Financial and Insurance Discussion with Vivek Singh

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18/07/2026

'तिजोरी का अदृश्य दीमक' — छोटे-छोटे डिजिटल खर्चों का वो जाल जो चुपके से जेब साफ कर देता है

आज हमलोग बात करेंगे इस आधुनिक युग के एक ऐसे सबसे शांत, छिपे हुए और खतरनाक आर्थिक लीकेज पर जो आज के डिजिटल रहन-सहन में हर दूसरे घर की तिजोरी को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है। एक जमाना था जब हमारे खर्च बहुत साफ और बड़े होते थे—जैसे राशन का बिल, बिजली का बिल, या बच्चों की स्कूल फीस। हमें पता होता था कि पैसा कहाँ जा रहा है।

लेकिन आज के इस इंटरनेट और स्मार्टफोन के दौर में, कंपनियों ने हमारी जेब से पैसा निकालने का एक बहुत ही शातिर और नया तरीका ढूंढ लिया है, जिसे हम सरल भाषा में कहते हैं—"छोटे-छोटे ऑटो-डेबिट खर्चे या डिजिटल सब्सक्रिप्शन का मीठा जाल। आज मैं बहुत ही जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूँ कि बड़ी-बड़ी खरीदारी पर मोलभाव करना एक बात है, लेकिन आपके बैंक खाते से हर महीने कटने वाले ₹199, ₹299 या ₹499 के छोटे-छोटे अदृश्य खर्चों पर नजर न रखना—अपनी तिजोरी में एक ऐसा दीमक पालने जैसा है जो साल के अंत में आपकी मोटी बचत को चुपके से चाट जाता है।

आइए बहुत ही सादगी और गहराई से समझते हैं कि इस आधुनिक डिजिटल लाइफस्टाइल का असली गणित क्या है।

'सिर्फ कुछ रुपयों का खेल' — आपके दिमाग के साथ चालाकी
हमें सबसे पहले कंपनियों के इस नए बिज़नेस मॉडल को बहुत ही सरल शब्दों में समझना होगा। आज आप कोई भी ऐप डाउनलोड करें, कोई मनोरंजन का प्लेटफॉर्म देखें, या कोई डिजिटल सर्विस इस्तेमाल करें, वे आपको शुरुआत में कहते हैं—"पहला महीना बिल्कुल मुफ्त (Free Trial)!" या "मात्र ₹99 महीना।"

हमारा दिमाग बहुत आसानी से इस जाल में फंस जाता है। हम सोचते हैं, "₹99 में क्या जाता है! एक दिन की चाय का खर्च भी इससे ज्यादा है।" हम वहां अपना क्रेडिट कार्ड या बैंक खाता लिंक कर देते हैं और 'ऑटो-डेबिट' (यानी हर महीने अपने आप पैसा कटने का नियम) चालू कर देते हैं।

शुरुआत में सब कुछ बहुत सामान्य लगता है। लेकिन धीरे-धीरे क्या होता है? मोबाइल में तीन अलग-अलग वीडियो देखने वाले ऐप्स का सब्सक्रिप्शन चल रहा है, दो गाने सुनने वाले ऐप्स का प्रीमियम प्लान चालू है, एक ऑनलाइन कूपन वाला ऐप हर महीने पैसे काट रहा है, और किसी ऐसी डिजिटल सर्विस का पेमेंट हर साल अपने आप हो जाता है जिसे आपने पिछले छह महीने से खोलकर भी नहीं देखा है।
जब आप हर एक खर्चे को अलग से देखते हैं, तो वह बहुत छोटा लगता है। लेकिन जब ये सारे छोटे-छोटे 'अदृश्य लीकेज' आपस में मिलते हैं, तो महीने के अंत में आपके खाते से ₹3,000 से ₹5,000 चुपके से साफ हो जाते हैं। एक आम इंसान सोचता है कि "मैं तो कोई बड़ी फिजूलखर्ची नहीं कर रहा, फिर भी मेरा बैंक बैलेंस हर महीने कम क्यों हो रहा है?" जानते हैं क्यों? क्योंकि आपकी बाल्टी का निचला हिस्सा इन छोटे-छोटे अनगिनत छेदों से छलनी हो चुका है।

'ऑटो-डेबिट' का मनोविज्ञान — कमाने की मेहनत बनाम खर्च की आसानी
कंपनियां इस बात को बहुत अच्छे से जानती हैं कि एक मध्यमवर्गीय इंसान जब जेब से नकद ₹5,000 निकाल कर किसी को देता है, तो उसे बहुत दर्द होता है। वह दस बार सोचता है कि "क्या यह चीज सच में जरूरी है?"

