27/12/2025
1 अप्रैल से बदल जाएगा इनकम टैक्स का पुराना कानून: 2026 में असेसमेंट ईयर खत्म होगा, 64 साल पुराना नियम खत्म होगा
1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स कानून, ₹12 लाख तक की सैलरी पर नहीं देना होगा टैक्स
केंद्र सरकार 1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू करने जा रही है, जो 1961 के पुराने कानून की जगह लेगा।
नए सिस्टम का मकसद टैक्स को सरल बनाना, कानून को छोटा करना और आम टैक्सपेयर के लिए उलझनें कम करना है; इसी के तहत नई टैक्स स्लैब, आसान भाषा और डिजिटल‑फर्स्ट प्रोसेस लाई जा रही है।
नई टैक्स स्लैब: नई रेजीम में क्या बदला?
क्रम पुराना स्लैब पुरानी दर नया स्लैब नई दर
1 ₹3 लाख तक 0% ₹0–₹4 लाख 0%
2 ₹3–₹7 लाख 5% ₹4–₹8 लाख 5%
3 ₹7–₹10 लाख 10% ₹8–₹12 लाख 10%
4 ₹10–₹12 लाख 15% ₹12–₹16 लाख 15%
5 ₹12–₹15 लाख 20% ₹16–₹20 लाख 20%
6 ₹15 लाख से ऊपर 30% ₹20–₹24 लाख 25%
7 – – ₹24 लाख से ऊपर 30%
ध्यान देने वाली बात: नई टैक्स रेजीम में सरकार ने 4–8 लाख पर लगने वाला 5% टैक्स और 8–12 लाख पर लगने वाला 10% टैक्स रिबेट के ज़रिए माफ करने का प्रावधान रखा है, इसलिए नेट इफेक्ट यह होगा कि:
₹4 लाख तक की आय पर सीधे 0% टैक्स।
रिबेट और ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन को मिलाकर ₹12.75 लाख तक की सैलरी practically टैक्स‑फ्री हो जाएगी, यानी इस लेवल तक कोई इनकम टैक्स देनदारी नहीं बचेगी।
‘असेसमेंट ईयर’ खत्म, अब सिर्फ ‘टैक्स ईयर’
अभी तक इनकम टैक्स में दो टर्म चलते थे:
Previous Year – जिस साल आपने कमाई की।
Assessment Year – अगला साल, जिसमें उसी आय पर टैक्स रिटर्न भरते थे।
नए कानून में यह कन्फ्यूजन खत्म करके सिर्फ “Tax Year” की अवधारणा रखी गई है; यानी जिस साल आप कमाई करते हैं, उसी साल को टैक्स ईयर माना जाएगा और उसी नाम से रिटर्न भरा जाएगा।
यह बदलाव ग्लोबल प्रैक्टिस के हिसाब से किया जा रहा है, ताकि कैलकुलेशन, डॉक्यूमेंटेशन और इंटरनेशनल कंप्लायंस आसान हो सके।
कानून कितना सरल हुआ?
मौजूदा इनकम टैक्स एक्ट, 1961 में बार‑बार संशोधन के कारण 819 सेक्शन और 47 चैप्टर हो गए थे, जिन्हें आम टैक्सपेयर समझना मुश्किल था।
नए कानून में सेक्शनों की संख्या घटाकर 536 और चैप्टर घटाकर 23 कर दिए गए हैं, भाषा को प्लेन इंग्लिश/हिंदी में लिखा गया है ताकि कोई भी सैलरीड/स्मॉल बिज़नेस टैक्सपेयर खुद भी बेसिक बात समझ सके।
डिजिटल और फेसलेस टैक्स सिस्टम
नया एक्ट डिजिटल‑फर्स्ट अप्रोच पर बनाया गया है: रिटर्न फाइलिंग, नोटिस, रिस्पॉन्स, अपील – सबकुछ अधिकतम ऑनलाइन और फेसलेस मोड में होगा।
फेसलेस असेसमेंट/अपीलेट सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा, ताकि टैक्सपेयर और अफसर के बीच डायरेक्ट कांटैक्ट कम से कम हो और भ्रष्टाचार व डर दोनों घटें।
सरकार ने साफ किया है कि सोशल मीडिया या ईमेल मॉनिटरिंग हर टैक्सपेयर के लिए नहीं होगी; यह केवल गंभीर टैक्स चोरी या हाई‑रिस्क मामलों में ही कानूनन अनुमति के दायरे में की जाएगी।
जॉइंट टैक्स फाइलिंग का प्रस्ताव
ICAI ने बजट 2026 के लिए सुझाव दिया है कि शादीशुदा जोड़ों को भारत में भी joint tax return फाइल करने का विकल्प मिले, जैसा कई देशों में होता है।
इससे उन परिवारों को फायदा हो सकता है, जहां एक ही सदस्य ज़्यादातर कमाता है और दूसरे की आय कम या शून्य है; दोनों की आय को मिलाकर slab‑benefit दिया जा सकता है।
सरकार ने फिलहाल इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है, लेकिन मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए इसे सिरियस कंसिडरेशन में बताया जा रहा है।
1961 वाला एक्ट क्यों बदला जा रहा है?
60+ साल पुराने कानून में लगातार संशोधन से स्ट्रक्चर पेचीदा हो गया, जिससे टैक्सपेयर, प्रोफेशनल और डिपार्टमेंट – तीनों के लिए कंप्लायंस मुश्किल हुआ।
Startup, gig economy, डिजिटल एसेट्स, इंटरनेशनल टैक्सेशन जैसे नए सेक्टरों को कवर करने के लिए एक फ्रेश, क्लीन और टेक‑रेडी फ्रेमवर्क की जरूरत थी, जिसे इनकम टैक्स एक्ट 2025 के ज़रिए लाने की कोशिश है।