Resources Advisory Services (India) Pvt.Ltd.

Resources Advisory Services (India) Pvt.Ltd. A Distribution House For Investment & Insurance Products A Distribution House For Investment & Insurance Products
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has been set up as a Distribution Network for Investment & Insurance Products. The Company distributes Life and Non-Life Insurance Products Mutual Funds, Debentures,Share Trading, Fixed Deposits,Home Finance, of many Principals, The Company distributes Mutual Funds of all Asset Management Companies (AMCs) and Non-Life Insurance Products including
Motor Insurance, Health Insurance, Travel Insuranc

e, Personal Accident Insurance, Home Insurance, Shop Insurance Policies of all major General Insurance Companies in India. The Products are promoted by a sales force of Commited People , and through a wide Branch network.

बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी।
04/01/2017

बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी।

04/08/2016

जानकारी : जानिए! क्या है जीएसटी और इसका फायदा-नुकसान।

जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवा कर (Goods & Services Tax) एक ऐसी दवा का नाम है जो भारत की Tax वाली बीमारी का इलाज एक बार में कर देगी। राज्यसभा ने आज GST के लिए संविधान संशोधन बिल पर बहस की और वोटिंग हुई। ये संविधान में 122वां संशोधन है। इसे भारत में Tax सुधारों को लेकर आज़ादी के बाद से अब तक का सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन माना जा रहा है जिसे राज्यसभा ने पास कर दिया है।

- राज्यसभा में GST को लेकर संविधान संशोधन को मंजूरी मिल जाने के बाद पूरे देश में GST को 1 अप्रैल 2017 से लागू किया जा सकता है।

- इससे भारत एक Single टैक्स वाली अर्थव्यवस्था बन जाएगा यानी देश में वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाले अलग अलग तरह के Tax खत्म हो जाएंगे और फिर एक नये आंकड़े के मुताबिक देश के करीब 132 करोड़ लोग सेवाओं और वस्तुओं पर सिर्फ एक तरह का Tax देंगे जिसे GST के नाम से जाना जाएगा।

- अभी किसी भी सामान पर केंद्र और राज्य कई तरीके के टैक्स लगाते हैं। लेकिन GST आने से सभी तरह के सामानों पर एक जैसा टैक्स लगाया जाएगा।

- सर्विस टैक्स, सेंट्रल सेल्स टैक्स, स्टेट सेल्स टैक्स और VAT जैसे तमाम टैक्स ख़त्म होंगे।

- मौजूदा स्थिति ये है कि हमें किसी भी सामान पर करीब 30 से 35% टैक्स देना पड़ता है।

- कुछ चीज़ों पर तो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से लगाया जाने वाला टैक्स 50 फीसदी तक पहुंच जाता है।

- GST आने के बाद ये टैक्स 18% हो जाएगा, जिसमें कोई In-direct टैक्स नहीं होगा।

- GST के आने से टैक्स का ढांचा सरल हो जाएगा और इससे manufacturing sector का पैसा और समय दोनो बचेंगे।

- विशेषज्ञों की राय है कि अगर देश में GST लागू हो जाएगा तो GDP growth 1 से 2 फीसदी तक बढ़ सकती है।

- GST भारत की अर्थव्यवस्था को एक देश, एक टैक्स वाली अर्थव्यवस्था बना देगा। फिलहाल भारत के लोग वस्तुओं और सेवाओं के लिए 20 अलग अलग तरह के टैक्स चुकाते हैं जबकि GST लागू होने के बाद सिर्फ एक तरह का टैक्स ही चुकाना होगा।

- लेकिन GST लागू होने के कुछ वर्षों तक आपको महंगाई वाले दिन भी देखने पड़ सकते हैं।

- packaged food Products पर ज्यादातर राज्यों में अभी कोई ड्यूटी नहीं लगती है जहां इन Products पर ड्यूटी लगती है वहां भी इसकी दर 4 से 6 प्रतिशत तक है लेकिन GST लागू होने के बाद आपको डिब्बाबंद खाने पर भी 18 प्रतिशत तक का टैक्स देना होगा।

- इसी तरह Jewellery पर अभी 3 प्रतिशत ड्यूटी और रेडीमेड Garments पर 4 से 5 प्रतिशत स्टेट Vat लगता है लेकिन 18 प्रतिशत GST लगने के बाद गहने और कपड़े महंगे हो सकते हैं।

- GST लागू होने के बाद Discount भी महंगा हो जाएगा। अभी डिस्काउंट के बाद बची बाकी की कीमत पर टैक्स लगता है लेकिन GST लागू होने के बाद MRP पर टैक्स लगेगा।

- इसके अलावा सभी तरह की सेवाएं महंगी हो जाएंगी, क्योंकि अभी मोबाइल फोन और क्रेडिट कार्ड जैसी सेवाओं पर 15 प्रतिशत का Tax लगता है जो बढ़कर 18 प्रतिशत हो जाएगा यानी आपको इन सेवाओं पर अभी के मुकाबले 3 प्रतिशत ज़्यादा रकम खर्च करनी पड़ेगी।

- GST लागू होने के बाद घर और कार खरीदना काफी सस्ता हो जाएगा। छोटी कारों और Compact SUVs पर अभी 30 से 44 प्रतिशत तक टैक्स लगता है लेकिन सिर्फ 18 प्रतिशत GST लगने की वजह से ये कारें 45 हज़ार रुपये तक सस्ती हो सकती हैं।

- अभी घर खरीदने पर आपको सर्विस टैक्स और Vat दोनों चुकाने पड़ते हैं लेकिन GST लागू होने पर आपको सिर्फ एक तरह का टैक्स देना होगा।

- इसी तरह Restaurant में खाना खाना भी सस्ता हो जाएगा ऐसा इसलिए होगा क्योंकि अभी अलग-अलग राज्यो में Vat की दर अलग-अलग है और आपको Service टैक्स भी चुकाना होता है..लेकिन GST लागू होने पर आपको सिर्फ एक ही तरह का Tax देना होगा।