इसलिए उन्होंने आपकी जेब के इस दर्द को पूरी तरह खत्म करने के लिए 'ऑटो-डेबिट' और 'वन-क्लिक पेमेंट' का सिस्टम बनाया है। जब पैसा आपकी आँखों के सामने से नहीं गुजरता, जब आपके फोन पर सिर्फ एक छोटा सा मैसेज आता है और पैसा अपने आप कट जाता है, तो आपके दिमाग को उस खर्च का अहसास ही नहीं होता। आप अनजाने में उन चीजों के लिए भी सालों-साल भुगतान करते रहते हैं जिनका आपकी जिंदगी में कोई व्यावहारिक उपयोग नहीं है।
जो पैसा आप सुबह से शाम तक दुकान पर बैठकर, या ऑफिस में पसीना बहाकर कमाते हैं, उसका एक-एक रुपया बहुत पवित्र है। उसे सिर्फ इसलिए व्यर्थ बहने देना क्योंकि आप एक बटन दबाकर उसे कैंसिल करने का सब्र नहीं कर पा रहे हैं, अपनी मेहनत का अपमान करना है।

अपनी तिजोरी को इस डिजिटल दीमक से बचाने के 3 अचूक नियम
इस आधुनिक आर्थिक नुकसान से बचने का रास्ता बहुत ही सीधा और वेल-प्लान्ड है। हमें तकनीक का विरोध नहीं करना है, हमें सिर्फ अपने रहन-सहन को थोड़ा सा अनुशासित करना है। अपनी फाइनेंशियल लाइफ का आर्किटेक्चर मजबूत करने के लिए आज ही ये तीन काम कीजिए:

1. 'बैंक स्टेटमेंट' का एक्स-रे कीजिए: आज ही अपनी नेट बैंकिंग खोलिए या पिछले तीन महीनों का बैंक स्टेटमेंट निकालिए। एक लाल पेन लें और हर उस खर्चे पर गोला बनाएं जो हर महीने अपने आप (Auto-Debit) कट रहा है। आप खुद चौंक जाएंगे कि ऐसी कितनी ही सर्विसेज हैं जिन्हें आप पूरी तरह भूल चुके थे, पर वे आपकी तिजोरी से हर महीने टैक्स वसूल रही हैं। जो जरूरी नहीं है, उसे तुरंत बंद (Cancel) कीजिए।

2. एक्सपर्ट्स की इस सलाह को याद रखें: जब भी आप किसी अनुभवी मार्गदर्शक, प्रतिष्ठित जानकार या बड़े एक्सपर्ट के साथ बैठकर अपनी तिजोरी का वेल-प्लान्ड ढांचा तैयार कर रहे हों, तो अपनी इस 'फिक्स्ड मंथली लीकेज' की लिस्ट भी उनके सामने रखें। एक सही विशेषज्ञ आपको बताएगा कि आपकी कुल कमाई के अनुपात में आपकी लाइफस्टाइल और डिजिटल खर्चों का बजट कितना होना चाहिए। वे आपको अनजाने खर्चों के जाल से निकालकर सही एसेट्स में पैसा लगाने का अनुशासित रास्ता दिखाएंगे।

3. 'मैन्युअल पेमेंट' का नियम अपनाएं: जहाँ भी संभव हो, ऑटो-डेबिट के विकल्प को बंद रखिए। जब हर महीने आपको खुद अपने हाथों से रीचार्ज या पेमेंट करना पड़ेगा, तो आपका दिमाग आपको खुद सचेत कर देगा कि "भाई, पिछले महीने तो तुमने इस ऐप को एक बार भी इस्तेमाल नहीं किया, तो इस बार पैसे क्यों दे रहे हो?"

आज मैं चाहता हूँ कि आप सब अपना स्मार्टफोन उठाएं और बहुत ही शांति से अपने ऐप्स की लिस्ट देखें। खुद से पूछें कि क्या आपकी मेहनत की गाढ़ी कमाई सिर्फ इसलिए व्यर्थ जा रही है क्योंकि आपने अपनी तिजोरी के दरवाजों को खुला छोड़ रखा है?

बड़ी चोरियों से तो हम सब सावधान रहते हैं, लेकिन असली समझदारी इन छोटी-छोटी अदृश्य चोरियों से अपनी तिजोरी को बचाने में है। जब आपके खर्चों का एक-एक रुपया आपकी अनुमति और आपकी नजर के सामने से गुजरेगा, तो आपका आर्थिक ढांचा भी मजबूत रहेगा और आपके मन का सुकून भी हमेशा अमर रहेगा।

क्या आपने भी कभी अपने बैंक स्टेटमेंट में कोई ऐसा ऑटो-डेबिट खर्चे देखा है जिसे देखकर आप हैरान रह गए हों?

