01/07/2014
भुगतान न करने या देर से करने का असर केवल कर्ज उत्पादों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मोटर बीमा पर भी इसका असर पड़ता है। मोटर बीमा पॉलिसी एक वार्षिक अनुबंध है, जिसको हर साल रिन्यू (नवीकरण) कराना आवश्यक होता है। सामान्य तौर पर पॉलिसी का समय उसे खरीदने के दिन की मध्य रात्रि से गिना जाता है।
क्या कभी आप बिजली-पानी का बिल समय पर जमा करना भूल गए हैं? या फिर आपको ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा है, जिसमें अपने क्रेडिट कार्ड का न्यूनतम बकाया वक्त पर भरने से चूक गए हों? यदि ऐसा है तो आपको उन दिक्कतों का पता होगा जिसमें न केवल देर से बिल भरने पर जुर्माना भरना पड़ता है, बल्कि सेवाओं में रुकावट का सामना भी करना पड़ सकता है।
जुर्माना लगाने के अलावा वित्तीय संस्थान इन दिनों आपकी साख या वित्तीय हैसियत पर भी नजर रखते हैं। वे देखते हैं कि आप अपने बकायों का भुगतान किस तरह करते हैं। इसी के आधार पर वे आपकी क्रेडिट लिमिट बढ़ाने या आपको रेहन (मॉरगेज) की सुविधा देने का फैसला करते हैं। इसके लिए वे आपके क्रेडिट स्कोर पर ध्यान देते हैं, जिससे आपके भुगतानों के ट्रैक रिकार्ड का पता चलता है। इसमें पर्सनल व होम लोन व क्रेडिट कार्ड समेत सभी तरह के भुगतान शामिल होते हैं।
भुगतान न करने या देर से करने का असर केवल कर्ज उत्पादों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मोटर बीमा पर भी इसका असर पड़ता है। मोटर बीमा पॉलिसी एक वार्षिक अनुबंध है जिसको हर साल रिन्यू (नवीकरण) कराना आवश्यक होता है। सामान्य तौर पर पॉलिसी का समय उसे खरीदने के दिन की मध्य रात्रि से गिना जाता है। यदि आप समय पर नवीकरण कराने से चूकते हैं तो आपकी पॉलिसी खत्म हो जाएगी। इसका मतलब हुआ आपको नए सिरे से किसी बीमा कंपनी से पॉलिसी खरीदनी होगी।
जहां कई लोग वाकई में मोटर बीमा को रिन्यू कराना भूल जाते हैं। वहीं ऐसे मामले में भी देखने में आते हैं, जहां लोग कुछ पैसे बचाने के चक्कर में जान-बूझकर पॉलिसी का नवीकरण नहीं कराते, जबकि इस प्रक्रिया में वे खुद को अतिरिक्त वित्तीय बोझ से लाद लेते हैं, क्योंकि बीमा न होने के दौर में उन्हें अपने वाहन की रिपेयरिंग पर खर्च करना पड़ सकता है। नवीकरण से प्राप्त होने वाले संचित लाभों से भी वंचित रहना पड़ सकता है। इससे भी ज्यादा अहम बात यह है कि यदि इस बीच वाहन से कोई दुर्घटना हो गई तो दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को क्षतिपूर्ति का भुगतान अपनी जेब से करने की नौबत आ सकती है।
कारण कुछ भी हो, यदि आप अपनी मोटर बीमा पॉलिसी को रिन्यू कराना एक दिन के लिए भी भूल जाते हैं तो पॉलिसी लैप्स हो जाएगी। उसे दोबारा बहाल करने के लिए फिर से वही प्रक्रिया अपनानी पड़ेगी, जो नई पॉलिसी खरीदते वक्त अपनानी पड़ती है। यदि थर्ड पार्टी मोटर बीमा के लिए आवेदन करते हैं तो प्रक्रिया बहुत कठिन नहीं है। उस स्थिति में बीमा कंपनी पॉलिसी ब्रेक होने के बाद भी नवीकरण करने को तैयार हो जाएगी। लेकिन बीमा कंपनी उस अवधि के लिए कोई दावा स्वीकार नहीं करेगी, जब वाहन बीमाकृत नहीं था। मगर यदि आपने समग्र पॉलिसी का चयन किया है (जो कि ज्यादा अपनाया जाने वाला विकल्प है) तो आपको कुछ लंबी प्रक्रिया का पालन करना पड़ेगा।
लैप्स हो चुकी मोटी बीमा पॉलिसी का नवीकरण कराने के लिए आपको नई पॉलिसी की तरह नया प्रपोजल फॉर्म भरना होगा। बीमा कंपनी आपके वाहन का निरीक्षण भी नए सिरे से करेगी। ऐसा वाहन को पहले हो चुके किसी तरह के नुकसान की जांच के लिए किया जाता है। बीमा करने का निर्णय लेने के बावजूद बीमा कंपनी इस नुकसान की भरपाई नहीं करेगी। लैप्स पॉलिसी वाले वाहन का नया मोटर बीमा करने के लिए बीमा कंपनी अधिक प्रीमियम की मांग कर सकती है। यह भी संभव है कि वह बीमा करने से मना कर दे।
लैप्स हो चुकी पॉलिसी पर नो क्लेम बोनस (एनसीबी) के तहत संचित लाभ भी नहीं मिलते। एनसीबी प्रीमियम पर मिलने वाली वह छूट है, जो हर उस साल के लिए मिलती है, जिसमें आप कोई क्लेम नहीं लेते। लगातार क्लेम न लेने पर यह लाभ 50 फीसद (आधा प्रीमियम) तक हो सकता है। यदि आपका वाहन 90 दिन से अधिक अवधि तक बीमा विहीन रहता है तो आपको एनसीबी का कोई भी लाभ नहीं मिलेगा। इस स्थिति में आप एनसीबी को नए खरीदे गए वाहन को ट्रांसफर भी नहीं करा सकते। नए व महंगे वाहन की खरीद पर लगने वाला प्रीमियम पुराने वाहन के मुकाबले काफी ज्यादा होगा। इस तरह एनसीबी लाभ गंवाने का नुकसान कई स्तरों पर झेलना पड़ता है।
लैप्स मोटर पॉलिसी के नवीकरण में आने वाली मुश्किलों को देखते हुए समझदारी इसी में है कि पॉलिसी को समय पर रिन्यू करा लिया जाए। आजकल, बीमा कंपनियां अपने ग्राहकों को पॉलिसी के नवीकरण के बारे में ईमेल व एसएमएस एलर्ट के जरिये पहले से सूचित करती हैं। टेक्नोलॉजी के इस दौर में बीमा पॉलिसियों का ऑनलाइन नवीकरण भी होता है, जो आसान भी है। ऑनलाइन नवीकरण से आपको डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित पॉलिसी तुरंत प्राप्त हो जाती है।