- अभी एयरकंडीशनर, माइक्रोवेव ओवन और वॉशिंग मशीन जैसे घरेलू ऊपकरण खरीदने पर आपको 12.5 प्रतिशत एक्साइज़ और 14.5 VAT देना पड़ता है..लेकिन GST के तहत सिर्फ 18 प्रतिशत टैक्स देने से ये सामान आप काफी कम दामों पर घर ला पाएंगे।

- देशभर में माल ढुलाई करीब 20 प्रतिशत तक सस्ती हो जाएगी जिससे महंगाई घट सकती है।

- उद्योगों को अभी करीब अलग-अलग तरह के 18 Tax भरने होते हैं लेकिन GST लागू होने पर उद्योगों का वक्त और पैसा दोनों बचेंगे।

- GST के ज़रिए देश में एक टैक्स की व्यवस्था लागू हो जाएगी। इसी के साथ केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले 20 तरह Indirect Taxes यानी अप्रत्यक्ष टैक्स ख़त्म हो जाएंगे।

- GST के बाद एक्साइज़ ड्यूटी, सर्विस टैक्स, एडिशनल ड्यूटी ऑफ कस्टम, Vat, सेल्स टैक्स, सेंट्रल सेल्स टैक्स, मनोरंजन टैक्स और Luxury टैक्स जैसे कर खत्म हो जाएंगे।

- GST में तीन तरह के टैक्स शामिल होंगे जिनमें पहला होगा CGST यानी central goods And Services tax, जिसे केंद्र सरकार वसूलेगी।

- दूसरा Tax होगा SGST यानी State goods And Services tax जिसे राज्य सरकारें वसूलेंगी।

- तीसरा होगा IGST यानी Integrated goods And Services tax जो दो राज्यों के बीच होने वाले कारोबार पर लगेगा और इसे दोनों राज्यों को बराबर अनुपात में बांटा जाएगा।

- अभी आप अलग-अलग सामान पर 30 से 35 प्रतिशत तक का टैक्स चुकाते हैं लेकिन GST की वजह से आपको सिर्फ 18 प्रतिशत टैक्स देना होगा।

- एक देश एक टैक्स की नीति लागू होने पर आपको किसी सामान के लिए अलग अलग राज्यों में अलग अलग कीमत नहीं चुकानी होगी..यानी पूरे देश में सभी सामान एक ही दाम पर मिलेंगे।

- कई वस्तुएं ऐसी हैं..जिन पर अभी काफी कम टैक्स लगता है। GST से इन वस्तुओं पर लगने वाला Tax बढ़ जाएगा। GST के तहत हर लेन देन की Online Entry होगी, इसलिए तमाम कारोबारी बिक्री कम दिखाकर Tax की चोरी नहीं कर पाएंगे।

- सरकार GST का एक पोर्टल बनाएगी जिसपर Pan नंबर दर्ज करके आप अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के बाद आपको Unique Identification Number मिलेगा और इस नंबर का इस्तेमाल करके आप एक बार में ही Tax की online Payment कर पाएंगे।

- GST बिल को लोकसभा ने 6 मई 2015 को मंजूरी दे दी थी..लेकिन राज्यसभा में इस बिल को पास करवाने के लिए केंद्र सरकार को इसमें कई संशोधन करने पड़े।

- देश के ज्यादातर राज्य GST के समर्थन में हैं लेकिन राज्यसभा से पास हो जाने के बाद भी GST को लागू करवाने में काफी वक्त लग सकता है क्योंकि देश के सभी राज्यों को अपनी अपनी विधानसभाओं में इसे पास कराना होगा।

- आपको बता दें कि संविधान में संशोधन के लिए देश के आधे से ज्यादा राज्यों को इस बिल को मंज़ूरी देनी होगी।

- राज्यों में GST बिल पास हो जाने के बाद GST काउंसिल की स्थापना की जाएगी जिसमें केंद्र और राज्य के प्रतिनिधि शामिल होंगे जो बिल को अंतिम रूप देंगे।

- सरकार की कोशिश है कि इस बिल को 1 अप्रैल 2017 से लागू कर दिया जाए लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक कानूनी दिक्कतों की वजह से GST अगले वर्ष अक्टूबर या नवंबर तक लॉन्च हो पाएगा।

- GST की नींव आज से 16 वर्ष पहले अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में रखी गई थी।

- इसके बाद वर्ष 2007 में यूपीए की सरकार के दौरान वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बजट में 2010 से GST लागू करने का प्रस्ताव दिया था।

- सैद्धांतिक रूप से बीजेपी और कांग्रेस दोनों GST का समर्थन करते रहे हैं लेकिन कुछ बिंदु ऐसे थे, जिनकी वजह से इस बिल को राज्यसभा में कांग्रेस का समर्थन नहीं मिल रहा था।

- कांग्रेस केंद्र द्वारा सभी सेवाओं और वस्तुओं पर 1 प्रतिशत ज़्यादा कर लगाए जाने के फैसले के विरोध में थी जिसे सरकार ने बिल से हटा दिया।

- कांग्रेस की मांग थी कि सरकार एक dispute settlement authority का निर्माण करे..ताकि दो राज्यों या फिर केंद्र और राज्य के बीच होने वाले विवादों को सुलझाया जा सके।

- कांग्रेस चाहती थी कि सरकार GST पर 18 प्रतिशत का Cap तय करे यानी GST के तहत टैक्स की दर हमेशा के लिए 18 प्रतिशत ही हो..जिसे आगे चलकर सरकार अपनी मर्जी से ना बढ़ा पाए।

- आपको बता दें कि दुनिया के करीब 165 देशों में GST की व्यवस्था लागू है, यानी इन देशों में भारत की तरह वस्तुओं और सेवाओं पर अलग अलग तरह के Tax नहीं देने पड़ते।