विवेक सिंह l

14/07/2026
नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने हाइपरटेंशन, डायबिटीज, हार्ट की बीमारी वगैरह की दवाओं समेत 39 दवाओं की र...
12/07/2026

नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने हाइपरटेंशन, डायबिटीज, हार्ट की बीमारी वगैरह की दवाओं समेत 39 दवाओं की रिटेल कीमत तय कर दी है।

09/07/2026

"करोड़पति तो सबको बनना है, पर निवेश के नाम पर नानी याद क्यों आती है?" : एक कड़वा और चटपटा सच!

नमस्कार दोस्तों!

आज जरा दिल पर हाथ रखकर बैठिएगा, क्योंकि आज मैं कोई किताबी ज्ञान या फाइनेंस की कोई टर्म समझाने नहीं आया हूँ। आज मैं वो बातें करने आया हूँ जो आपके गल्ले की हकीकत हैं, जो आपके दिमाग में चलती हैं, लेकिन कोई खुलकर बोलता नहीं। आज बात होगी उस 'मानसिक बीमारी' की जिसे हम कहते हैं—"बिना बीज बोए फसल काटने की लालच!"

कल रात की बात है। मैं आराम से बैठा कुछ पेंडिंग काम निपटा रहा था कि अचानक मेरे फेसबुक मैसेंजर की घंटी बजी। दिल्ली के एक भाई साहब थे। बड़ी ही गर्मजोशी से बोले—नमस्कार विवेक साहब! आपके आर्टिकल्स रोज पढ़ता हूँ, बड़ा मजा आता है। सीधी बात नो बकवास लिखते हो। साहब, मुझे भी एक तगड़ी वेल्थ (संपत्ति) बनानी है। मुझे भी करोड़ों का मालिक बनना है। कोई ऐसी बढ़िया, धांसू स्कीम बताओ जहां बस 'वन-टाइम' (एक बार) मोटा पैसा लगाऊं और जिंदगी भर ऐश करूँ। बार-बार का झंझट नहीं चाहिए।"

मैंने थोड़ा मुस्कुराते हुए मैसेंजर पर ही टाइप किया—नमस्कार भाई साहब! बिल्कुल बन सकती है वेल्थ। यह बताइए कि आपका बजट कितना है? और सबसे जरूरी बात, कितने सालों के लिए निवेश करना चाहते हैं? धैर्य तो पूरा है ना आपमें?"

आगे से भाई साहब का जो जवाब आया ना, उसने मेरे दिमाग की बत्ती जला दी। वो बोले—"अरे विवेक जी, आप तो वित्तीय सलाहकार हो, कैसी बातें करते हो? आज की डेट में फालतू खर्चा करने को पैसे किसके पास हैं? मंदी का दौर है, जेब में वैसे ही तंगी रहती है। मैं हर महीने पैसा ब्लॉक नहीं कर सकता। और समय? समय तो बिल्कुल नहीं है भाई! मुझे तो बस कोई ऐसा शॉर्टकट बताओ कि साल-दो साल में पैसा रॉकेट की तरह ऊपर भाग जाए।"

भाइयों, मैसेंजर बंद करके मैं सोच में पड़ गया। यह कहानी सिर्फ उस एक अकेले भाई साहब की नहीं है। आज हमारे समाज के 95% लोगों की यही कड़वी, चटपटी और खोखली हकीकत बन चुकी है। सबको लक्ष्मी जी की असीम कृपा चाहिए, लेकिन जेब से एक रुपया ढीला करने में जान निकलती है।

हकीकत का पहला तमाचा: "वेल्थ सबको चाहिए, पर प्रेजेंट में इन्वेस्टमेंट किसी को नहीं करना!"

आजकल के लोगों का एक अजीब ही लॉजिक है। जब कोई नया आईफोन (iPhone) बाजार में आता है, तो ₹1.5 लाख निकालने में किसी की जेब नहीं दुखती। क्रेडिट कार्ड स्वाइप हो जाते हैं, दोस्त-यारों से उधार ले लिया जाता है। जब किसी महंगी गाड़ी की EMI भरनी हो, तो लोग हंसते-हंसते हर महीने ₹10000 से ₹20000 तक की किश्त चुकाते हैं। जब वीकेंड पर किसी महंगे होटल में जाकर ₹5,000 का बिल बनाना हो, तो छाती चौड़ी हो जाती है।

लेकिन! जैसे ही मैं उनसे कहता हूँ कि—"भाई, अपने भविष्य के लिए, अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए, अपनी रिटायरमेंट के लिए हर महीने सिर्फ ₹5,000 की एक अनुशासित शुरुआत करो।"—वैसे ही अचानक देश में मंदी आ जाती है! अचानक उनके खर्चे बढ़ जाते हैं। अचानक उनके पास पैसे खत्म हो जाते हैं।

भाइयों, यह कैसी वित्तीय साक्षरता है? दूसरों को अमीर दिखाने के लिए (दिखावे की जिंदगी जीने के लिए) आपके पास लाखों रुपए हैं, लेकिन खुद को सचमुच अमीर बनाने के लिए आपके पास फूटी कौड़ी नहीं है? आज आप वर्तमान के मजे लेने के चक्कर में अपने भविष्य की तिजोरी को खुद ही ताला मार रहे हैं। बिना आज कुछ त्यागे, आप कल की सुरक्षा की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?

