लगे। चौथाई सेना बची थी कि पीछे से आवाज आई, 'हनुमान हम लोग अमर हैं‌ हमें जीतना असंभव है। अतः अपने स्वामी के साथ लंका से लौट जाओ, इसी में तुम सबका कल्याण है।'

आंजनेय ने कहा, 'लौटूँगा अवश्य पर तुम्हारे कहने से नहीं, अपितु अपनी इच्छा से। हाँ तुम सब मिलकर आक्रमण करो फिर मेरा बल देखो और रावण को जाकर बताना।'

राक्षसों ने जैसे ही एक साथ मिलकर हनुमानजी पर आक्रमण करना चाहा, वैसे ही पवनपुत्र ने उन सबको अपनी पूँछ में लपेटकर ऊपर आकाश में फेंक दिया।

वे सब पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति जहाँ तक है वहाँ से भी ऊपर चले गए, चले ही जा रहे हैं।

'चले मग जात सूखि गए गात', (गोस्वामी तुलसीदास)

उनका शरीर सूख गया अमर होने के कारण मर सकते नहीं। अतः रावण को गाली देते हुए और कष्ट के कारण अपनी अमरता को कोसते हुए अभी भी जा रहे हैं। इधर हनुमान जी ने आकर प्रभु के चरणों में शीश झुकाया।

श्रीराम बोले, 'क्या हुआ हनुमान?'

'प्रभु! उन्हें ऊपर भेजकर आ रहा हूँ।'

राघव, 'पर वे अमर थे हनुमान।'

'हाँ स्वामी इसलिए उन्हें जीवित ही ऊपर भेज आया हूँ, अब वे कभी भी नीचे नहीं आ सकते? रावण को अब आप शीघ्रातिशीघ्र ऊपर भेजने की कृपा करें। जिससे माता जानकी का आपसे मिलन और महाराज विभीषण का राजसिंहासन हो सके।'

पवनपुत्र को प्रभु ने उठाकर गले लगा लिया। वे धन्य हो गए अविरल भक्ति का वर पाकर। श्रीराम उनके ऋणी बन गए और बोले, 'हनुमान जी ! आपने जो उपकार किया है, वह मेरे अंग अंग में ही जीर्ण-शीर्ण हो जाय। मैं! उसका बदला न चुका सकूँ। क्योंकि उपकार का बदला विपत्तिकाल में ही चुकाया जाता है। पुत्र! तुम पर कभी कोई विपत्ति न आये।' यह सुनकर निहाल हो गए आंजनेय।

हनुमान जी की वीरता के समान साक्षात काल, देवराज इन्द्र, महाराज कुबेर तथा भगवान विष्णु की भी वीरता नहीं सुनी गयी। ऐसा कथन श्रीराम का है,

न कालस्य न शक्रस्य न विष्णर्वित्तपस्य च।
कर्माणि तानि श्रूयन्ते यानि युद्धे हनूमतः॥

02/08/2023
LIC-inaugurates-Digi-Zone-to-sell-insurance-policies-online - Life Insurance Corporation (LIC) of India has inaugurated ...
30/12/2021

LIC-inaugurates-Digi-Zone-to-sell-insurance-policies-online - Life Insurance Corporation (LIC) of India has inaugurated 'Digi Zone' as part of its effort to enhance its digital footprint.

"With an intention to become a tech-driven life insurer, LIC will offer information regarding its products and services through kiosks installed in the premises, the insurer said in a statement on Wednesday.

Customers can use LIC's Digi Zone to buy policies online, pay the premium and avail of other services.

LIC plans to undertake the next wave of digital transformation to unlock several benefits of accelerating growth, driving customer satisfaction and improving intermediary productivity and loyalty, it said

पोस्ट मार्टमदक्षिणपंथी विचारधारा के लोगों की दरअसल समस्या यह है कि वे काम तो अधिक करते हैं लेकिन उनका प्रचार तन्त्र बिल्...
12/12/2021

