Financial and Insurance Discussion with Vivek Singh

Financial and Insurance Discussion with Vivek Singh Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Financial and Insurance Discussion with Vivek Singh, Insurance Company, Burnpur, Asansol.

24/05/2026

बहुत से लोग बाजार में इस उम्मीद से आते हैं कि यहाँ जल्दी पैसा बन जाएगा। किसी ने YouTube पर कोई multibagger बता दिया, किसी ने Telegram पर कोई stock भेज दिया, किसी दोस्त ने कहा “ये शेयर अगले 6 महीने में दोगुना हो जाएगा”, और बस लोग बिना समझे निवेश कर देते हैं। जब तक बाजार ऊपर जाता है तब तक उन्हें लगता है कि वे बहुत समझदार investor हैं, लेकिन जैसे ही गिरावट शुरू होती है, वही लोग panic में बेचकर बाहर निकल जाते हैं और फिर कहते हैं कि “share market जुआ है।”

सच्चाई यह है कि बाजार किसी की इच्छाओं, उम्मीदों या जरूरतों के हिसाब से काम नहीं करता। Market आपको वह नहीं देता जो आप चाहते हैं, बल्कि वह देता है जिसके आप योग्य बनते हैं। अगर आपके अंदर धैर्य नहीं है, risk management नहीं है, financial understanding नहीं है, emotions पर control नहीं है, तो market बहुत जल्दी आपकी कमियाँ सामने ला देता है।

कई लोग केवल return के पीछे भागते हैं लेकिन process पर ध्यान नहीं देते। वे यह नहीं समझते कि wealth creation कोई एक-दो महीने का खेल नहीं है। बड़ी wealth हमेशा discipline, patience और consistency से बनती है। यही कारण है कि बहुत से लोग bull market में पैसा कमाते हुए दिखाई देते हैं लेकिन लंबे समय में वही लोग wealth बना पाते हैं जो कठिन समय में भी टिके रहते हैं।

बाजार में सफल होने के लिए सबसे पहले यह स्वीकार करना पड़ता है कि हर समय profit नहीं होगा। गिरावट भी आएगी, uncertainty भी आएगी, और कई बार आपके अच्छे investments भी कुछ समय के लिए negative दिखाई देंगे। लेकिन mature investor वही होता है जो short term noise से प्रभावित होकर बार-बार decisions नहीं बदलता। जो व्यक्ति हर दिन portfolio देखकर panic करता है, वह लंबे समय की wealth creation का लाभ शायद ही उठा पाए।

यहाँ सबसे बड़ा अंतर knowledge और behaviour का होता है। बहुत लोग जानकारी तो इकट्ठा कर लेते हैं लेकिन व्यवहार में discipline नहीं ला पाते। उन्हें पता होता है कि SIP लंबे समय में अच्छा परिणाम दे सकती है, फिर भी market गिरते ही SIP बंद कर देते हैं। उन्हें पता होता है कि diversification जरूरी है, फिर भी पूरा पैसा एक-दो stocks में लगा देते हैं। उन्हें पता होता है कि emergency fund होना चाहिए, फिर भी पूरा पैसा market में डाल देते हैं। Market अंततः ऐसी गलतियों की कीमत वसूलता है।

अक्सर लोग पूछते हैं कि “कौन सा stock सबसे ज्यादा return देगा?” लेकिन सही प्रश्न यह होना चाहिए कि “क्या मैं mentally और financially इतना disciplined हूँ कि लंबे समय तक निवेश बनाए रख सकूँ?” क्योंकि investment products से ज्यादा महत्वपूर्ण investor का behaviour होता है। एक average investment strategy भी लंबे समय में शानदार परिणाम दे सकती है अगर investor disciplined रहे। वहीं एक बेहतरीन strategy भी fail हो सकती है अगर investor emotions से decisions ले।

बाजार में success पाने के लिए केवल intelligence काफी नहीं होती। यहाँ patience intelligence से ज्यादा powerful होता है। Warren Buffett ने भी कहा था कि stock market impatient लोगों से पैसा लेकर patient लोगों को देने की मशीन है। यही कारण है कि कई बार साधारण लोग भी extraordinary wealth बना लेते हैं क्योंकि वे समय को अपना साथी बना लेते हैं।

आज social media ने investing को और भी कठिन बना दिया है। हर दिन कोई न कोई “next multibagger”, “guaranteed return”, “secret strategy” या “sure shot stock” लेकर बैठा है। इससे लोगों का focus long term investing से हटकर instant excitement पर चला जाता है। लेकिन wealth excitement से नहीं, consistency से बनती है। रोज नए ideas बदलने वाले लोग अक्सर returns नहीं, केवल stress कमाते हैं।

