Saurabh pathak insurance advisor

Saurabh pathak insurance advisor All type of insurance service

08/05/2021
23/05/2020

*HEALTH INSURANCE PLAN*
*की महत्वपूर्ण विशेषतायें*
अपने परिवार का स्वास्थ्य बिमा कराएं और हॉस्पिटल में लगने वाले खर्च से मुक्ति पाएं ।
*COVID19 COVERD*

👉 यह एक फ्लोटर पालिसी है, जिसमे एक ही प्रीमियम द्वारा सम्पूर्ण परिवार (पति, पत्नी व् अधिकतम 4 बच्चे 25 वर्ष से कम उम्र के) को शामिल किया जा सकता है ।

👉 बिमा राशि का उपयोग परिवार का एक सदस्य या सम्पूर्ण सदस्य अपनी आवशक्तानुसार कर सकते है ।

👉 प्रवेश की आयु सीमा 90 दिन के बच्चे से लेकर 65 वर्ष तक के व्यक्तियों की है ।

👉 पॉलिसी का नवीनीकरण आजीवन रहेगा ।

👉55साल तक 50 लाख तक कोई स्वस्थ्य परीक्षण नही, 55 वर्ष से अधिक के व्यक्तियों को मेडिकल जाँच कंपनी के खर्च पर होगी ।

🌟 *पॉलिसी के लाभ* 🌟

👉 एम्बुलैंस शुल्क एयर एम्बुलेंस की भी व्यवस्था
👉 All डे केअर बीमारियों का इलाज सुविधा बिना 24 घंटे हॉस्पिटल में भर्ती हुए ।
👉 गंभीर अवस्था में घर पर दिए गए उपचार का खर्च
👉 बीमित व्यक्ति की अंग दान करने वाले का भी अस्पताल का खर्च
👉 प्रत्येक साल के बाद स्वास्थ परिक्षण 5000 तक का 10 लाख या इससे अधिक बीमा राशि पर
👉 100% आटोमेटिक रिस्टोरशन सुविधा उपलब्ध बिना किसी अतिरिक्त प्रीमियम पर ।

👉 बोनस सुविधा 20%-50% प्रति वर्ष अधिकतम 100%-150% क्लेम रहित पालिसी होने पर
👉 भर्ती होने के 60 दिन पूर्व व् छुट्टी होने के बाद 180 दिन तक लिए गए सम्पूर्ण उपचार का खर्च

👉 विदेश में गम्भीर बीमारी के ईलाज की व्यवस्थ

🌟🌟 *क्या नहीं मिलता* 🌟🌟
💉 प्रथम 30 दिन तक दुर्घटना को छोड़ कर अन्य कोई जोखिम शामिल नहीं
💉 पालिसी लेते समय पूर्व मौजूद बिमारियों का कवर 3 वर्ष तक नहीं
💉 मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, रेटिनल डिटेचमेंट/मेक्युलेर डिजेनेरेशन, रीढ़ की हड्डी की गद्दी का खसक जाना, वेरिकॉजवेन्स, प्रोस्टेट ग्लैंड, नाक की हड्डी का टेढ़ा होना, साइनस संबंधी रोग, टॉन्सिल्स, थॉयरोएड, हर्निया एवम् जन्मजात बीमारियां,
गलब्लेडर, मूत्रतंत्र सम्बंधित रोग, पथरी, बच्चेदानी का ऑपरेशन, महिलाओं की आतंरिक बिमारियों, घुटने के जोड़ सम्बंधित व् मेरुदंड सम्बंधित बिमारियों को 2 वर्ष तक कवर नहीं किया जाता है ।

🌟 *हॉस्पिटल में भर्ती होने पर मिलने वाले लाभ* 🌟

👍 रूम रेंट
👍 डॉक्टर की फीस
👍 नर्सिंग चार्ज
👍 दवाइयों का सम्पूर्ण खर्च
👍 जांच का सम्पूर्ण खर्च
👍 एम्बुलेंस खर्च
👍 स्पेशलिस्ट डॉक्टर की फीस
👍 ऑपरेशन खर्च