हकीकत का दूसरा तमाचा: "टाइम किसी को नहीं देना, सब्र का फल अब मीठा नहीं, तुरंत चाहिए!"

आज की जनरेशन 'इंस्टेंट नूडल्स' वाली जनरेशन है। 2 मिनट में मैगी चाहिए, 10 मिनट में राशन चाहिए, और 2 दिन में निवेश किया हुआ पैसा डबल चाहिए! लोगों के पास सब्र (Patience) नाम की चीज ही खत्म हो चुकी है।

जब लोग मेरे पास आते हैं, तो वे निवेश का विकल्प नहीं ढूंढ रहे होते, वे जादू की छड़ी ढूंढ रहे होते हैं। वे चाहते हैं कि विवेक कोई ऐसा गुप्त मंत्र फूंक दे कि आज वो सट्टा लगाएं और कल सुबह तक उनके अकाउंट में छप्पर फाड़कर पैसा बरस जाए।

मेरे भाई, कान खोलकर सुन लो—पैसे का भी एक नेचर होता है, उसका एक नियम होता है। पैसा रातों-रात सिर्फ जुए में डबल होता है, और जुए में अंत में इंसान रोड पर ही आता है।

वेल्थ क्रिएशन का सबसे पहला और अखंड नियम है—समय (Time)! समय को अपना दोस्त बनाइए, जल्दबाजी को नहीं दुनिया के सबसे अमीर इन्वेस्टर वॉरेन बफेट ने एक बार बहुत सुंदर बात कही थी—"यदि आप आज किसी पेड़ की ठंडी छांव में बैठे हैं, तो उसका सीधा सा कारण यह है कि किसी ने बहुत समय पहले वहां एक छोटा सा पौधा लगाया था।"

निवेश का भी यही नियम है। आप चाहे जितने भी होशियार हों, आप रातों-रात फसल नहीं काट सकते। फसल पकने में भी चार से छह महीने का प्राकृतिक समय लगता है। जब तक आप अपने पैसे को बाजार में, अपने चुने हुए पूल में टिकने का समय नहीं दोगे, तब तक कंपाउंडिंग (Compounding) का जादू शुरू ही नहीं होगा। कंपाउंडिंग की असली ताकत शुरुआती 2-4 साल में नहीं दिखती, वो दिखती है 10वें, 15वें या 20वें साल में। लेकिन वहां तक रुकने का दम, वहां तक सब्र रखने का कलेजा आज किसी के पास नहीं है। सबको पहले साल में ही बंपर रिटर्न चाहिए, नहीं मिला तो स्कीम खराब है, सलाहकार खराब है, मार्केट खराब है! खुद की जल्दबाजी पर कोई नजर नहीं डालता।

हकीकत का तीसरा तमाचा: "वन-टाइम का भूत और कंटीन्यूअस इन्वेस्टमेंट से डर!"
मैं अपने हर लेख में यह कतई नहीं कहता कि आप सिर्फ म्यूचुअल फंड या एसआईपी (SIP) ही करो। आप पैसे को किसी भी एसेट पूल (Asset Pool) में डालो—चाहे अपने खुद के धंधे में वापस री-इन्वेस्ट करो, कोई अच्छी जमीन लो, या गोल्ड खरीदो।

लेकिन नियम नंबर एक हमेशा याद रखो—पैसा किसी भी पूल में जाए, उसमें 'निरंतरता' (Continuity) और 'कंटीन्यूअस टाइम' देना सबसे अनिवार्य है।

लोग गलती क्या करते हैं? इस साल धंधे में ₹5 लाख का तगड़ा मुनाफा हुआ, तो उन्होंने उसे किसी जमीन में या किसी फंड में डाल दिया। अगले साल मुनाफा थोड़ा कम हुआ, तो निवेश पूरी तरह बंद कर दिया! तीसरे साल गाड़ी खरीद ली। चौथे साल फिर थोड़ा सा निवेश किया।

अरे भाई, ऐसे वेल्थ नहीं बनती! यह कोई बरसाती नाला नहीं है जिसे जब मर्जी आए बहा दिया और जब मर्जी आए सुखा दिया। वेल्थ बनाना एक बहती हुई नदी की तरह है, जिसमें पानी (यानी आपका पैसा) लगातार, हर महीने, हर साल बिना रुके बहना चाहिए। जब आप किसी भी एसेट पूल को लगातार 10 साल, 15 साल या 20 साल का समय देते हैं, तब जाकर वो पूल एक समंदर बनता है।