सही investing का मतलब केवल ज्यादा return कमाना नहीं होता। सही investing का मतलब है financial stability बनाना, अपने goals पूरे करना, future secure करना और ऐसी व्यवस्था बनाना जहाँ पैसा आपके लिए काम करे। इसके लिए जरूरी है कि व्यक्ति अपने risk profile को समझे, अपने goals clear रखे और disciplined तरीके से निवेश करे।

इसलिए अगली बार जब market में तेजी देखकर आपको लगे कि “मुझे भी जल्दी पैसा बनाना है”, तब खुद से एक सवाल जरूर पूछिए कि क्या आपने खुद को उस wealth के योग्य बनाया है? क्या आपके अंदर वह patience, discipline और understanding है जो लंबे समय की success के लिए चाहिए?

क्योंकि बाजार आपको वह नहीं देता जो आप चाहते हैं।
बाजार आपको वही देता है जिसके आप योग्य होते हैं।

ज्यादा जानकारी के लिए और सही तरीके से गोल के अनुसार इन्वेस्टमेंट करने के लिए हमारे साथ आप जुड़ सकते है l
9614110370

19/05/2026

₹1 Crore sounds huge today.
But at 7% inflation:

After 10 years → Value = ~₹50 lakh
After 20 years → ~₹26 lakh
After 30 years → ~₹13 lakh

That’s the silent power of inflation.

Saving money is not enough anymore.

Your money must grow faster than inflation.

Invest your Money in Growing Assets

1L invested in a smallcap scheme has become 20L over 19 yrs @ 17% CAGR!The journey has not been smooth. In the 19 yrs, t...
11/05/2026

1L invested in a smallcap scheme has become 20L over 19 yrs @ 17% CAGR!

The journey has not been smooth. In the 19 yrs, the fund crashed 75% (2008), 50% (2018), 34% (2010), 25% (2013), 24% (2024) & on many other occasions more than 10%

Yet, over the long term - it has delivered phenomenal returns. NAV of 10 becoming 200+

Here is the illustration of the investment journey of 1L in a smallcap fund over 19yrs. 1L coming down to 45K only to recover & become 20L in 19 yrs.

The returns column refer to the returns at various points since inception (Absolute for less than 1 yr, CAGR for period more than 1 yr). Beyond 5 yrs, CAGR has been above 11% despite crashes. Patience is the key.

NAV fell from 10 to 4, 18 to 13, 70 to 37. Jumped again from 37 to 71 in just 9 months.

Disc - Not a recommendation. Consult your advisor.

Inflation is a silent Wealth Killer.
29/04/2026

Inflation is a silent Wealth Killer.

08/04/2026

रात को सब सोच रहे थे कि market से पैसे निकाल लें,
सुबह वही लोग सोच रहे हैं कि और क्यों नहीं लगा दिए।

यही market है- यहां भावनाओं पर नियंत्रण रखने वाला ही पैसा बना पाता है।

SIP करते रहो, market को रोज़ मत देखो।

यह है भारत के सबसे बदनसीब निवेशक की कहानी।वह हर साल Sensex को उसके 52-हफ़्ते के सबसे ऊँचे स्तर पर खरीदता है।और 35 सालों ...
04/04/2026

यह है भारत के सबसे बदनसीब निवेशक की कहानी।
वह हर साल Sensex को उसके 52-हफ़्ते के सबसे ऊँचे स्तर पर खरीदता है।
और 35 सालों तक खरीदता रहता है।
वह लगातार लगा रहता है।
वह भारत का सबसे बदनसीब निवेशक है।
क्योंकि हर बार जब वह निवेश करता है, तो बाज़ार (उसी साल) गिर जाता है।

लेकिन बाज़ार के लंबे समय तक कंपाउंड होने से 35 लाख रुपये, 3 करोड़ रुपये से थोड़े ज़्यादा बन जाते हैं।

यह 10.5% का रिटर्न है। उस निवेश के लिए, जिसका समय सबसे खराब था।

This is India's unluckiest investor's story.
He buys the Sensex every year at the 52-week high.
And keeps buying for 35 years.
He is persistent.
He is the unluckiest investor in India.
Because each time he invests the market falls (that year).

But long-term compounding of the market turns Rs 35 lakh into just over Rs 3 crore.

That's a 10.5% return. For the worst-timed investment.