व् बीमारी से सम्बंधित खर्च का भुगतान पालिसी के नियम अनुसार किया जाता है ।
*Health Acpeclist*
*SAURABH PATHAK*
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20/05/2020

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11/05/2020

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25/01/2020

*क्या आप अब भी LIC पॉलिसी लेने के से इन्कार कर रहे हो या टाल रहे हो ?*

पढीये दिल दहलाने वाली हकीकत

मुंबई के कांदिवली एरिया मे रहने वाले रोहीत पांडे (उम्र 22 साल) जो spice jet विमान कंपनी मे Aircraft Maintance Engineer का काम करते थे, कल दिनांक 10 जुलै 2019 को maintanance का काम करते वक्त उसकी मौत हो गयी।

परिवारवालों ने कहा की वो उनके परिवार के *एकलौते कमाने वाले सदस्य थे।* (sole breadwinner)

रोहित पांडे के परिवार मे उनकी विधवा माँ और 2 छोटी बहने है जो पढ रही है।

रोहित का बचपन से पायलट बनने का सपना था, लेकिन 2 साल पहले उसके पिताजी की आकस्मिक मृत्यु होने पर रोहित का सपना चूर चूर हो गया।

लेकीन उसने हार नही मानी ।
उसने पायलट की जगह Aircraft mainatanace Engineer का course करके अच्छे नंबर से पास होने के कारण उसे spice jet Airlines मे जॉब मिला।

रोहित खुश था की पायलट ही ना सही, लेकिन विमान के engineer का काम मिला है तो उसकी दुनिया विमान से जुडी रहेगी।

लेकीन कल ड्युटी पे काम करते वक्त उनकी अचानक मौत क्या हुई और उसके साथ उसके परिवार वाले भी मानो मर गये जैसे हो गये।

एक अकेला कमानेवाला रोहित और 20 साल की छोटी उमर मे माँ और दो बहने का बोझ उठाने की जिम्मेदारी उसके कंधे पे थी।

आज उनकी दुनिया तहस-नहस हो गयी है।

सब चिंतीत है की रोहित के मौत से spicejet airlines company उसे कुछ देगी या नही,
और देगी तो कब देगी, कितना मुआवजा देगी।
किसीको कुछ नही पता।

*कुछ समझ नही आ रहा है, लेकिन मन मे बहुत सारे सवाल उठ रहे है।*

1. क्या रोहित की LIC पॉलिसी होगी या नही?

2. पॉलिसी ली होगी, तो कितने लाख की होगी ?

3. क्या कोई LIC agent रोहित को LIC policy समझाने गया होगा या नही ?

4. और अगर गया होगा तो रोहित ने LIC पॉलिसी ली भी होगी या नही ?

5. क्या LIC agent को उसने कोई बहाना बना के टाल दिया होगा?

6. उसके परिवार मे विधवा माँ और छोटी बहनो की पढाई और शादी का क्या होगा , क्या अब माँ को कोई जॉब करना पडेगा या दोनो बहनो को पढाई छोडनी पडेगी ?

*प्रिय ग्राहक,*
*तुम जरा अपने बारे मे सोच सकते हो क्या?*
👇👇👇

एक ओर रोहित का परिवार
और
दुसरी ओर आप का परिवार जीसमे आप एकमात्र breadwinner है
1. *क्या आपने LIC पॉलिसी ली है ?*

2. *पॉलिसी ली भी है तो क्या वह पर्याप्त है?*

3. *क्या आपने आपके LIC Agent को झुठा बहाना बना के पॉलिसी लेने से इन्कार किआ है या पॉलिसी लेने का टाल दिया है?*