पोस्ट मार्टम
दक्षिणपंथी विचारधारा के लोगों की दरअसल समस्या यह है कि वे काम तो अधिक करते हैं लेकिन उनका प्रचार तन्त्र बिल्कुल कमजोर होता है।यह भारत की ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के दक्षिणपंथियो की समस्या है।इसके अलावा वे उच्च नैतिक मूल्यों और शुचिता में कुछ ज्यादा ही विश्वास रखते हैं और वैसा ही क्रियान्वयन करने का प्रयास करते हैं,इसलिए समाज के सभी वर्गों को खुश नहीं रख पाते।नतीज़ा यह होता है कि वे शीघ्र पतन के शिकार हो जाते हैं और सत्ता से बाहर हो जाते हैं।
अटल जी जैसे महान और नेक व्यक्ति भी इसी समस्या के कारण वापस सरकार नहीं बना सके,जबकि उनकी सरकार स्वतंत्र भारत की सर्वश्रेष्ठ सरकार मानी जाती है।वामपंथी गिद्धों को यह समस्या बिल्कुल नहीं रही है।वे काम तो कम या बिल्कुल नहीं करते हैं लेकिन प्रचार प्रसार माध्यमों में उनकी गहरी घुसपैठ रहती है,इसलिए वे शीघ्र पतन के जल्द शिकार नहीं होते हैं और सत्ता में उनकी वापसी जल्द हो जाती है।
कांग्रेस की इतनी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के बावजूद सत्ता में लम्बे समय तक रहने का यही एक कारण रहा है।
वरना नैतिकता और शुचिता से तो उनका 36 का आंकड़ा रहता है और लोग भी उनसे नैतिकता और शुचिता की उम्मीद कम ही रखते हैं बल्कि गलती से यदि लाल बहादुर शास्त्री जैसे ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ नेता होने पर लोगों को आश्चर्य होताञ था।
प्रधानमंत्री श्रीमोदी ने देश की बागडोर संभालते ही दक्षिणपंथी लोगों के शीघ्र पतन की बीमारी को पहचाना।हालांकि गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने गुजरात में वामपंथी गिद्धों का सफाया कर दिया था।और पिछले तीन दशको से वंहा वे अनवरत शासन कर रहे हैं।लेकिन राष्ट्रीय कैनवास में उनको प्रधान मंत्री बनने के बाद ही इसकी व्यापकता और गहराई मालूम पड़ी और उन्होंने वामपंथी गिद्धों का माकूल ज़वाब देने के लिए कमर कस ली और नतीज़ा भी आशानुरूप रहा।अब अधिकतर टीवी चैनलों पर या समाचारों पत्रों में वामपंथी गिद्धों का इतना अधिक दबदबा नहीं रहा।साम,दाम,दंड और भेद से लगभग पूरे संचार तंत्र को सेट कर दिया गया।पार्टी की विचारधारा रखने के लिए प्रवक्ताओं की एक विशाल और विद्वान लोगों की फौज तैयार कर ली गई,जो कि ना केवल हिंदी बल्कि इंग्लिश में भी अपने अकाट्य तर्कों से विरोधियों को लाजवाब कर देते हैं।
पहले दक्षिणपंथी लोग इंग्लिश भाषा से दूर ही रहते थे।गुरु मूर्ति जैसे एकाध व्यक्ति को छोड़ दे तो अधिकतर लोग ठेठ उत्तर भारतीय हिन्दी बोलने वाले होते थे।लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है।आपको बीजेपी में फर्राटेदार इंग्लिश बोलने वाले लोग शाम को हर टीवी चैनल पर मिल जाएंगे संबित पात्रा,सुधांशु त्रिवेदी,नलिन कोहली,नूपुर शर्मा,प्रेम शुक्ला, जफर इकबाल,शहजाद पूना वाला आदि सैंकड़ों तेज-तर्रार प्रवक्ता है जो कि पार्टी की नीतियों और विचारधारा का प्रचार प्रसार करते हैं।
लेकिन इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि बीजेपी के प्रवक्ताओं के अलावा भी सैकड़ों गैर राजनैतिक लोग,पत्रकार, बुद्धिजीवी,प्रोफेशनल्स आदि भी अलग अलग विषयों पर अपनी निष्पक्ष राय रखते हैं और बीजेपी की नीतियों का समर्थन और बचाव करते हैं।
कृषि कानूनों पर विजय सरदाना,रक्षा मामलों में मेजर जी डी बक्शी,राजनैतिक चर्चाओं में हर्ष वर्धन सिंह,आलोक मेहता, सोनम महाजन,शुभ राष्ट्रा,स्मिता प्रकाश,दिवंगत शेष नारायण सिंह,सुबुही खान,एच राजशेखर आदि कुछ उदाहरण हैं, जिनका दशकों तक राजनैतिक और अन्य क्षेत्रों में व्यापक अनुभव रहा है और वे पूर्ववर्ती सरकारों और वर्तमान सरकार के कार्यकलापों का तुलनात्मक अध्ययन करते हैं और सरकार की विभिन्न योजनाओं को प्रभावशाली अंदाज में और तर्कों सहित प्रस्तुत करते हैं।महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वे बीजेपी के प्रवक्ताओं से भी ज्यादा प्रभावशाली तरीके से अकाट्य तर्कों से सरकार का बचाव करते हैं।
यह कोई एकदम,अचानक और रातोंरात ही नहीं हुआ है बल्कि इसके पीछे प्रधान मंत्री श्री मोदी और उनकी टीम का बहुत बड़ा परिश्रम और योगदान रहा है।
अटल जी तो बेचारे सीधे साधे नेता थे,अपनी बात खुद ही कहने में विश्वास रखते थे।किसी बात के लिए जिद्द नहीं करते थे और मिडिया के साथ उनके कभी भी गहरे सम्बंध नहीं रहे
पहले कार्यकाल में अटल जी एक सांसद तक का इंतजाम नहीं कर पाए और एक वोट से अपनी सरकार की कुर्बानी दे डाली।लेकिन बीजेपी का वर्तमान नेतृत्व ऐसा बिल्कुल नहीं है। मोदी - शाह की जोड़ी अद्भुत है।
वे संख्याओं और समीकरण का पूरा ध्यान रखते हैं और देश के इतने राज्यों में उनकी सरकारे पहले कभी नहीं रही।अब तो एक एमएलए से वे मणिपुर जैसे राज्य में अपनी सरकार बना लेते हैं और कर्नाटक और मध्यप्रदेश की कॉंग्रेस की सरकारों को येन केन प्रकरण हटा कर खुद की सरकार बना लेते हैं।
भाजपा का वर्तमान नेतृत्व नैतिकता और शुचिता के ज्यादा चक्कर में नहीं पड़ता हैं और कुछ उन्नीस इक्कीस होने पर उनका प्रचार तन्त्र सब मैनेज कर लेता है।इसको भले ही हम बीजेपी का कांग्रेसीकरण भी बोल सकते हैं लेकिन यह सच है कि यह नई बीजेपी राज करना और उसे लम्बे समय तक बरकरार रखना सीख गई है।भारतीय राजनीति में दक्षिणपंथी विचारधारा का इतना वर्चस्व इसके पहले कभी भी नहीं रहा था।
मेरे जैसे राजनीति के अल्प ज्ञानी व्यक्ति के लिए, जो कि भारत की राजनीति का पिछले पांच दशको से भ्रमित विद्यार्थी रहा है और सत्तर के दशक से सभी राजनैतिक दलों का उत्थान और पतन देखा है, उसके लिए यह परिवर्तन बहुत ही रोचक और सुखद है।
शायद आपको भी चीजों में बुनियादी फर्क महसूस हुआ ही होगा और यह स्तिथि अब जल्द से बदलने वाली नहीं है।

