05/02/2020
श्रीमती निर्मला सीतारमण ने बजट में LIC के विनिवेश की बाते की-तो कई तरह की अफवाहें चलने लगी। LIC घाटे में है, LIC प्राइवेट हो जाएगा इत्यादि इत्यादि। जानकारी की दृष्टि से बता दें-कि LIC के पूर्व बहुत सारी सरकारी कंपनियों का विनिवेश (सरकार अपनी हिस्सेदारी का कुछ अंश/हिस्सा बेच देती है-जिसे शेयर मार्केट के द्वारा हमलोग खरीद सकते हैं) कर चुकी है। नरसिम्हा राव की सरकार में वित्त मंत्री श्री मनमोहन सिंह के समय (1995-1996 मे) स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का शेयर भारत सरकार ने बेचा। आज सरकार की हिस्सेदारी स्टेट बैंक में 61.23℅ है। नवरत्न कंपनियां- NTPC में सरकारी हिस्सेदारी-63%, ONGC में 69%, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया में 85.82%, इंडियन ऑयल कारपोरेशन में 56.98%, BHEL में 63.17%, भारत पेट्रोलियम में 54% हिंदुस्तान पेट्रोलियम में 51.11%, GAIL में 70% है। ज्यादातर बैंक शेयर मार्केट में लिस्टेड हैं जैसे इलाहाबाद बैंक, आंध्र बैंक, बैंक ऑफ बरोदा, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, केनरा बैंक, सेंट्रल बैंक, कारपोरेशन बैंक, देना बैंक, इंडियन बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, ओरिएण्टल बैंक, यूनाइटेड बैंक इत्यादि। लेकिन उपर्युक्त सारी कंपनियों में सरकारी भागीदारी 51 % या ज्यादा है-इसलिए ये सरकारी कंपनियां है। सरकार LIC में कितना प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी-ये अभी तय नही है। अपुष्ट समाचार 10% का है। फिर भी 90% शेयर सरकार के पास रहेगा। इसके पूर्व सरकार को संसद के दोनों सदनों से बीमा अधिनियम में संशोधन कराना होगा। हमलोग जागरूक रहे तथा आम जनता को भी समझाएं-कि LIC अरबो रुपये के प्रॉफिट में है। हमलोगों ने इस वर्ष लाभांश का 5%= 2611 करोड़ से ज्यादा सरकार को दिया है। LIC की पॉलिसियों पर sovereign guarantee यथावत रहेगा। सरकार हर बीमाधारक के बीमाधन तथा घोषित बोनस के भुगतान की गारंटी लेती रहेगी।