4. *क्या आपका LIC Agent आप को फोन करके पॉलिसी लेने को कह रहा है और आप उसे आप बिजी है, फिर कभी फोन करना ऐसा कह रहे हॊ ?*

*जरा सोचो*

*अभी भी वक्त है..*
आप के परीवार के बारे मे सोचो
और
*आज ही LIC policy का सुरक्षा कवच ले लो* जीससे आप का परिवार आप के न रहने पर रस्ते पे ना आ जाये।

आपका LIC Advisor Saurabh pathak

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12/01/2020

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29/12/2019

जीवन के *20* साल हवा की तरह उड़ गए । फिर शुरू हुई *नोकरी* की खोज । ये नहीं वो , दूर नहीं पास । ऐसा करते करते *2 .. 3* नोकरियाँ छोड़ने एक तय हुई। थोड़ी स्थिरता की शुरुआत हुई।

फिर हाथ आया पहली तनख्वाह का *चेक*। वह *बैंक* में जमा हुआ और शुरू हुआ अकाउंट में जमा होने वाले *शून्यों* का अंतहीन खेल। *2- 3* वर्ष और निकल गए। बैंक में थोड़े और *शून्य* बढ़ गए। उम्र *27* हो गयी।

और फिर *विवाह* हो गया। जीवन की *राम कहानी* शुरू हो गयी। शुरू के *2 .. 4* साल नर्म , गुलाबी, रसीले , सपनीले गुजरे । हाथो में हाथ डालकर घूमना फिरना, रंग बिरंगे सपने। *पर ये दिन जल्दी ही उड़ गए*।

और फिर *बच्चे* के आने ही आहट हुई। वर्ष भर में *पालना* झूलने लगा। अब सारा ध्यान बच्चे पर केन्द्रित हो गया। उठना - बैठना, खाना - पीना, लाड - दुलार ।

समय कैसे फटाफट निकल गया, पता ही नहीं चला।
*इस बीच कब मेरा हाथ उसके हाथ से निकल गया, बाते- करना घूमना - फिरना कब बंद हो गया दोनों को पता ही न चला*।

*बच्चा* बड़ा होता गया। वो *बच्चे* में व्यस्त हो गयी, मैं अपने *काम* में । घर और गाडी की *क़िस्त*, बच्चे की जिम्मेदारी, शिक्षा और भविष्य की सुविधा और साथ ही बैंक में *शुन्य* बढाने की चिंता। उसने भी अपने आप काम में पूरी तरह झोंक दिया और मेने भी....

इतने में मैं *37* का हो गया। घर, गाडी, बैंक में *शुन्य*, परिवार सब है फिर भी कुछ कमी है ? पर वो है क्या समझ नहीं आया। उसकी चिड चिड बढती गयी, मैं उदासीन होने लगा।

इस बीच दिन बीतते गए। समय गुजरता गया। बच्चा बड़ा होता गया। उसका खुद का संसार तैयार होता गया। कब *10वि* *anniversary*आई और चली गयी पता ही नहीं चला। तब तक दोनों ही *40 42* के हो गए। बैंक में *शुन्य* बढ़ता ही गया।

एक नितांत एकांत क्षण में मुझे वो *गुजरे* दिन याद आये और मौका देख कर उस से कहा " अरे जरा यहाँ आओ, पास बैठो। चलो हाथ में हाथ डालकर कही घूम के आते हैं।"

उसने अजीब नजरो से मुझे देखा और कहा कि " *तुम्हे कुछ भी सूझता* *है यहाँ ढेर सारा काम पड़ा है तुम्हे* *बातो की सूझ रही है*।"
कमर में पल्लू खोंस वो निकल गयी।

तो फिर आया *पैंतालिसवा* साल, आँखों पर चश्मा लग गया, बाल काला रंग छोड़ने लगे, दिमाग में कुछ उलझने शुरू हो गयी।

