27/06/2026
स्थानीय मान्यता के अनुसार, बाबा हरिगिरी एक सिद्ध संत, योगी और शिवभक्त थे। कहा जाता है कि उन्होंने गढ़पुरा क्षेत्र में एक शांत स्थान पर वर्षों तक कठोर तपस्या की। उनकी सादगी, आध्यात्मिक साधना और लोकसेवा से प्रभावित होकर आसपास के गाँवों के लोग उनके पास आशीर्वाद और मार्गदर्शन के लिए आने लगे।
जनश्रुति है कि बाबा लोगों को सत्य, अहिंसा, परोपकार, ईश्वर-भक्ति और मानव सेवा का संदेश देते थे। उनके बारे में कई चमत्कारिक कथाएँ भी प्रचलित हैं, लेकिन इनका स्वतंत्र ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
बाबा के ब्रह्मलीन होने के बाद उनके सम्मान में उनकी समाधि और पूजा-स्थल बनाया गया। समय के साथ यह स्थान हरिगिरी धाम के रूप में प्रसिद्ध हो गया। स्थानीय लोगों के सहयोग से मंदिर और अन्य धार्मिक सुविधाओं का विकास हुआ, जिससे यह क्षेत्र के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल हो गया।
आज हरिगिरी धाम में प्रतिदिन श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। विशेष रूप से महाशिवरात्रि, श्रावण मास और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहाँ बड़ी संख्या में भक्त एकत्र होते हैं। कई स्थानों पर भंडारा, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन भी किए जाते हैं।