सबको रिटायरमेंट के बाद 'रेगुलर इनकम' तो चाहिए, पर उसके लिए आज का यह 'कंटीन्यूअस इन्वेस्टमेंट' वाला पेन (Financial Pain) लेने को कोई तैयार नहीं है।

आखरी और सबसे जरूरी बात: "कंसल्टेंसी का नक्शा बनाम एक्शन का दर्द"
मेरे पास बहुत से लोग आते हैं, बाकायदा पर्सनलाइज्ड कंसल्टेंसी (Personalized Consultancy) करवाते है । हम घंटों बैठकर उनकी प्रोफाइल के हिसाब से एक बेहतरीन कस्टमाइज्ड वेल्थ प्लान तैयार करते हैं। वो बड़ी खुश होते है और कहते हैं—"विवेक जी, मजा आ गया!"

लेकिन जब एक महीने बाद उस प्लान पर 'एक्शन' लेने और जेब से पैसा निकालकर लगातार इन्वेस्ट करने की बारी आती है, तो बहानों की पूरी बारात आ जाती है! "भाई साहब, इस महीने शादी आ गई", "दुकान में माल अटक गया", "अगले महीने से पक्का करेंगे!"

भाइयों, याद रखिए—कंसल्टेंसी सिर्फ एक नक्शा (Map) है, उस रास्ते पर चलना और अनुशासन का दर्द सहना सिर्फ और सिर्फ आपका काम है। अगर कुर्सी से उठोगे ही नहीं, तो दुनिया का सबसे बेहतरीन नक्शा भी आपको आपकी मंजिल तक नहीं पहुंचा सकता। सिर्फ ज्ञान बटोरने से तिजोरी नहीं भरेगी, उस ज्ञान पर तुरंत अमल करना शुरू करो।

अब फैसला आपके हाथ में है...
शॉर्टकट के भ्रम से बाहर निकलिए। अमीर दिखना छोड़िए और सचमुच अमीर बनने की राह पर चलिए।

क्या आप भी अब तक किसी 'शॉर्टकट' या 'वन-टाइम' स्कीम के इंतजार में बैठे थे?
या फिर आज इस लेख को पढ़ने के बाद, आप अपने बहानों की लिस्ट फाड़कर पहला 'प्रैक्टिकल एक्शन' लेने को तैयार हैं?

आपकी हर हिचकिचाहट को दूर करने के लिए मैं आपके साथ खड़ा हूँ। इस लेख को उन सभी दोस्तों के साथ शेयर कीजिए जो सिर्फ प्लान बनाते हैं पर एक्शन नहीं लेते!
धन्यवाद l

http://p.njw.bz/22521

टैक्स और वेल्थ क्रिएशन पर एक अलग नज़रिया lकई इन्वेस्टर वोलैटिलिटी से डरते हैं, लेकिन लंबे समय में, वोलैटिलिटी डिसिप्लिन्...
07/07/2026

टैक्स और वेल्थ क्रिएशन पर एक अलग नज़रिया l

कई इन्वेस्टर वोलैटिलिटी से डरते हैं, लेकिन लंबे समय में, वोलैटिलिटी डिसिप्लिन्ड इक्विटी इन्वेस्टर के सबसे बड़े साथियों में से एक हो सकती है। यह ऐसे मौके बनाती है जो वेल्थ बनाने में मदद करती हैं।

असली दुश्मन अक्सर मार्केट का उतार-चढ़ाव नहीं होता—यह महंगाई होती है। जो इन्वेस्टर अपना सारा पैसा फिक्स्ड डिपॉजिट में लगाकर वोलैटिलिटी से बचते हैं, वे सुरक्षित महसूस कर सकते हैं, लेकिन समय के साथ, महंगाई और टैक्स चुपचाप उनकी खरीदने की ताकत कम कर सकती हैं और असली वेल्थ कम कर सकती हैं।

मार्केट के कुछ समय के उतार-चढ़ाव को रिस्क समझने की गलती न करें। सबसे बड़ा रिस्क है महंगाई और टैक्स की अनदेखी, दोहरी ताकतों के कारण अपनी वेल्थ खोना।

वोलैटिलिटी कुछ समय के लिए होती है। महंगाई कभी न खत्म होने वाली होती है। समझदारी से चुनें।

मान लीजिए किसी ने फिक्स्ड डिपॉजिट में ₹1,00,000 इन्वेस्ट किए, जिस पर एवरेज सालाना 7% का रिटर्न मिला। इतने सालों में, इन्वेस्टमेंट बढ़कर लगभग ₹3,86,968 हो जाता है।