- न्यूजीलैंड में 15 प्रतिशत, ऑस्ट्रेलिया में 10 प्रतिशत, फ्रांस में 19.6 प्रतिशत, जर्मनी में 19 प्रतिशत, स्वीडन और डेनमार्क में 25 प्रतिशत और यहां तक कि पाकिस्तान में भी 18 प्रतिशत की दर से GST लागू है।

- GST से पहले भारत के Tax सिस्टम में सबसे बड़ा बदलाव 2005 में किया गया था जब सेल्स टैक्स को VAT से बदल दिया गया था।

- VAT की मदद से अलग अलग चरणों में लगने वाले Taxes को कम करने की कोशिश की गई थी लेकिन VAT भी टैक्स पर टैक्स लगाने वाली व्यवस्था का अंत नहीं कर पाया।

- VAT उन वस्तुओं पर भी लगता है..जिनके लिए Exise ड्यूटी चुका दी गई है, यानी आम लोगों को Tax पर भी Tax देना पड़ता है।

- भारत में Tax की वर्तमान व्यवस्था के तहत देश में निर्मित होने वाली वस्तुओं की Manufacturing पर एक्साइज़ ड्यूटी देनी पड़ती है..जबकि ये सामान जब बिक्री के लिए जाता है तो इस पर सेल्स टैक्स और VAT लग जाता है।

- इसी तरह सेवाओं पर लोगों से सर्विस टैक्स वसूला जाता है लेकिन GST लागू होने पर सामान या सर्विस पर सिर्फ एक ही Tax देना होगा।

- GST के तहत सरकार राज्य सरकारों को नुकसान की स्थिति में पूरे 5 वर्षों तक मुआवज़ा देगी।

03/07/2015

भारत में गोमांस पर पाबंदी से ठप पड़ा बांग्लादेश का कारोबार

भारत में गोमांस पर पाबंदी से ठप पड़ा बांग्लादेश का कारोबारभारत में गोमांस पर पाबंदी से ठप पड़ा बांग्लादेश का कारोबार

मोदी सरकार के शासनकाल के एक साल में बांग्लादेश की सीमा पर पहरा दे रहे करीब 30,000 सैनिकों को एक और जिम्मेदारी मिल गई है। यह जिम्मेदारी मुस्लिम बहुल पड़ोसी देश में अवैध रूप से गाय की तस्करी को रोकना है।

करीब-करीब हर दूसरी रात बांस की छड़ी और रस्सी हाथ में लिए सैनिक जूट और धान के खेतों में दौड़ते हैं और तालाबों में तैरकर बांग्लादेश के मार्केट की ओर गाय, बछड़े या बैल आदि लेकर जा रहे तस्करों का पीछा करते हैं। इस साल बीएसएफ ने अब तक 90,000 मवेशी को जब्त किया है और 400 भारतीय एवं बांग्लादेशी तस्करों को पकड़ा है।

वधशालाओं को मवेशी की बिक्री, गोमांस प्रोसेसिंग यूनिट्स, चमड़ा उद्योग एवं बोन क्रशिंग इंडस्ट्रीज के लिए नीलामी को ऑपरेट करने वाले बांग्लादेशी व्यापारी का अनुमान है कि देश की करीब 190 अरब डॉलर की इकॉनमी में यह क्षेत्र करीब 3 फीसदी योगदान देता है।

भारत की पॉलिसी का बांग्लादेश की जीडीपी पर क्या असर पड़ा है, यह तो पता नहीं चल सका है। लेकिन, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के राजनीतिक सलाहकार एच.टी.इमाम ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि गोमांस व्यापार एवं चमड़ा उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है।

बांग्लादेश के टॉप बीफ एक्सपोर्टर बंगाल मीटि के सैयद हसन हबीब ने बताया कि इसे अपने अंतरराष्ट्रीय ऑर्डरों में 75 फीसदी कटौती करनी पड़ी। कंपनी करीब 125 टन गोमांस खाड़ी के देशों में निर्यात करती है। उन्होंने कहा कि भारत के इस कदम के कारण पिछले छह महीनों में गायों की कीमत 40 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई है और उनलोगों को दो प्रोसेसिंग यूनिट को बंद भी करना पड़ा।

हबीब ने घरेलू मांग की पूर्ति के लिए नेपाल, भूटान और म्यांमार से गाय आयात करने की योजना बनाई है लेकिन उनका कहना है कि भारतीय गाय का मांस और चमड़ा बहुत ही अच्छी क्वॉलिटी का होता है। बांग्लादेश चमड़ा उद्योग संघ के अध्यक्ष शाहीन अहमद ने कहा कि 190 चमड़ा कारखानों में 30 बंद चमड़े की कमी के कारण बंद हो गए और 4,000 वर्कर्स बेरोजगार हो गए।

03/07/2015

कैसे पाएं अनक्लेम्ड म्यूचुअल फंड पेमेंट

जो म्यूचुअल फंड इनवेस्टर्स NEFT फैसिलिटी यूज नहीं करते हैं और पेमेंट इंस्ट्रूमेंट को इनकैश नहीं करा पाते हैं उनके म्यूचुअल फंड पेमेंट्स अनक्लेम्ड रह जाते हैं। ऐसे में अगर इनवेस्टर का अड्रेस बदल गया है तो उनका चेक भी डिलीवर नहीं हो पाएगा। यह भी हो सकता है कि इनवेस्टर ने अपना रजिस्टर्ड बैंक अकाउंट बंद करा दिया हो और म्यूचुअल फंड में बैंक अकाउंट को अपडेट नहीं कराया हो।