अमेरिका: मज़बूत ग्राहक… लेकिन कमजोर उत्पादन आधारमजबूत मुद्रा की असली कीमतUnited States को एक अनोखा फायदा मिला हुआ है-उसक...
02/04/2026

अमेरिका:
मज़बूत ग्राहक…
लेकिन कमजोर उत्पादन आधार

मजबूत मुद्रा की असली कीमत
United States को एक अनोखा फायदा मिला हुआ है-
उसकी मुद्रा, US Dollar, पूरी दुनिया में चलती है।

ऊपर से यह एक ताकत लगता है।
लेकिन इसके पीछे एक गहरी कीमत छुपी है।

दुनिया एक बाज़ार है
अमेरिका डॉलर लेकर आता है
बाकी देश असली चीज़ें बनाते हैं,मोबाइल, मशीनें, तेल,कपड़े आदि आदि

और वे सब डॉलर के बदले बेच देते हैं।
👉 अमेरिका को मिलता है सस्ता सामान
👉 दुनिया को मिलते हैं डॉलर,मुनाफा,रोज़गार

सिस्टम कैसे चलता है
बाकी देश:
डॉलर कमाते हैं
सब खर्च नहीं करते
बचत को U.S. Treasuries में पुनः लगा देते हैं

मतलब:
उन्होंने अमेरिका को सामान बेचा
और फिर उसी पैसे ज़रूरत का इंपोर्ट किया और बचे हुए डॉलर्स से अमेरिका के बांड ख़रीद लिए (उधार दे दिया)

ऊपर से सब परफेक्ट लगता है
अमेरिका को:
सस्ता सामान
अपने ही डॉलर वापस मिल गए
सिर्फ ब्याज देनाभाई।

सब कुछ आसान।
लेकिन असली नुकसान यहीं से शुरू होता है

1. उत्पादन धीरे-धीरे बाहर चला जाता है
जब
बाहर से सस्ता सामान मिलता है
डॉलर मजबूत रहता है
तो कंपनियाँ उत्पादन बाहर ले जाती हैं

नतीजा
Low-cost manufacturing बाहर
Domestic factories कमजोर हो बंद होने लगती है।

2. औद्योगिक गहराई कम होती है
यह सच है कि अमेरिका अभी भी उत्पादन करता है
लेकिन:
मास मैन्युफैक्चरिंग कम हो गई
रोजगार देने वाली इंडस्ट्री कमजोर हुई

3. GDP बढ़ता है… लेकिन सबको फायदा नहीं मिलता- क्यूंकि wages,rent,interest,profits में सर्वाधिक ग्रोथ प्रॉफिट की होने लगती है।
टेक और फाइनेंस तेज़ी से बढ़ते हैं
लेकिन ये sectors:
कम लोगों को रोजगार देते हैं
ज्यादा पैसा कुछ लोगों तक सीमित रखते हैं

Result:
Growth without broad participation

4. कर्ज बढ़ता जाता है
हर बार जब दुनिया U.S. Treasuries खरीदती है:
अमेरिका का कर्ज बढ़ता है
सिस्टम चलता है…
लेकिन उधार पर

5. अर्थव्यवस्था का संतुलन बदल जाता है
धीरे-धीरे:
Production से consumption
Industry से Finance
Jobs से Assets(आप ध्यान दीजिए, बहुत से अमीर औद्योगिक घरानों के बच्चे उद्योग मे जाना चाहते है, या फ़ैमिली ऑफिस बना एशर्ट्स में फाइनेंसियल निवेश कर पैसा बनाना चाहते है)

सबसे बड़ा बदलाव
पहले:
अमेरिका बनाता था और बेचता था
अब:
अमेरिका खरीदता ज्यादा है, बनाता कम है (mass level पर)

सबसे बड़ा सच
यह सिस्टम फ्री नहीं है।
दुनिया की रिज़र्व करेंसी बनने के लिए:

👉 आपको लगातार trade deficit चलाना पड़ता है
👉 आपको अपनी currency को मजबूत रखना पड़ता है

और इसका असर:
आपके अपने उत्पादन तंत्र पर पड़ता है

दुनिया ने अमेरिका से डॉलर लिया
और इसके साथ ही अमेरिका ने दुनिया को अपनी फैक्ट्रियाँ भी ले जाने दीं।

यह पतन नहीं है…
लेकिन एक गहरा structural बदलाव है।
और यह बदलाव:
विकास तो लाता है…
पर विचलित करने वाला असंतुलन भी।

और असली खतरा?
जब तक आपको यह साफ दिखे…
👉 तब तक सिस्टम इतना गहरा हो चुका होता है कि बदलना आसान नहीं होता।

डॉलर के बाद , शायद ही कोई दूसरा देश अपनी करेंसी को रिज़र्व करेंसी बनाने के बारे में सोचेगा l

Address

Burnpur
Asansol
713325

Opening Hours

Monday 9am - 10pm
Tuesday 9am - 10pm
Wednesday 9am - 10pm
Thursday 9am - 10pm
Friday 9am - 10pm
Saturday 9am - 10pm
Sunday 9am - 10pm

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Financial and Insurance Discussion with Vivek Singh posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share