बेटा उधर कॉलेज में था, इधर बैंक में *शुन्य* बढ़ रहे थे। देखते ही देखते उसका *कॉलेज* ख़त्म। वह अपने पैरो पे खड़ा हो गया। उसके पंख फूटे और उड़ गया *परदेश*।

उसके *बालो का काला* रंग भी उड़ने लगा। कभी कभी दिमाग साथ छोड़ने लगा। उसे *चश्मा* भी लग गया। मैं खुद *बुढा* हो गया। वो भी *उमरदराज* लगने लगी।

दोनों *55* से *60* की और बढ़ने लगे। बैंक के *शून्यों* की कोई खबर नहीं। बाहर आने जाने के कार्यक्रम बंद होने लगे।

अब तो *गोली दवाइयों* के दिन और समय निश्चित होने लगे। *बच्चे* बड़े होंगे तब हम *साथ* रहेंगे सोच कर लिया गया घर अब बोझ लगने लगा। *बच्चे* कब *वापिस* आयेंगे यही सोचते सोचते बाकी के दिन गुजरने लगे।

एक दिन यूँ ही सोफे पे बेठा ठंडी हवा का आनंद ले रहा था। वो दिया बाती कर रही थी। तभी *फोन* की घंटी बजी। लपक के *फोन* उठाया। *दूसरी तरफ बेटा था*। जिसने कहा कि उसने *शादी* कर ली और अब *परदेश* में ही रहेगा।

उसने ये भी कहा कि पिताजी आपके बैंक के *शून्यों* को किसी *वृद्धाश्रम* में दे देना। और *आप भी वही रह लेना*। कुछ और ओपचारिक बाते कह कर बेटे ने फोन रख दिया।

मैं पुन: सोफे पर आकर बेठ गया। उसकी भी पूजा ख़त्म होने को आई थी। मैंने उसे आवाज दी *"चलो आज फिर हाथो में हाथ लेके बात करते हैं*"
*वो तुरंत बोली " अभी आई"।*

मुझे विश्वास नहीं हुआ। *चेहरा ख़ुशी से चमक उठा*। आँखे भर आई। आँखों से आंसू गिरने लगे और गाल भीग गए । अचानक आँखों की *चमक फीकी* पड़ गयी और मैं *निस्तेज* हो गया। हमेशा के लिए !!

उसने शेष पूजा की और मेरे पास आके बैठ गयी " *बोलो क्या बोल रहे थे*?"

लेकिन मेने कुछ नहीं कहा। उसने मेरे शरीर को छू कर देखा। शरीर बिलकुल *ठंडा* पड गया था। मैं उसकी और एकटक देख रहा था।

क्षण भर को वो शून्य हो गयी।
" *क्या करू*? "

उसे कुछ समझ में नहीं आया। लेकिन *एक दो* मिनट में ही वो चेतन्य हो गयी। धीरे से उठी पूजा घर में गयी। एक अगरबत्ती की। *इश्वर को प्रणाम किया*। और फिर से आके सोफे पे बैठ गयी।

मेरा *ठंडा हाथ* अपने हाथो में लिया और बोली
" *चलो कहाँ घुमने चलना है तुम्हे* ? *क्या बातें करनी हैं तुम्हे*?" *बोलो* !!

ऐसा कहते हुए उसकी आँखे भर आई !!......
वो एकटक मुझे देखती रही। *आँखों से अश्रु धारा बह निकली*। मेरा सर उसके कंधो पर गिर गया। ठंडी हवा का झोंका अब भी चल रहा था।

*क्या ये ही जिन्दगी है ? ?*

सब अपना नसीब साथ लेके आते हैं इसलिए कुछ समय अपने लिए भी निकालो । जीवन अपना है तो जीने के तरीके भी अपने रखो। शुरुआत आज से करो। क्यूंकि कल कभी नहीं आएगा।
.......... ये मार्मिक सत्य सभी मित्रों को समर्पित

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