सेबी की गाइडलाइंस के मुताबिक, ऐसे MF कंपनियों को ऐसे फंड्स का इनवेस्टमेंट शॉर्ट टर्म डेट इंस्ट्रूमेंट्स में करना होगा। इन फंड्स का एनएवी भी कैलकुलेट होगा। फंड हाउस इस इनवेस्टमेंट पर सालाना आधा पर्सेंट इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट फीस वसूल कर सकते हैं। इनवेस्टर्स अपना पैसा पाने के लिए यह प्रॉसेस अपना सकते हैं।

कम्युनिकेशन
इनवेस्टर को सबसे पहले यह पता लगाना होगा कि उसका पैसा अनक्लेम्ड कैसे रह गया है। इसके बारे में म्यूचुअल फंड कंपनी को बताना होगा।

इंफॉर्मेशन अपडेट
अगर अड्रेस चेंज होने की वजह से फंड अनक्लेम्ड रह गया है तो इनवेस्टर को पहले केवाईसी डिटेल चेंज फॉर्म भरके अड्रेस अपडेट कराना होगा। बैंक अकाउंट अपडेट करने के लिए इनवेस्टर को बैंक अकाउंट रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरकर नए अकाउंट का कैंसल्ड चेक लगाना होगा।

इंडेम्निटी लेटर
नया पेमेंट इंस्ट्रूमेंट लेने के लिए इनवेस्टर को म्यूचुअल फंड के बताए फॉर्मेट में लेटर ऑफ इंडेम्निटी देना होगा। इसमें फोलियो नंबर, स्कीम की डिटेल और अनक्लेम्ड पेमेंट का ब्योरा देना होगा।

प्रभावी एनएवी
अनक्लेम्ड रकम पर 3 साल के भीतर क्लेम किए जाने पर पेमेंट पोर्टफोलयो के मौजूदा एनएवी पर होगा। अगर पैसा 3 साल से ज्यादा समय तक अनक्लेम्ड रह गया है तो पेमेंट तीसरे साल के अंत में रहे एनएवी के हिसाब से होगा।

03/07/2015

10 दमदार शेयर

चीन के शेयर बाजार में गिरावट और ग्रीस क्राइसिस के चलते दुनिया भर के स्टॉक मार्केट्स में पिछले कुछ दिनों में उतार-चढ़ाव हुआ है। हालांकि, भारतीय शेयर बाजार पर ग्रीस मामले का अभी तक ज्यादा असर नहीं हुआ है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगले तीन से पांच साल में भारतीय मार्केट से अच्छा रिटर्न मिल सकता है। जो इनवेस्टर्स पोर्टफोलियो बनाने की सोच रहे हैं, उनके लिए यह अच्छा मौका है। हम यहां आपको टॉप 10 वेल्थ क्रिएटिंग आइडियाज के बारे में बता रहे हैं।

किटेक्स गारमेंट्स

यह कोच्चि बेस्ड कंपनी है, जो एक्सपोर्ट इनफैंट गारमेंट्स बनाती है। कंपनी को 85 पर्सेंट रेवेन्यू इनफैंट गारमेंट्स सेगमेंट और 15 पर्सेंट अपनी अनलिस्टेड फर्म किटेक्स चिल्ड्रेनवियर लिमिटेड को फैब्रिक बेचने से मिलता है। किटेक्स गारमेंट्स अब ग्रोथ के अगले फेज की तैयारी कर रही है। वह अमेरिका में कुछ प्राइवेट लेबल्स के लाइसेंस खरीद रही है। कंपनी का अमेरिका में अपना ब्रांड भी लॉन्च करने का इरादा है। कंपनी ने कहा है कि उसे अगले तीन साल के लिए 10 से 15 करोड़ रुपये सालाना इनवेस्टमेंट की जरूरत पड़ेगी। 75 करोड़ रुपये का कैपिटल एक्सपेंडिचर कंपनी फाइनेंशियल ईयर 2014 में ही कर चुकी है। फाइनेंशियल ईयर 2018 की अनुमानित अर्निंग के हिसाब से किटेक्स गारमेंट्स के शेयर 16.1 के पीई पर मिल रहे हैं। फाइनेंशियल ईयर 2015 से 2018 के बीच कंपनी की सेल्स ग्रोथ 25 पर्सेंट और प्रॉफिट ग्रोथ 40 पर्सेंट सीएजीआर रहने की उम्मीद है। इस लिहाज से शेयर अट्रैक्टिव लग रहे हैं।

टाटा एलेक्सी

यह टीसीएस और इंफोसिस की तरह ट्रेडिशनल आईटी कंपनी नहीं है। यह नीश प्लेयर है। कंपनी सॉफ्टवेयर डिवेलपमेंट और सर्विसेज एवं सिस्टम इंटीग्रेशन एंड सपोर्ट सर्विसेज पर फोकस करती है। पिछले तीन साल के दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 17 पर्सेंट सीएजीआर से बढ़ा है। अगले तीन साल में इसकी ग्रोथ 28 पर्सेंट सीएजीआर रहने की उम्मीद है। इस कंपनी पर कर्ज नहीं है और फाइनेंशियल ईयर 2015 में रिटर्न ऑन इक्विटी 45 पर्सेंट से अधिक रहा था। इसके 2018 तक बढ़कर 45 पर्सेंट होने की उम्मीद है।
कोवाई मेडिकल सेंटर एंड हॉस्पिटल्स लिमिटेड
कंपनी 750 बेड वाला मल्टी-डिसिप्लिनरी एडवांस्ड सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल कोयंबटूर में चलाती है। इसके पास 150 स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स हैं और 250 पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल प्रोफेशनल्स उनकी मदद कर रहे हैं। यह कोयंबटूर का अकेला अस्पताल है, जो हार्ट और लिवर ट्रांसप्लांट कर सकता है। पिछले 10 साल से कंपनी की ग्रोथ शानदार रही है। फाइनेंशियल ईयर 2015 में इसकी ग्रोथ 21 पर्सेंट सीएजीआर रही। पिछले साल इसका ऑपरेटिंग प्रॉफिट 26 पर्सेंट सीएजीआर बढ़कर 94 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, मुनाफा पिछले 10 साल में 26 पर्सेंट सीएजीआर से बढ़कर 3.9 करोड़ से 38.7 करोड़ रुपये हो गया। 2015 से 2018 तक कंपनी की सेल्स ग्रोथ 24 पर्सेंट और प्रॉफिट ग्रोथ 31 पर्सेंट सीएजीआर रहने की उम्मीद है।

