26/04/2025
ललकार
======
बंशी नहीं बिगुल बजने दो , धुआँधार हो जाने दो।।
दुश्मन युद्ध चाहता है तो , एक बार हो जाने दो।।
रोजरोज की किचकिच से यदि, पिण्ड छुड़ाना है तो फिर,
जो होगा देखा जायेगा , आर पार हो जाने दो।।
बेशक हमने पक्ष लिया है , आजीवन उजियारों का।।
सदा वार झेला है हमने, खुले छिपे अँधियारों का।।
लेकिन लिए आँख में आँसू , सहनशीलता बोल उठी,
ऐसे उजले दिन से अच्छा , अन्धकार हो जाने दो ।।
जो होगा देखा जायेगा , आर पार हो जाने दो।।
दुश्मन युद्ध चाहता है तो , एक बार हो जाने दो।।
मरने और मारने का प्रण , लेकर घर से निकल पड़ो।।
दुश्मन की छाती पर जमकर, लावे जैसे उकल पड़ो।।
तड़प उठे क्रूरता बैर की , सहम उठे संहारों से,
सदियाँ भुला न पाएँ ऐसा , चीत्कार हो जाने दो।।
जो होगा देखा जायेगा , आर पार हो जाने दो।।
दुश्मन युद्ध चाहता है तो , एक बार हो जाने दो।।
किसमें कितना ज्यादा दम खम , अब दिखलाना ही होगा।।
बलिदानी भावों का परचम , फिर लहराना ही होगा ।।
भले प्रलय के पर्वत टूटें , महाकाल कलिकाल हिलें,
तीनों लोक थरथरा जाएँ , जीत हार हो जाने दो।।
जो होगा देखा जायेगा , आर पार हो जाने दो।।
दुश्मन युद्ध चाहता है तो , एक बार हो जाने दो।।
यद्यपि कवि का ध्येय नहीं है , मानव को मानव मारे।।
सपने में भी नहीं समर्थन , हिंसा का सुन लो प्यारे।।
पर निर्दोषों के हत्यारों , की हत्या मजबूरी है,
फिर चाहे यह दुराचार हो , दुराचार हो जाने दो ।।
जो होगा देखा जायेगा , आर पार हो जाने दो।।
दुश्मन युद्ध चाहता है तो , एक बार हो जाने दो।।
जंग हुई तो तय है स्तुति भी निन्दा हो जायेगी ।।
भीषणता से मृत्यु हार कर शर्मिन्दा हो जायेगी ।।
लेकिन जब परिणाम मिलेंगे तो ऐसा मन बदलेगा,
जिओ और जीने दो वाली अड़ ज़िन्दा हो जायेगी ।।
इसीलिए कहता हूँ वीरो, धारदार हो जाने दो ।।
जो होगा देखा जायेगा , आर पार हो जाने दो।।
दुश्मन युद्ध चाहता है तो , एक बार हो जाने दो।।