21/06/2020
फ़ादर्स डे' पर मेरे पूज्य पिताजी और पितातूल्य बुजुर्गों को प्रणाम। पिता आंसुओं और मुस्कान का वह समुच्चय सिद्धान्त है, जो बेटे के दुख में रोता तो सुख में हंसता है। उसे आसमान छूता देख खुद को भाग्यशाली मानता है। जब कोई बच्चा चलना सीखता है तो सबसे पहले अपने पिता की उँगली थामता है। बोलना शुरू करने के साथ ही बच्चे ज़िद करना भी शुरू कर देते हैं और पिता उनकी सभी ज़िद पूरी करते हैं। एक वाक्य में कहूं तो पिता हमारे जीवन में वह महान शख्स है जो हमारे सपनों को पूरा करने के लिए अपने सपनो की धरती बंजर ही छोड़ देता है। आज 'फ़ादर्स डे' पर दुनिया के सभी पिताओं को मैं वंदन करता हूँ।
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