वैबको इंडिया

कंपनी ट्रक और बस के लिए एयर और एयर-असिस्टेड ब्रेक सिस्टम्स में मार्केट लीडर है। इसके क्लाइंट्स में टाटा मोटर्स, अशोक लीलैंड, महिंद्रा और वोल्वो सहित करीब-करीब सारी कंपनियां शामिल हैं। इसकी पैरेंट कंपनी वैबको होल्डिंग्स इंक एबीएस के मामले में ग्लोबल लीडर है। इसने दुनिया भर में 1.7 करोड़ से ज्यादा एबीएस बेचे हैं।

रेप्रो इंडिया

कंपनी पब्लिशर्स, कॉरपोरेट्स, एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस और सरकार को कंटेंट, प्रिंट और फुलफिलमेंट सॉल्यूशंस प्रोवाइड करती है। रेप्रो इंडिया ने आने वाले कुछ सालों में ग्रोथ बढ़ाने के लिए दो कदम उठाए हैं। कंपनी ने रैपल्स नाम से कस्टमाइज्ड सॉल्यूशन तैयार किया है, जिसके जरिये टैबलेट्स पर प्री-लोडेड टेक्स्टबुक डिलीवर किया जाता है। कंपनी ने पिछले दो साल में इसमें 22 करोड़ रुपये का इनवेस्टमेंट किया है। पब्लिशर्स को इससे कंटेंट क्रिएट करने, उन्हें डिजिटली स्टोर करने में मदद मिलेगी।

मदरसन सूमी

मिड कैप सेगमेंट में मदरसन सूमी सिस्टम्स जैसी कंपनियों ने ऑर्गेनिक और इन-ऑर्गेनिक ग्रोथ दोनों ही लिहाज से अच्छा प्रदर्शन किया है। कंपनी की ग्रोथ एक्सपोर्ट मार्केट में बढ़िया रही है। इसका मतलब यह है कि डोमेस्टिक ऑटो सेगमेंट में रिकवरी से मदरसन सूमी की ग्रोथ और तेज होगी। पिछले कुछ सालों में इस कंपनी के शेयरहोल्डर्स को तगड़ा रिटर्न मिला है।
पीआई इंडस्ट्रीज और कोरोमंडल इंटरनेशनल
जून में मॉनसूनी बारिश बढ़िया हुई है। अगर एग्रीकल्चर ग्रोथ बढ़ती है तो इससे इकनॉमिक रिकवरी काफी तेज हो सकती है। पीआई इंडस्ट्रीज और कोरोमंडल इंटरनेशनल एग्री सेगमेंट की कंपनियां हैं और दोनों ने पिछले कुछ वर्षों में अच्छी ग्रोथ हासिल की है।

पेज इंडस्ट्रीज

पिछले 10 साल में टेक्सटाइल स्टॉक्स में इनवेस्टर्स को काफी पैसा गंवाना पड़ा, लेकिन अगर आप इस सेक्टर की चुनिंदा कंपनियों- पेज इंडस्ट्रीज और किटेक्स गारमेंट्स को देखें तो वे मल्टीबैगर साबित हुई हैं। इन कंपनियों के रिटर्न रेशियो भी बढ़िया रहे हैं और सालाना ग्रोथ इंडस्ट्रीज की औसत ग्रोथ से काफी अधिक रही है।

एनबीसीसी

इस सरकारी कंपनी के पास 30,000 करोड़ रुपये की ऑर्डर बुक है। पिछली तिमाही में कंपनी ने मार्जिन के मामले में मायूस किया था, लेकिन आगे चलकर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी बिजनेस से एनबीसीसी को 80 पर्सेंट रेवेन्यू मिलेगा। कंपनी सरकारी प्रॉपर्टीज के री-डिवेलपमेंट पर फोकस कर रही है। यह शेयर 1,000 रुपये तक जा सकता है।

03/07/2015

एक रुपए का नोट तैयार करने का खर्च एक रुपये 14 पैसे

एक रुपए का नोट तैयार करने का खर्च एक रुपये 14 पैसेएक रुपए का नोट तैयार करने का खर्च एक रुपये 14 पैसे
वित्त मंत्रालय ने 1 रुपए का नोट फिर से शुरू किया, जिसके बाद नोट की लागत1.14 रुपए बैठ रही है। आरटीआई से यह अहम जानकारी सामने आई है।

आरटीआई ऐक्टिविस्ट सुभाष अग्रवाल ने भारत प्रतिभूति मुद्रणालय तथा मुद्रा निर्माण निगम लिमिटेड में आरटीआई डालकर जानकारी मांगी थी, जिसके जवाब में बताया गया है कि नोट की लागत 1.14 रुपए आ रही है।

मुद्रणालय की ओर से कहा गया कि इस नोट को उसने वर्ष 2014-15 के दौरान फिर से छापना शुरू किया जिस पर 1.14 रुपए प्रति नोट की लागत आ रही है। हालांकि एक रुपए के नोट को पहले 1994 में बंद कर दिया गया था।

उस दौरान भी ज्यादा लागत को वजह बताया गया था। 1995 में इसी वजह से दो और पांच रुपये के नोट भी बंद कर दिए गए थे। वित्त मंत्रालय ने 6 मार्च 2015 को एक रुपए का नोट फिर से लॉन्च किया था, अब फिर से सरकार को ज्यादा लागत की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है।