लेकिन, कई लोगों की सोच के उलट, FD पर मिलने वाला इंटरेस्ट हर साल एक्रुअल बेसिस पर टैक्सेबल होता है (लागू टैक्स नियमों के तहत)। उदाहरण के लिए, अगर हम आखिर में पूरी अवधि में कुल टैक्स इम्पैक्ट कैलकुलेट करते हैं, तो टैक्स के बाद की वैल्यू लगभग ₹2,97,434 होगी।

दिलचस्प बात यह है कि बहुत कम लोग फिक्स्ड डिपॉजिट के लॉन्ग-टर्म टैक्स इम्पैक्ट के बारे में बात करते हैं। फिर भी, जब म्यूचुअल फंड की बात आती है, तो चर्चा अक्सर सिर्फ टैक्स पर फोकस होती है, जबकि टैक्स देने के बाद भी बनी दौलत को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।

20 साल बाद बिना टैक्स के FD Rs. 3,86,968
20 साल बाद सभी टैक्स के साथ BSE सेंसेक्स Rs. 6,66,298
20 साल बाद सभी टैक्स के साथ निफ्टी 50 Rs. 7,04,753
20 साल बाद सभी टैक्स के साथ BSE स्मॉल कैप Rs. 9,55,186
20 साल बाद सभी टैक्स के साथ BSE मिडकैप Rs. 9,81,547
20 साल बाद सभी टैक्स के साथ एक्टिवली मैनेज्ड एवरेज स्मॉल कैप Rs. 12,85,420
20 साल बाद सभी टैक्स के साथ एक्टिवली मैनेज्ड एवरेज मिड कैप Rs. 13,74,512

इन्वेस्टमेंट का असली मकसद टैक्स के बाद वेल्थ को मैक्सिमाइज़ करना होना चाहिए, न कि सिर्फ़ टैक्स से बचना।

यह सोच एक वजह है कि कई मिडिल-क्लास इन्वेस्टर अपने कम्फर्ट ज़ोन में ही रहते हैं और ग्रोथ-ओरिएंटेड इन्वेस्टमेंट से मिलने वाले लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन पोटेंशियल से चूक जाते हैं।

यह इलस्ट्रेशन सिर्फ़ एजुकेशनल मकसद के लिए दिया गया है और इसे इन्वेस्टमेंट या टैक्स एडवाइस नहीं समझना चाहिए।

http://p.njw.bz/22521

डिस्क्लेमर: कृपया ध्यान रखें कि म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट मार्केट रिस्क के संपर्क में आते हैं। कोई भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले, स्कीम से जुड़े सभी डॉक्यूमेंट्स को अच्छी तरह से रिव्यू करें। रिपोर्ट का मटीरियल सिर्फ़ इन्फॉर्मेशनल मकसद के लिए है और इसे पाने वाले को ही इस्तेमाल करना चाहिए। हालांकि हमने इस रिपोर्ट का डेटा और कंटेंट इकट्ठा करने में बहुत कोशिश की है, लेकिन हम अंदाज़ों के लॉजिक या किसी भी डेटा की सच्चाई के बारे में कोई वादा नहीं करते हैं। इस मटीरियल का इस्तेमाल करके लिए गए कोई भी फ़ैसले पूरी तरह से पाने वाले की ज़िम्मेदारी हैं। रिपोर्ट में मिली किसी भी गलती या अंतर को, जो कभी भी हमारे ध्यान में आए या पता चले, हम उसे ठीक करने का अधिकार रखते हैं। कोई भी इन्वेस्टमेंट करने से पहले अच्छी तरह रिसर्च कर लें। क्यों? सिर्फ़ इसलिए कि यह दिलचस्प है।

एक नंबर जिसके बारे में आपका बैंक आपसे कभी बात नहीं करेगा।आपका FD रेट नहीं।आपका मैच्योरिटी अमाउंट नहीं।साथ में दी गई टेबल...
23/06/2026

एक नंबर जिसके बारे में आपका बैंक आपसे कभी बात नहीं करेगा।

आपका FD रेट नहीं।

आपका मैच्योरिटी अमाउंट नहीं।

साथ में दी गई टेबल देखें और आपको वह नंबर पता चल जाएगा।

👉 वे इस पर बात क्यों नहीं करते?

क्योंकि वह नंबर आपको बताता है कि आपकी दौलत सच में बढ़ी है या नहीं - या यह सिर्फ़ संख्या में बढ़ी है, खरीदने की ताकत में नहीं।

बढ़ता हुआ पैसा और बढ़ती दौलत हमेशा एक जैसी बात नहीं होती।

मेरे दादा जी मानते थे:
फिक्स्ड डिपॉज़िट सुरक्षित हैं।

और वह अकेले नहीं थे।
लाखों भारतीय आज भी यही मानते हैं।

लेकिन किससे सुरक्षित?