📌 _अब शुरू करे अपना व्यापार, बेहद कम पूंजी की दरकार, कमाए बेहतर मुनाफा, मदद कर रही सरकार_नमकीन व बिस्किट वर्तमान समय में...
07/12/2021

📌 _अब शुरू करे अपना व्यापार, बेहद कम पूंजी की दरकार, कमाए बेहतर मुनाफा, मदद कर रही सरकार_

नमकीन व बिस्किट

वर्तमान समय में ग्रामीण क्षेत्रों (Rural Areas) में बेरोजगारी (Unemployment) एक बड़ी समस्या है. जिस वजह से ज्यादातर ग्रामीण युवा शहर की तरफ अपना रुख कर रहे हैं. यदि उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में ही रोजगार मिले तो वे अपने परिवार के साथ रहकर ही आसानी से अच्छा खासा पैसा कमा सकते हैं. आज के समय में खाने की चीजें हर किसी की पहली जरुरत है. खाद्य उत्पाद (Food Products) की मार्केट में भारी मांग है. कई सारी कम्पनियां भारतीय बाजार (Indian Market) में कई तरह के खाद्य उत्पादों का प्रोडक्शन कर अच्छा खासा पैसा कमा रही हैं. आज हम आपको कुछ ऐसे ही Small Business Ideas के बारे में बताएंगे. जिनको आप ग्रामीण स्तर पर कम लागत में शुरू करके मोटा मुनाफा कमा सकेंगे. तो आइए जानते हैं Small Business Ideas के बारे में....