02/07/2015

आयकर रिटर्न भरने में ज्यादातर लोग कुछ जरूरी चीजों को नजरंदाज कर देते हैं, जिससे उन्हें किसी न किसी तौर पर नुकसान उठाना पड़ता है।

'ऑनलाइन दौर' आने के बाद से कई जटिल प्रक्रियाओं से मुक्ति मिली है, पर फिर भी कुछ ध्यान रखने वाली बातें हैं, जिन्हें स्किप कर आप छोटी-छोटी मुसीबतों से घिर सकते हैं।
यहां जानें ये बातें, जिससे नहीं होगी रिटर्न फाइल करते वक्त कोई भी गलती -

पैन भरते वक्त सावधानी -

अक्सर देखने में आया है कि रिटर्न फाइल करते वक्त हम सांख्यिकी गलतियां कर देते हैं, जिसका खामियाजा बाद में भुगतना पड़ता है। मसलन हमें PAN और TAN भरते वक्त सावधान और सतर्क रहना चाहिए।

बैंक की जानकारी में 'झोल' -

बैंक अकाउंट नंबर भरते वक्त टैक्स जमाकर्ता भारी गलती कर बैठते हैं। बैंक ब्रांच का IFS कोड कई बार जल्दबाजी में गलत भर दिया जाता है। ध्यान रखें कि जो अकाउंट 3 साल से ज्यादा से निष्क्रिय है, उसका जिक्र रिटर्न भरते वक्त न करें।

हुए हैं कुछ बदलाव, दें ध्यान -
आईटीआर फॉर्म में इस साल से कुछ बदलाव किए गए हैं, जिससे थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। इस लिहाज से आपको सही फॉर्म चुनकर भरने की जरूरत है, वरना आपका आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा।

फॉर्म 16 के लिए एक से ज्यादा फॉर्म भरने की जरूरत नहीं -
यदि आपने नौकरी बदली है, तो आपको फॉर्म 16 अमूमन मिलता ही है, इसके लिए एक से ज्यादा फॉर्म भरने की जरूरत नहीं है।

आय के सोर्स में गलतियां -
गलतियों की एक गुंजाइश यहां भी संभव है। जब आप अपनी आय के सोर्स का जिक्र करें तो टैक्सेबल और नॉन टैक्सेबल आय का जिक्र सावधानी से करें।

ज्यादातर लोगों को लगता है कि फिक्स्ड डिपॉजिट और सेविंग के ब्याज से हुई आया टेक्सेबल नहीं होती या बैंक खुद टैक्स काट लेता है, जबकि ऐसा नहीं होता। बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट से टीडीएस काटता है, जिसका मतलब यह नहीं कि आप उसे आईटीआर फॉर्म में शामिल नहीं करेंगे।

02/07/2015

वॉट्सऐप जैसे ऐप्स की सर्विस लेने पर आपको नहीं देना होगा एक्स्ट्रा चार्ज

वॉट्सऐप, वाइबर, स्काइप और बाकी ऐप्स की सर्विस इस्तेमाल करने पर आपको एक्स्ट्रा चार्ज नहीं देना पड़ेगा। टेलिकॉम रेग्युलेटर (ट्राई) ने इन ऐप्स से रेवेन्यू हासिल करने का ऑपरेटर्स का प्रस्ताव ठुकरा दिया है।

मामले से वाकिफ लोगों ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इस मामले में कंसल्टेशन प्रोसेस शुरू करने की योजना भी टाल दी है। ट्राई का मानना है कि ऑपरेटर्स डेटा रेवेन्यू में ग्रोथ के जरिए अपने नुकसान की भरपाई करने में सक्षम हैं। टेलिकॉम इंडस्ट्री ने फ्री मेसेंजर सर्विसेज के इस्तेमाल और वॉइस ओवर इंटरनेट कॉल के कारण 5,000 करोड़ रुपए के सालाना नुकसान का आंकड़ा पेश किया था।

ट्राई के एक अधिकारी ने बताया, 'टेलिकॉम इंडस्ट्री के रेवेन्यू में बढ़ोतरी का एक-तिहाई हिस्सा सिर्फ डेटा सर्विसेज से आ रहा है। जहां तक वॉइस सर्विसेज का सवाल है, तो इसके रेवेन्यू में भी बढ़ोतरी हो रही है। ओटीटी के रेग्युलेशन पर कंसल्टेशन पेपर का भी प्रस्ताव नहीं है।'

भारतीय मोबाइल फोन ऑपरेटर्स ने नेटवर्क तैयार करने पर अरबों डॉलर का निवेश किया है। ऑपरेटर्स ओवर-द-टॉप-प्लेयर्स (ओटीटी) का रेग्युलेशन चाहते हैं। ओवर-द-टॉप-प्लेयर्स के दायरे में वैसे सभी ऐप्स आते हैं, जो यूज़र्स अपने मोबाइल पर डाउनलोड करते हैं। टेलिकॉम कंपनियों को उनसे दिक्कत है, जो इंटरनेट पर फ्री मेसेजिंग और वॉइस कॉल सर्विस देते-कराते हैं। मसलन वॉट्सऐप, वाइबर और स्काइप। कई यूजर्स टेलिकॉम ऑपरेटर्स की नॉर्मल वॉइस कॉल और एसएमएस सर्विस के बजाय इन ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं। इससे टेलिकॉम ऑपरेटर्स के रेवेन्यू पर चोट पहुंचती है।

ऑपरेटर्स चाहते हैं कि ओटीटीपी उनका टेलिकॉम नेटवर्क इस्तेमाल करने बदले फीस दें, जो वे सरकार को देते हैं। ऐसा होने पर ऐप बनाने वाली कंपनियों को फ्री मेसेजिंग और वॉइस ओवर इंटरनेट कॉल सर्विसेज के लिए लोगों से चार्ज लेना पड़ेगा और इस मामले में ये कंपनियां टेलिकॉम कंपनियों के बराबर हो जाएंगी।