अगर आपका पैसा खरीदने की ताकत खो रहा है, तो क्या यह सच में सुरक्षित है?

नंबर देखें।

अप्रैल 2021
👉 AICPI-IW इंडेक्स: 118
👉 SBI 5-साल की FD: 5.40%
👉 5-साल की G-Sec: 5.42%

अप्रैल 2026
👉 AICPI-IW इंडेक्स: 150

यह सिर्फ़ पाँच सालों में रहने-सहने के खर्च में लगभग 27% की बढ़ोतरी है।

अब टैक्स के बाद के असली रिटर्न देखें:

👉 10% टैक्स स्लैब → -0.04%
👉 20% टैक्स स्लैब → -0.55%
👉 30% टैक्स स्लैब → -1.07%

इसे समझने दें।
पैसा बढ़ा।

लेकिन खरीदने की ताकत नहीं बढ़ी।
अब खुद से एक आसान सवाल पूछें:

अपनी FD के ब्याज पर टैक्स देने के बाद, क्या आपकी दौलत सच में बढ़ी?

या आपके पैसे की वैल्यू चुपचाप कम हो गई, जबकि आपको सेफ्टी का आरामदायक भ्रम था?

कागज़ पर 5.4% FD रिटर्न अच्छा लग सकता है।

लेकिन जब आप फिक्स्ड-रिटर्न इंस्ट्रूमेंट्स में इन्वेस्ट करते हैं, तो महंगाई आपका सबसे बड़ा कॉम्पिटिटर होती है।

👉और जब महंगाई टैक्सेशन के साथ मिलती है, तो नतीजा बहुत बुरा हो सकता है।
महंगाई आपकी खरीदने की ताकत कम करती है।

टैक्स आपका रिटर्न कम करता है।
दोनों मिलकर, साल दर साल चुपचाप आपकी दौलत पर हमला करते हैं।

कड़वी सच्चाई यह है:
👉 दौलत बनाना भूल जाइए।

एक डेवलपिंग इकॉनमी में, कई फिक्स्ड-रिटर्न इंस्ट्रूमेंट्स खरीदने की ताकत बनाए रखने के लिए भी संघर्ष करते हैं।

👉कुछ समय में, वे बिल्कुल भी सुरक्षा देने में फेल हो जाते हैं।

ज़्यादातर लोग वोलैटिलिटी से डरते हैं।
मुझे खरीदने की ताकत के चुपचाप खत्म होने का डर है।
क्योंकि वोलैटिलिटी दिखती है।
महंगाई नहीं।

किसी भी रिटर्न का जश्न मनाने से पहले, हमेशा एक नंबर कैलकुलेट करें:

टैक्स के बाद। महंगाई के बाद। असली रिटर्न।

असल में आपको यही रिटर्न मिलता है।

24/05/2026

बहुत से लोग बाजार में इस उम्मीद से आते हैं कि यहाँ जल्दी पैसा बन जाएगा। किसी ने YouTube पर कोई multibagger बता दिया, किसी ने Telegram पर कोई stock भेज दिया, किसी दोस्त ने कहा “ये शेयर अगले 6 महीने में दोगुना हो जाएगा”, और बस लोग बिना समझे निवेश कर देते हैं। जब तक बाजार ऊपर जाता है तब तक उन्हें लगता है कि वे बहुत समझदार investor हैं, लेकिन जैसे ही गिरावट शुरू होती है, वही लोग panic में बेचकर बाहर निकल जाते हैं और फिर कहते हैं कि “share market जुआ है।”

सच्चाई यह है कि बाजार किसी की इच्छाओं, उम्मीदों या जरूरतों के हिसाब से काम नहीं करता। Market आपको वह नहीं देता जो आप चाहते हैं, बल्कि वह देता है जिसके आप योग्य बनते हैं। अगर आपके अंदर धैर्य नहीं है, risk management नहीं है, financial understanding नहीं है, emotions पर control नहीं है, तो market बहुत जल्दी आपकी कमियाँ सामने ला देता है।

कई लोग केवल return के पीछे भागते हैं लेकिन process पर ध्यान नहीं देते। वे यह नहीं समझते कि wealth creation कोई एक-दो महीने का खेल नहीं है। बड़ी wealth हमेशा discipline, patience और consistency से बनती है। यही कारण है कि बहुत से लोग bull market में पैसा कमाते हुए दिखाई देते हैं लेकिन लंबे समय में वही लोग wealth बना पाते हैं जो कठिन समय में भी टिके रहते हैं।

बाजार में सफल होने के लिए सबसे पहले यह स्वीकार करना पड़ता है कि हर समय profit नहीं होगा। गिरावट भी आएगी, uncertainty भी आएगी, और कई बार आपके अच्छे investments भी कुछ समय के लिए negative दिखाई देंगे। लेकिन mature investor वही होता है जो short term noise से प्रभावित होकर बार-बार decisions नहीं बदलता। जो व्यक्ति हर दिन portfolio देखकर panic करता है, वह लंबे समय की wealth creation का लाभ शायद ही उठा पाए।