1) नमकीन बनाने का व्यवसाय (Namkeen Making Business)
नमकीन उद्योग एक ऐसा ही लघु उद्योग है जिससे ग्रामीण क्षेत्र के लोग अच्छा लाभ कमा सकते हैं. इसे आप घर बैठे या फिर बड़े स्तर पर भी शुरू कर सकते हैं. नमकीन एक ऐसा उत्पाद है जो भोजन के साथ-साथ हर घर में बड़े मजे से चाय, जूस आदि के साथ खाया जाता है. नमकीन भोजन के स्वाद को काफी गुना बढ़ा देता है. तो आइए जानते हैं कैसे शुरू करें ये व्यवसाय....

नमकीन बनाने की कच्ची सामग्री (Namkeen Raw Material)
नमकीन को कई तरह से बना सकते हैं. क्योंकि इसको बनाने के कई प्रकार हैं, अब यह आप पर निर्भर करता है कि आप किस तरह की नमकीन बनाना चाहतें हैं. वैसे मूल रूप से नमकीन बनाने के लिए मसाले, तेल और बेसन आदि की जरूरत पड़ती है, जो आसानी से मार्केट में कहीं भी मिल जाएगी.

कितना करना होगा निवेश
शुरूआत में आप छोटे स्तर से यह काम शुरू करते हुए आसपास या मोहल्ले में बेच सकते हैं. जिसके लिए किसी मशीन की आवश्यकता नहीं पड़ती. आप घर के सदस्यों के साथ मिलकर ही किराने की दुकानों या घर-घर जाकर नमकीन बेच सकते हैं. बाद में मुनाफा होने पर 50 से 60 हज़ार निवेश कर सकते हैं. अगर आप चाहें तो काम में मदद के लिए दो चार वर्कर भी रख सकते हैं और अपने उत्पाद को एफएसएसएआई (FSSAI) में रजिस्ट्रेशन भी कर सकते हैं. इससे आपके उत्पाद को जहां एक तरफ विशेष पहचान मिलेगी, वहीं आपको भी मुनाफा ज्यादा होगा

कितना होगा मुनाफा*मुनाफ
आप 1 किलो नमकीन 20 से 30 रूपए की मार्जिन रेट पर बेचते हैं. तो एक दिन में आप 100 किलो माल का उत्पादन और सेल कर लेते है तो आपको आसानी से प्रतिदिन 2 से 3 हजार रुपए की आमदनी होगी. इस तरह से आप महीने में 60 से 90 हजार रुपए की कमाई कर सकते हैं. माल की अधिक बिक्र होने पर आपकी कमाई भी बढ़ेगी.

2) बिस्कुट बनाने का व्यवसाय (Biscuit Making Business)
अगर आप छोटे स्तर पर और कम निवेश में व्यवसाय करना चाहते हैं तो आप बिस्कुट बनाने का बिजनेस आसानी से घर से शुरू कर सकते हैं. घर पर बनाने के लिए बस आपको एक अच्छे ओवन (Oven) की आवश्यकता पड़ेगी.

बिस्कुट बनाने की कच्ची सामग्री (Biscuit Raw Materials)

गेहूं का आटा (Wheat Flour)

चीनी (Sugar)

वनस्पति तेल (Oil)

ग्लूकोज (Glucose)

दूध पाउडर (Milk Powder)

नमक (Salt)

बेकिंग पाउडर (Baking Powder)

कुछ खाद्य केमिकल्स (Food Chemicals)

कितना करना होगा निवेश
इस व्यापार को घर से शुरू करने के लिए आपको न्यूनतम 15 से 30 हजार रुपए की जरूरत होगी. अगर आप चाहें तो 1-2 वर्कर भी रख सकते हैं और अपने उत्पाद को एफएसएसएआई (FSSAI) में रजिस्ट्रेशन भी कर सकते हैं.

कितना होगा मुनाफा
इस व्यवसाय से आप महीने का 40 से 50 हज़ार रुपए कमा सकते हैं. बस आपको अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग करनी अच्छी से आनी चाहिए. जिससे समय के साथ मुनाफा भी बढ़ता जाएगा.

सरकार कर रही मदद
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम PMEGP के अन्तर्गत 35%तक की सरकारी सहायता छूट भी उपलब्ध है

PMFME के अंतर्गत भी 35%+10% कुल 45% तक की सरकारी सहायता मिलती है।

वन्दे मातरम 🇮🇳
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