हालांकि, ओटीटी इकाइयों का कहना है कि सरकार या कंपनी किसी के लिए पेमेंट सिस्टम फ्री इंटरनेट या नेट न्यूट्रिलिटी के कॉन्सेप्ट के खिलाफ है। एक ऐप कंपनी के टॉप अधिकारी ने बताया कि अगर ओटीटीपी को चार्ज देने पर मजबूर किया जाता है, तो इसका बोझ कन्ज़यूमर्स पर पड़ेगा। ट्राई ने हाल में एक सेमिनार के जरिए ओटीटी कंपनियों और टेलिकॉम ऑपरेटर्स को एक मंच पर इकट्ठा किया था।

ट्राई के एक और अधिकारी ने बताया, 'हम भी यह बात समझते हैं कि इससे ऑपरेटर्स के रेवेन्यू को कुछ नुकसान पहुंचता है। मिसाल के तौर पर हमारे आंकड़ों के मुताबिक, दो साल पहले हर महीने औसतन एक शख्स 27 एसएमएस भेजता था, जिसकी संख्या अब घटकर 17 रह गई है।'

जीएसएम इंडस्ट्री की संस्था सीओएआई के डायरेक्टर जनरल राजन मैथ्यूज का कहना था कि अगर ओटीटीपी को रेग्युलेशन के दायरे में नहीं लाया जाता है, तो टेलिकॉम कंपनियों का नुकसान अगले तीन साल में पांच गुना बढ़कर 24,000 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।

02/07/2015

शुक्रवार 3 जुलाई से लागू हो जाएगी फुल मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी|

शुक्रवार 3 जुलाई से भारत में फुल मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी सेवा शुरू होने जा रही है। पहले इस सेवा को 3 मई से लागू किया जाना था, लेकिन बाद में इसके लॉन्च की तारीख आगे बढ़ा दी गई।

एक वरिष्ठ टेलिकॉम अधिकारी ने बताया कि 3 जुलाई से यह सर्विस शुरू हो जाएगी। पूरे देश में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के लागू होने के बाद ग्राहकों को अपना
टेलिकॉम सर्कल बदलने पर अपना मोबाइल नंबर नहीं बदलना होगा।

मौजूदा सिस्टम में अगर किसी व्यक्ति के पास दिल्ली का नंबर हो, तो उसे मुंबई, चेन्नै या किसी और सर्कल में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। उन सर्कल्स में मूव करने पर उसे अलग ही नंबर लेना होगा।

फुल नंबर पोर्टेबिलिटी को 3 मई को शुरू होना था। लेकिन सेल्युलर ऑपरेटर्स असोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) ने टेलिकॉम ऑपरेटर्स से सर्विस लागू होने से रोकने की अपील की थी ताकि टेलिकॉम ऑपरेटर्स इसके लिए जरूरी तकनीकी बदलाव कर सकें। मंत्रालय ने इसके लिए दो महीने की मोहलत दी थी।

23/01/2015

सुजलॉन ने जर्मन सब्सिडियरी सेन्वियोन को बेचा

सुजलॉन एनर्जी के लिए बड़ी खबर है। सुजलॉन एनर्जी ने अपनी जर्मन सब्सिडियरी सेन्वियोन को अमेरिका की पीई कंपनी सेंटरब्रिज पार्टनर्स को बेच दिया है। सुजलॉन एनर्जी ने सेन्वियोन को 100 करोड़ यूरो नकद में बेचा है। सुजलॉन लाइसेंस फीस के लिए सेन्वियोन की ऑफशोर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करेगी।

इस सौदे के बाद कंपनी को अपना घरेलू कर्ज कम करने में बड़ी मदद मिलेगी। सितंबर 2014 तक सुजलॉन एनर्जी पर 17,323 करोड़ रुपये का कर्ज था। इस डील के बाद मिली पूंजी के जरिए सुजलॉन एनर्जी 5000 करोड़ रुपये का घरेलू कर्ज कम करेगी। ये सौदा वित्त वर्ष 2015 के अंत तक पूरा हो जाएगा।
सुजलॉन के कुल कर्ज का करीब 30-35 फीसदी हिस्सा एसबीआई का है और सेन्वियोन को बेचने से कंपनी को अपनी कर्ज कम करने में मदद मिलेगी। डील के बाद सुजलॉन अपने बाकी बचे कर्ज को अच्छी तरह सर्विस कर पाएगी।

23/01/2015

निफ्टी 8761.4 पर बंद, सेंसेक्स 29000 के पार

सेंसेक्स 29000 के पार, निफ्टी 8750 के ऊपर
सेंसेक्स 150 अंक उछला, निफ्टी 8760 के ऊपर
सेंसेक्स-निफ्टी 0.5% मजबूत, ऑयल एंड गैस शेयर फिसले
सेंसेक्स-निफ्टी में 0.25% की बढ़त, यूरोप की चाल सुस्त
सेंसेक्स-निफ्टी में हल्की बढ़त, आरआईएल 3% लुढ़का
बाजार में लगातार छठे दिन शानदार जोश और जश्न जारी है। आज फिर सेंसेक्स और निफ्टी ने नई ऊंचाई हासिल की है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में आज रिकॉर्ड स्तरों पर क्लोजिंग देखने को मिली है। सेंसेक्स जहां पहली बार 29000 के ऊपर बंद होने में कामयाब हुआ है, तो निफ्टी भी 8760 के ऊपर पहली बार ही बंद हुआ है।

फार्मा और कैपिटल गुड्स शेयरों ने आज बाजार में जोश भरने का काम किया। लेकिन कंज्यूमर ड्युरेबल्स और ऑयल एंड गैस शेयरों में बिकवाली हावी रही। आज मिडकैप शेयरों की चाल भी सुस्त रही, पर स्मॉलकैप शेयरों में थोड़ी खरीदारी जरूर नजर आई।

बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 117 अंक यानि 0.4 फीसदी की बढ़त के साथ 29006 के स्तर पर बंद हुआ है। वहीं एनएसई का 50 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 32 अंक यानि 0.4 फीसदी चढ़कर 8761.4 के स्तर पर बंद हुआ है। सेंसेक्स ने आज 29060.41 का नया रिकॉर्ड ऊपरी स्तर छूआ और निफ्टी ने 8772.70 के रिकॉर्ड ऊपरी स्तर तक दस्तक दी है।

आज के कारोबारी सत्र में सन फार्मा, डीएलएफ, एक्सिस बैंक, आईडीएफसी, टाटा मोटर्स, ओएनजीसी और सिप्ला जैसे दिग्गज शेयर 3.9-1.6 फीसदी तक उछलकर बंद हुए हैं। हालांकि रिलायंस इंडस्ट्रीज, एनटीपीसी, पीएनबी, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, हीरो मोटो, मारुति सुजुकी और गेल जैसे दिग्गज शेयर 2.5-0.4 फीसदी तक गिरकर बंद हुए हैं।

मिडकैप शेयरों में पीटीसी इंडिया फाइनेंस, पीएमसी फिनकॉर्प, कॉरपोरेशन बैंक, प्रेस्टीज एस्टेट और गेटवे डिस्ट्रिपार्क्स सबसे ज्यादा 6-4.1 फीसदी तक गिरकर बंद हुए हैं। हालांकि मिडकैप शेयरों में सन फार्मा एडवांस्ड, गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर्स, डीबी रियल्टी, इंडिया सीमेंट और स्टरलाइट टेक सबसे ज्यादा 17.25-7.7 फीसदी तक मजबूत होकर बंद हुए हैं।

स्मॉलकैप शेयरों में हिताची होम, एजीसी नेटवर्क्स, ईपीसी इरीगेशन, नेक्टर लाइफ और होटल लीला सबसे ज्यादा 20-7.1 फीसदी तक चढ़कर बंद हुए हैं। हालांकि स्मॉलकैप शेयरों में आधुनिक इंडस्ट्रीज, केजीएन एंटरप्राइजेज, एलेंबिक, सुप्रीम पेट्रो और यूबी होल्डिंग्स सबसे ज्यादा 13.1-8.8 फीसदी तक कमजोर होकर बंद हुए हैं।

23/01/2015

शेयर बाजार में कैसे करें निवेश की शुरुआत

इक्विटी मार्केट में कैसे करें निवेश की शुरुआत और कैसे बनाएं अपना मजबूत पोर्टफोलियो आइए जानते हैं मार्केट एक्सपर्ट निपुण मेहता, एचडीएफसी सिक्योरिटीज के हेड वी के शर्मा और बीएसई के सीईओ आशीष चौहान की सलाह

इक्विटी मार्केट में जब चाहे निवेश किया या निकाला जा सकता है। पिछले 5 सालों में सेंसेक्स का औसत सालाना रिटर्न 17.4 फीसदी रहा है। लंबी अवधि में हमेशा इक्विटी मार्केट ने अच्छा रिटर्न दिया है। लिहाजा इक्विटी मार्केट में लंबी अवधि का नजरिया रखना जरूरी है।

शेयर खरीदने से पहले निवेशकों को पूरा रिसर्च करना चाहिए। अगर खुद की रिसर्च नहीं है, तो निवेशकों को इंडेक्स फंड में ही लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहिए। लंबी अवधि में इंडेक्स फंड से अच्छा फायदा मिल सकता है।

शेयर बाजार में निवेश की रणनीति अपनाते समय निवेशक लालच और डर से बचें और बाजार में लंबे समय का नजरिया बनाएं रखें। निवेशकों को शेयर खरीदने के साथ ही उसे बेचने का लक्ष्य तय करना चाहिए। शेयर टार्गेट प्राइस पर पहुंचने पर ही उसे बेचना चाहिए। निवेशकों को टिप्स के आधार पर निवेश नहीं करना चाहिए क्योंकि उससे नुकसान होने की संभावना है। आईपीओ या सेकंडरी मार्केट में पैसा लगाते समय सावधानी बरतनी चाहिए।

कोई भी शेयर चुनने से पहले निवेशकों को कंपनी के बिजनेस के बारे में जानकारी लेनी चाहिए। कंपनी का परफॉर्मेंस देखना चाहिए। साथ ही शेयरों का वैल्युएशन भी देखना चाहिए। निवेशकों को अच्छे फंडामेंटल्स वाली कंपनियों में पैस लगाना चाहिए।

निवेशक अपना पोर्टफोलियो बनाने से पहले कुछ बातों का जरूर ध्यान रखें। नए निवेशकों को छोटे निवेश से शुरुआत करना चाहिए और काफी ज्यादा कंपनियों के शेयर ना खरीदें। एक ही सेक्टर की ज्यादा कंपनियों में भी पैसा नहीं लगाना चाहिए। निवेशक एफएमसीजी, फार्मा जैसे डिफेंसिव सेक्टर के शेयर अपने पोर्टफोलियो में शामिल करके अपना पोर्टफोलियो मजबूत कर सकते है।
इक्विटी निवेश के लिए बैंक एकाउंट, डीमैट एकाउंट, ट्रेडिंग एकाउंट होना चाहिए। इक्विटी में आईपीओ, सेकेंडरी मार्केट या म्युचुअल फंड के जरिए निवेश किया जा सकता है। आईपीओ या लिस्टेड शेयर में निवेश करने से पहले निवेशकों को रिसर्च करके खुद की समझ से कंपनी के परफॉर्मेंस, मैनेजमैंट को देखकर निवेश करना चाहिए।

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