यहाँ सबसे बड़ा अंतर knowledge और behaviour का होता है। बहुत लोग जानकारी तो इकट्ठा कर लेते हैं लेकिन व्यवहार में discipline नहीं ला पाते। उन्हें पता होता है कि SIP लंबे समय में अच्छा परिणाम दे सकती है, फिर भी market गिरते ही SIP बंद कर देते हैं। उन्हें पता होता है कि diversification जरूरी है, फिर भी पूरा पैसा एक-दो stocks में लगा देते हैं। उन्हें पता होता है कि emergency fund होना चाहिए, फिर भी पूरा पैसा market में डाल देते हैं। Market अंततः ऐसी गलतियों की कीमत वसूलता है।

अक्सर लोग पूछते हैं कि “कौन सा stock सबसे ज्यादा return देगा?” लेकिन सही प्रश्न यह होना चाहिए कि “क्या मैं mentally और financially इतना disciplined हूँ कि लंबे समय तक निवेश बनाए रख सकूँ?” क्योंकि investment products से ज्यादा महत्वपूर्ण investor का behaviour होता है। एक average investment strategy भी लंबे समय में शानदार परिणाम दे सकती है अगर investor disciplined रहे। वहीं एक बेहतरीन strategy भी fail हो सकती है अगर investor emotions से decisions ले।

बाजार में success पाने के लिए केवल intelligence काफी नहीं होती। यहाँ patience intelligence से ज्यादा powerful होता है। Warren Buffett ने भी कहा था कि stock market impatient लोगों से पैसा लेकर patient लोगों को देने की मशीन है। यही कारण है कि कई बार साधारण लोग भी extraordinary wealth बना लेते हैं क्योंकि वे समय को अपना साथी बना लेते हैं।

आज social media ने investing को और भी कठिन बना दिया है। हर दिन कोई न कोई “next multibagger”, “guaranteed return”, “secret strategy” या “sure shot stock” लेकर बैठा है। इससे लोगों का focus long term investing से हटकर instant excitement पर चला जाता है। लेकिन wealth excitement से नहीं, consistency से बनती है। रोज नए ideas बदलने वाले लोग अक्सर returns नहीं, केवल stress कमाते हैं।

सही investing का मतलब केवल ज्यादा return कमाना नहीं होता। सही investing का मतलब है financial stability बनाना, अपने goals पूरे करना, future secure करना और ऐसी व्यवस्था बनाना जहाँ पैसा आपके लिए काम करे। इसके लिए जरूरी है कि व्यक्ति अपने risk profile को समझे, अपने goals clear रखे और disciplined तरीके से निवेश करे।

इसलिए अगली बार जब market में तेजी देखकर आपको लगे कि “मुझे भी जल्दी पैसा बनाना है”, तब खुद से एक सवाल जरूर पूछिए कि क्या आपने खुद को उस wealth के योग्य बनाया है? क्या आपके अंदर वह patience, discipline और understanding है जो लंबे समय की success के लिए चाहिए?

क्योंकि बाजार आपको वह नहीं देता जो आप चाहते हैं।
बाजार आपको वही देता है जिसके आप योग्य होते हैं।

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9614110370

19/05/2026

₹1 Crore sounds huge today.
But at 7% inflation:

After 10 years → Value = ~₹50 lakh
After 20 years → ~₹26 lakh
After 30 years → ~₹13 lakh

That’s the silent power of inflation.

Saving money is not enough anymore.

Your money must grow faster than inflation.

Invest your Money in Growing Assets

1L invested in a smallcap scheme has become 20L over 19 yrs @ 17% CAGR!The journey has not been smooth. In the 19 yrs, t...
11/05/2026

1L invested in a smallcap scheme has become 20L over 19 yrs @ 17% CAGR!

The journey has not been smooth. In the 19 yrs, the fund crashed 75% (2008), 50% (2018), 34% (2010), 25% (2013), 24% (2024) & on many other occasions more than 10%

Yet, over the long term - it has delivered phenomenal returns. NAV of 10 becoming 200+

Here is the illustration of the investment journey of 1L in a smallcap fund over 19yrs. 1L coming down to 45K only to recover & become 20L in 19 yrs.

The returns column refer to the returns at various points since inception (Absolute for less than 1 yr, CAGR for period more than 1 yr). Beyond 5 yrs, CAGR has been above 11% despite crashes. Patience is the key.

NAV fell from 10 to 4, 18 to 13, 70 to 37. Jumped again from 37 to 71 in just 9 months.

Disc - Not a recommendation. Consult your advisor.

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